सरकार ने देश में बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए PLI योजना को मंजूरी प्रदान की

सरकार ने बैटरी भंडारण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को मंजूरी प्रदान की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में 12 मई को हुई केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी प्रदान की गई. इस योजना के लिए 18,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

इस योजना का लक्ष्‍य 50 गीगावाट घंटा (Gigawatt hours – GWh) ‘उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण’ (Advanced Chemistry Cell) क्षमता हासिल करना है. यह फैसला आत्मनिर्भर भारत का एक परिदृश्य होने के साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है. इसके तहत अब उन्नत क्षमता की बैटरी का निर्माण देश में ही किया जायेगा.

एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री बैटरी सेल स्‍टोरेज (ACC) के है?

एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री बैटरी सेल स्‍टोरेज (Advanced Chemistry Cell) एक अत्यधिक क्षमता के उर्जा भंडारण (storage) उपकरण है. यह रासायनिक उर्जा को संग्रहीत (store) करता और फिर वे आवश्यकता होने पर इसे वापस विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है.

ACC के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: मुख्य बिंदु

  • मेक इन इंडिया अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम से 45,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है.
  • मौजूदा समय में 20000 करोड़ रुपये का बैटरी स्टोरेज आयात किया जाता है. PLI योजना के तहत आयात कम होगा और देश में उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
  • इस योजना से इलेक्ट्रिकल व्हीकल और इलेक्ट्रिकल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा. सभी तरह के वाहनों में बैटरी का इस्तेमाल हो सकता है.
  • भारत में 1.36 लाख मैगावाट का सौर ऊर्जा उत्‍पादन हो रहा है, लेकिन सौर उर्जा से तैयार होने वाली बिजली का उपयोग दिन में ही कर सकते हैं. अगर बैटरी स्टोरेज होगा तो उसके आधार पर ये काम आसानी से होगा.
  • इसके जरिये डीजल जेनरेटर को रिप्लेस किया जा सकेगा, बैटरी स्टोरेज डीजल जेनरेटर का भी विकल्प है. दिन में सौर ऊर्जा के जरिये बिजली उत्पादन और उसका बैटरी स्टोरेज के जरिये रात में इस्तेमाल संभव हो सकेगा.

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (Production Linked Incentives) योजना के तहत देश में उत्पादन को बढावा देने के लिए कंपनियों को नकद प्रोत्साहन (कैश इंसेंटिव) दिया जाता है.

सरकार ने ऑटोमोबाइल, नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, उन्नत रसायन विज्ञान, टेलिकॉम, फार्मा, और सोलर पीवी निर्माण, स्पेशलिटी स्टील आदि के क्षेत्र में इस योजना को मंजूरी दी है.