सैन्य खर्च के मामले में SIPRI रिपोर्ट जारी

ग्लोबल थिंक-टैंक स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI) ने वर्ष 2018 में किये गये सैन्य खर्च पर एक वैश्विक रिपोर्ट 29 अप्रैल 2019 को जारी किया. इस रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर किया जाने वाला सैन्य खर्च 2018 में 2.6 फीसदी बढ़कर 1,822 बिलियन डॉलर हो गया है. यह 1988 के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा वैश्विक सैन्य खर्च है.

रिपोर्ट के अनुसार सैन्य खर्च के मामले में विश्व में अमेरिका पहले, चीन दूसरे और सऊदी अरब तीसरे स्थान पर है. इस रिपोर्ट के अनुसार सैन्य खर्च के मामले में भारत विश्व में चौथे स्थान पर है.

सैन्य खर्च के मामले में विश्व के 7 सबसे बड़े देश

क्रम देश सैन्य खर्च
1 अमेरिका 649 बिलियन डॉलर
2 चीन 250 बिलियन डॉलर
3 सऊदी अरब 67.6 बिलियन डॉलर
4 भारत 66.5 बिलियन डॉलर
5 फ्रांस 63.8 बिलियन डॉलर
6 रूस 61.4 बिलियन डॉलर
7 यूके 50 बिलियन डॉलर

SIPRI रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

  • अमेरिका डिफेंस पर खर्च करनेवाला सबसे बड़ा देश है. अमेरिका ने पिछले 7 वर्षों में पहली बार अपने सैन्य खर्च में बढ़ोतरी की है.
  • डिफेंस पर अमेरिका का खर्च उसके बाद खर्च करने वाले आठ देशों के कुल खर्चे से भी अधिक है.
  • चीन का सैन्य उपकरणों पर खर्च भारत की तुलना में 4 गुना अधिक है.
  • वर्ष 2018 में पाकिस्तान ने 11 फीसदी बढ़ोतरी के साथ 11.4 अरब डॉलर सैन्य खर्च किया.
  • विश्व के कुल डिफेंस खर्च का 60% सैन्य खर्च विश्व के 5 अग्रणी देश (अमेरिका, चीन, सऊदी अरब, भारत और फ्रांस) करते हैं.

SIPRI रिपोर्ट 2019: भारत के सन्दर्भ में

  • भारत का सैन्य खर्च 3.1% बढ़कर $66.5 बिलियन हो गया है. भारत, वैश्विक कुल रक्षा खर्च का 3.7% हिस्सा खर्च करता है.
  • भारत का सेना पर होने वाले खर्च में से एक-चौथाई हिस्सा पेंशन पर खर्च होता है. बचे हुए पैसे में से दो-चौथाई हिस्सा रोजमर्रा के खर्चे, वेतन और 15 लाख के करीब सैन्य बल के रख-रखाव में खर्च होता है.
  • भले ही भारत रूस को हटाकर डिफेंस पर खर्च करनेवाला चौथा बड़ा देश बन गया हो, लेकिन भारतीय सेना कई क्षेत्रों में आधुनिकीकरण और नए हथियारों की कमी से अभी भी जूझ रही है.
  • भारत द्वारा किये जाने वाले सैन्य खर्च में से बहुत कम हिस्सा सेना के आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद के लिए खर्च होता है. लगभग 4.6 लाख करोड़ रुपये के खर्चे में से सिर्फ एक-चौथाई हिस्सा ही सेना के आधुनिकीकरण, नई खरीद आदि पर खर्च होता है.
  • भारतीय सेना कई मोर्चों पर अभाव का शिकार है. इसमें लड़ाकू विमान से लेकर पनडुब्बी तक की कमी शामिल है.

SIPRI रिपोर्ट 2019: चीन के सन्दर्भ में

चीन ने लगातार 24वें साल अपने डिफेंस बजट में खासी बढ़ोतरी की है. चीन का फोकस स्पष्ट है कि अपने मुख्य प्रतिद्वंदी को अमेरिका की तुलना में सैन्य क्षमता के आधार पर भी अधिक से अधिक ताकतवर बन सके. साथ ही चीन की कोशिश ताइवान और दक्षिण चीन सागर (साउथ चाइना सी) में अपनी दावेदारी को बहुत मजबूत करने की भी है.