ऑटो इंडस्ट्री के लिए ₹26,000 करोड़ की नई PLI स्कीम को मंजूरी दी गयी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऑटो इंडस्ट्री के लिए ₹26,000 करोड़ की नई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को मंजूरी दे दी है. इसका उद्देश्य ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत देश में इलेक्ट्रिक वाहन और हाइड्रोजन ईधन चालित वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देना है.

ऑटो सेक्टर के लिए PLI योजना 2021-22 के बजट में सरकार द्वारा 13 सेक्टर के लिए गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव घोषणाओं का हिस्सा है जिसके लिए सरकार ने 1.97 लाख करोड़ रुपये का परिव्यय रखा है.

मुख्य बिंदु

  • इसके साथ ऑटो क्षेत्र में ये स्कीम उच्च मूल्य के एडवांस ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी वाहनों और उत्पादों को प्रोत्साहित करेगी. यह हायर टेक्नोलॉजी, अधिक कुशल और ग्रीन ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग में एक नए युग की शुरुआत करेगी. ऑटोमेटिव कंपनियां या इस क्षेत्र में आने वाले इन्वेस्टर्स दोनों ही इस योजना का लाभ ले सकेंगे.
  • इस योजना का लाभ PLI योजना के तहत आने वाले ऑटो कंपोनेंट सेगमेंट शामिल होंगे. इनमें इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टीयरिंग सिस्टम, ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन असेंबली, सेंसर, सनरूफ, सुपरकैपेसिटर, एडेप्टिव फ्रंट लाइटिंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑटोमैटिक ब्रेकिंग, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम और कोलिजन वार्निंग सिस्टम शामिल हैं.
  • देश की मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का लगभग 35 प्रतिशत योगदान है. देश में कुल मिलाकर 12 बिलियन डॉलर का व्हीकल एक्सपोर्ट किया जाता है. 15 बिलियन डॉलर का कॉम्पोनेन्ट एक्सपोर्ट किया जाता है जबकि 17 बिलियन डॉलर का इम्पोर्ट किया जाता है. इस 17 बिलियन के इम्पोर्ट को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार क्षेत्र में 100% FDI को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश (FDI) को को मंजूरी दी है. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 15 सितम्बर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी.

मुख्य बिंदु

  • मंत्रिमंडल ने कर्ज से जूझ रहे दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को राहत प्रदान करने के लिए दूरसंचार क्षेत्र में कई संरचनात्मक और प्रक्रिया सुधारों को मंजूरी दी है. राहत पैकेज में दूरसंचार कंपनियों द्वारा वैधानिक बकाया के भुगतान पर 4 साल की मोहलत (moratorium) शामिल है.
  • सरकार ने स्वचालित मार्ग के तहत दूरसंचार क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को 49% से बढ़ाकर 100% कर दिया है. किसी देश के किसी व्यक्ति या फर्म से किसी दूसरे देश में किया गया कोई भी निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश कहलाता है.

विपणन वर्ष 2022-23 के लिए रबी फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में वृद्धि

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2022-23 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी है. गेहूं का MSP 40 रुपये बढ़ाकर 2015 रुपये प्रति क्विंटल और जौं का 35 रुपये बढ़ाकर 1635 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

विपणन वर्ष 2022-23 के लिए रबी फसलों का MSP

फसलप्रति क्विंटल MSPवृद्धि
गेहूं201540
जौ163535
सरसों5050400
चना5230130
कुसुभ5441114
मसूर5500400

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है. MSP की घोषणा सरकार द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की संस्तुति पर वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में की जाती है.

सरकार फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

सरकार ने कपड़ा क्षेत्र के लिए 10683 करोड़ रुपए की PLI योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कपड़ा क्षेत्र के लिए 10,683 करोड़ रुपए की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को मंजूरी दी. यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 8 सितम्बर को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में दी गई.

मुख्य बिंदु

  • केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने MMF (मानव निर्मित रेशे) परिधान, MMF फैब्रिक्स तथा टेक्निकल टेक्सटाइल के 10 खंडों/उत्पादों के लिए PLI योजना को मंजूरी दी है.
  • कपड़ा क्षेत्र के लिए PLI योजना बजट 2021-22 में 13 क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाओं का हिस्सा है. बजट में 13 क्षेत्रों के लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये की PLI योजनाओं की घोषणा की गई थी.
  • एक अनुमान के अनुसार 5 साल की अवधि में कपड़ा क्षेत्र के लिए PLI योजना से 19,000 करोड़ रुपए से भी अधिक का नया निवेश मिलेगा. योजना के तहत 3 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक का कुल कारोबार हासिल किया जा सकेगा. साथ ही इससे क्षेत्र में 7.5 लाख से भी अधिक लोगों के लिए अतिरिक्त रोजगारों के साथ-साथ सहायक गतिविधियों के लिए भी कई लाख और रोजगार के अवसरों का सृजन होगा.

असंगठित कामगारों के राष्‍ट्रीय डेटाबेस के लिए “ई-श्रम पोर्टल” का शुभारंभ

भारत में असंगठित कामगारों के राष्‍ट्रीय डेटाबेस के लिए “ई-श्रम पोर्टल” शुरू किया गया है. इस पोर्टल का शुभारंभ श्रम और रोजगार मंत्री भूपेन्‍द्र यादव ने 26 अगस्त को किया.

इस पोर्टल पर देश के असंगठित क्षेत्र के कामगारों का विवरण दिया जाएगा. इससे कामगारों के लिए विभिन्‍न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बेहतर कार्यान्‍वयन की सुविधा उपलब्‍ध हो सकेगी.

ई-श्रम पोर्टल क्या है?

  • केंद्र सरकार का लक्ष्य 38 करोड़ असंगठित कामगारों जैसे निर्माण मजदूर, प्रवासी कार्यबल, रेहड़ी-पटरी वाले और घरेलू कामगार आदि को एक पोर्टल या सरकारी दस्तावेज में पंजीकृत करना है. इसके लिए लगभग 404 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गयी है.
  • इन श्रमिकों के लिए 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) और ई-श्रम कार्ड जारी किया जायेगा जो पूरे देश में मान्य होगा
  • इस सरकारी डेटाबेस में पीएम श्रम योगी मानधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और पीएम जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) सहित सामाजिक सुरक्षा (पेंशन, बीमा) योजनाओं को जोड़ा जाएगा. असंगठित कामगार इस डेटाबेस प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे.

ई-श्रम पोर्टल पर श्रमिकों का पंजीकरण

  • देश के असंगठित क्षेत्र के कामगार इस पोर्टल या एप्प से निःशुल्क पंजीकरण कर सकते हैं. पोर्टल पर श्रमिकों के पंजीकरण का समन्वय श्रम मंत्रालय, राज्य सरकारों, ट्रेड यूनियनों और सीएससी द्वारा किया जाएगा.
  • श्रमिकों के प्रश्नों की सहायता और समाधान के लिए एक राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर – 14434 – भी शुरू किया गया है. एक श्रमिक आवश्यक विवरण भरने के अलावा, अपने आधार कार्ड नंबर और बैंक खाते के विवरण का उपयोग करके पर पंजीकरण कर सकता है.
  • इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद श्रमिक भाइयों और बहनों को भारत सरकार की सोशल सेक्योरिटी स्कीम का फायदा लेने के लिए बार-बार पंजीकरण की जरूरत नहीं पड़ेगी.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा के चौथे संस्करण ‘ईज 4.0’ का अनावरण

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने 25 अगस्त को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा के चौथे संस्करण ‘ईज 4.0’ (वर्ष 2021-22) का अनावरण किया. इसमें सक्षम-तकनीक, सरल और सहयोगी बैंकिंग की व्यवस्था है.

क्या है ईज एजेन्डा?

ईज (EASE) एजेंडा का पूरा नाम “एन्हांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस” है. बैंकों की कार्य कुशलता और क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्ष 2019 में 13 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को कम करके 5 बैंकों में सम्मिलित किया गया था. इसका उद्देश्य घाटे में जा रहे सार्वजनिक बैंक को मुनाफा कमाना था. उस समय से इसे ‘ईज एजेंडा’ कहा गया था. इसके बाद से निश्चित अंतराल पर एजेंडा के लक्ष्य बदलते रहे हैं.

क्या है ‘ईज 4.0’ का लक्ष्य?

ईज 4.0 का उद्देश्य ग्राहक-केंद्रित डिजिटल परिवर्तन के एजेंडे को आगे बढ़ाना है. इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के काम करने के तरीकों में डिजिटल और डाटा को गहराई से जोड़ना है. एजेंडा 4.0 में पूर्वोत्तर में बैंकिंग सेवाएं सरल और विस्तृत करने पर जोर दिया जाएगा.

‘ईज 3.0’ की वार्षिक रिपोर्ट जारी

  • वित्त मंत्री ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा ‘ईज 3.0’ (2020-21) की वार्षिक रिपोर्ट भी जारी किया है. उन्होंने ईज 3.0 बैंकिंग रिफॉर्म्स इंडेक्स पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले बैंकों को सम्मानित किया.
  • रिपोर्ट के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मुनाफा कमाया है. इन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने प्रौद्योगिकी-संचालित सुधारों में तेजी दिखाई है.
  • वित्त वर्ष 2020 में जहां 26,016 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था जबकि 2021 में सार्वजनिक बैंकों ने 31,817 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. पांच साल के नुकसान के बाद यह पहला साल है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मुनाफा कमाया है.
  • मार्च 2021 तक कुल सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (टोटल NPA) 6.16 लाख करोड़ रुपये की थी, जो मार्च 2020 में वर्तमान से 62,000 करोड़ रुपये अधिक थी.
  • वित्त मंत्री ने भारतीय स्टेट बैंक को ईज 3.0 रिफॉर्म्स इंडेक्स अवार्ड 2021 का समग्र विजेता घोषित किया. बैंक ऑफ बड़ौदा दूसरे और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया तीसरे स्थान पर है.

सरकार ने ड्रोन उडानें संबंधी नये नियम जारी किये

केंद्र सरकार ने 26 अगस्त को ड्रोन उडानें संबंधी नये नियम जारी किये. इसके अनुसार कार्गो डिलीवरी के लिए ड्रोन कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे और व्यापार के अनुकूल नियामक संस्था “मानव रहित विमान प्रणाली संवर्धन परिषद” की स्थापना की जाएगी.

मुख्य बिंदु

  • नये नियमों के अनुसार हवाई अड्डे की परिधि से येलो जोन क्षेत्र को 45 किलोमीटर से घटाकर 12 किलोमीटर कर दिया है.
  • हवाईअड्डे के आसपास ग्रीन जोन में आठ से बारह किलोमीटर के बीच के क्षेत्र में 200 फीट तक ड्रोन के संचालन के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है.
  • ड्रोन और ड्रोन टैक्सियों में भारी पेलोड ले जाने की क्षमता को 300 से बढ़ाकर 500 किलोग्राम कर दिया गया है. ड्रोन उडानों की अनुमति की संख्या घटाकर 25 से 5 कर दी गई है.
  • ड्रोन के ट्रांसफर और डी-रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया आसान की गई है. ड्रोन नियम, 2021 के तहत अधिकतम जुर्माना घटाकर 1 लाख रुपए किया गया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय ड्रोन के आयात को नियंत्रित करेगा.

वित्त मंत्री ने ‘राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन’ योजना का शुभारंभ किया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 अगस्त, 2021 को चार वर्षीय राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (National Monetisation Pipeline – NMP) योजना का शुभारंभ किया.

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन योजना: मुख्य बिंदु

  • यह केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की परिसंपत्ति मुद्रीकरण पाइपलाइन है. यह पाइपलाइन नीति आयोग द्वारा अवसंरचना से संबंधित मंत्रालयों के परामर्श से विकसित की गई है.
  • NMP के तहत वित्तीय वर्ष 2022 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 तक की चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्‍य परिसंपत्तियों के जरिए 6.0 लाख करोड़ रुपये की कुल मुद्रीकरण क्षमता का अनुमान लगाया गया है.
  • मुद्रीकरण का उद्देश्य नई बुनियादी ढांचागत सुविधाओं या अवसंरचना के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के निवेश का उपयोग करना है. यह रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए अत्‍यंत आवश्यक है जिससे आर्थिक विकास की गति को तेज करने के साथ-साथ समग्र जन कल्याण के लिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों को निर्बाध रूप से एकीकृत करना भी संभव हो सकेगा.
  • इस योजना के तहत सड़क, रेलवे और बिजली क्षेत्र की संपत्ति मुद्रीकृत होने वाली संपत्ति के कुल अनुमानित मूल्य का 66% से अधिक होगी. शेष अनुमानित मूल्य खनन, दूरसंचार, बंदरगाहों, विमानन, प्राकृतिक गैस, गोदामों और स्टेडियमों और पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइनों जैसे क्षेत्रों से आएगा.
  • यह योजना भारत के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए और अधिक मूल्य बनाने में मदद करेगा और सरकारी स्वामित्व को स्थानांतरित किए बिना निजी भागीदारी के नवीन तरीकों की खोज करेगा.

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में खाद्य तेलों के उत्‍पादन को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय मिशन को मंजूरी दी

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने ‘पाम ऑयल राष्ट्रीय मिशन’ (National Oilseeds and Oil Palm Mission) को मंजूरी दी है. इस मिशन का उद्देश देश में खाद्य तेलों के उत्‍पादन में वृद्धि और आयात पर निर्भरता में कमी लाना है.

पाम ऑयल राष्ट्रीय मिशन: मुख्य बिंदु

  • इस मिशन को केन्‍द्रीय प्रायोजित योजना के रूप में कार्यान्वित किया जाएगा. इस मिशन में पूर्वोत्‍तर क्षेत्र तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर विशेष ध्‍यान दिया जाएगा.
  • इस योजना के लिए 11,040 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय निर्धारित किया गया है, जिसमें से केंद्र सरकार 8,844 करोड़ रुपये का वहन करेगी. इसमें 2,196 करोड़ रुपये राज्यों को वहन करना है.
  • इस योजना के अंतर्गत 2025-26 तक पाम ऑयल के लिए 6.5 लाख हेक्‍टेयर अतिरिक्‍त क्षेत्र उपलब्‍ध कराया जाएगा. इस प्रकार पाम ऑयल के लिए 10 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र का लक्ष्‍य पूरा किया जा सकेगा.
  • क्रूड पाम ऑयल का उत्‍पादन 2025-26 तक बढ़कर 11.20 लाख टन और 2029-30 तक 28 लाख टन हो जाने की उम्‍मीद है.
  • भारतीय तेल ताड़ अनुसंधान संस्थान (IIOPR) ने देश में पाम ऑयल की खेती के लिए 2020 में एक विश्लेषण किया था. इसके अनुसार देश मे 28 लाख हेक्टयर भूमि पर पाम ऑयल की खेती हो सकती है. इसमें से 9 लाख हेक्टेयर भूमि उत्तर-पूर्व में है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में वित्‍तीय समावेश के आंकलन के लिए FI इंडैक्‍स की शुरूआत की

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश में वित्‍तीय समावेश के आंकलन के लिए एक सम्‍पूर्ण वित्‍तीय समावेश सूचकांक (Financial Inclusion Index – FI Index) की शुरूआत की है. RBI ने एक वक्‍तव्‍य में कहा कि FI इंडैक्‍स हर वर्ष जुलाई में प्रकाशित किया जाएगा.

मार्च 2021 को समाप्‍त अवधि के लिए वार्षिक FI इंडैक्‍स 53.9 दर्ज हुआ है. मार्च 2017 को समाप्‍त अवधि के लिए ये आंकड़ा 43.4 था.

FI-इंडैक्‍स: एक दृष्टि

  • FI-इंडैक्‍स की परिकल्‍पना एक बहुपक्षीय सूचकांक के रूप में की गई है जिसमें सरकार और विभिन्‍न क्षेत्रीय नियामकों के साथ मिलकर बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक तथा बीमा क्षेत्र से जुड़े ब्‍यौरे को शामिल किया जाएगा.
  • इस सूचकांक में वित्‍तीय समावेश के पहलुओं पर जानकारी को 0 से लेकर 100 तक एक एकाकी मापदण्‍ड के माध्‍यम से दर्शाया जाएगा, जहां 0 की रीडिंग सम्‍पूर्ण वित्‍तीय बहिष्‍करण के लिए होगी और 100 की रीडिंग सम्‍पूर्ण वित्‍तीय समावेश के लिए होगी.
  • FI-इंडैक्‍स के तीन प्रमुख पहलु हैं. 35 प्रतिशत महत्‍व वित्‍तीय सेवाओं तक पहुंच को दिया गया है. सेवाओं के उपयोग को 45 प्रतिशत महत्‍व दिया है और गुणवत्‍ता को 20 प्रतिशत. इन तीन प्रमुख पहलुओं को कुल 97 विभिन्‍न सूचकों के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा.
  • ये सूचकांक वित्‍तीय सेवाओं तक पहुंच की सरलता, सेवाओं की उपलब्‍धता और उपयोग तथा सेवाओं की गुणवत्‍ता पर भी आधारित होगा.
  • गुणवत्‍ता का पैमाना इस सूचकांक का एक विशिष्‍ट पहलु है जिसमें वित्‍तीय साक्षरता, उपभोक्‍ता सुरक्षा और सेवाओं में असमानताओं और कमियों के आधार पर वित्‍तीय समावेश की गुणवत्‍ता को दर्शाया जाएगा.
  • ये सूचकांक बिना किसी आधार वर्ष के गठित किया गया है और वित्‍तीय समावेश की ओर कई वर्षों से सभी पक्षधरों द्वारा किए गए संयुक्‍त प्रयासों को दर्शाता है.

HAL ने ‘हिंदुस्तान -228’ विमान के ‘ग्राउंड रन और लो स्पीड टैक्सी ट्रायल’ को पूरा किया

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने ‘हिंदुस्तान -228’ (VT-KNR) विमान के ‘ग्राउंड रन और लो स्पीड टैक्सी ट्रायल’ (LSTT) को सफलतापूर्वक पूरा किया है. DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ‘टाइप सर्टिफिकेशन’ के लिए यह ट्रायल किया गया है.

यह विमान HAL के कानपुर केन्द्र में 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा था. यह भारत में मेड-इन-इंडिया नागरिक विमानन के लिए एक प्रमुख मील का पत्थर है. यह क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है.

भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान) को समर्थन देने के लिए हिंदुस्तान -228 विमान का निर्माण किया जा रहा है. इस विमान का उपयोग सिविल संचालकों और राज्य सरकारों द्वारा प्रशिक्षण, रखरखाव आदि सहित अपने अंतर-राज्यीय संपर्क के लिए सफलतापूर्वक किया जा सकता है.

हिंदुस्तान-228: एक दृष्टि

हिंदुस्तान-228 (Hindustan-228) 19 सीटों वाला मल्टीरोल यूटिलिटी विमान है. इसका निर्माण भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने किया है. HAL एक सरकारी स्वामित्व वाली एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण निर्माता कंपनी है.

इस नागरिक संस्करण का उपयोग एयर एम्बुलेंस, VIP परिवहन, यात्री परिवहन, कार्गो परिवहन, क्लाउड सीडिंग, उड़ान निरीक्षण भूमिकाओं और मनोरंजक गतिविधियों जैसे पैरा जंपिंग, फोटोग्राफी के लिए किया जा सकता है.

राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के स्थापना की घोषणा, भारत को ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बनाने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का नया वैश्विक केंद्र बनाने के लिए “राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन” की स्थापना की घोषणा की. इसी के साथ उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को ऊर्जा क्षेत्र में स्वतंत्र बनाने का लक्ष्य भी तय किया.

मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत हर साल 12 लाख करोड़ रुपए से अधिक खर्च करता है. भारत को यह संकल्प लेना होगा कि देश की आजादी के 100 साल पूरे होने से पहले भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा.
  • उन्होंने कहा इसके लिए देश को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाना होगा.
  • भारतीय रेलवे ने 2030 तक नेट जीरो कार्बन इमिटर बनने का लक्ष्य रखा है. इन सारे प्रयासों के साथ ही देश ‘मिशन सर्कुलर इकोनॉमी’ पर भी बल दे रहा है.
  • जी-20 देशों के समूह में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जो अपने क्लाइमेट गोल्स को प्राप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
  • भारत ने इस दशक के अंत (2030) तक रिन्यूएबल एनर्जी के 450 गीगावाट (GW) का लक्ष्य तय किया है. इसमें से 100 गीगावाट (GW) के लक्ष्य को भारत ने तय समय से पहले प्राप्त भी कर लिया है.
  • भारत की कुल बिजली उत्पादन क्षमता अब 383.73 गीगावॉट हो गई है. इसके अतिरिक्त भारत एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर है- जो वर्ष 2022 के अंत तक 175 GW अक्षय ऊर्जा की क्षमता प्राप्त करन, अक्षय ऊर्जा में यह अब तक दुनिया की सबसे बड़ी विस्तार योजना है.
  • राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की घोषणा सबसे पहले इस साल फरवरी में पेश 2021-22 के बजट में की गयी थी. वर्तमान में देश में जो भी हाइड्रोजन की खपत होती है, वह जीवाश्म ईंधन से आती है.
  • ऑक्सीजन के साथ दहन के दौरान हाइड्रोजन ईंधन एक शून्य-उत्सर्जन ईंधन है. इसका उपयोग फ्यूल सेल या आंतरिक दहन इंजन में किया जा सकता है. यह अंतरिक्ष यान प्रणोदन के लिए ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जाता है.