ईरान ने भारत को चाबहार रेल परियोजना से अलग किया

ईरान ने भारत को चाबहार रेल परियोजना से अलग करने की 14 जुलाई को घोषणा की. घोषणा के तहत ईरान इस रेल परियोजना को भारत की आर्थिक सहायता के बिना पूरा करेगा. इसके लिए वह ईरान के राष्ट्रीय विकास निधि से 40 करोड़ डॉलर की धनराशि का उपयोग करेगा.

चाबहार परियोजना: एक दृष्टि

  • सन 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान की यात्रा की थी जिस दौरान चाबहार समझौते पर हस्‍ताक्षर हुआ था. पूरे परियोजना पर करीब 1.6 अरब डॉलर का निवेश होना था.
  • इस परियोजना में चाबहार बंदरगाह और इस बंदरगाह से जहेदान के लिए 628 किलोमीटर रेलवे लाइन को पूरा किया जाना था.
  • इस परियोजना से भारत के अफगानिस्‍तान और अन्‍य मध्‍य-एशियाई देशों तक एक वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराना जाना था. इसके लिए ईरान, भारत और अफगानिस्‍तान के बीच त्रिपक्षीय करार हुआ था.
  • भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह को विकसित करने में अरबों रुपये खर्च किए हैं.
  • भारत के लिए चाबहार व्यापारिक के साथ-साथ रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है. यह बंदरगाह चीन की मदद से विकसित किए गए पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर है. इसलिए भारत के लिहाज से ये काफी महत्वपूर्ण है.
  • अमेरिका के दबाव की वजह से भारत के रिश्ते ईरान के साथ पूर्ववत नहीं हैं. अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह के लिए राहत दे रखी है. वैसे भी भारत ने पहले से ही ईरान से तेल का आयात बहुत कम कर दिया है.

चाबहार रेल परियोजना

चाबहार रेल परियोजना चाबहार पोर्ट से जहेदान के बीच बनाई जानी है. भारत और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत भारत की सरकारी रेल कंपनी भारतीय रेलवे कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (IRCON) इस परियोजना को पूरा करने वाली थी.

इस प्रोजेक्ट के लिए IRCON के इंजीनियर ईरान गए थे लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने रेल परियोजना पर काम को शुरू नहीं किया.

चीन और ईरान के बीच नये समीकरण की उम्मीद

अमेरिका की एक रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया में अमेरिका के साथ चल विवाद के कारण चीन और ईरान जल्‍द ही एक बड़ा समझौता कर सकते हैं. इसके अनुसार चीन ईरान से बेहद सस्‍ती दरों पर तेल खरीदेगा और इसके बदले में पेइचिंग ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है. चीन ईरान की सुरक्षा के लिए घातक आधुनिक हथियार देगा. रिपोर्ट के अनुसार ईरान और चीन के बीच 25 साल के रणनीतिक समझौते पर बातचीत पूरी हो गई है

भारत, ब्रिटेन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाला दूसरा सबसे बड़ा निवेशक देश बना

भारत, ब्रिटेन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने वाला दूसरा सबसे बड़ा निवेशक देश बन गया है. वर्ष 2019 में भारत ने ब्रिटेन में 120 परियोजनाओं में निवेश और 5429 रोज़गार सृजित किया था.

ब्रिटेन सरकार के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, भारत FDI में चार प्रतिशत की वृद्धि कर तीसरे से दूसरे पायदान पर आ गया है. वर्तमान में ब्रिटेन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिहाज से अमरीका पहले स्थान पर है. दूसरे स्थान पर भारत और तीसरे स्‍थान पर जर्मनी है.

भारत और पाकिस्‍तान ने अपनी हिरासत में मौजूद नागरिकों की सूची का आदान-प्रदान किया

भारत और पाकिस्तान ने 1 जुलाई को एक-दूसरे को अपनी हिरासत में मौजूद कैदियों और मछुआरों की सूची का आदान-प्रदान किया. सूची का आदान-प्रदान नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक माध्यम से एक साथ किया गया.

भारत ने अपनी हिरासत में मौजूद 265 पाकिस्‍तानी आम नागरिकों और 97 मछुआरों की सूची सौंपी. पाकिस्‍तान ने अपनी हिरासत में मौजूद 54 आम नागरिकों और 270 मछुआरों की सूची सौंपी.

भारत और पाकिस्‍तान ने एक-दूसरे की जेलों में बंद कैदियों की सूची का आदान-प्रदान प्रत्‍येक वर्ष पहली जनवरी और पहली जुलाई को करते हैं. कैदियों की सूची का आदान-प्रदान 21 मई, 2008 को हुए राजनयिक पहुंच संबंधी समझौते के तहत किया जाता है.

भारत में 59 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया

सरकार ने देश में चल रहे 59 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसकी घोषणा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 29 जून को की. देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा को ध्यान में रखते हुए इन ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया है. इनमें अधिकतर चीनी मोबाइल ऐप हैं.

प्रतिबंधित ऐप में टिकटॉक, शेयरइट और वी-चैट शामिल हैं. इन ऐप पर एंड्रॉयड और IOS दोनों प्लेटफॉर्म पर प्रतिवंध लगाया गया है. इन ऐप को प्रतिवंधित किये जाने से आत्‍मनिर्भर भारत अभियान को फायदा होगा. इस फैसले से भारतीय र्स्‍टाटअप कंपनियों को फायदा होगा और वे इनका बेहतर विकल्‍प लेकर आ सकेंगी.

गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने इन एप्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी. सिफारिश में कहा गया है कि ये एप, उपयोगकर्ताओं के डेटा को चुराकर, उन्हें गुपचुप तरीके से भारत के बाहर स्थित सर्वर को भेजते हैं.

प्रतिबंधित ऐप की सूची

1. TikTok, 2. Shareit 3. Kwai, 4. UC Browser, 5. Baidu map, 6. Shein, 7. Clash of Kings, 8. DU battery saver, 9. Helo, 10. Likee, 11. YouCam makeup, 12. Mi Community, 13. CM Browers, 14. Virus Cleaner, 15. APUS Browser,
16. ROMWE, 17. Club Factory, 18. Newsdog, 19. Beutry Plus, 20. WeChat, 21. UC News, 22. QQ Mail, 23. Weibo, 24. Xender, 25. QQ Music, 26. QQ Newsfeed, 27. Bigo Live, 28. SelfieCity, 29. Mail Master, 30. Parallel Space, 31. Mi Video Call – Xiaomi, 32. WeSync, 33. ES File Explorer, 34. Viva Video – QU Video Inc, 35. Meitu, 36. Vigo Video, 37. New Video Status, 38. DU Recorder, 39. Vault- Hide, 40. Cache Cleaner DU App studio, 41. DU Cleaner, 42. DU Browser, 43. Hago Play With New Friends, 44. Cam Scanner, 45. Clean Master – Cheetah Mobile, 46. Wonder Camera, 47. Photo Wonder, 48. QQ Player, 49. We Meet, 50. Sweet Selfie, 51. Baidu Translate, 52. Vmate, 53. QQ International, 54. QQ Security Center, 55. QQ Launcher, 56. U Video, 57. V fly Status Video, 58. Mobile Legends और 59. DU Privacy

भूटान सरकार और खोलोंगछू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड के बीच जलविद्युत परियोजना के समझौते

भूटान सरकार और खोलोंगछू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड के बीच 29 जून को भूटान की राजधानी थिम्‍पू में जलविद्युत परियोजना के समझौते पर हस्ताक्षर हुए. ये समझौते विदेशमंत्री डॉ एस जयशंकर और भूटान के विदेशमंत्री डॉ तंडी दोरजी के वर्चुअल (विडियो कांफ्रेंसिंग) मौजूदगी में हुए.

600 मेगावाट की यह परियोजना पूर्वी भूटान के त्राशियांगत्से जिले में खोलोंगछू नदी की धारा पर होगी. इस योजना को खोलोंगछू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड संचालित करेगी. यह भूटान के द्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन और भारत के सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के बीच बनी संयुक्त उपक्रम कंपनी है.

यह परियोजना 2025 तक पूरी होने की संभावना है. भारत और भूटान के प्रधानमंत्रियों ने पिछले वर्ष अगस्त में 720 मेगावाट मांगदेछू जल विद्युत परियोजना का शुभारंभ किया था. जल विद्युत क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग का प्रमुख क्षेत्र है.

खोलोंगछू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड

खोलोंगछू हाइड्रो एनर्जी लिमिटेड (Kholongchhu Hydro Energy Limited) भारत के सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड (SJVNL) और भूटान के ड्रूक ग्रीन पावर कार्पोरेशन (DGPC) का एक संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) कंपनी है.

द्वितीय विश्‍व युद्ध में रूस और मित्र देशों की विजय प्राप्‍त करने की 75वीं वर्षगांठ पर विजय परेड

रूस की राजधानी मॉस्‍को में 24 जून को विजय परेड का आयोजन किया गया. यह परेड द्वितीय विश्‍व युद्ध में रूस और मित्र देशों की विजय प्राप्‍त करने की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गयी थी. इस परेड में भारत और चीन को भी आमंत्रित किया गया था.

भारत की ओर से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परेड में हिस्सा लिया. वह 22-24 जून तक रूस की यात्रा पर थे. भारत की तीनों सेनाओं के 75 सदस्यों ने इस परेड में हिस्सा लिया था. परेड में हिस्सा लेने वाली टुकड़ी का नेतृत्व वीर सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट के एक अधिकारी द्वारा किया गया था. इस रेजिमेंट ने द्वितीय विश्‍व युद्ध में भाग लिया था.

श्री राजनाथ सिंह ने इस मॉस्को यात्रा में रूस के उप-प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोफ के साथ बैठक वार्ता की थी. बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की समीक्षा हुई और इसे विस्‍तार देने पर विचार-विमर्श हुआ.

द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सशस्त्र बल की भूमिका

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ‘ब्रिटिश भारतीय सशस्त्र बल’ मित्र देशों की सबसे बड़ी टुकड़ियों में से एक थे. भारतीय सशस्त्र बल ने उत्तरी और पूर्वी अफ्रीकी अभियान, पश्चिमी रेगिस्तान अभियान और यूरोपीय थिएटर में एक्सिस शक्तियों के खिलाफ हिस्सा लिया था. इस अभियान के दौरान 87 हज़ार से अधिक भारतीय सैनिकों ने अपना बलिदान दिया और क़रीब 34,354 सैनिक इसमें घायल हुए थे.

इस युद्ध में भारतीय सेना ने न केवल सभी मोर्चों पर लड़ाई लड़ी, बल्कि दक्षिणी, ट्रांस-ईरानी लेंड-लीज मार्ग पर लॉजिस्टिक समर्थन भी सुनिश्चित किया था. इसमें हथियार, गोला-बारूद, उपकरण और भोजन सोवियत संघ, ईरान और इराक में भेजे गए थे.

भारतीय सैनिकों की वीरता को चार हज़ार से अधिक अलंकरणों से सम्मानित किया गया था, जिसमें 18 विक्टोरिया और जॉर्ज क्रॉस भी शामिल है. तत्कालीन सोवियत संघ ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता की सराहना की और सूबेदार नारायण, राव निक्कम और रॉयल इंडियन आर्मी सर्विस कोर के हवलदार गजेंद्र सिंह चंद को USSR के सर्वोच्च सम्मान ‘आडर आफ द रेड स्टार’ से सम्मानित किया था.

लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में चीनी सेना के साथ हिंसक संघर्ष

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी क्षेत्र में 15 जून को भारतीय सेना का चीनी सेना के साथ हिंसक संघर्ष हो गया. इस क्षेत्र में चीन की सेना ने वहां यथास्थिति बदलने की कोशिश की थी जिससे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई. इस हिंसक झड़प में भारत के करीब 20 सैनिक शहीद हो गये.

इन शहीदों में बिहार रेजीमेंट के 16वीं बटालियन के कमांडिंग अधिकारी कर्नल बी संतोष बाबू ने चीन के सैनिकों के साथ हिंसक संघर्ष में देश के लिए अपनी जान न्‍योछावर कर दी. कर्नल संतोष बाबू हैदराबाद के समीप सूर्यपेट के निवासी थे.

उल्लेखनीय है कि भारत में चीन से लगी सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की है. यह गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है.

संक्षिप्त घटनाक्रम

  1. पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर दोनों देशों के बीच चार पॉइंट्स पर पिछले कई दिनों से गतिरोध जारी है. इसके बाद से ही दोनों देशों ने वहां अपने सैनिकों की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी थी.
  2. 6 जून को पहली बार भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी. जिसमें गतिरोध के पॉइंट्स की पहचान की गई थी. इस बातचीत में गलवान वैली और हॉट स्प्रिंग एरिया में गतिरोध के तीन पॉइंट्स में धीरे-धीरे सैनिकों को पीछे किये जाने पर सहमति बनी थी. चीन पैंगोंग सो एरिया से पीछ हटने को तैयार नहीं हुआ था.
  3. चीन 6 जून को हुई सहमति से मुकर गया. उसने गलवान घाटी में एलएसी पर इस सहमति के अनुरूप काम नहीं किया. 15 जून को देर शाम और रात को चीन की सेना ने वहां यथास्थिति बदलने की कोशिश की जिससे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई.

भारत ने UNRWA को 2 मिलियन डालर की सहायता राशि प्रदान की

भारत ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के कल्याण के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी (UNRWA) को 2 मिलियन अमरीकी डालर की सहायता राशि प्रदान की है. यह सहायता कोरोनोवायरस की संकट की परिस्थिति के दौरान शिक्षा और स्वास्थ्य सहित UNRWA के प्रमुख कार्यक्रमों और सेवाओं के लिए दी गई है. UNRWA ने भारत के समर्थन की सराहना की है.

UNRWA: एक दृष्टि

UNRWA, संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी (United Nations Relief and Works Agency) का संक्षिप्त रूप है. यह उन फिलिस्तीनियों लोगों के कल्याण के लिए कार्य करता है जो 1948 में युद्ध के दौरान अपने घर छोड़ कर चले गए थे यह जिन्हें घरों से बाहर निकाल दिया गया था.

2019 में भारत ने UNRWA में अपना वार्षिक योगदान 1.25 मिलियन डालर से बढ़ाकर 5 मिलियन अमरीकी डालर कर दिया था.

नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने मानचित्र में दिखाया

नेपाल सरकार ने अपने देश का नया राजनीतिक और प्रशासनिक मानचित्र जारी किया है. नेपाल के भू-बंधन और सुधार मंत्रालय की ओर से मंत्री पद्मा अरयाल ने यह नया मानचित्र 19 मई को जारी किया. इस मानचित्र को मंजूरी के लिए नेपाली संसद के समक्ष रखा जाएगा.

नेपाल द्वारा जारी नए मानचित्र में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के कुल 395 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को नेपाल के हिस्से में दिखाया गया है. इस मानचित्र में कालापानी के कुल 60 वर्ग किलोमीटर और लिंपियाधुरा के 335 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल किया गया है.

भारत द्वारा सड़क का निर्माण

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में उत्‍तराखंड में धारचूला से लिपुलेख तक नई रोड का उद्घाटन किया था. इस रोड पर नेपाल ने आपत्ति जताई है. इस रोड के निर्माण से कैलाश मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्रियों की दूरी कम हो जाएगी. यह रोड सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है.

सुगौली संधि में तय किया गया है भारत-नेपाल की सीमा

नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच सुगौली संधि साल 1816 में हुआ था. सुगौली बिहार के बेतिया यानी पश्चिम चंपारण में नेपाल सीमा के पास एक छोटा सा शहर है.

इस संधि में कालापानी इलाके से होकर बहने वाली महाकाली नदी भारत-नेपाल की सीमा मानी गई है. इस संधि में तय हुआ कि काली या महाकाली नदी के पूरब का इलाका नेपाल का होगा. बाद में अंग्रेज सर्वेक्षकों ने काली नदी का उदगम स्थान अलग-अलग बताना शुरू कर दिया.

दरअसल महाकाली नदी कई छोटी धाराओं के मिलने से बनी है और इन धाराओं का उदगम अलग-अलग है. नेपाल का कहना है कि कालापानी के पश्चिम में जो उदगम स्थान है वही सही है और इस लिहाज से पूरा इलाका उसका है. दूसरी ओर भारत दस्तावजों के सहारे साबित कर चुका है कि काली नदी का मूल उदगम कालापानी के पूरब में है.

सुगौली संधि के अंतर्गत नेपाल को अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से उन सभी हिस्सों पर हक छोड़ना था, जो नेपाल के राजा ने युद्धों में जीतकर हासिल किए थे. इनमें पूर्वोत्तर में सिक्किम रियासत तथा पश्चिम में कुमाऊं और गढ़वाल के क्षेत्र भी शामिल थे.

चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण है कालापानी

कालापानी चीन, नेपाल और भारत की सीमा के मिलन-बिंदु पर भारतीय राज्य उत्‍तराखंड में है. कालापानी इलाके का लिपुलेख दर्रा चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. 1962 से ही कालापानी पर भारत की इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस की पहरेदारी है.

IMD मौसम रिपोर्ट में पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र को भी शामिल किया गया

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मौसम रिपोर्ट में पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र- मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान को शामिल किया जाना हाल के दिनों में चर्चा में रहा है.

दरअसल IMD ने जम्मू और कश्मीर के अपने मौसम संबंधी उप-मंडल का उल्लेख ‘जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद’ के रूप में करना शुरू किया है. इनमें मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के अंतर्गत आते हैं.

IMD द्वारा यह परिवर्तन 5 मई से उत्तर-पश्चिमी डिविजन के दैनिक पूर्वानुमान में दिखाई देना शुरू हुआ था. देश में इस समय 36 मौसम संबंधी उप-मंडल हैं. इन्हें राज्य की सीमाओं के साथ परिभाषित किया गया है.

उत्तर पश्चिम डिविजन के तहत 9 उप-मंडल (सबडिवीजन) आते हैं जिसमें जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-चंडीगढ़-हरियाणा, पंजाब, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी राजस्थान शामिल हैं.

घटनाक्रम का महत्व

इस घटनाक्रम का महत्व ऐसे समय में काफी बढ़ जाता है जब भारत ने हाल ही एक बार फिर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि POK भारत का हिस्सा है. इसमें बगैर भारत की अनुमति के किसी तरह की छेड़खानी सहन नहीं की जाएगी.

IMD ने मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान के लिये मौसम पूर्वानुमान जारी करना तब शुरू किया गया है जब कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने गिलगिट-बाल्टिस्तान में चुनाव की अनुमति दी थी.

पाकिस्तान और चीन का संयुक्त हित

  1. वर्तामान में पाकिस्तान, POK को देश का ‘स्वतंत्र हिस्सा’ मानता है. यहाँ पृथक सरकार चलती है. POK के अपने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति हैं.
  2. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (China–Pakistan Economic Corridor- CPEC), गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है.
  3. POK के इस हिस्से में चीन तभी पूंजी निवेश करेगा, जब यह हिस्सा पूरी तरह पाकिस्तान के नियंत्रण में न आ जाए. यह यहाँ नई सरकार के गठन से ही यह संभव है.
  4. इस कारण पाकिस्तान ने POK के उपरी हिस्से गिलगित-बाल्टिस्तान को देश का पांचवां प्रदेश बनाने का मंसूबा तैयार किया है. अभी पाकिस्तान में चार प्रांत सिंध, पंजाब, खैबर पख्तूनख्वाह और बलूचिस्तान हैं.

मालदीव की मदद के लिए भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन संजीवनी’ चलाया

मालदीव की मदद के लिए भारतीय वायुसेना ने हाल ही में ‘ऑपरेशन संजीवनी’ (Operation Sanjeevani) चलाया था. इस ऑपरेशन के द्वारा इंडियन एयर फोर्स और इंडियन आर्मी ने मिलकर मालदीव का भारत में फंसा 6.2 टन का सामान उन तक पहुंचाया. यह सामान एयर फोर्स के C-130 एयरक्राफ्ट में लिफ्ट कर माले पहुंचाया गया.

क्या था मामला?

दरअसल भारत के अलग-अलग सप्लायर्स से ये सामान मालदीव जाना था लेकिन 21 दिन के लॉकडाउन की वजह से यह दवाई और सामान किसी और तरीके से मालदीव नहीं भेज सकते थे.

मालदीव सरकार के आग्रह पर इंडियन एयर फोर्स ने ऑपरेशन संजीवनी शुरू किया. इंडियन एयर फोर्स के विमान ने यह सामान नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नै, मदुरै के एयरपोर्ट से उठाया फिर माले के लिए उड़ान भरी. यह सामान 8 अलग-अलग सप्लायर्स के वेयरहाउस में थे.

जो सामान भेजा गया है उसमें बीपी, डायबिटीज, किडनी के मरीजों की दवाइयों से लेकर एंटी वायरल और इंफ्लुएंजा की वैक्सीन तक हैं. इसमें जरूरी दवाइयां और अस्तपाल के लिए जरूरी सामान थे. इसमें कैंसर से लेकर कोराना वायरस के मरीज के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाई भी हैं.

भारत और मालदीव के बीच चलाये गये मुख्य ऑपरेशन

2014 में ऑपरेशन नीर: मालदीव की राजधानी माले को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ा था. भारतीय वायुसेना ने 374 टन पीने के पानी की आपूर्ति की थी.

1988 में ऑपरेशन कैक्टस: मालदीव सरकार का तख्तापलट की कोशिश को बेअसर करने में मदद के लिए भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन कैक्टस चलाया था.

मालदीव: एक दृष्टि

मालदीव (मालदीव गणराज्य) हिंद महासागर में स्थित एक द्वीपीय देश है. इसका फेलाव भारत के लक्षद्वीप की उत्तर-दक्षिण दिशा में है जो लक्षद्वीप सागर में स्थित है. श्रीलंका की दक्षिण-पश्चिमी दिशा से यह करीब 700 किलोमीटर (435 mi) पर है. मालदीव की राजधानी माले है. जनसंख्या और क्षेत्रफल दोनों के आधार पर मालदीव एशिया का सबसे छोटा देश है.

1 अप्रैल 2020: भारत-चीन राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे हुए

1 अप्रैल 2020 को भारत और चीन के बीच शुरू किये गये राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे हो गये. दोनों देशों ने विश्व में फैले COVID-19 महामारी के कारण अपने राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मनाने के लिए निर्धारित सभी कार्यक्रमों को स्थगित करने का निर्णय लिया था.

भारत और चीन के नेताओं ने 1 अप्रैल 1950 को दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था. दोनों देशों ने संयुक्त रूप से ‘शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पाँच सिद्धांतों’ (Five Principles of Peaceful Coexistence) की वकालत की थी. भारत, चीनी गणराज्य (People’s Republic of China- PRC) के साथ संबंध स्थापित करने वाला पहला गैर-समाजवादी देश था.

भारत-चीन राजनयिक संबंध: एक दृष्टि

  • 21वीं सदी के प्रारंभ से अब तक भारत और चीन के बीच होने वाला व्यापार 3 बिलियन डॉलर से बढ़कर लगभग 100 बिलियन डॉलर (32 गुना) हो गया है. वर्ष 2019 में भारत तथा चीन के बीच होने वाला व्यापार की मात्रा 92.68 बिलियन डॉलर थी.
  • भारत तथा चीन के बीच हैंड-इन-हैंड (Hand-in-Hand) संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभ्यास के अब तक 8 संस्करण आयोजित किये जा चुके हैं.

भारत-चीन मुख्य विवाद

  • डोकलाम गतिरोध 2017, अरुणाचल प्रदेश में आसफिला क्षेत्र पर विवाद.
  • परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (Nuclear Suppliers Group- NSG) में भारत का प्रवेश, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता पर विरोध.
  • चीन के ‘बेल्ट एंड रोड पहल’ (Belt and Road Initiative) के अंतर्गत चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (China Pakistan Economic Corridor- CPEC) विवाद.