चीन ने ‘शेनझू-13’ अंतरिक्ष यान से तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन भेजा

चीन का अंतरिक्ष यान ‘शेनझू-13’ तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अपने साथ लेकर गया है. इस दल में दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्री झाई झिगांग 55 वर्ष व वांग यापिंग 41 शामिल हैं. इसके अलावा एक महिला अंतरिक्ष यात्री ये गुआंगफू भी इस मिशन का हिस्सा हैं.

अंतरिक्ष स्टेशन ‘तियान’ के काम को पूरा करेगा

चीन ने 16 अक्तूबर को शेनझू-13 अन्तरिक्ष मिशन को लांच किया था. चीन अपना खुद का स्पेस स्टेशन ‘तियान’ अंतरिक्ष में स्थापित कर रहा है. इस मिशन का उद्देश्य इस चीनी स्पेस स्टेशन के काम को पूरा करना और अगले छह महीने तक ऑपरेट करना है. नए मिशन के तहत चीन ने शेनझू-13 अंतरिक्ष यान को लांग मार्च-2 से रवाना किया है.

सबसे लंबे समय का रिकॉर्ड

चीन के इस मिशन का उद्देश्य सबसे लंबा समय अंतरिक्ष में बिताने का रिकॉर्ड बनाने का भी है. इससे पहले चीन ने तीन महीने के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन भेजा था, जो हाल ही में पृथ्वी पर लौटे हैं. इस बार चीन ने छह महीने के लिए इस मिशन को लांच किया है.

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भारत के सहयोग से नेपाल में दूसरी सबसे बड़ी परियोजना शुरू की गयी

नेपाल ने अपने पूर्वी हिस्से में 679 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के विकास के लिए भारत की सतलज जल विद्युत निगम (SJVN) के साथ 1.3 अरब डॉलर का समझौता किया है. यह भारत द्वारा शुरू किया गया दूसरा बड़ा उद्यम होगा.

इस परियोजना में कुल 679 मेगावाट क्षमता वाली लोवर अरुण जलविद्युत परियोजना भारत द्वारा शुरू की गई दूसरी बड़ी परियोजना है.

इससे पहले भारत ने 1.04 अरब अमेरिकी डॉलर लागत वाली 900 मेगावाट क्षमता की अरुण-3 जलविद्युत परियोजना शुरू की थी. इस परियोजना को बनाओ, रखो, चलाओ और सौंपो (BOOT) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा.

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बांग्लादेश ने भूटान के साथ अपना पहला तरजीही व्यापार समझौता किया

बांग्लादेश ने अपना पहला तरजीही व्‍यापार समझौता भूटान के साथ किया है. बांग्लादेश के वाणिज्‍य मंत्री टीपू मुंशी और भूटान के आर्थिक मामलों के मंत्री ल्‍यानपो लोकनाथ शर्मा ने 6 दिसम्बर को ढाका में इस समझौते पर हस्‍ताक्षर किये गये.

तरजीही व्‍यापार समझौते के अनुसार दोनों देश एक दूसरे को अनेक वस्‍तुओं का शुल्‍क-मुक्‍त आयात कर सकेंगे. इसके अनुसार भूटान बांग्लादेश की 100 वस्‍तुएं बिना सीमाशुल्‍क के आयात कर सकेगा. भूटान की 34 वस्तुओं को बांग्लादेश में बिना सीमाशुल्‍क निर्यात किया जा सकेगा.

यह समझौता दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध कायम होने के 50 साल पूरे होने के अवसर पर किये गये हैं. 1971 में बांग्लादेश के गठन के बाद उसे सबसे पहले मान्‍यता देने वाला देश भूटान ही था. उसके बाद भारत ने बांग्लादेश को स्‍वतंत्र देश के रूप में मान्‍यता प्रदान की थी.

तरजीही व्यापार समझौता क्या है?

तरजीही व्यापार समझौते के तहत दो देश वस्तुओं पर आयात को शुल्क मुक्त या काफी कम कर देते हैं.

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भारत को अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के संचालक मंडल की अध्यक्षता मिली

भारत को अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के संचालक मंडल की अध्यक्षता मिली है. श्रम सचिव अपूर्व चंद्र को ILO के संचालक मंडल के अध्यक्ष के लिए चुना गया है. वह इस पद पर अक्टूबर 2020 से जून 2021 तक रहेंगे. 35 साल बाद भारत को ILO के संचालक मंडल की अध्यक्षता मिली है.

अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) क्या है?

अंतर्राष्‍ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization) संयुक्‍त राष्‍ट्र की एजेंसी है. यह अन्तर्राष्ट्रीय श्रम मानक तय करती है. यह संगठन अंतरराष्ट्रीय आधारों पर मजदूरों तथा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए नियम बनाता है. 1969 में इसे विश्व शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

संचालक मंडल ILO का शीर्ष कार्यकारी निकाय है. यह निकाय नीतियों, कार्यक्रमों, एजेंडा, बजट और महानिदेशकों का चुनाव करती है. वर्तमान में ILO के 187 सदस्य हैं. ILO का मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है.

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भारत को अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन अध्‍यक्ष और फ्रांस को सह-अध्‍यक्ष चुना गया

भारत को फिर से अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (International Solar Alliance) अध्‍यक्ष और फ्रांस को सह-अध्‍यक्ष चुन लिया गया है. अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की 14 अक्टूबर को आयोजित वचुर्अल बैठक में 34 सदस्‍य देशों ने इसका फैसला किया. इस बैठक की अध्यक्षता भारत के ऊर्जा तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने की थी. दोनों देशों का कार्यकाल दो साल का होगा.

बैठक में गठबंधन के चार क्षेत्रों का प्रतिनिधित्‍व करने वाले चार नये उपाध्‍यक्षों का भी चयन किया गया है. नए उपाध्यक्ष हैं:

  1. एशिया प्रशांत क्षेत्र — फिजी और नाउरू
  2. अफ्रीका क्षेत्र — मॉरीशस और नाइजर
  3. यूरोप और अन्य क्षेत्र — यूके और नीदरलैंड
  4. लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र — क्यूबा और गुयाना

जानिए क्या है अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन…»

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दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन देशों के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) देशों के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 24 सितम्बर को आयोजित की गयी. इस बैठक की मेजबानी नेपाली विदेश मंत्री ने की थी. बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया.

बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने पड़ोसी की पहली नीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता सभी पड़ोसी देशों से जुड़ाव, एकीकृत, सुरक्षित और समृद्ध दक्षिण एशिया के निर्माण की दिशा में काम करने की बात कही.

बैठक में एस जयशंकर ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद, संपर्क को अवरुद्ध करना और व्यापार को बाधित करना तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियां हैं जिन्हें दूर करने के लिए सार्क देशों को कड़े कदम उठाने होंगे.

सार्क (SAARC): एक दृष्टि

  • SAARC, South Asian Association for Regional Cooperation (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन- दक्षेस) का संक्षिप रूप है.
  • इसकी स्थापना 8 दिसम्बर 1985 को भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान द्वारा मिलकर की गई थी. भारत के प्रयास से अप्रैल 2007 में सार्क के 14वें शिखर सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान इसका आठवा सदस्य बना था.
  • सार्क दक्षिण एशिया के आठ देशों का आर्थिक और राजनीतिक संगठन है. संगठन के सदस्य देशों में दुनिया की कुल जनसंख्या का 20 फीसदी (लगभग 1.7 अरब) निवास करता है.
  • सार्क का मुख्यालय नेपाल की राजधानी काठमांडू में है. इसका राजभाषा अंग्रेजी है.
  • संगठन का संचालन सदस्य देशों के मंत्रिपरिषद द्वारा नियुक्त महासचिव करते हैं, जिसकी नियुक्ति तीन साल के लिए सदस्य देशों के वर्णमाला क्रम के अनुसार की जाती है.
  • सार्क के प्रथम महासचिव बांग्लादेश के अब्दुल अहसान और वर्तमान महासचिव पाकिस्तान के अमजद हुसैन बी सियाल हैं.

वर्तमान सदस्य देश

भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव, भूटान और अफ़ग़ानिस्तान

वर्तमान प्रेक्षक देश

अमेरिका, दक्षिण कोरिया, यूरोपीय संघ, ईरान, चीन, ऑस्ट्रेलिया. म्यान्मार, मॉरिशस और जापान

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भारत को संयुक्‍त राष्‍ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद के महिला स्थिति आयोग का सदस्‍य चुना गया

भारत को संयुक्‍त राष्‍ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economic and Social Council-ECOSOC) के महिला स्थिति आयोग का सदस्‍य चुना गया है. भारत 2021 से 2025 तक चार वर्ष के लिए इस प्रतिष्‍ठित संस्‍था का सदस्‍य रहेगा. यह चयन स्‍त्री-पुरूष समानता और महिला सशक्तीकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि है.

महिला स्थिति आयोग के सदस्‍यों के लिए हुए चुनाव में भारत, अफगानिस्‍तान और चीन ने भाग लिया था. 54 सदस्‍यों के बीच भारत और अफगानिस्‍तान को जीत हासिल हुई जबकि चीन को आधे से भी कम मत मिले.

ECOSOC क्या है?

संयुक्‍त राष्‍ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC), आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का प्रमुख अंग है.

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भारत सहित 5 देश संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद के अस्‍थायी सदस्‍य चुने गये

भारत दो साल के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) का अस्‍थायी सदस्‍य चुन लिया गया है. 193 सदस्‍यों वाली संयुक्‍त राष्ट्र महासभा में भारत को 184 मत मिले हैं. भारत का दो साल का कार्यकाल 1 जनवरी 2021 से 31 दिसम्बर 2022 तक होगा. भारत के साथ-साथ आयरलैंड, मैक्सिको, नॉर्वे और केन्या ने भी सुरक्षा परिषद के चुनाव जीते हैं.

भारत, एशिया-प्रशांत क्षेत्र से 2021-22 के लिए अस्‍थायी सदस्‍यता का एकमात्र उम्‍मीदवार था. 55 सदस्‍यों वाले एशिया-प्रशांत समूह के सदस्‍यों ने जून 2019 में ही भारत की उम्‍मीदवारी को सर्वसम्‍मति से स्‍वीकृति प्रदान कर दी थी. संयुक्‍त राष्‍ट्र के इतिहास में भारत आठवीं बार प्रतिष्ठित सुरक्षा परिषद के लिए निर्वाचित हुआ है.

भारत अगस्त 2021 में UNSC का अध्यक्ष बनेगा

भारत अगस्त, 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अध्यक्ष पद संभालेगा. नियमों के अनुसार, हर सदस्य देश अंग्रेजी वर्णानुक्रम के अनुसार बारी-बारी से एक महीने के लिए अध्यक्षता करता है. संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता कार्यालय के अनुसार, भारत अगस्त, 2021 और फिर 2022 में फिर एक महीने के लिए अध्यक्ष बनेगा.

संयुक्त राष्ट्र संघ: एक दृष्टि

  • संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 24 अक्तूबर 1945 को विश्व के 50 देशों ने संयुक्त राष्ट्र अधिकार-पत्र पर हस्ताक्षर कर किया था. भारत शुरुआती दिनों से ही इसका सदस्य है.
  • संयुक्त राष्ट्र संघ के छह अंग हैं- 1. सुरक्षा परिषद्, 2. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय, 3. महासभा, 4. सचिवालय, 5. आर्थिक और सामाजिक परिषद् और 6. न्यायसिता परिषद्.
  • संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएं हैं- अरबी, चाइनीज, अंग्रेजी, फ्रेंच, रसियन और स्पैनिश. आधिकारिक भाषाएं छह हैं, लेकिन यहां पर संचालन भाषा केवल अंग्रेजी और फ्रेंच हैं.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संयुक्त राष्ट्र के छः प्रमुख अंगों में से एक अंग है. अन्तर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इसका गठन किया गया है.
  • सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं- पांच स्थाई और दस अस्‍थायी (प्रत्येक 2 वर्ष के लिए). चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका इसके स्थाई सदस्य हैं. दस अस्‍थायी सदस्य क्षेत्रीय आधार पर सामान्य सभा द्वारा चुने जाते है। सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष हर महीने वर्णमालानुसार बदलता है.
  • सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्यों को वीटो पॉवर मिली हुई है, जबकि अस्थायी सदस्य के पास वीटो का अधिकार नहीं होता.

वीटो क्या है?

वीटो (veto) का शाब्दिक अर्थ है- ‘मैं अनुमति नहीं देता हूं’. मौजूदा समय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों चीन, फ्रांस, रूस, यूके और अमेरिका के पास वीटो पावर है. स्थायी सदस्यों के फैसले से अगर कोई भी सदस्य सहमत नहीं है तो वह वीटो पावर का इस्तेमाल करके उस फैसले को रोक सकता है.

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भारत वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमता भागीदारी शुरू करने वाले देशों के समूह में शामिल

भारत, वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमता भागीदारी (GPAI) संस्थापक सदस्य देशों के समूह में 15 जून को शामिल हो गया. इस समूह में अमरीका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, कनाडा, फ्रांस सहित कई अन्‍य देश शामिल हैं. इससे अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों और भागीदारों के सहयोग से उद्योग जगत, नागरिक संगठनों, सरकारों और शिक्षा जगत के प्रमुख विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने में सहायता मिलेगी.

GPAI क्या है?

  • GPAI, Global Partnership on Artificial Intelligence का संक्षिप्त रूप है. विभिन्‍न भागीदार देशों के अनुभव के इस्‍तेमाल से कृत्रिम बुद्धिमता (Artificial Intelligence) की चुनौतियों और अवसरों को बेहतर ढंग से समझने का अपनी तरह का पहला प्रयास है.
  • GPAI को भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, मैक्सिको, न्यूजीलैंड, कोरिया गणराज्य, सिंगापुर द्वारा शुरू किया गया है.
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NAM देशों का विशेष ऑनलाइन शिखर सम्‍मेलन आयोजित किया गया

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के सदस्‍य देशों का विशेष शिखर सम्‍मेलन 4 मई को वीडियो कान्‍फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया गया. इस ऑनलाइन सम्‍मेलन सदस्‍य देशों के राष्‍ट्रध्‍यक्षों और शासनाध्‍यक्षों ने हिस्सा लिया. सम्‍मेलन का आयोजन अजरबेजान के राष्‍ट्रपति इलहाम अलीयेफ की पहल पर किया गया था. अजर बेजान इस समय गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अध्‍यक्ष है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सम्‍मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया.

इस वर्चुअल सम्‍मेलन में कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सदस्‍य देशों के बीच समन्‍वय के तरीकों पर चर्चा की गयी. सम्‍मेलन का समापन कोविड-19 के खिलाफ गुटनिरपेक्ष आंदोलन के देशों की एकता की राजनीतिक घोषणा के साथ हुआ.

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) क्या है?

  • NAM, Non-Aligned Movement (गुटनिरपेक्ष आंदोलन) का संक्षिप्त रूप है. NAM संयुक्त राष्ट्र के बाद दूसरा बड़ा राजनीतिक संगठन है. इसके साथ एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 120 विकासशील देश जुड़े हुए हैं. इसकी स्थापना अप्रैल,1961 में हुई थी. भारत NAM का संस्थापक सदस्य रहा है.
  • इसका जन्म तब हुआ था, जब दुनिया पूरी तरह से अमेरिकी और पू्र्व सोवियत गुट में बंटा हुआ था. उस समय NAM देशों ने निश्चय किया था, कि विश्व के वे किसी भी गुट के साथ या विरोध में नहीं (गुटनिरपेक्ष) रहेंगे.
  • यह आंदोलन भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के राष्ट्रपति गमाल अब्दुल नासिर, युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप बरोज़ टीटो, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डाॅ सुक्रणों एवं घाना के राष्ट्राध्यक्ष क्वामें एन्क्रूमा ने आरंभ किया था.
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कोविड-19 पर G-20 देशों का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया

G-20 देशों का आपातकालीन शिखर सम्मेलन 26 मार्च को विडियो कांफ्रेन्सिंग (वर्चुअल) माध्यम से आयोजित किया गया. यह सम्मेलन सऊदी अरब के सुलतान सलमान बिन अब्दुल अजीज अल साऊद की अध्यक्षता में आयोजित किया गया था. कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य प्रणाली और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर विचार करने के लिए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनिया के अन्य शीर्ष नेता इस सम्मेलन में हिस्सा लिया. फिलहाल G-20 की अध्यक्षता कर रहे सऊदी अरब ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये G-20 शिखर सम्मेलन आयोजित करने का आह्वान किया था. G-20 सदस्य देशों के अलावा स्पेन, जोर्डन, सिंगापुर और स्विटजरलैंड को भी इस सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था.

शीर्ष अन्तर्राष्ट्रीय संगठन भी शामिल हुए

संयुक्त राष्ट्र, विश्वबैंक, विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व व्यापर संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन जैसे शीर्ष अन्तर्राष्ट्रीय संगठन भी इस बैठक में शामिल थे.

बैठक में आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन), अफ्रीकी संघ, खाड़ी सहयोग परिषद और अफ्रीका के विकास के लिये नई भागीदारी (New Partnership for Africa’s Development- NEPAD) जैसे क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया था.

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने G-20 देशों से कोरोना वायरस से निपटने के लिए ठोस कार्य योजना तैयार करने की अपील की. उन्होंने चिकित्सा अनुसंधान और विकास के लाभों को मुक्तभाव से साझा करने, स्वास्थ्य प्रणाली को आवश्यकता के अनुसार और मानवीय रूप में विकसित करने तथा आपदा प्रबंधन के नये तौर-तरीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

सदस्य देशों ने कोविड-19 के सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभाव से उबरने के लिए 50 खरब (5 ट्रिलियन) डॉलर उपलब्ध कराने की वचनबद्धता व्यक्त की.

G-20: एक दृष्टि

जी-20 में भारत के अलावा, अर्जेन्टीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं.

जानिए क्या है G-20…»

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सऊदी अरब को जापान के बाद जी-20 देशों का अध्यक्ष बनाया गया

सऊदी अरब को जापान के बाद जी-20 देशों का अध्यक्ष बनाया गया है. जी-20 समूह की अध्यक्षता ग्रहण करने वाला यह पहला अरब देश है. जी-20 सम्मेलन 21 और 22 नवंबर 2020 को सऊदी अरब की मेजवानी में राजधानी रियाद में होगा.

सऊदी अरब ने समूह के मौजूदा कार्यों को जारी रखने और विभिन्न मुद्दों पर बहुराष्ट्रीय सहमति बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है. सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने इसे अंतर्राष्ट्रीय तालमेल को आकार देने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है.

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