विपणन वर्ष 2021-22 के लिए खरीफ फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में बढ़ोतरी की गयी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी का निर्णय किया है. यह निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 10 जून को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुई.

विपणन सीजन 2021-22 के लिए खरीफ फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी केन्द्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य, औसत उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा तय किया गया था ताकि किसानों को उनकी उपज का समुचित लाभ मिल सके.

मुख्य बिंदु

  • धान के MSP में 72 रुपये की वृद्धि की गयी है. यह अब 1,940 रुपये प्रति क्विंटल है.
  • अरहर दाल के MSP में 300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गयी है. अरहर दाल का MSP अब 6300 रुपये प्रति क्विंटल है. उड़द दाल का MSP भी बढ़ कर अब 6300 रुपये प्रति क्विटल, मूंग दाल का MSP बढ़ा कर 7275 रुपये प्रति क्विंट किया गया है.
  • तिलहन में तिल के MSP में सबसे ज्यादा 452 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. अब तिल का MSP 7,307 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. मूंगफली का MSP 275 रुपये बढ़ा है और 5550 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है.

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP (Minimum Support Price) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है.

सरकार हर साल फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

RBI की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक, रेपो दर 4%, रिवर्स रेपो दर 3.35% पर अपरिवर्तित

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समि‍ति (MPC) की बैठक 2-4 जून को मुंबई में आयोजित की गयी थी. बैठक की अध्यक्षता बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की थी. यह चालू वित्त वर्ष (2020-21) की दूसरी द्विमासिक (जून-जुलाई) मौद्रिक नीति (2nd Bi-Monthly Monetary Policy) समीक्षा बैठक थी.

MPC की बैठक: मुख्य बिंदु

  • रिजर्व बैंक ने वर्तमान में रेपो रेट 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट 3.35 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है। पिछली बैठक में भी इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया था.
  • RBI ने इस वित्त वर्ष (2021-22) में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) दर 9.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया जो पहले 10.5 प्रतिशत था. वित्त वर्ष (2021-22) में GDP -7.3 प्रतिशत रहेगा.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर4%
रिवर्स रेपो दर3.35%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर (MSF)4.25%
बैंक दर4.25%
नकद आरक्षित अनुपात (CRR)4%
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)18%

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): एक दृष्टि

  • भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है. यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है.
  • RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI ऐक्ट 1934 के अनुसार हुई. प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन 1937 में मुम्बई आ गया.
  • पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन 1949 से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है.

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गयी

सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया है. इससे संबंधित आदेश श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 3 जून को जारी किया. यह समिति राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण पर तकनीकी जानकारी और सिफारिश देगी.

अजीत मिश्रा समिति के अध्यक्ष

इस विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक ग्रोथ के निदेशक प्रोफेसर अजीत मिश्रा होंगे. विशेषज्ञ समूह के सदस्यों में प्रोफेसर तारिका चक्रवर्ती (IIM कोलकाता) अनुश्री सिन्हा (सीनियर फेलो, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च), विभा भल्ला (संयुक्त सचिव) एच श्रीनिवास (महानिदेशक, वीवी गिरी नेशनल लेबर इंस्टीट्यूट) शामिल हैं. श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ श्रम एवं रोजगार सलाहकार डीपीएस नेगी सदस्य सचिव हैं.

सरकार ने न्यूनतम मजदूरी पर इससे पहले जनवरी 2018 में अनूप सत्पथी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था. इस समिति ने 2018 की कीमतों के अनुसार न्यूनतम मजदूरी को 375 रुपये प्रति दिन या 9,750 रुपये प्रति माह तय करने की सिफारिश की थी. इन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया गया था.

मजदूरी निर्धारण के लिए वैज्ञानिक मानदंड

यह समिति मजदूरी दरों को तय करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम प्रथाओं को देखेगा और मजदूरी निर्धारण के लिए एक वैज्ञानिक मानदंड विकसित करेगा.

राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम मजदूरी का तात्पर्य ऐसे वेतन से है, जो पूरे देश में सभी श्रेणियों के श्रमिकों पर लागू होता है.

NSO ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान जारी किए

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 31 मई को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान जारी किए. ये अनुमान स्थिर (2011-12) और वर्तमान मूल्यों दोनों पर ही जारी किए गये हैं.

मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2020-21 में स्थिर मूल्यों (2011-12) पर अब वास्तविक (GDP) 135.13 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2019-20 के लिए GDP का पहला संशोधित अनुमान 145.69 लाख करोड़ रुपये था जो 29 जनवरी, 2021 को जारी हुआ था.
  • 2020-21 के दौरान GDP की वृद्धि -7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2019-20 में यह 4 प्रतिशत रही थी.
  • वर्ष 2020-21 में वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी के 197.46 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2019-20 में पहला संशोधित अनुमान 203.51 लाख करोड़ रुपये था. जिससे 2019-20 की 7.8 प्रतिशत बढ़ोतरी की तुलना में -3.0 प्रतिशत बदलाव प्रदर्शित हो रहा है.
  • वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में स्थिर मूल्यों (2011-12) पर जीडीपी 38.96 लाख करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि 2019-20 की चौथी तिमाही में यह 38.33 लाख करोड़ रुपये रहा था. इस प्रकार 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी प्रदर्शित होती है.

कोविड महामारी में अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए ‘प्रधानमंत्री केयर्स बाल-योजना’

कोविड महामारी में अनाथ हुए बच्चों की मदद के लिए प्रधानमंत्री केयर्स बाल-योजना की घोषणा की गयी है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 मई को इस योजना के अंतर्गत कई कल्याणकारी कदमों को मंजूरी दी. इन बच्चों को निशुल्क शिक्षा और 23 वर्ष की आयु होने पर दस लाख रुपये दिए जाएंगे.

योजना के मुख्य बिंदु

  • वे सभी बच्चे, जो अपने माता-पिता या कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता महामारी के कारण खो चुके हैं, उन सभी की प्रधानमंत्री केयर्स बाल-योजना के जरिये मदद की जाएगी.
  • प्रत्‍येक बच्‍चे के लिये 10 लाख रुपये का एक विशेष कोष बनाया जायेगा. इस कोष में 18 वर्ष की आयु तक पीएम केयर्स फंड द्वारा योगदान दिया जायेगा. लाभार्थी बच्‍चों को 18 वर्ष की आयु से 23 वर्ष पूर्ण होने तक पांच वर्ष के लिये मासिक सहायता धनराशि दी जायेगी.
  • 23 वर्ष की आयु प्राप्‍त करने पर लाभार्थी को उसके पेशेवर या व्‍यक्तिगत उपयोग के लिये 10 लाख रुपये की पूरी राशि हस्‍तांतरित कर दी जायेगी.
  • दस वर्ष से कम आयु के बच्‍चों को केन्‍द्रीय विद्यालयों या निजी विद्यालयों में प्रवेश दिया जायेगा. जबकि 11 से 18 वर्ष की आयु के बच्‍चों को सैनिक्‍स विद्यालयों या नवोदय सहित अन्‍य आवासीय विद्यालयों में शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है.
  • सभी लाभार्थी बच्‍चों का पांच लाख रूपये स्‍वास्‍थ्‍य बीमा भी आयुष्‍मान भारत योजना के अन्‍तर्गत कराया जायेगा. जिसके प्रीमियम का भुगतान पीएम केयर्स फंड द्वारा किया जाना है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपना वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत किया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 27 मई को अपना वार्षिक रिपोर्ट (RBI Annual Report) 2021 प्रस्तुत किया. रिपोर्ट में कोविड संक्रमण का अर्थव्यवस्था पर असर और बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता पर जोर दिया गया है.

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • बीते वित्त वर्ष में बैंकों के साथ धोखाधड़ी में गिरावट आई और उनकी संपत्ति की गुणवत्ता में इजाफा हुआ है. भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती बनी हुई है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए बैंकों में पर्याप्त पूंजी है.
  • बीते वित्त वर्ष के दौरान विकास दर में 8 फीसदी गिरावट का अनुमान है, लेकिन पूंजी प्रवाह और विदेशी निवेशकों के बूते शेयर बाजार रिकॉर्ड बनाता जा रहा है.
  • रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट 31 मार्च 2021 तक 7 फीसदी बढ़कर 57.08 लाख करोड़ रुपये हो गई है. एक साल पहले यह 53.55 लाख करोड़ थी. पिछले 9 महीनों यानी जून से मार्च तक में ही बैलेंस शीट 7 फीसदी बढ़ी है.वृद्धि का कारण विदेशी और घरेलू निवेश रहा है. विदेशी निवेश में 11.48 फीसदी और घरेलू निवेश में 13.75 फीसदी इजाफा हुआ है.
  • अन्य देनदारियों में भी 43.05 फीसदी की बढ़त देखी गई है. घरेलू संपत्तियों में 26.42 फीसदी बढ़त रही. सबसे ज्यादा उछाल विदेशी मुद्रा में आया, जो कुल संपत्ति का 73.58 फीसदी पहुंच गया.
  • कोरोना की दूसरी लहर के कारन 2021-22 के लिए पूर्व में लगाए 10.5 फीसदी के विकास दर अनुमान को प्राप्त करना अब मुश्किल हो सकता है.
  • आरबीआई ने कहा, महामारी के दौरान नोटों का चलन मूल्य के हिसाब से 16.8 फीसदी बढ़ा, जबकि नोटों की संख्या में 7.2 फीसदी की वृद्धि हुई है. कुल चलन में 500 और 2000 के नोटों की हिस्सेदारी 85.7 फीसदी पहुंच गई, जो एक वित्त वर्ष पहले 83.4 फीसदी थी.

RBI ने आकस्मिक जोखिम कोष कुल पूंजी के 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आकस्मिक जोखिम कोष (Contingency Risk Buffer) कुल पूंजी के 5.5 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया है. इस फैसले के तहत RBI ने आरक्षित कोष से केन्द्र सरकार को 99.122 हजार करोड़ रुपये अधिशेष के रूप में अंतरित करने की मंजूरी दे दी. RBI ने 31 मार्च 2021 को समाप्त नौ महीने (जुलाई 2020-मार्च 2021) की लेखा अवधि के लिए यह रकम दी है.

RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में 21 मई को हुई केन्द्रीय बोर्ड की 589वें बैठक में यह निर्णय लिया गया. इस बैठक में वर्तमान आर्थिक स्थिति, वैश्विक और घरेलू चुनौतियों तथा कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिये हाल के नीतिगत उपायों की समीक्षा की.

RBI का अधिशेष क्या होता है?

RBI को अपनी आय में किसी तरह का आय कर नहीं देना पड़ता. इसलिए अपनी जरूरतें पूरी करने, जरूरी प्रावधान और जरूरी निवेश के बाद जो राशि बचती है वह अधिशेष राशि (सरप्लस फंड) होती है. इसे लेकर सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच विवाद भी रहा है.

RBI के आय के मुख्य स्रोत

  • बैंकों व वित्तीय संस्थानों को दिए गए ऋण पर ब्याज
  • केंद्र व राज्य सरकारों को दिए गए पैसे पर ब्याज
  • विदेशी मुद्रा से होने वाली कमाई

RBI का मुख्य खर्च

  • नोटों की छपाई पर
  • एजेंसियों का शुल्क और कमीशन
  • कर्मचारियों की सैलरी व अन्य खर्च
  • आकस्मिक निधि (कंटिजेंसी फंड) के लिए तय प्रावधान

केंद्र सरकार और RBI के बीच मतभेद

पिछले वर्ष, RBI के रिजर्व के स्तर पर केंद्र सरकार और RBI के बीच मतभेद पैदा हुए थे. सरकार ने कहा था कि RBI के रिजर्व का स्तर एसेट्स के 26 फीसदी पर है, जबकि दुनिया भर में यह स्तर 16 फीसदी है. सरकार ने अतिरिक्त रिजर्व को अपने खाते में ट्रांसफर करने की मांग की थी.

RBI ने आर्थिक पूंजी ढांचे की समीक्षा के लिए RBI के पूर्व गवर्नर विमल जालान की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था.

जालान समिति की सिफारिश

जालान समिति ने आकस्मिक जोखिम कोष रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट का 6.5 से 5.5 प्रतिशत तक सीमित रखने और इससे अतिरिक्त रकम को सरकार को सौंपे जाने की सिफारिश की थी.

ईरान ने ONGC द्वारा खोजी गयी गैस फील्ड परियोजना के ठेका स्थानीय कंपनी को दिया

ईरान ने फारस की खाड़ी की फरजाद-B परियोजना का काम अपनी घरेलू कंपनियों को देने का फैसला किया है. इससे भारतीय कंपनी ऑयल एवं नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) इस दौड़ से बाहर हो गई है. यह ठेका 1.78 अरब डॉलर का था.

हाल ही में हुए एक समझौते के तहत ईरान के नेशनल इरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने फरजाद-B गैस फील्ड के विकास के लिए पेट्रोपर्स ग्रुप के साथ 1.78 अरब अमेरिकी डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं.

फरजाद-B गैस फील्ड परियोजन क्या है?

फरजाद-B गैस फील्ड ईरान के फारस की खाड़ी में है. इसकी खोज भारतीय कंपनी ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) ने की थी. OVL ने 2008 में फारस ऑफशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक में एक विशाल गैस फिल्ड की खोज की थी. OVL और उसके पार्टनर्स ने इस खोज और डेवलपमेंट के लिए 11 अरब डॉलर तक निवेश करने की पेशकश की थी. इसे बाद में फरजाद-B नाम दिया गया.

फरजाद-B गैस फील्ड में 21,700 अरब घनफुट गैस का भंडार है. इसका 60 प्रतिशत निकाला जा सकता है. परियोजना से रोज 1.1 अरब घन फुट गैस प्राप्त की जा सकती है.

OVL इस परियोजना के परिचालन में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी की इच्छुक थी. उसके साथ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) और ऑयल इंडिया लि (OIL) भी शामिल थीं. इन दोनों की 40 और 20 प्रतिशत की हिस्सेदार थी.

OVL के नेतृत्व में भारतीय कंपनियों का एक समूह परियोजना पर अब तक 40 करोड़ डॉलर यानी करीब 3 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुका है. ईरान की नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी (NIOC) ने फरवरी 2020 में कंपनी को बताया था कि वह फरजाद-B परियोजना का ठेका किसी ईरानी कंपनी को देना चाहती है.

ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL)

OVL सरकारी कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) की सब्सिडिअरी है. ONGC ने इसे विदेशी परियोजनाओं में निवेश करने के लिए बनाया है. OVL ने ईरान के इस गैस क्षेत्र के विकास पर 11 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बनाई थी.

जानिए कौन है वितालिक बुतेरिन जिन्होंने इंडिया कोविड रिलीफ फंड में 1 अरब डॉलर दान किए

ईथेरियम (Ethereum) के सह-संस्थापक कोफाउंडर विटालिक बुटेरिन (Vitalik Buterin) ने भारत के कोविड रिलीफ फंड में 1 अरब (बिलियन) डॉलर की राशि दान में दी है. यह व्यक्तिगत रूप से दिया गया अब तक का सबसे बड़ा दान है.
बुतेरिन ने जो दान दिया है वो क्रिप्टोकरेंसी में है. इनमें 500 इथेर (ETH) सिक्के और 50 ट्रिलियन से ज्यादा शिबा इनु सिक्के (Shiba Inu coin) शामिल हैं.

कौन है वितालिक बुतेरिन?

27 वर्षीय वितालिक बुतेरिन रूस में जन्मे कनाडा के नागरिक हैं. वह क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म इथेरियम के सह-संस्थापक हैं. बुतेरिन की कुल संपत्ति लगभग 21 बिलियन डॉलर है.

बुतेरिन ने अपने पिता से बिटकॉइन के बारे में जाना. बुतेरिन के पिता एक सॉफ्ट फर्म के मालिक हैं. बुतेरिन ने 17 साल की उम्र में ही बिटकॉइन मैगजीन की शुरुआत कर दी थी. वह यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे थे लेकिन बाद में पढ़ाई छोड़ दी.

क्रिप्टोकरेंसी की कीमत में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिलता है. यही वजह है कि बुतेरिन की संपत्ति में बीते एक सप्ताह में ही एक अरब डॉलर से बढ़कर 21 अरब डॉलर हो गई है.

ईथेरियम (Ethereum) क्या है?

ईथीरियम (Ethereum) एक क्रिप्टोकरेंसी (आभासी मुद्रा) है. इसका निर्माण वितालिक बुतेरिन और गाविन वुड (Gavin Wood) द्वारा किया गया था. ईथेरियम, बिटकॉइन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है.

RBI ने अब यूनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द किया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पश्चिम बंगाल के बागनान स्थित यूनाइटेड को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (United Co-operative Bank Ltd) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है. RBI ने पर्याप्त पूंजी के अभाव और कमाई को लेकर सही प्रोसपेक्ट नहीं होने का हवाला देते हुए यह फैसला किया है.

बैंकिंग लाइसेंस रद्द होने के बाद 13 मई, 2021 के बिजनेस ऑवर खत्म होने के बाद से यह बैंक किसी तरह का बैंकिंग बिजनेस नहीं कर सकता है.

सरकार ने देश में बैटरी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए PLI योजना को मंजूरी प्रदान की

सरकार ने बैटरी भंडारण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को मंजूरी प्रदान की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में 12 मई को हुई केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी प्रदान की गई. इस योजना के लिए 18,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.

इस योजना का लक्ष्‍य 50 गीगावाट घंटा (Gigawatt hours – GWh) ‘उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण’ (Advanced Chemistry Cell) क्षमता हासिल करना है. यह फैसला आत्मनिर्भर भारत का एक परिदृश्य होने के साथ ही मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है. इसके तहत अब उन्नत क्षमता की बैटरी का निर्माण देश में ही किया जायेगा.

एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री बैटरी सेल स्‍टोरेज (ACC) के है?

एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री बैटरी सेल स्‍टोरेज (Advanced Chemistry Cell) एक अत्यधिक क्षमता के उर्जा भंडारण (storage) उपकरण है. यह रासायनिक उर्जा को संग्रहीत (store) करता और फिर वे आवश्यकता होने पर इसे वापस विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है.

ACC के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना: मुख्य बिंदु

  • मेक इन इंडिया अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से उन्नत रसायन सेल बैटरी भंडारण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम से 45,000 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है.
  • मौजूदा समय में 20000 करोड़ रुपये का बैटरी स्टोरेज आयात किया जाता है. PLI योजना के तहत आयात कम होगा और देश में उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
  • इस योजना से इलेक्ट्रिकल व्हीकल और इलेक्ट्रिकल मोबिलिटी को बढ़ावा मिलेगा. सभी तरह के वाहनों में बैटरी का इस्तेमाल हो सकता है.
  • भारत में 1.36 लाख मैगावाट का सौर ऊर्जा उत्‍पादन हो रहा है, लेकिन सौर उर्जा से तैयार होने वाली बिजली का उपयोग दिन में ही कर सकते हैं. अगर बैटरी स्टोरेज होगा तो उसके आधार पर ये काम आसानी से होगा.
  • इसके जरिये डीजल जेनरेटर को रिप्लेस किया जा सकेगा, बैटरी स्टोरेज डीजल जेनरेटर का भी विकल्प है. दिन में सौर ऊर्जा के जरिये बिजली उत्पादन और उसका बैटरी स्टोरेज के जरिये रात में इस्तेमाल संभव हो सकेगा.

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना क्या है?

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (Production Linked Incentives) योजना के तहत देश में उत्पादन को बढावा देने के लिए कंपनियों को नकद प्रोत्साहन (कैश इंसेंटिव) दिया जाता है.

सरकार ने ऑटोमोबाइल, नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, उन्नत रसायन विज्ञान, टेलिकॉम, फार्मा, और सोलर पीवी निर्माण, स्पेशलिटी स्टील आदि के क्षेत्र में इस योजना को मंजूरी दी है.

SpO2 आधारित ऑक्‍सीकेयर प्रणाली की खरीद की मंजूरी दी गई

सरकार ने SpO2 आधारित ऑक्‍सीकेयर प्रणाली की 1.50 लाख यूनिट की खरीद की मंजूरी दी गई है. इस ऑक्‍सीकेयर को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. इस खरीद पर 322 करोड रुपए से अधिक की लागत आएगी जिसका भुगतान पीएम केयर्स निधि से किया जायेगा

SpO2 आधारित ऑक्‍सीजन आपूर्ति प्रणाली क्या है?

  • ऑक्‍सीकेयर, ऑक्‍सीजन सेचुरेशन लेवल यानी SpO2 आधारित ऑक्‍सीजन आपूर्ति प्रणाली है जो रोगियों को दिए जा रहे ऑक्‍सीजन को नियंत्रित करती है. ऑक्‍सीकेयर सिस्टम का उपयोग घरों, पृथकवास केन्‍द्रों, कोविड देखभाल केन्‍द्रों और अस्‍पतालों में किया जा सकता है.
  • ऑक्‍सीकेयर सिस्‍टम व्‍यक्ति को हाईपोक्‍सिया की स्थिति में जाने से बचाता है. हाईपोक्‍सिया की स्थिति मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है.
  • इस प्रणाली का विकास DRDO की बेंगलूरू स्थित रक्षा जैव अभियांत्रिकी और इलेक्‍ट्रो मेडिकल प्रयोगशाला (DEBEL) ने किया है. यह प्रणाली अत्‍यधिक उंचाई वाले क्षेत्रों में निरंतर तैनात सैनिकों के लिए विकसित की गई है.
  • स्‍वदेश विकसित यह प्रणाली व्‍यवहारिक और अत्‍यधिक उपयोगी है. इसे कोविड मरीजों के उपचार के लिए प्रभावी रूप से उपयोग किया जा सकता है.