CBI और ED के निदेशकों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने के लिए अध्यादेश

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशकों के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने के लिए  14 नवम्बर को दो अध्यादेश जारी किये. ये अध्यादेश हैं- केंद्रीय सतर्कता आयोग संशोधन अध्यादेश 2021 और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना संशोधन अध्यादेश 2021.

अध्यादेशों के अनुसार, CBI और ED के निदेशकों को उनके कार्यकाल की समाप्ति से पहले नहीं हटाया जा सकता है. दोनों निदेशकों को दो साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद तीन साल तक का विस्तार दिया जा सकता है. अध्यादेशों में कहा गया है, प्रारंभिक नियुक्ति में उल्लिखित अवधि सहित कुल मिलाकर पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा. मौजूदा समय में CBI और ED के निदेशकों की नियुक्ति की तारीख से उनका दो साल का निश्चित कार्यकाल होता है.

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चौथी स्कॉर्पीन सबमरीन ‘INS वेला’ भारतीय नौसेना को प्रदान की गई

भारत की चौथी स्कॉर्पीन सबमरीन ‘आईएनएस वेला’ भारतीय नौसेना को प्रदान कर दी गई. इसका निर्माण ‘प्रोजेक्ट-75’ के तहत किया गया है.

प्रमुख बिंदु

  • ‘प्रोजेक्ट-75’ के तहत शामिल स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियाँ ‘डीज़ल-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम’ द्वारा संचालित होती हैं. स्कॉर्पीन सर्वाधिक परिष्कृत पनडुब्बियों में से एक है, जो एंटी-सरफेस शिप वॉरफेयर, पनडुब्बी रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी एकत्र करने, खदान बिछाने और क्षेत्र-विशिष्ट की निगरानी सहित कई मिशनों को पूरा करने में सक्षम है.
  • ‘स्कॉर्पीन’ श्रेणी जुलाई 2000 में रूस से खरीदे गए ‘INS सिंधुशास्त्र’ के बाद लगभग दो दशकों में नौसेना की पहली आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बी शृंखला है.
  • प्रोजेक्ट-75 भारतीय नौसेना का एक कार्यक्रम है, जिसमें छह स्कॉर्पीन श्रेणी की ‘अटैक सबमरीन’ का निर्माण किया जाना है. दो पनडुब्बियों- कलवरी और खांदेरी को भारतीय नौसेना में शामिल किया जा चुका गया है. स्कॉर्पीन ‘वागीर’ का परीक्षण चल रहा है. छठी पनडुब्बी- ‘वाग्शीर’ निर्माणाधीन है. कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों का डिज़ाइन ‘फ्रेंच स्कॉर्पीन श्रेणी’ की पनडुब्बियों पर आधारित है.
  • इसका निर्माण मझगाँव डॉक लिमिटेड (MDL) द्वारा किया जा रहा है. इस पनडुब्बियों के निर्माण के लिए अक्तूबर, 2005 में 3.75 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर किये गये थे. ‘मझगाँव डॉक लिमिटेड’ शिपयार्ड रक्षा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है.
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गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव 2021 भारत की मेजबानी में आयोजित किया गया

भारतीय नौसेना द्वारा 07 से 09 नवंबर 2021 तक गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC) 2021 आयोजित किया गया था. यह इसका तीसरा संस्करण था जिसकी मेजबानी नेवल वॉर कॉलेज, गोवा के तत्वावधान में की गयी थी. GMC 2021 की थीम “Maritime Security and Emerging Non-Traditional Threats: A case for proactive role for Indian Ocean Region” है.

GMC 2021 में, भारतीय नौसेना बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड सहित हिंद महासागर क्षेत्र के 12 देशों के नौसेना प्रमुखों/ समुद्री बलों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया था.

GMC का मुख्य भाषण विदेश सचिव श्री हर्षवर्धन श्रृंगला ने दिया, जिन्होंने सागर के बारे में भारत के दृष्टिकोण और समुद्री सुरक्षा के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला. उन्होंने दोहराया कि समुद्री परिवहन और रसद ब्लू इकोनमी का एक प्रमुख घटक है और विशेष रूप से आईओआर देशों के लिए महत्वपूर्ण है.

GMC -21 तीन सत्रों में आयोजित किया गया था:

  1. आईओआर में राष्ट्रीय क्षेत्राधिकार से परे क्षेत्रों में उभरते गैर-पारंपरिक खतरों को कम करने के लिए अनिवार्य घटक
  2. समुद्री कानून प्रवर्तन के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना
  3. उभरते गैर-पारंपरिक खतरों का मुकाबला करने के लिए सामूहिक समुद्री दक्षताओं का लाभ उठाना.
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देश का पहला विध्वंसक युद्धपोत ‘विशाखापट्टनम’ भारतीय नौसेना को सौंपा गया

देश में नौसेना के लिए युद्धपोत बनाने की परियोजना P15B का पहला विध्वंसक युद्धपोत ‘विशाखापट्टनम’ (Y12704) को 31 अक्तूबर को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया. इसके शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की सामरिक और रणनीतिक क्षमता में बढ़ोतरी होगी.

विशाखापट्टनम युद्धपोत: मुख्य बिंदु

  • ‘विशाखापट्टनम’ भारत में निर्मित सबसे लंबा विध्वंसक युद्धपोत है. इसे ‘नौसेना डिजाइन निदेशालय’ ने डिजाइन किया है और निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डाक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है. इसका निर्माण स्वदेशी स्टील डीएमआर-249ए से किया गया है. इसकी लंबाई 164 मीटर है और भार क्षमता 7,500 टन है.
  • इस युद्धपोत को सुपरसोनिक ब्रह्मोस और बराक समेत सभी प्रमुख मिसाइलों और हथियारों से लैस किया गया है. यह पूर्ण रूप से दुश्मन की पनडुब्बियों, युद्धपोतों, एंटी सबमरीन मिसाइलों और युद्धक विमानों का मुकाबला बिना किसी सहायक युद्धपोत के करने में सक्षम है.
  • इसमें समुद्र के नीचे युद्ध करने में सक्षम डिस्ट्रायर, पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर लगाए गए हैं. साथ ही इसमें हाल माउंटेड सोनार, हमसा एनजी, हेवी वेट टारपीडो ट्यूब लांचर्स, राकेट लांचर्स आदि भी शामिल हैं. यह एक बार में 42 दिनों तक समुद्र में रहने में सक्षम है.
  • ‘नौसैनिक युद्धपोत निर्माण परियोजना’ के तहत देश के चार कोनों के प्रमुख शहरों विशाखापट्टनम, मोरमुगाओ, इंफाल और सूरत के नाम पर चार युद्धपोतों का निर्माण किया जा रहा है.
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भारत ने लंबी दूरी के स्मार्ट बम का सफल फ्लाइट परीक्षण किया

भारत ने 29 अक्तूबर को लंबी दूरी के बम का सफल फ्लाइट परीक्षण किया था. यह परीक्षण ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया. इस बम का परीक्षण एरियल प्लेटफार्म के माध्यम से किया गया. परीक्षण के दौरान इस बम को एक फाइटर एयरक्राफ्ट से गिराया गया. इसे लांग रेंज बम को स्मार्ट बम भी कहा जाता है, क्योंकि गिराने के बाद भी इस बम की दिशा और गति को बदला जा सकता है.

इसे पूरी तरह स्वदेशी टेक्‍नोलॉजी से भारत में बनाया गया है. यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना सेना (IAF) की टीम ने किया.

मुख्य बिंदु

  • इस बम का सफल परीक्षण काफी अहम है क्योंकि मौजूदा घटनाक्रम के दृष्टिकोण से भारत के सामने पाकिस्तान के साथ-साथ चीन से भी टक्कर लेने की चुनौती है. बीते कुछ समय से चीन का रुख काफी आक्रामक हुआ है. इसे देखते हुए भारत को अपनी रक्षा तैयारियों को चुस्त-दुरुस्त रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.
  • इससे पहले 28 अक्तूबर को भारत ने अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया था. अग्नि-5 को डीआरडीओ और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है. यह परमाणु सक्षम और सतह से सतह पर 5,000 किलोमीटर रेंज तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है.
  • DRDO ने ABHYAS का सफल फ्लाइट टेस्‍ट किया था. यह हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) है. यह हथियार प्रणालियों को परीक्षण के लिए एक रियलिस्टिक डेंजर सीनेरियो देता है, जिसकी मदद से विभिन्न मिसाइलों या हवा में मार करने वाले हथियारों का परीक्षण किया जा सकता है.
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अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण, 5 हजार किलोमीटर तक मारक क्षमता

भारत ने 27 अक्टूबर को परमाणु सक्षम अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल (Agni-5 ballistic Missile) का सफल परीक्षण (यूजर ट्रायल) किया. यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा तट के पास ‘डॉ अब्दुल कलाम द्वीप’ पर एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) पर मोबाइल लॉन्चर से से किया गया. ‘डॉ अब्दुल कलाम द्वीप’ को पहले व्हीलर आईलैंड के नाम से जाना जाता था. अग्नि-5 का सफल परीक्षण विश्वस्त न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (credible minimum deterrence) हासिल करने की भारत की नीति के अनुरूप है.

अग्नि-5 मिसाइल: एक दृष्टि

  • अग्नि 5 मिसाइल एक परमाणु सक्षम अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (intercontinental ballistic missile – ICBM) है. यह अग्नि श्रृंखला की सबसे उन्नत मिसाइल है. इस श्रृंखला की अन्य मिसाइलों के उलट यह मार्ग और दिशा-निर्देशन, विस्फोटक ले जाने वाले शीर्ष हिस्से और इंजन के लिहाज से सबसे उन्नत है.
  • यह मिसाइल तीन चरणों में मार करने वाली मिसाइल है. इसमें ‘ठोस प्रणोदक’ इंधन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है जिस कारण यह सड़क, रेल और मोबाइल लॉन्चर दोनों से फायर किया जा सकता है.
  • यह 17 मीटर लंबी और 2 मीटर व्यास वाली मिसाइल है जिसका वजन करीब 50 हजार किलोग्राम है. यह 1500 किलोग्राम वजनी परमाणु सामग्री ले जाने में सक्षम है. इसकी मारक क्षमता 5000 हजार किलोमीटर तक है.
  • निर्माण: अग्नि-5 को देश में ही एडवांस्ड सिस्टम्स लैबोरेटरी (ASL) ने रक्षा अनुसंधान विकास प्रयोगशाला (DRDL) और अनुसंधान केंद्र इमारत (RCI) के सहयोग से विकसित किया है. मिसाइल को भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने समेकित किया है. ASL मिसाइल विकसित करने वाली रक्षा शोध एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख प्रयोगशाला है.
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प्रधानमंत्री ने वाराणसी में आयुष्मान भारत बुनियादी ढांचा मिशन का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री ने 25 अक्तूबर को वाराणसी में आयुष्मान भारत बुनियादी ढांचा मिशन (Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission) का शुभारंभ किया था. इस मिशन का उद्देश्‍य अगले पांच वर्ष में स्‍वास्‍थ्‍य नेटवर्क को मजबूत करना है. इस परियोजना की कुल लागत 64.180 हजार करोड रुपये है.

आयुष्मान भारत बुनियादी ढांचा मिशन: मुख्य बिंदु

  • इसके माध्यम से आने वाले चार-पांच सालों में देश के गांव से लेकर ब्‍लॉक, जिला, रीजनल और नेशनल लेवल तक क्रिटिकल हेल्‍थ केयर नेटवर्क को सशक्‍त किया जायेगा. अंतर्गत गांवों और शहरों में स्‍वास्‍थ्‍य तथा अरोग्‍य केंद्र खोले जाएंगे जहां फ्री मेडिकल कंसलटेशन, फ्री टेस्‍ट, फ्री दवा, ऐसी सुविधायें भी मिलेंगी.
  • इस मिशन से देश के स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र में विभिन्‍न कमियों को दूर किया जा सकेगा और यह निदान तथा उपचार के लिए व्‍यापक सुविधाएं उपलब्‍ध कराएगा. गंभीर बिमारियों के लिए 600 जिलों में 30 हजार नए बिस्‍तर जोडे जायेंगे
  • आयुष्मान भारत हेल्‍थ इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर मिशन के तीन बड़े पहलू हैं. पहला, डायगनिस्टिक और ट्रीटमेंट के लिये विस्तृत सुविधाओं के निर्माण से जुड़ा है.
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DRDO ने ‘ABHYAS’ हाईस्पीड मिसाइल वेहिकल का सफल परीक्षण किया

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने 22 अक्टूबर को ‘ABHYAS’ हाईस्पीड मिसाइल वेहिकल का सफल परीक्षण किया था. यह परीक्षण उड़ीसा के चांदीपुर में इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया था. इस परीक्षण में वेहिकल की उड़ान को कई रडार और इलेक्ट्रो ऑप्टिक सिस्टम की मदद से ट्रैक किया गया.

ABHYAS ड्रोन: एक दृष्टि

  • ABHYAS, हाई स्पीड एक्पेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) है. यह एक प्रकार का ड्रोन है जो मिसाइल वेहिकल यान के रूप में कार्य करता है. इसका इस्तेमाल अनेक मिसाइल प्रणालियों का मूल्यांकन करने के लिए हवाई लक्ष्य के तौर पर किया जा सकता है.
  • ABHYAS को DRDO के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान, बेंगलुरू ने डिजाइन और विकसित किया है. इसे गैस टर्बाइन इंजन से चलाया जाता है ताकि सबसोनिक गति पर लंबी उड़ान भरी जा सके. यह अपने नेविगेशन और रास्ता खोजने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित MEMS आधारित नेविगेशन प्रणाली का उपयोग करता है.

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) क्या है?

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक संगठन है. यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है. इसकी स्थापना 1958 में की गयी थी. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है. DRDO का आदर्श वाक्य ‘बलस्य मूलं विज्ञानं’ है. वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं. पूरे देश में DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है.

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अंडमान निकोबार के पर्यटन स्थल ‘माउंट हैरियट’ का नाम बदलकर ‘माउंट मणिपुर’ किया गया

केंद्र सरकार ने हाल ही में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल ‘माउंट हैरियट’ का नाम बदलकर ‘माउंट मणिपुर’ कर दिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पोर्ट ब्लेयर की यात्रा के दौरान यह घोषणा की गई थी.

माउंट हैरियट क्या है?

1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध में महाराजा कुलचंद्र ध्वज सिंह सहित कई मणिपुर के लोगों ने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी थी. इस युद्ध के बाद इन सभी को सजा के तौर पर अंडमान निकोबार के सेलुलुर जेल (कालापानी) भेजा गया था. लेकिन इस जेल के बनने में देरी थी, इस कारण से कैदियों को माउंट हैरियट पर रखा गया था.

माउंट हैरियट दक्षिण अंडमान जिले की फेरगुंज तहसील में एक पहाड़ी है. ब्रिटिश राज के दौरान यह चीफ कमिशनर की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी. इसका नाम ब्रिटिश कलाकार और फोटोग्राफर, हैरियट क्रिस्टीना टाइटलर के नाम पर रखा गया था

एंग्लो-मणिपुर युद्ध 1891

एंग्लो-मणिपुर युद्ध 1891 में एक महीने से अधिक तक मणिपुर के लोगों और अंग्रेजों के बीच लड़ा गया था. इसकी शुरुआत महल के तख्तापलट से शुरू हुई थी और जिसका फायदा उठाकर अंग्रेजों ने हमला कर मणिपुर को अपना नया रियासत बना लिया था.

अंग्रेजों ने राजा कुलचंद्र और उनके भाइयों सहित कुल 23 लोगों को जीवन भर के लिए अंडमान ले जाया गया था. कुलचंद्र को बाद में रिहा कर दिया गया और मौत से पहले कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया. इन 23 लोगों को मणिपुर में युद्ध नायक माना जाता है. यही कारण है कि माउंट हैरियट 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है.

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भारत छठी बार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के सदस्य देश के रूप में भारत को फिर से चुना गया है. भारत छठी बार भारी बहुमत से UNHRC के लिए फिर से निर्वाचित हुआ है. UNHRC में भारत का कार्यकाल 2022 से 2024 तक रहेगा.

UNHRC का सदस्य देशों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र में गुप्त मतदान के जरिए किया गया. संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस चुनाव में अर्जेंटीना, बेनिन, कैमरून, इरिट्रिया, फिनलैंड, जाम्बिया, होंडुरास, भारत, कजाकिस्तान, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, मलेशिया, मोंटेनेग्रो, पराग्वे, कतर, सोमालिया, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका का चयन किया.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) क्या है?

UNHRC संयुक्त राष्ट्र का एक निकाय है जो विश्व भर में मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए काम करता है. इस परिषद का गठन वर्ष 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के जरिए किया गया था. इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग इस काम को करता था. इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में है.

UNHRC के सदस्य का चुनाव

UNHRC में 47 सदस्य देश होते हैं. इनका चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा के जरिए किया जाता है. इस परिषद के सदस्य देशों की सीट का बंटवारा भौगोलिक आधार पर किया गया है. जिसमें अफ्रीका और एशिया पैसिफिक क्षेत्र से 13-13 सदस्य चुने जाते हैं. इसके अलावा दक्षिण अमेरिका और कैरिबियाई देशों से 8 सदस्य, पश्चिमी यूरोप से 7 और पूर्वी यूरोप से 6 सदस्यों का चुनाव किया जाता है.

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विदेश मंत्री ने किरगिज गणराज्‍य, कजा‍खस्‍तान और आर्मीनिया की यात्रा पूरी की

विदेश मंत्री एस. जयशंकर 10 से 14 अक्तूबर तक किरगिज गणराज्‍य कजा‍खस्‍तान और आर्मीनिया की यात्रा पर थे.

किरगिज: उन्होंने इस यात्रा की शुरुआत किरगिज से की थी. विदेश मंत्री के रूप में किरगिज की यह उनकी पहली यात्रा थी. उन्होंने किर्गिज गणराज्य के विदेश मंत्री रुसलान कजाकबायेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी. इस वार्ता में दोनों देश विभिन्‍न विकास परियोजनाओं के लिए 20 करोड़ अमरीकी डॉलर की ऋण सुविधा पर सहमत हुए.

कजाख्स्‍तान: किरगिज के बाद विदेश मंत्री कजाख्स्‍तान पहुंचें थे. वे कजाख्स्‍तान के नूर सुल्‍तान में एशिया में संपर्क और आपसी विश्‍वास बढ़ाने के उपायों पर गठित मंच की छठी मंत्रिस्‍तरीय बैठक में शामिल हुए थे. कजाख्स्‍तान इस मंच का वर्तमान अध्‍यक्ष है और उसी ने इसे स्‍थापित करने की पहल की थी.

आर्मीनिया: 13 और 14 अक्‍तूबर को विदेश मंत्री आर्मीनिया के दौरे पर थे. आर्मीनिया के स्‍वतंत्र होने के बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री की यह पहली यात्रा थी. उन्‍होंने वहां के विदेश मंत्री ऐरारत मिर्जायान के साथ बैठक की थी. बैठक में उन्होंने दिवपक्षीय सहयोग को बढाने के मुद्दे पर चर्चा की. इन नेताओं ने दोनों देशों के बीच व्‍यापार, शिक्षा और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को बढावा देने के मुद्दे पर भी सहमति जताई. दोनों नेताओं ने अंतर्राष्‍ट्रीय उत्‍तर दक्षिण परिवहन गलियारा सहित संपर्क मजबूत करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श किया.

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गृह मंत्रालय ने कई राज्यों में BSF के अधिकार क्षेत्र क्षेत्राधिकार में परिवर्तन किया

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने कई राज्यों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र क्षेत्राधिकार में परिवर्तन किया है. इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में विभिन्न अपराधों पर लगाम लगाने के लिए BSF का क्षेत्राधिकार 50 किलोमीटर तक बढ़ाया गया है.

मुख्य बिंदु

  • केंद्र सरकार ने BSF कानून में संशोधन कर इसे पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम में अंतरराष्ट्रीय सीमा से मौजूदा 15 किलोमीटर की जगह 50 किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तार करने की शक्ति दे दी है.
  • पाकिस्तान की सीमा से लगे गुजरात के क्षेत्रों में यह दायरा 80 किलोमीटर से घटा कर 50 किलोमीटर कर दिया है. राजस्थान में 50 किलोमीटर तक की क्षेत्र सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
  • पांच पूर्वोत्तर राज्यों मेघालय, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है. इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी सीमा निर्धारित नहीं है.

BSF के अधिकार

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर सीमा से लगे इलाकों के ‘शेड्यूल’ को संशोधित किया है, जहां BSF के पास पासपोर्ट अधिनियम, एनडीपीएस अधिनियम, सीमा शुल्क अधिनियम जैसे अधिनियमों के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की शक्तियां होंगी. BSF को CRPC, Passport Act and Passport (Entry to India) Act के तहत ये करवाई करने का अधिकार मिला है.
  • BSF के क्षेत्राधिकार को 50 किमी तक बढ़ा देने से BSF का अधिकार क्षेत्र कई राज्यों में काफी अंदरुनी इलाके तक पहुंच जाएगा. इससे एक समस्या यह होगी कि BSF जब भी अंदरुनी क्षेत्र में कार्रवाई करेगी, तो उसका और स्थानीय पुलिस का अधिकार क्षेत्र टकराएगा और दोनों के बीच विवाद की स्थिति भी पैदा हो सकती है.
  • हालांकि, इसके उलट एक तर्क यह भी है कि पहले जहां BSF को अपने दायरे के बाहर पहुंच चुके अपराधी को पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब उन्हें किसी खुफिया जानकारी के आधार पर संदिग्ध को पकड़ने में खास दिक्कत नहीं आएगी. इससे कार्रवाई में समय की खासा बचत होगी.
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