फार्मास्युटिकल क्षेत्र का पहला वैश्विक नवाचार शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया

फार्मास्युटिकल क्षेत्र का पहला वैश्विक नवाचार शिखर सम्मेलन 18-19 नवम्बर को आयोजित किया गया था. इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किया था. इस सम्मेलन में 12 सत्र हुए जिसमें देश-विदेश के 40 से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया.

सम्मेलन के मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर जोर दिया है, जो भारत को दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में अग्रणी बना सके.
  • उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मास्‍युटिकल उद्योग देश के आर्थिक विकास का एक प्रमुख घटक है. भारतीय स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में वर्ष 2014 के बाद से 12 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ है.
  • उन्होंने कहा कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र द्वारा अर्जित वैश्विक विश्वास की वजह से अब भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाने लगा है.

प्रधानमंत्री ने सिडनी संवाद को सम्‍बोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन से पहले सिडनी संवाद (Sydney Dialogue) को सम्‍बोधित किया था. अपने संबोधन में उन्होंने सभी लोकतांत्रिक देशों का आह्वान किया कि वे क्रिप्टो-करेंसी के मुद्दे पर संगठित रूप से कार्य करें. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका संचालन गलत हाथों में न जाये अन्यथा युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो सकता है.

उन्‍होंने भारत में हो रहे पांच महत्‍वपूर्ण बदलावों को रेखांकित किया. ये बदलाव हैं:

  1. भारत में विश्व के सबसे विस्तृत सार्वजनिक सूचना प्रौदयोगिकी ढांचे का विकास
  2. शासन तथा कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए डिजिटल टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल
  3. स्‍टार्टअप के लिए तेजी से विकसित होता अनुकूल तंत्र
  4. उद्योग और सेवा क्षेत्रों का बडे पैमाने पर डिजिटल रूपांतरण और
  5. टेलीकॉम टेक्‍नोलॉजी में स्‍वेदेशी क्षमता के विकास के लिए निवेश
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