भारत का सबसे बड़ा प्रवाहमान सौर ऊर्जा संयंत्र रामगुंडम में स्‍थापित किया जायेगा

भारत का सबसे बड़ा प्रवाहमान (तैरता हुआ) सौर ऊर्जा संयंत्र (India’s biggest floating solar power plant) तेलंगाना के रामगुंडम में स्‍थापित किया जायेगा. इस संयंत्र की क्षमता 100 मेगावॉट होगी. इस परियोजना को रामगुंडम के ताप बिजली संयंत्र जलाशय में स्‍थापित किया जायेगा.

यह सौर परियोजना राष्‍ट्रीय ताप बिजली निगम (NTPC) द्वारा शुरू किया जायेगा. इसकी अनुमानित लागत 423 करोड़ रुपये है. इस संयंत्र में साढे चार लाख फोटोवोल्‍टिक पैनल होंगे जो जलाशय के 450 एकड़ के क्षेत्र में प्रवाहित रहेंगे.

NTPC ने अपनी कुल क्षमता का 30 प्रतिशत उत्‍पादन हरित ऊर्जा के लिए रखा है. प्रवाहमान सौर ऊर्जा परियोजना का उद्देश्‍य कार्बन उत्‍सर्जन को कम करना है.

सेना ने अपने सैन्य फार्म को 1 अप्रैल 2021 से औपचारिक रूप से बंद किया

सेना ने अपने सैन्य फार्म (Military Farm) को 1 अप्रैल 2021 से औपचारिक रूप से बंद कर दिया है. ये सैन्य फार्म सैनिकों को गायों का स्वास्थ्यप्रद दूध उपलब्ध कराने के लिए स्थापित किए गए थे.

सैन्य फार्म: एक दृष्टि

  • सैन्य फार्म की स्थापना सेना की इकाइयों को दूध की आपूर्ति के लिए 132 साल पहले ब्रिटिश काल में की गई थी.
  • स्वतंत्रता के बाद पूरे भारत में 30 हजार मवेशियों के साथ 130 सैन्य फार्म बनाए गए थे. पहला सैन्य फार्म 1 फरवरी 1889 को इलाहाबाद में स्थापित किया गया था.
  • ये सैन्य फार्म लगभग 20 हजार एकड़ भूमि पर फैले थे और सेना इनके रखरखाव पर सालाना लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च करती थी.
  • रक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2017 में कई सुधारों की घोषणा की थी कि जिनमें सैन्य फार्म को बंद करना भी शामिल था.
  • इन फार्म में रखे गए मवेशियों को सेना ने बहुत ही साधारण मूल्य में अन्य सरकारी विभागों या सहकारी डेयरियों को देने का फैसला किया है.

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (संशोधन) विधेयक-2021 संसद से पारित

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (संशोधन) विधेयक-2021’ को 28 मार्च को मंजूरी दे दी. इस विधेयक को हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा से मंजूरी दी गई थी. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लिया है.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 239AA के तहत दिल्ली एक विधानसभा के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश है. यह विधेयक विधानसभा और उप-राज्यपाल की कुछ शक्तियों और जिम्मेदारियों में संशोधन करता है. 1991 का मौजूदा अधिनियम पुलिस और भूमि को छोड़कर विधान सभा को हर मामले में कानून बनाने की अनुमति देता है.

विधेयक के प्रावधान

इस विधेयक में दिल्ली के उप-राज्यपाल के अधिकार बढ़ाने का प्रावधान किया गया है. विधेयक के तहत दिल्ली सरकार को कोई भी नियम कानून या योजना लाने से पहले उपराज्यपाल की सहमति लेनी होगी.

स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिये प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में समिति का गठन

15 अगस्‍त 2022 को भारत के स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाई जाएगी. इसके उपलक्ष्‍य में 75 सप्‍ताह पहले से कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है.

सरकार ने स्‍वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में राष्‍ट्रीय समिति गठित की है. समिति में 259 सदस्‍य हैं. इस समिति में कई केंद्रीय मंत्री, मुख्‍यमंत्री, राज्‍यपाल और प्रमुख राजनीतकि दलों के नेता तथा प्रधान न्‍यायाधीश शरद अरविंद बोबडे भी शामिल हैं.

यह समिति राष्‍ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्‍तर पर आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर विभिन्‍न कार्यक्रमों की तैयारी के लिए नीतिगत दिशा-निर्देश देगी.

आजादी का अमृत महोत्‍सव

  • सरकार, राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर इस अवसर को आजादी का अमृत महोत्‍सव के रूप में मनाना चाहती है. अमृत महोत्‍सव के कार्यक्रम 12 मार्च 2021 से शुरू हो जायेंगे. 12 मार्च को राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के नेतृत्‍व में चलाए गए ऐतिहासिक नमक सत्‍यग्रह के 91 वर्ष पूरे हो रहे हैं.
  • अमृत महोत्‍सव के उपलक्ष्‍य में विभिन्‍न मंत्रालयों से आयोजित कार्यक्रमों के बारे में मार्गदर्शन के लिए राष्‍ट्रीय कार्यान्‍वयन समिति पहले ही गठित कर ली गई है.

DRDO ने SFDR मिसाइल का सफल परीक्षण किया, मारक क्षमता 100-200 किमी

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 5 मार्च को सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया. परीक्षण में ग्राउंड बूस्टर मोटर समेत सभी सिस्टम उम्मीदों पर खरे उतरे और उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया.

SFDR मिसाइल: मुख्य बिंदु

  • यह मिसाइल सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक पर आधारित है. यह तकनीक भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है.
  • यह मिसाइल भारत की सतह-से-हवा और हवा-से-हवा दोनों ही मिसाइलों को बेहतर प्रदर्शन करने और उनकी स्ट्राइक रेंज को बढ़ाने में मदद करेगा. इस मिसाइल की मारक क्षमता 100-200 किमी है.
  • भारत में SFDR परियोजना का लक्ष्य लंबी दूरी की मिसाइलों के प्रणोदन प्रणाली के तकनीकों को उन्नत करना है. इस प्रणाली में थ्रस्ट मॉड्यूलेटेड डक्टेड रॉकेट के साथ-साथ स्मोक नोजल-लेस मिसाइल बूस्टर शामिल है.
  • इस सिस्टम में थ्रस्ट मॉडुलन गर्म गैस प्रवाह नियंत्रक का उपयोग करके प्राप्त किया जाता है और इसके साथ ही यह प्रणाली एक ठोस ईंधन वाले वायु-श्वास रैमजेट इंजन का भी उपयोग करती है.

कारों में चालक के साथ वाली सीट के लिए एयरबैग को अनिवार्य किया गया, एयरबैग क्या होता है?

सरकार ने अब कारों में चालक के साथ वाली सीट के लिए एयरबैग की व्‍यवस्‍था करना अनिवार्य कर दिया है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 5 मार्च को इस संबंध में अधिसूचना जारी की.

जारी अधिसूचना के अनुसार, 1 अप्रैल 2021 से तैयार किए जाने वाले नये मॉडलों में चालक के बगल वाली सीट पर बैठे व्यक्ति के लिये भी एयर बैग की व्‍यवस्‍था करनी होगी. 31 अगस्‍त से मौजूदा मॉडलों में भी एयरबैग फिट करना अनिवार्य होगा.

चालक के साथ वाली यात्री सीट पर एयरबैग न होने से दुर्घटना की स्थिति में जोखिम बढ़ जाता है. मंत्रालय की अधिसूचना सड़क सुरक्षा पर उच्‍चतम न्‍यायालय की समिति के सुझावों पर आधारित है.

कार में एयरबैग क्या होता है?

  1. एयरबैग कार में लगा एक सुरक्षा कवच है. दुर्घटना के दौरान ये एक सुरक्षा कवर की तरह काम करते हैं. ये एयरबैग कार के स्टियरिंग व्हील, दरवाजे, डैशबोर्ड, छत ईत्यादि में लगा हो सकता है.
  2. एयरबैग कॉटन का बना होता है और इस पर सिलिकॉन की कोटिंग की जाती है. दुर्घटना के समय जब यह फूलता है तो उस वक़्त इसमें नाइट्रोजन गैस भर जाती है.
  3. किसी कार के दुर्घटना होते वक्त एयरबैग खुल जाता है. जब कोई कार किसी चीज से टकराता है तब उस कार का एक्सिलेरोमीटर सर्किट सक्रीय हो जाता है. यह सर्किट एयरबैग से लगे सेंसर को सिगनल देता है. सिगनल मिलते ही (लगभग 1/20 सेकंड) बंद एयरबैग फूल जाता है.

बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए ‘कैच द रेन’ नाम से देशव्यापी अभियान

सरकार ने बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए ‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) नाम से देशव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है. इस पहल की घोषणा केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने 3 मार्च को की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान में देश के नागरिकों से बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है.

‘कैच द रेन’ अभियान: मुख्य बिंदु

  • बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए ‘कैच द रेन’ अभियान 1 अप्रैल से 30 जून तक चलाया जायेगा. इस अभियान में सरकार के सात मंत्रालय हिस्सा लेंगे. इसे स्वच्छता अभियान की तर्ज पर इसे चलाया जाएगा.
  • इस अभियान में लोगों की भागीदारी के द्वारा मानसून से पहले बारिश के पानी को एकत्रित करने वाली जगहों को साफ करने सुरक्षित बनाने पर जोर रहेगा. यह अभियान देश के 623 जिलों में चलेगा. गांवों को भी योजना से जोड़ा जाएगा.
  • इस दौरान लोगों को जल के महत्व के बारे में जागरूक बनाने का एक बड़ा अभियान छेड़ा जाएगा. इसमें पौने दो लाख नेहरू युवा केंद्रों की भूमिका को और कारगर बनाने पर जोर दिया जाएगा.
  • वर्ष 2019 में जुलाई से सितंबर के बीच देश के 252 जिलों में अभियान चलाया गया था. इस दौरान भूजल की भारी कमी वाले चिह्नित ब्लॉक, जिलों और राज्यों को लक्षित करके 6,000 करोड़ रुपये की लागत वाली अटल भूजल योजना शुरू की गई. इस बार यह अभियान देशव्यापी होगा.
  • इस अभियान में रेल और रक्षा मंत्रालय की भूमिका बहुत बड़ी होगी. इन दोनों मंत्रालयों के पास लाखों हेक्टेयर जमीन पड़ी हुई है, जहां बारिश के पानी को एकत्रित किया जा सकता है. इसके अलावा खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय, नागरिक उड्डयन, शिक्षा और खेल व युवा मामले मंत्रालय की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी.

राज्‍यसभा और लोकसभा टीवी का विलय किया गया

राज्‍यसभा टीवी (RSTV) और लोकसभा टीवी (LSTV) का विलय कर दिया गया है. विलय के बाद इसका नाम संसद टीवी (Sansad TV) कर दिया गया है. दोनों चैनलों के एकीकरण के बारे में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्‍यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू और लोक सभा अध्‍यक्ष ओम बिडला ने संयुक्‍त रूप से यह निर्णय लिया है. प्रसार भारती के CEO सूर्य प्रकाश की अध्यक्षता में इस विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था.

विलय के बाद रवि कपूर को संसद टीवी का मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्‍त किया गया है. वह भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवा निवृ‍त अधिकारी हैं. संसद टीवी लोकसभा और राज्‍यसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण दो अलग-अलग चैनलों पर करेगा.

ISRO ने PSLV-C51 राकेट से ब्राजील के अमे‍जोनिया-1 सहित 19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 28 फरवरी को ब्राजील के अमे‍जोनिया-1 सहित 19 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C51 अन्तरिक्ष यान के माध्यम से किया गया. यह ISRO की वाणिज्यिक संस्था ‘न्‍यू स्‍पेस इंडिया लिमिटेड’ का पहला मिशन था.

इस प्रक्षेपण में PSLV-C51 द्वारा ब्राजील के अमेजोनिया-1 उपग्रह के साथ 18 अन्य उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा गया. ISRO ने इस बार सैटेलाइट के अलावा भगवद गीता की एक इलेक्ट्रॉनिक कॉपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो भी अंतरिक्ष में भेजी है.

मुख्य तथ्यों पर एक दृष्टि

  • PSLV-C51, PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) का 53वां और इस वर्ष का पहला मिशन था. इस अंतरिक्ष यान के शीर्ष पैनल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर उकेरी गई है.
  • PSLV-C51 रॉकेट ने ब्राजील के 637 किलोग्राम भार के एमेजोनिया-1 उपग्रह को सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया. बाद में एक घंटे से अधिक समय के अंतराल के बाद इसने शेष 18 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया.
  • अमेजोनिया-1, ब्राजील के नेशनल इंस्‍टीट्यूट फॉर स्‍पेस रिसर्च का प्रकाशीय पृथ्‍वी पर्यवेक्षण उपग्रह है. यह अमेजन क्षेत्र में वनों की कटाई की निगरानी और ब्राजील के लिए विविध कृषि के विश्लेषण के लिए उपयोगकर्ताओं को दूरस्थ संवेदी आंकड़े मुहैया कराएगा. साथ ही मौजूदा ढांचे को और मजबूत बनाएगा.
  • अमेजोनिया-1 के साथ 18 अन्य उपग्रह को भी सफलतापूर्वक उसकी कक्षा में स्थापित किया गया है. इन उपग्रहों में चेन्नई की स्पेस किड्ज़ इंडिया (SKI) का उपग्रह भी शामिल है. SKI ने एक एसडी कार्ड में भगवद्गीता की इलेक्ट्रॉनिक प्रति को अंतरिक्ष भेजा है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता की घोषणा

सरकार ने OTT (Over the Top Platform), ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता की घोषणा की है. यह घोषणा 25 फरवरी को सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने की.

घोषणा के मुख्य बिंदु

  • सोशल मीडिया का भारत में एक फिजिकल कार्यालाय अनिवार्य होगा. इन दिशानिर्देशों के अंतर्गत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को शिकायतों के निपटान के लिए मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क व्यक्ति और एक रेजिडेंट शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा. सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को आपत्तिजनक सामग्री के पहले प्रवर्तक (पोस्ट करने वाले) का खुलासा करना होगा.
  • सूचना और प्रसारण मंत्री ने ओटीटी और डिजिटल मीडिया प्लेटफार्मों के नियमन के लिए त्रिस्तरीय तंत्र की भी घोषणा की. डिजिटल मीडिया पोर्टल को कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा.
  • डिजिटल मीडिया पर समाचार प्रदर्शित करने वालों को संबंधित भारतीय प्रेस परिषद की आचार संहिता और केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन कानून के मानदंडों का पालन करना होगा.

DAC ने तीनों सशस्त्र बलों के कई पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने तीनों सशस्त्र बलों के कई पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है. ये मंजूरी 23 फरवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई (DAC) की बैठक में दी गयी. इस बैठक में तीनों सशस्त्र बलों की जरूरतों को लेकर विभिन्न हथियारों, प्लेटफार्म, सैन्य उपकरणों के पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी गयी.

इस बैठक में कुल 13,700 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन ‘आवश्यकताओं को भी स्वीकृति’ (AON) दी गयी. ये सभी AON रक्षा खरीद की उच्चतम प्राथमिकता श्रेणी में हैं. इनमें ‘इंडियन- IDDM (स्वदेश में डिजाइन तैयार, विकसित एवं विनिर्मित)’ शामिल हैं.

खरीद प्रस्ताव में शामिल ये सभी साजो सामान स्वदेश में डिजाइन तैयार, विकसित एवं विनिर्मित होंगे. इनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित प्लेटफार्म भी शामिल हैं. DAC ने यह भी मंजूरी दी है कि सभी पूंजीगत खरीद अनुंबंध, डी एंड डी (डिजाइंड एवं डेवलप्ड) मामलों को छोड़ कर दो साल में संपन्न की जाएं.

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) क्या है?

रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council), तीनों सशस्त्र बलों की योजना और खरीद को स्वीकृति प्रदान करने वाली सर्वोच्च संस्था है. इसका गठन 2001 में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रणाली में सुधार की सिफारिश के आधार पर किया गया था.

DRDO ने सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘VL-SRSAM’ के दो परीक्षण किए

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 22 फरवरी को सतह-से-हवा में कम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल (VL-SRSAM) के दो सफल परीक्षण किए. ये परीक्षण ओडिसा तट के पास चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से किये गये.

DRDO ने इसे विशेष तौर पर नौसेना के लिए देश में ही डिजाइन और विकसित किया है. यह मिसाइल समुद्र में नजदीकी लक्ष्य सहित विभिन्न हवाई हमलों के खतरे से निपटने में सक्षम है. परीक्षण में मिसाइलों ने अत्यधिक सटीकता के साथ लक्ष्यों को भेद दिया. मिसाइलों को हथियार नियंत्रण प्रणाली के साथ तैनात किया गया था.