जेके राउलिंग ने अपनी नई बाल पुस्तक ‘द इकाबॉग’ का इन्टरनेट संस्करण जारी किया

ब्रिटिश लेखिका जेके राउलिंग ने 26 मई को अपनी नई बाल पुस्तक (children’s book) ‘द इकाबॉग’ (The Ickabog) का इन्टरनेट संस्करण जारी किया. इस पुस्तक के कहानियों को 10 जुलाई तक प्रत्येक दिन किस्तों (instalments) में theickablog.com पर मुफ्त में प्रकाशित की जाएगी. इसका आधिकारिक प्रकाशन नवंबर 2020 में किया जायेगा.

जे.के. रोलिंग

जेके रोलिंग का पूरा नाम जोन कैथलीन रोलिंग (Joanne Kathleen Rowling) है. वह एक ब्रिटिश लेखिका हैं. अंग्रेज़ी में लिखा उनका उपन्यास- श्रृंखला ‘हैरी पॉटर’ (Harry Potter) 21वी सदी का सबसे मशहूर उपन्यासों में से एक है. हैरी पॉटर में एक नयी जादुई दुनिया का वर्णन है. इन उपन्यासों पर इन्हीं नामों की 8 हॉलिवुड फ़िल्में भी बन चुकी हैं.

हैरी पॉटर श्रृंखला का पहला उपन्यास ‘हैरी पॉटर और द फिलोस्फर स्टोन’ 1997 में प्रकाशित हुआ था. जेके रोलिंग ने 2012 में वयस्कों के लिए अपना पहला उपन्यास ‘द कैजुअल वेकेंसी’ (The Casual Vacancy) और 2013 में उन्होंने ‘रॉबर्ट गैलब्रेथ’ नाम से एक अपराध उपन्यास प्रकाशित किया था.

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भारत में पहला संस्थागत वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र IDRC का उद्घाटन

भारत में हाल ही में पहला संस्थागत वैकल्पिक विवाद समाधान (alternate dispute resolution) केंद्र का उद्घाटन किया गया है. इस केंद्र का नाम ‘भारतीय विवाद समाधान केंद्र’ (Indian Dispute Resolution Centre-IDRC) है. इसका उद्घाटन सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक न्यायालय के अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एके सिकरी ने किया था.

IDRC भारत में अपनी तरह का पहला संस्थागत ADR (alternate dispute resolution) केंद्र है, जो ई-पंच निर्णय, ई-मध्‍यस्‍थता और ई-समाधान पोर्टल के जरिए ऑफलाइन सुविधा प्रदान करता है. यह पूरी तरह से कागज रहित विवाद के समाधान का माहौल प्रदान करता है.

IDRC के पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, उच्च न्यायालयों और जिला न्यायालयों के पूर्व जज, वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व नौकरशाह, सीए, आर्किटेक्ट, कॉर्पोरेट लीडर और अन्‍य लोग शामिल हैं.

IDRC एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में स्थापित किया गया है

  • IDRC को एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में स्थापित किया गया है. यह देश और दक्षिण एशिया में अद्वितीय और नया रास्‍ता बनाने वाला संस्थागत वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र (ADR) है.
  • IDRC एक अनूठा मिश्रण के रूप में दोनों ऑफलाइन बुनियादी ढांचे के साथ-साथ ऑनलाइन E-ADR प्लेटफार्म प्रदान करता है. IDRC की वेबसाइट (www.theidrc.com) है.
  • IDRC के पास मध्यस्थता, समाधान और सुलह के लिए प्रारंभिक स्‍तर पर तटस्थ मूल्यांकन और विशेषज्ञ निर्धारण के लिए अत्याधुनिक ADR बुनियादी ढांचा मौजूद है.
  • IDRC का मुख्‍य कायार्लय नई दिल्ली के कनॉट प्लेस क्षेत्र में होगा. साथ ही देश में रणनीतिक वाणिज्यिक स्थानों पर केंद्र रहेगा.
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रस्किन बॉन्ड की नई पुस्तक ‘Hop On; My Adventures on Boats, Trains and Planes’ का विमोचन

विश्व प्रसिद्ध अंग्रेजी भाषा के लेखक रस्किन बॉन्ड की नई पुस्तक ‘Hop On; My Adventures on Boats, Trains and Planes’ का 19 मई को विमोचन किया गया. यह पुस्तक ebook के रूप में उनके 86वें जन्मदिन पर प्रकशित की गयी. इस पुस्तक में उनके बचपन के कुछ यादगार यात्रा रोमांचों का वर्णन किया गया है.

द ब्लू अम्ब्रेला, नाइट ट्रेन एट देओली, द रूम ऑन द रूफ, अवर ट्रीज स्टिल ग्रो इन देहरा आदि रस्किन बॉन्ड की कुछ लोकप्रिय किताबें हैं.

रस्किन जन्म हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ और वे देश आजाद होने के बाद भी भारत में ही रहे. 1964 से वे उत्तराखंड के मसूरी में रह रहे हैं. 1999 में भारत सरकार ने उन्हें साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदानों के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया. 2014 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.

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एंटीबॉडिज के आकलन पर आधारित ELISA जांच किट ‘कोविड कवच’ तैयार की गयी

पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV), ने कोरोना संक्रमण की जांच के लिए रक्त में एंटीबॉडिज के आकलन पर आधारित एलिसा जांच किट तैयार की है. इस जांच किट का नाम ‘कोविड कवच’ दिया गया है. यह देश में तैयार पहला परीक्षण किट है.

कोविड कवच जांच किट से ‘कोविड-19’ जांच की गति तेज होने की आशा है. यह किट विभिन्न परीक्षण स्थलों पर प्रामाणिकता जांच में काफी स्टीक साबित हुआ है. इससे लगभग ढाई घंटे में 90 नमूनों की जांच की जा सकती है. इस किट के बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए इसकी प्रौद्योगिकी फार्मास्युटिकल कंपनियों को दी गई है.

यह किट रक्त में IGG एंटीबॉडी की उपस्थिति का परीक्षण करेगी. यह ELISA (Enzyme-linked Immunosorbent Assay) आधारित परीक्षण करने में सक्षम है. ELISA का उपयोग संक्रमणों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए किया जाता है.

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कैलाश मानसरोवर के लिए नया रास्ता लिपूलेख-धाराचूला मार्ग का शुभारंभ

भारत सरकार ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए हाल ही में एक नया रास्ता ‘लिपूलेख-धाराचूला मार्ग’ की शुरुआत की है. इस मार्ग के शुरू हो जाने के बाद कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा अब काफी आसान होगी.

लिपूलेख-धाराचूला मार्ग: एक दृष्टि

लिपूलेख-धाराचूला मार्ग उत्तराखंड में 17000 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है. इस मार्ग की लंबाई 80 किलोमीटर है. नया रास्ता लिपूलेख को धारचूला से जोड़ता है. इस मार्ग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) ने किया है.

इस रास्ते का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 8 मई को किया. लिपूलेख-धाराचूला मार्ग के पूरा हो जाने के बाद कैलाश मानसरोवर की यात्रा 1 हफ्ते में पूरा किया जा सकेगा, जबकि पहले 2-3 सप्ताह का समय लगता था.

इस मार्ग के बन जाने से अब मानसरोवर के तीर्थयात्री भारतीय भूमि पर 84 प्रतिशत और चीन की भूमि पर केवल 16 प्रतिशत की यात्रा करेंगे. इससे पहले अन्य मार्गों से 80% सड़क यात्रा चीन में करनी होती थी.

सैन्य दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण: यह मार्ग सैन्य दृष्टिकोण से भी काफी महत्वपूर्ण है. इससे चीन सीमा पर सैनिकों की तैनाती और रसद आपूर्ति आसान होगी.

कैलाश पर्वत: एक दृष्टि

  • कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित एक पर्वत श्रेणी है. इस पर्वत को भगवान शिव का घर कहा गया है. इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षसताल झील हैं. यहां से- ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि कई महत्वपूर्ण नदियां निकलतीं हैं.
  • कैलाश-मानसरोवर जाने के अनेक मार्ग हैं किंतु उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट, धारचूला, खेत, गर्ब्यांग, कालापानी, लिपूलेख, खिंड, तकलाकोट होकर जानेवाला मार्ग अब तक का सबसे सुगम मार्ग था. यह भाग 544 किमी (338 मील) लंबा है और इसमें अनेक चढ़ाव उतार है.
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विशाखापत्‍तनम में LG पॉलीमर लिमिटेड के संयंत्र से स्‍टायरीन गैस का रिसाव की दुर्घटना घटी

आंध्र प्रदेश के विशाखापत्‍तनम में 7 मई को स्‍टायरीन (Styrene) गैस के रिसाव की दुर्घटना घटी. इस गैस का रिसाव विशाखापत्‍तनम में गोपालापट्टनम के पास आर आर वेंकटपुरम गांव (Vizag) में स्थित LG पॉलीमर लिमिटेड (LG Polymers Limited) कंपनी के संयंत्र से हुआ था. इस दुर्घटना से कई लोगों की मौत हो गई और बीमार पड गये.

दुर्घटना (Vizag Gas Leak) से संयंत्र के आस-पास के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों पर इसका असर पड़ा. रिसाव के कारण लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, उल्‍टी आने और शरीर में चकत्‍ते पड़ने की शिकायत की.

यह दुर्घटना उस समय हुई, जब संयंत्र के कुछ मजदूर लॉकडाउन की पाबंदियों के आंशिक रूप से हटने के बाद एक इकाई को फिर से चालू करने का प्रयास कर रहे थे. इसी क्रम में स्टायरिन गैस लीक हुई, जो प्लाटिक का कच्चा माल है.

LG पॉलीमर लिमिटेड: एक दृष्टि

1961 में हिंदुस्तान पॉलीमर ने पॉलीस्टायरीन और इससे जुड़े दूसरे उत्पादों को बनाने के लिए विजाग में यह प्लांट लगाया था. 1978 में मक्डॉवेल एंड कम्पनी में इसका विलय हो गया. 1997 में दक्षिणी कोरिया की कम्पनी LG केम ने इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया. इसका नाम बदलकर LG पॉलीमर रखा गया.

स्‍टायरीन क्या है?

स्‍टायरीन (Styrene) एक कार्बनिक यौगिक है. इसका रासायनिक सूत्र C6H5CH=CH2 है. यह गैस श्वसन प्रणाली को प्रभावित करती है. इस गैस के संपर्क में आने के कारण फेफड़ों की मांसपेशियां पक्षाघात का शिकार हो सकता है. इससे ऑक्सीजन की कमी होने से मौत भी हो सकती है.

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प्रधानमंत्री स्‍वामित्‍व योजना की शुरूआत की, जानिए क्या है यह योजना

पंचायत राज दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘स्वामित्व योजना’ की घोषणा की है. इस योजना का उद्देश्य संपत्ति को लेकर भ्रम और झगड़े को खत्म करना है. इससे गांव में विकास योजनाओं को शुरू करने में मदद मिलेगी.

प्रधानमंत्री ने छह राज्‍यों- उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड में प्रायोगिक तौर पर ‘स्‍वामित्‍व योजना’ की शुरूआत की.

क्या है स्‍वामित्‍व योजना?

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बताया गया कि भारत की 60% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. ज्यादातर लोगों के पास उनकी संपत्ति के स्वामित्व के दस्तावेज नहीं हैं. अंग्रेजों के समय से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनों का बंदोबस्त होता आया है. यही बंदोबस्त ग्राम विवाद का मुख्य कारण होता है. स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिल जाएगा. इसके बाद फिर किसी भी प्रकार का विवाद नहीं होगा.

स्‍वामित्‍व योजना के मुख्य बिंदु

  • इसके तहत देश के सभी गांवों में ड्रोन के माध्यम से गांव की हर संपत्ति की मानचित्रण किया जायेगा. इसके बाद गांव के लोगों को उस संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र दिया जाएगा.
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में नियोजन तथा राजस्‍व संग्रह को सुचारू बनाने और संपदा अधिकारों पर स्‍पष्‍टता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. इससे संपत्ति संबंधित विवादों के समाधान में भी सहायता मिलेगी.
  • संपत्ति का मालिकाना प्रमाण-पत्र मिलने से शहरों की तरह गांवों में भी बैंकों से आसानी से ऋण लिए जा सकेगा. इसके लिए ग्रामीणों से न्यूनतम डॉक्युमेंट मांगे जाएंगे.
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प्रधानमंत्री ने ग्राम सरपंचों को वीडियो कान्‍फ्रेसिंग के जरिए सम्‍बोधित किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 24 अप्रैल को राष्‍ट्रीय पंचायत राज दिवस पर देश-भर के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और सरपंचों को वीडियो कान्‍फ्रेसिंग के जरिए सम्‍बोधित किया.

उन्होंने अपने संबोधन में कोरोना वायरस से निपटने में ग्रामीण भारत के योगदान की सराहना की. श्री मोदी ने गांव, जिला, और देश को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए अपने-अपने स्तर पर आत्मनिर्भर बनने की बात कही.

एकीकृत ई-ग्राम स्‍वराज पोर्टल और मोबाइल ऐप

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक एकीकृत ई-ग्राम स्‍वराज पोर्टल और मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया. यह एकीकृत पोर्टल पंचायती राज मंत्रालय की एक नई पहल है. इससे ग्राम पंचायतों को अपनी विकास योजनाएं बनाने और लागू करने में सहायता मिलेगी.

यह निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में भी महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा. ये भविष्‍य में ग्राम पंचायत के अलग-अलग कामों का लेखा-जोखा रखने वाला सिंगल प्‍लेटफॉर्म (सिम्‍पलीफाईड वर्क वेट अकाउंटिंग एप्‍लीकेशन फॉर पंचायती राज) बनेगा.

स्वामित्व योजना की शुरूआत

उन्होंने छह राज्‍यों के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रायोगिक तौर पर ‘स्वामित्व योजना’ की शुरूआत की. इस योजना का उद्देश्य संपत्ति को लेकर भ्रम और झगड़े को खत्म करना है. पढ़ें पूरा आलेख…»

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MHRD ने डिजिटल पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए ‘विद्यादान’ की शुरुआत की

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने ऑनलाइन शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ‘विद्यादान’ (VidyaDaan) की शुरुआत की है. इसकी शुरुआत मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने 22 अप्रैल को की. इसका उद्देश्य कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफार्म पर गुणवत्तापूर्ण डिजिटल पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवाना है.

क्या है विद्यादान ?

  • विद्यादान एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसके तहत विभिन्न शिक्षाविदों और संगठनों को पाठ्यक्रम के अनुसार ई-लर्निंग सामग्री विकसित करने और इसमें योगदान देने के लिए जोड़ा जायेगा. जो भी ई-लर्निंग सामग्री विकसित करने में अपना योगदान देना चाहते हैं वो व्याख्यात्मक वीडियो, एनिमेशन, पथ योजनाओं, मूल्यांकन और प्रश्न बैंक के रूप में अपना योगदान दर्ज करवा सकते हैं.
  • इस कार्यक्रम के तहत समस्त सामग्री की समीक्षा विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी और उसके बाद उसको ‘दीक्षा एप’ (DIKSHA App) पर उपयोग के लिए जारी किया जायेगा. जिससे देश भर के छात्रों को कहीं भी और कभी भी पढाई करने की सुविधा उपलब्ध होगी.
  • राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने हिसाब से विद्यादान कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं, इसमें व्यक्तियों, संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, एडटेक संगठनों, शिक्षकों आदि को इससे जोड़ कर इसमें पाठ्य सामग्री क्षेत्रीय भाषा और अपने-अपने क्षेत्रों के सन्दर्भ में भी उपलब्ध करवा सकते हैं.
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स्विट्जरलैंड ने अपने सबसे ऊंचे पर्वत माउंट मैटरहॉर्न पर तिरंगा बनाया

स्विट्जरलैंड ने 18 अप्रैल को अपने सबसे ऊंचे पर्वत माउंट मैटरहॉर्न (Matterhorn Mountain) पर रोशनी से तिरंगा बनाया. कोरोना से जंग के लिए भारत की कोशिशों के प्रति सम्मान दर्शाने के लिए यह तिरंगा बनाया गया था. स्विट्जरलैंड के मशहूर लाइट आर्टिस्ट गेरी हॉफस्टेटर ने लाइट प्रोजेक्शन के जरिए करीब 1000 मीटर से बड़े आकार के तिरंगे के आकार में रोशनी की थी.

माउंट मैटरहॉर्न आल्प्स पर्वत श्रृंखला का सबसे ऊंचा बिंदु है. इसकी ऊँचाई 14690 फीट है. स्विट्जरलैंड के लैंडमार्क पर भारतीय तिरंगे का अर्थ है, कोरोनावायरस के खिलाफ जंग में भारतीयों को उम्मीद और ताकत देना.

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SCTIMST ने ‘कोविड-19’ की जांच के लिए एक किफायती और तेज ​​परीक्षण किट विकसित किया

तिरुवनंतपुरम के Sree Chitra Tirunal Institute for Medical Sciences and Technology (SCTIMST) ने ‘कोविड-19’ की जांच के लिए एक किफायती और तेज ​​परीक्षण किट विकसित की है. इस किट के जरिए सिर्फ 2 घंटे में कोरोना संक्रमण का पता लग जाएगा. इसका खर्च करीब 1000 रुपये है. इस किट को ‘Chitra Gene LAMP-N’ नाम दिया गया है.

अलप्पूझा के राष्ट्रीय वाइरॉलॉजी संस्थान ने इस परीक्षण किट को मान्यता दी है और ICMR को इसकी जानकारी दे दी है. अब एससीटी संस्थान इस तकनीक को बड़े स्तर पर काम लाने के लिए ज़रुरी बदलाव की प्रक्रिया में है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो सके.

कीमत के लिहाज़ से नई किट से की जाने वाकी जाँच काफी किफायती है, क्योंकि इसकी कीमत महज़ 1000 रुपए होगी, जबकि अबतक प्रयोग में ली जाने वाली पीसीआर किट से की जाने वाली जाँच की कीमत 2000-2500 रुपए के बीच होती है. इसके साथ ही नई मशीन की कीमत भी 2.5 लाख रुपए होगी, जबकि RT-PCR मशीन की कीमत करीब 15-40 लाख रुपए के बीच होती है.

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पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई का निधन

पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक देसाई का 13 अप्रैल को निधन हो गया. देसाई 9 जुलाई 1996 से 6 मई 1998 तक देश के अटॉर्नी जनरल थे. इससे पहले, 18 दिसंबर 1989 से 2 दिसंबर, 1990 तक वह सॉलिसीटर जनरल थे.

अशोक देसाई: एक दृष्टि

  • अशोक देसाई को 2001 में पद्म भूषण और कानून पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उन्होंने 1956 में बंबई उच्च न्यायालय में वकालत शुरू की और आठ अगस्त, 1977 को वह वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किए गए थे.
  • देसाई ने उच्च पदों पर व्याप्त भ्रष्टाचार और इस तरह के गंभीर आरोपों में घिरे उच्च लोकसेवकों के खिलाफ जांच को लेकर बहुचर्चित विनीत नारायण प्रकरण में अहम भूमिका निभाई थी.
  • उन्होंने समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर रखने, नर्मदा बांध प्रकरण और गैरकानूनी प्रवासी (अधिकरण द्वारा निर्धारण) कानून जैसे जनहित के अनेक मामलों में उच्चतम न्यायालय में बहस की.
  • वह गैर सरकारी संगठन ‘कमेटी फॉर ज्यूडीशियल अकाउंटेबिलटी’ के भी सदस्य थे. इस समिति ने भ्रष्टाचार के आरोप में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी रामास्वामी को पद से हटाने के लिए अभियान चलाया था.
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