भारत, सिंगापुर और थाईलैंड के बीच त्रिपक्षीय नौसेना अभ्यास SITMEX-20 आयोजित किया गया

भारत, सिंगापुर और थाईलैंड के बीच 21-22 नवम्बर को त्रिपक्षीय नौसेना अभ्यास ‘SITMEX-20’ आयोजित किया गया. इसका आयोजन अंडमान सागर में किया गया था. यह SITMEX का दूसरा संस्करण था. इसका पहला संस्करण 2019 में पोर्ट ब्लेयर में भारतीय नौसेना की मेजवानी में आयोजित किया गया था.

इस अभ्यास की मेजबानी रिपब्लिक ऑफ सिंगापुर नेवी (RSN) ने की थी. भारतीय नौसेना की ओर से स्वदेश निर्मित ASW कार्वेट कमोर्ट और मिसाइल कार्वेट करमुक ने अभ्यास में भाग लिया था.

कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण यह अभ्यास ‘समुद्र में नॉन-कांटेक्ट–फॉर्मेट’ में निर्धारित किया गया था. इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तीनों नौसेनाओं के बीच इंटरओपेराबिलिटी और बहुमुखी समुद्री परिचालन को बढ़ाना था.

SITMEX क्या है?

SITMEX भारत, सिंगापुर और थाईलैंड के बीच वार्षिक नौसैन्य अभ्यास है. जिस अभ्यास में भारतीय नौसेना, रिपब्लिक ऑफ सिंगापुर नेवी (RSN) और रॉयल थाई नेवी (RTN) हिस्सा लेते हैं. इस अभ्यास का आयोजन क्षेत्र में समग्र समुद्री सुरक्षा को बढ़ाने और सामान्य समझ और प्रक्रियाओं को विकसित करने के लिए किया जाता है.

IMO ने भारतीय नेविगेशन सिस्टम को विश्व व्यापी रेडियो नेविगेशन प्रणाली के रूप में मान्यता दी

अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) की समुद्री सुरक्षा समिति (MSC) ने इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) को विश्व व्यापी रेडियो नेविगेशन प्रणाली (WWRNS) के रूप में मान्यता दी है. IMO संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी है जो शिपिंग की सुरक्षा और जहाजों द्वारा समुद्री और वायुमंडलीय प्रदूषण की रोकथाम के लिए जिम्मेदार है.

अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश

भारत अपना स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सिस्टम रखने वाला चौथा देश बन गया है. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन के पास अपना स्वयं का नेविगेशन सिस्टम था. GPS के विपरीत, हालांकि, IRNSS एक क्षेत्रीय है और वैश्विक नेविगेशन प्रणाली नहीं है.

IRNSS का नाम ‘नाविक’ रखा गया है

इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने विकसित किया है. ये एक क्षेत्रीय स्वायत्त उपग्रह नौवहन प्रणाली है जो पूर्णतया भारत सरकार के अधीन है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका नाम भारत के मछुवारों को समर्पित करते हुए ‘नाविक’ रखा है.

IRNSS नाविक: एक दृष्टि

IRNSS भारत विकसित एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है. इसे हिंद महासागर में जहाजों के नेविगेशन में सहायता के लिए सटीक स्थिति सूचना सेवा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. भारत अभी तक इस टेक्नॉलजी के लिए अमेरिका पर आश्रित था.

IRNSS देश की सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक के हिस्से में इसके उपयोगकर्ता को सटीक स्थिति की सूचना दे सकता है. यह भारतीय सीमा में लगभग 1500 किमी तक फैले हिंद महासागर में अमेरिका के स्वामित्व वाली ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) की जगह लेगा.

भारत ने नौसेना की स्कॉर्पीन श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी ‘वागिर’ को जलावतरित किया

भारत ने हाल ही में भारतीय नौसेना की स्कॉर्पीन श्रेणी की पांचवीं पनडुब्बी वागिर (Vagir) को जलावतरित किया.

इस पनडुब्बी का नाम ‘वागिर’ हिंंद महासागर में पाई जाने वाली एक शिकारी मछली के नाम पर रखा गया है. पहली वागिर पनडुब्बी रूस से आई थी. उसे 3 दिसंबर 1973 को नौसेना में शामिल किया गया था और 7 जून 2001 को सेवामुक्त कर दिया गया था.

वागिर पनडुब्बी: एक दृष्टि

वागिर स्कॉर्पीन श्रेणी की छह पनडुब्बियों में से पांचवीं पनडुब्बी है, जिनका निर्माण भारत में किया जा रहा है. इस श्रेणी की पहली पनडुब्बी कलवरी है. अन्य तीन पनडुब्बियां खंडेरी, करंज व वेला हैं, जबकि छठी वागशीर को भी जल्द लांच किया जाएगा.

इस श्रेणी की पनडुब्बियों को फ्रांसीसी नौसेना एवं ऊर्जा कंपनी DCNS ने डिजाइन किया है. इनका निर्माण भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के अंतर्गत ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत किया जा रहा है.

यह पनडुब्बी सतह व पनडुब्बी रोधी युद्ध, खुफिया सूचना एकत्र करने, सुरंग बिछाने व निगरानी में सक्षम है. यह दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा दे सकती है.

NGT ने दिल्ली और NCR में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगाया

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली समेत पूरे NCR में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबन्ध लगा दिया है. यह प्रतिबन्ध 10 नवम्बर से 30 नवंबर तक रहेगा. बढ़ते प्रदूषण और कोरोना को देखते हुए यह फैसला लिया गया है. NGT का यह आदेश देश के उन सभी शहरों में भी लागू होगा जहां पिछले साल नवंबर में वायु की गुणवत्ता ‘खराब’ (poor) श्रेणी या इससे ऊपर की श्रेणी तक चला गया था.

ऐसा शहर जहाँ नवंबर 2019 में वायु की गुणवत्ता ‘मध्यम’ (moderate) यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 51-100 के बीच था, तो प्रदूषण रहित पटाखे बेचे और चलाए जा सकते हैं. लेकिन, दिवाली और छठ पर सिर्फ 2 घंटे की छूट मिलेगी. यह 2 घंटे राज्य सरकारों की तरफ से तय समय के मुताबिक होंगे.

एयर क्वालिटी इंडेक्स क्या है?

एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) वायु की गुणवत्ता को बताता है. इसमें बताया जाता है कि वातावरण में मौजूद हवा में किन गैसों की कितनी मात्रा घुली हुई है. इस इंडेक्स में 6 कैटेगरी बनाई गई हैं.

AQIश्रेणी
0-50अच्छी
51-100ठीक (मॉडरेट)
101-150सेंसेटिव लोगों की सेहत के लिए खराब
151-200सभी की सेहत के लिए खराब
201-300सेहत के लिए बहुत खराब
301-500खतरनाक

जहाजरानी मंत्रालय का नाम बदलकर अब मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग और वाटरवेज किया गया

सरकार ने जहाजरानी यानी शिपिंग मंत्रालय (Shipping Ministry) का नाम बदलकर ‘बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय’ (Ministry of Ports, Shipping and Waterways) कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए नाम की घोषणा 8 नवम्बर को की.

सरकार ने हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय और कृषि मंत्रालय का नाम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture & Farmers Welfare) किया था.

सूरत में रो-पैक्स फेरी सेवा की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए नाम की घोषणा सूरत में हजीरा और भावनगर जिले के घोघा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा की शुरुआत करने के दौरान की. इस रो-पैक्स सर्विस से दोनों जगहों के बीच सड़क यात्रा की 370 किलोमीटर की दूरी जल मार्ग के जरिए 90 किलोमीटर कम हो जाएगी. इस सर्विस से लगभग 9,000 लीटर प्रति दिन की काफी बचत होगी

रो-पैक्स फेरी वीसल ‘वोयेज सिम्फनी’ DWT 2500-2700 MT, 12000 से 15000 GT विस्थापन के साथ एक तीन मंजिला जहाज है. इसकी मुख्य डेक की भार क्षमता 30 ट्रक, ऊपरी डेक की 100 यात्री कार और यात्री डेक की क्षमता 500 यात्रियों और 34 क्रू और कर्मचारियों की है.

भारत ने पिनाका रॉकेट प्रणाली का सफल परीक्षण किया

भारत ने 4 नवम्बर को पिनाका रॉकेट प्रणाली के उन्नत संस्करण (पिनाका MK-II) का सफल परीक्षण किया. रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (DRDO) ने यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर से किया.

पिनाका रॉकेट प्रणाली: एक दृष्टि

पिनाका रॉकेट प्रणाली के उन्नत संस्करण मौजूदा पिनाका MK-I का स्थान लेंगे. यह रॉकेट अत्याधुनिक दिशासूचक प्रणाली से लैस है जिसके कारण यह सटीकता से लक्ष्य की पहचान कर उसपर निशाना साधता है.

पिनाका MK-I रॉकेट की मारक क्षमता करीब 37 किलोमीटर जबकि पिनाका MK-II की सीमा 60 किमी है.
इसका डिजाइन और विकास DRDO प्रयोगशाला, आयुध अनुसंधान एवं विकास स्थापना (ARDI) और हाई एनर्जी मैटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी (HEMRL) ने किया है.

सरकार ने चुनावी खर्च की सीमा में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की घोषणा की

सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों को चुनावी खर्च की सीमा में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है. केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद यह बढ़ोत्तरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है.

इस घोषणा के तहत अब लोकसभा चुनावों में अधिकतम 77 लाख तक और विधानसभा चुनाव में अधिकतम 30.80 लाख रुपये तक खर्च की सीमा तय की गयी है. अभी तक खर्च की यह सीमा लोकसभा में अधिकतम 70 लाख रुपए तक और विधानसभा में 28 लाख रुपये तक की थी.

भारतीय निर्वाचन आयोग ने COVID-19 के कारण सरकार से चुनावी खर्च की सीमा में बढ़ोत्तरी का सुझाव दिया था. इससे पहले चुनावी खर्च सीमा में यह बढ़ोत्तरी 2014 में की गई थी.

कुछ छोटे राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्र में बढ़ोतरी नहीं

चुनावी खर्च सीमा में की गई इस बढोत्तरी को अरुणाचल प्रदेश, गोवा, सिक्किम, पुंडुचेरी, अंडमान निकोबार, दादर नगर हवेली और दमन दीव, लक्षद्वीप, लद्दाख जैसे कुछ छोटे राज्यों व केंद्र शासित क्षेत्र में लागू नहीं किया गया है. यहाँ लोकसभा चुनाव में 59.40 लाख और विधानसभा चुनाव में 22 लाख रुपये तक की राशि तय की गयी है.

इसके साथ ही उत्तर-पूर्व के मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड जैसे राज्यों में लोकसभा में तो खर्च की सीमा को 77 लाख ही रखा गया है, लेकिन विधानसभा चुनावों में खर्च की सीमा को 22 लाख रुपए रखा है.

भारत ने नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का परीक्षण किया

भारत ने 22 अक्टूबर को नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (Nag Anti-Tank Guided Missile) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. यह परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में किया गया.

नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. इस मिसाइल का नवीनतम संस्करण बड़े टैंक्स को भी किसी भी मौसम में निशाना बना सकती है. इसकी मारक क्षमता 20 किमी तक की है.

इस मिसाइल में इंफ्रारेड का उपयोग कर लॉन्च से पहले टारगेट को लॉक किया जाता है. इसके बाद नाग अचानक ऊपर उठती है और फिर तेजी से टारगेट के एंगल पर मुड़कर उसकी ओर चल देती है.

इससे पहले भी नाग मिसाइल के कई परीक्षण किये जा चुके हैं. हर बात कुछ नया इसमें जोड़ा जाता रहा है. साल 2017, 2018 और 2019 में अलग-अलग तरीके की नाग मिसाइलों का परीक्षण हो चुका है.

भारत ने स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक ‘SANT’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने स्टैंड-ऑफ एंटी-टैंक (SANT) मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण 19 अक्टूबर को ओडिशा तट की इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया. यह मिसाइल विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने किया है.

SANT एंटी-टैंक मिसाइल, हेलीकॉप्टर लॉन्चेड नाग (HeliNa) का उन्नत संस्करण है. यह वायु-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल है.

भारत द्वारा किये गये हाल के परीक्षण

  • 18 अक्टूबर को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के नौसेना संस्करण का परीक्षण स्वदेश निर्मित INS चेन्नई से किया गया.
  • 16 अक्टूबर को ओडिशा तट स्थित परीक्षण रेंज से परमाणु-सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का रात में परीक्षण सफलतापूर्वक किया. द्रव्य ईंधन द्वारा चालित पृथ्वी-2 की रेंज 250 किलोमीटर है. सतह से सतह पर मार करने वाली यह भारत की पहली स्वदेशी रणनीतिक मिसाइल है.
  • 10 अक्टूबर को भारत ने अपनी पहली स्वदेशी एंटी रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-1 का सफल परीक्षण किया. यह जमीन पर दुश्मन के राडार का पता लगा सकती है.
  • 5 अक्टूबर को स्वदेशी SMART टारपीडो प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. यह टारपीडो रेंज से परे एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) के संचालन के लिए आवश्यक है.
  • 3 अक्टूबर को भारत ने ओडिशा तट से परमाणु-सक्षम शौर्य मिसाइल के नए संस्करण का सफल परीक्षण किया.
  • 1 अक्टूबर को लेजर-गाइडेड एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) महाराष्ट्र के अहमदनगर में एक MBT अर्जुन टैंक से दागी गई.
  • 30 सितंबर को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की एक्सटेंडेड रेंज का परीक्षण किया गया.
  • 22 सितंबर को ABHYAS – हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) व्हीकल्सः का ओडिशा के तट से परीक्षण किया गया.
  • 7 सितंबर को स्वदेशी रूप से विकसित हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का परीक्षण ओडिशा के तट से किया गया.

स्‍कूली शिक्षा में सूधार के लिए विश्व बैंक द्वारा समर्थित STARS परियोजना को मंजूरी दी गयी

सरकार ने हाल ही में STARS परियोजना को मंजूरी दी है. यह मंजूरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी. इस परियोजना की कुल लागत 5,718 करोड़ रुपए है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से पूरा किया जायेगा.

STARS परियोजना क्या है?

STARS का पूरा रूप Strengthening Teaching-Learning and Results for States है. यह भारतीय स्कूल शिक्षा प्रणाली में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए ‘स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग’, शिक्षा मंत्रालय के तहत केन्‍द्र सरकार की एक नई परियोजना है. यह कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा विश्वबैंक के सहयोग से चलाया जा रहा है.

STARS परियोजना के मुख्य बिंदु:

  • STARS परियोजना की कुल लागत 5,718 करोड़ रुपए में लगभग 3700 करोड़ रुपए की सहायता राशि विश्व बैंक से प्राप्त होगी.
  • ‘स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग’ के तहत एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्थान के रूप में ‘परख’ (PARAKH) नामक ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र’ की स्थापना की जाएगी. ‘परख’, ‘नई शिक्षा नीति (NEP)-2020’ में प्रस्तावित मूल्यांकन सुधारों में से एक है.
  • यह परियोजना 6 राज्यों- हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल और ओडिशा में चलायी जाएगी. 15 लाख स्कूलों में पढ़ रहे छह से 17 वर्ष तक की उम्र के 25 करोड़ विद्यार्थी तथा एक करोड़ से अधिक शिक्षक इस कार्यक्रम से लाभान्वित होंगे.

भारत ने ‘रुस्‍तम-2’ ड्रोन का सफल परीक्षण किया

भारत ने हाल ही में ‘रुस्‍तम-2’ ड्रोन का सफल परीक्षण किया है. यह परीक्षण कर्नाटक के चित्रदुर्गा में किया गया. परीक्षण में यह 16 हजार फीट की ऊंचाई पर लगातार 8 घंटे तक उड़ान भरता रहा. इसके बावजूद उसमें एक घंटे उड़ने के लिए काफी ईंधन बच गया था.

‘रुस्‍तम-2’ ड्रोन को डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने विकसित किया है. यह एक मध्यम ऊंचाई का ड्रोन है. 2020 के आखिर तक इस प्रोटोटाइप के 26,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता हासिल कर लेने की उम्‍मीद है. इसका फ्लाइट टाइम भी बढ़कर 18 घंटे करने पर काम हो रहा है.

रुस्‍तम-2 मिशन की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह के पेलोड्स ले जा सकता है. इस ड्रोन के साथ सिंथेटिक अपर्चर रडार, इलेक्‍ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्‍टम और सिचुएशनल अवेयरनेस सिस्‍टम भेजा जा सकता है. इसमें एक सैटेलाइट कम्‍युनिकेशन लिंक भी है जो युद्ध की स्थिति में हालात की जानकारी रियल टाइम में दे सकता है.

भारत सरकार इजरायली ड्रोन्‍स ‘हेरान’ की पूरी फ्लीट को अपग्रेड करना चाहती है. इस ड्रोन्‍स में हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइल और लेजर गाइडेड बम लगाए जाएंगे. इसके अलावा एक सैटेलाइट लिंक भी लगाया जाएगा ताकि इन्‍फॉर्मेशन पहुंचने में देरी न हो. DRDO का मकसद रुस्‍तम-2 को इजरायल के हेरॉन UAV की टक्‍कर का ड्रोन बनाना है.

भारत ने पहली स्‍वदेशी ऐंटी-रेडिएशन मिसाइल ‘रूद्रम-1’ का सफल परीक्षण किया

भारत ने पहली स्‍वदेशी ऐंटी रेडिएशन मिसाइल ‘रूद्रम-1’ (RUDRAM-1) का सफल परीक्षण किया है. परीक्षण में इस मिसाइल को फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई-30 से छोड़ा गया. यह मिसाइल टेस्‍ट भारतीय वायुसेना के लिए था.

रूद्रम ऐंटी-रेडिएशन मिसाइल को डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने विकसित किया है. यह देश की पहली न्‍यू जेनेरेशन ऐंटी रेडिएशन मिसाइल (NGARM) है. फिलहाल इसे सुखोई एयरक्राफ्ट से छोड़ा जा सकता है. मगर इसे जगुआर, मिराज 2000 और तेजस के साथ लॉन्‍च करने लायक भी बनाया जा रहा है.

ऐंटी रेडिएशन मिसाइल (NGARM) क्‍या है?

ऐंटी रेडिएशन मिसाइलों में सेंसर्स लगे होते हैं जो रेडिएशन का सोर्स ढूंढते हुए उसके पास जाते हैं और प्रहार करते हैं. इसका उपयोग मुख्य रूप से दुश्‍मन के कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम को ध्‍वस्‍त करने के लिए किया जाता है. ये दुश्‍मन के रडार, जैमर्स और बातचीत के लिए इस्‍तेमाल होने वाले रेडियो के खिलाफ भी उपयोग हो सकती हैं. ये मिसाइलें अचानक आने वाली जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के खिलाफ भी छोड़ी जा सकती हैं.

रूद्रम 100 किलोमीटर की दूर से पता लगा सकती है कि रेडियो फ्रीक्‍वेंसी कहां से आ रही है. इसकी मदद से जमीन पर मौजूद दुश्‍मन के रडार को ध्‍वस्‍त किया जा सकता है. यह मिसाइल 100 से 250 किलोमीटर की रेंज में किसी भी टारगेट को ध्‍वस्‍त कर सकती है. यह मिसाइल की लंबाई करीब 5.5 मीटर है और वजन 140 किलो है.