तुर्की ने अमेरिका सहित दस पश्चिमी देशों के राजदूतों को निष्कासित किया

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप अर्दोआन ने सामाजिक कार्यकर्ता उस्मान कवला की रिहाई की अपील करने वाले अमेरिका समेत 10 देशों के राजदूतों को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया है. किसी भी व्यक्ति को अवांछित घोषित करने से राजदूत के तौर पर उसकी मान्यता समाप्त हो जाती है.

मुख्य बिंदु

  • तुर्की ने कनाडा, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और अमेरिका के राजदूतों को देश से निष्कासित करने के लिए कहा है. तुर्की की तरफ से कहा गया है कि, इन सभी देशों के दूतावासों की तरफ से मानवाधिकार कार्यक्रता उस्मान कवाला की रिहाई की संयुक्त अपील की गई थी.
  • तुर्की के विदेश मंत्रालय ने सभी 10 देशों के राजदूतों को समन किया और विदेश मंत्रालय में बुलाया था और फिर उनके उपर विएना कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप लगाकर देश से निष्कासित करने की धमकी दी.
  • विएन कन्वेंशन के तहत देश के आंतरिक मामलों में विदेशी राजदूत हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं और तुर्की का कहना है कि, इन राजदूतों ने तुर्की के आंतरिक मामलों में दखल दिया है.

कौन है उस्मान कवला और क्या है मामला?

उस्मान कवला तुर्की के एक प्रसिद्ध कारोबारी और मानवाधिकार कार्यक्रता हैं. उन्होंने अनादोलु कल्टूर फाउंडेशन की स्थापना की थी और ये संगठन जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए काम करता है. ये संगठन खास तौर पर तुर्की और अर्मेनियाई आबाजी के बीच सुलह और कुर्द मुद्दे पर शांतिपूर्वक समाधान चाहता है.

फरवरी 2020 में तुर्की की एक अदालत ने उस्मान कवला को 2013 में सरकार विरोधी गीजी पार्क विरोध प्रदर्शनों के आरोपों से बरी कर जेल से बाहर करने का आदेश दिया था. लेकिन, तुर्की की सरकार ने एक नया वारंट जारी करते हुए कवला को 2016 में सरकार का तख्तापलट करने के आरोप में फिर गिरफ्तार कर लिया और तब से वो तुर्की की जेल में ही बंद हैं. जिनकी रिहाई की अपील इन 10 देशों के राजदूतों की तरफ से की गई थी.

माना जा रहा है कि, तुर्की कई मुद्दों को लेकर पश्चिमी देशों से भड़का हुआ है. हाल ही में FATF ने तुर्की को ग्रे लिस्ट में डाल दिया है, जो तुर्की के लिए बहुत बड़ा झटका है. इसके पीछे तुर्की का कहना है कि, चुंकी वो रूस से एस-400 मिसाइस डिफेंस सिस्टम खरीद रहा है, इसीलिए अमेरिका उससे बदला ले रहा है.

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