‘महामारी रोग अधिनियम 1897’ में संशोधन के लिए अध्यादेश

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘महामारी रोग अधिनियम 1897’ (The Epidemic Diseases Act of 1897) में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया है. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 22 अप्रैल को हुई मंत्रीमंडल की बैठक में लिया गया. इस संशोधन अध्यादेश में स्वास्थ्य-कर्मियों पर हमला गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है. यानी थाने से आरोपी को जमानत नहीं मिल सकेगी.

स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले के आरोपियों को पांच लाख रुपये तक जुर्माना और सात तक की सजा हो सकती है. ऐसे मामले की जांच वरिष्ठ इंस्पेक्टर के स्तर पर 30 दिन में पूरा करने और एक साल के भीतर अदालत में इसकी सुनवाई पूरी कर फैसला का प्रावधान कर दिया गया है.

महामारी रोग अधिनियम 1897 क्या है?

  • भारत में महामारी से निपटने के लिए ‘महामारी अधिनियम (एक्ट) 1897’ लागू किया गया था. इस कानून को अंग्रेजों के जमाने में उस समय लागू किया गया था जब भूतपूर्व बंबई स्टेट में बूबोनिक प्लेग ने महामारी का रूप लिया था. इस अधिनियम की चार धाराएं हैं.
  • इस अधिनियम का उपयोग उस समय किया जाता है, जब किसी भी राज्य या केंद्र सरकार को इस बात का विश्वास हो जाए कि राज्य व देश में कोई खतरनाक बीमारी प्रवेश कर चुकी है और समस्त नागरिकों में फैल सकती है.
  • 123 साल पुराने इस कानून में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हिंसक वारदातों के लिए सजा का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था. इस कानून की धारा 3 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति इस दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करता है तो भारतीय दंड संहिता की (IPC) धारा 188 के तहत सजा देने की बात कही गई थी.
  • संपूर्ण भारत में यह अधिनियम पहली बार COVID-19 से बचने के लिए मार्च 2020 में लागू किया गया. सन 1959 में हैजा के प्रकोप को देखते हुए उड़ीसा सरकार ने यह अधिनियम लागू किया था.
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