सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की अधिकतम उम्र सीमा के लिए नियमों में संशोधन किया

सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की अधिकतम उम्र सीमा के लिए नियमों में संशोधन किया है. नए नियम के तहत CDS पद पर नियुक्त अधिकारी 65 साल में सेवानिवृत्त होंगे. हालांकि, इस पद की कार्य-अवधि पर अभी फैसला नहीं लिया गया है.

उल्लेखनीय है कि सुरक्षा से जुड़ी कैबिनेट कमिटी ने हाल ही में CDS के पद को मंजूरी दी थी जो कि तीनों सेनाओं से जुड़े मामले में रक्षा मंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेंगे. CDS न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी के सैन्य सलाहकार के रूप में भी काम करेंगे.

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मिग-27 लड़ाकू विमान ने अंतिम बार उड़ान भरी. जोधपुर वायुसैनिक अड्डे से अंतिम विदाई दी गयी


मिग-27 लड़ाकू विमान ने 27 दिसम्बर को अंतिम बार उड़ान भरी. वायुसेना, जोधपुर वायुसैनिक अड्डे से सात विमानों की स्वाड्रन को अंतिम विदाई दी. इस अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता दक्षिण-पश्चिमी कमान के प्रमुख एयर मार्शल एसके घोटिया ने किया.

मिग 27 विमान: एक दृष्टि

  • मिग श्रेणी के विमान को सोवियत रूस से खरीदा गया था. मिग 27 विमान को 1985 में वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया था. लगभग चार दशकों से ज़मीन पर हमले की क्षमता रखने वाला भारतीय वायु सेना का बेहतरीन विमान रहा है.
  • मिग 27 का अपग्रेड रूप 2006 से वायु सेना के लिए प्रयोग लिया जा रहा था. जबकि मिग के अन्य विमान यथा मिग 23BN तथा मिग 23MF के साथ मिग 27 भी वायु सेना से रिटायर हो चुके हैं.
  • इन विमानों ने युद्ध और शांति के समय देश की रक्षा में बेहतरीन योगदान दिया है. करगिल युद्ध के दौरान 1999 में इन विमानों ने मुख्य भूमिका निभाई थी. वहीं ऑपरेशन पराक्रम में भी इस विमान का उपयोग किया गया.
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UGC ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए पांच नए दिशा-निर्देश जारी किए

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए 26 दिसम्बर को पांच नए दिशा-निर्देश जारी किए. मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने नई दिल्ली में मूल्य प्रवाह, गुरु दक्षता, सतत, केयर और मूल्यांकन सुधार नाम से इन दिशा-निर्देशों को जारी किया. इनका मकसद शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ भारत के शैक्षणिक संस्थानों की रैंकिंग सुधारकर इन्हें दुनिया के शीर्ष सौ संस्थानों में शामिल करना है.

  • नए दिशा-निर्देशों के तहत छात्र के मूल्यांकन को अधिक सार्थक और प्रभावी बनाया जाएगा और मूल्यांकन को लर्निंग आउटकम से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा गुणवत्तापूर्ण जर्नल्स की निरंतर निगरानी के लिए यूजीसी केयर की शुरुआत की गई है.
  • शैक्षणिक संस्थानों में मानवीय मूल्यों की संस्कृति को बढ़ावा देने के मकसद से UGC ने मूल्य प्रवाह नाम से दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं.
  • कॉलेज और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए गुरु दक्षता की शुरुआत भी की गई है, जिसके तहत शिक्षकों के लिए 1 महीने का शिक्षक प्रेरण कार्यक्रम (इंडक्शन प्रोग्राम) अनिवार्य किया जाएगा. इसका मकसद शिक्षकों को छात्रों के समक्ष रोल मॉडल यानि आदर्श के तौर पर पेश करना है.
  • शैक्षणिक संस्थानों में पर्यावरण के अनुकूल सतत कैंपस के विकास के लिए सतत नाम से दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं. इसका मकसद संस्थानों को भविष्य में सतत हरित तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है.
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हिमाचल प्रदेश में ‘रोहतांग सुरंग’ का नाम ‘अटल सुरंग’ रखा गया

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश में रोहतांग सुरंग (टनल) का नाम अटल सुरंग करने का निर्णय लिया है. इसकी घोषणा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 95वीं जयंती पर 25 दिसम्बर को की गयी.

इस सुरंग का निर्माण अटल बिहारी वाजपेयी ने ही शुरू करवाया था. इस सुरंग के शुरू हो जाने से मनाली और लेह के बीच दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी.

अटल सुरंग: मुख्य तथ्यों पर एक दृष्टि

यह हिमाचल प्रदेश में एक निर्माणाधीन सुरंग है जो मनाली और लेह को जोड़ेगी. यह हिमालय के पिर-पंजाल रेंज पर स्थित रोहतांग दर्रे (Rohtang Pass) के नीचे बनाई जा रही है. इस सुरंग की लंबाई 8.8 किलोमीटर और चौडाई 10 मीटर है. इस सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) कर रही है और निर्माण कार्य साल 2020 तक पूरा हो जायेगा.

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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करने को मंजूरी, जानिए क्या है NPR और NRC में अंतर

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की मंजूरी दी है. यह मंजूरी 24 दिसम्बर को नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में दी गयी. NPR के तहत देश भर के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा. हालांकि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा. मंत्रिमंडल ने NPR के लिए 3941.35 करोड़ रुपये के बजट आवंटन मंजूर किया है.

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) क्या है?

नैशनल पॉप्युलेशन रजिस्टर (National Population Register- NPR) जनसंख्या का रजिस्टर है. यह हर 10 वर्ष में होने वाली जनगणना का ही एक प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया में देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान कर उसका डेटाबेस बनाया जाता है. इसमें व्यक्ति का नाम, पता, शिक्षा, पेशा जैसी सूचनाएं दर्ज होती है.

NPR में दर्ज जानकारी लोगों द्वारा खुद दी गई सूचना पर आधारित होती है और यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होता है. इसका इस्तेमाल सरकार अपनी योजनाओं को लागू करने के लिए करती है. NPR से सरकारी योजनाओं के सही लाभार्थियों की पहचान हो पाएगी और यह भी पता चल पाएगा कि योजना का लाभ उन तक पहुंच रहा है या नहीं?

16वीं जनगणना से पहले NPR तैयार किया जायेगा

भारत में अब तक 15 बार जनगणना का काम हुआ है. आजादी से पहले अंग्रेजों ने भारत की आठ बार जनगणना करवाई थी, फिर आजादी के बाद सात जनगणना हो चुकी है.

देश में 2021 में होने वाले 16वीं जनगणना से पहले NPR अपडेट किया जाएगा. इससे पहले 2011 की जनगणना से पहले 2010 में भी NPR को अपडेट किया गया था. असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अप्रैल, 2020 से सितंबर, 2020 तक NPR को अपडेट करने का काम किया जाएगा.

NPR पहली बार 2004 में मंजूरी दी गयी थी

सरकार ने NPR को पहली बार 2004 में मंजूरी दी थी और 2010 की जनगणना के साथ NPR सर्वे हुआ. चूंकि जनगणना का काम हर 10 साल में होता है, इसलिए 2021 के जनगणना से पहले NPR को अपडेट किया जायेगा.

NPR और NRC में अंतर

NPR और NRC में अंतर है. NRC (National Register of Citizens) केबल भारतीय बैध नागरिकों (Citizens) के लिए है. NRC में हर व्यक्ति से प्रूफ मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारत के नागरिक हैं. इसका मकसद देश में रह रहे अवैध लोगों (घुसपैठियों) की पहचान करना है.

NPR (National Population Register) देश के जनसंख्या का रजिस्टर है. इसमें देश में रहने वाले सभी लोगों को शामिल किया जाता है और उनकी सूची तैयार की जाती है. छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को NPR में पंजीकरण करना होता है.

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सरकार ने तीनों सेनाओं के बीच तालमेल के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद बनाने को मंजूरी दी

कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्यॉरिटी ने 24 दिसम्बर को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का नया पद बनाने को मंजूरी दी. इस पद का मकसद भारत के सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है.

CDS मुख्यत: रक्षा और रणनीतिक मामलों में प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के एकीकृत सैन्य सलाहकार के रूप में काम करेगा. 1999 के करगिल युद्ध के मद्देनजर देश की सुरक्षा प्रणाली में खामियों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति ने रक्षा मंत्री के एकीकृत सैन्य सलाहकार के रूप में CDS की नियुक्ति का सुझाव दिया था.

अजीत डोभाल की समिति का गठन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक सैन्य सुधार की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत की तीनों सेना के लिए एक प्रमुख होगा, जिसे CDS कहा जाएगा. प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद CDS की नियुक्ति के तौर-तरीकों और उसकी जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था.

CDS की भूमिका

CDS की सबसे अहम् भूमिका युद्ध के समय होगी. युद्ध के समय तीनों सेनाओं के बीच प्रभावी समन्वय कायम करना CDS की जिम्मेदारी होगी. इससे दुश्मनों का सक्षम तरीके से मुकाबला करने में मदद मिलेगी.

दरअसल सशस्त्र बलों की तालमेल योजना में कई बार खामियां सामने आईं है. 1962 में चीन के साथ भारत का युद्ध हुआ था. उस युद्ध में भारतीय वायुसेना को कोई भूमिका नहीं दी गई थी जबकि भारतीय वायुसेना तिब्बत की पठारी पर जमा हुए चीनी सैनिकों को निशाना बना सकती थी और उनके बीच तबाही मचा सकती थी. इसी तरह से पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध में भारतीय नौसेना को पाकिस्तान की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर हमले की योजना से अवगत नहीं कराया गया. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रहते हुए इस तरह की कोई खामी नहीं रहेगी और सेना प्रभावी ढंग से दुश्मन से निपट सकेगी.

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भारत ने पिनाका और QR-SAM मिसाइल प्रणाली का सफल परीक्षण किया

भारत ने 19 दिसम्बर को दो मिसाइलों का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया. ये परीक्षण ओड़ीसा में चांदीपुर से परीक्षण केंद्र से किया गया. परीक्षण में स्वदेश में विकसित पिनाका और सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित कार्रवाई मिसाइल प्रणाली (QR-SAM) का परीक्षण किया गया. पिनाक और QR-SAM प्रणाली का परीक्षण निर्धारित लक्ष्य हासिल कर पूरी तरह सटीक साबित हुआ.

इस परीक्षण में पिनाक निर्देशित रॉकेट प्रणाली के उन्नत संस्करण का परीक्षण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के प्रूफ और प्रायोगिक स्थापना परीक्षण केंद्र से किया गया. जबकि सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित कार्रवाई मिसाइल (QR-SAM) एकीकृत परीक्षण केंद्र के प्रक्षेपण परिसर में मोबाइल लॉंचर से प्रक्षेपित की गई.

पिनाका:
पिनाका देश में तैयार मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्च (MBRL) प्रणाली है. भारतीय सेना के लिए इसका विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने किया है. पिनाक प्रणाली के मार्क-दो संस्करण की अधिकतम मारक क्षमता 75 किलोमीटर है और यह 45 सेकेंड से कम समय में ही इकट्ठे 12 रॉकेटों को निशाना बना सकती है.

QR-SAM:
सतह से हवा में मार करने वाली त्वरित कार्रवाई प्रणाली भी दो वाहनों के साथ लगभग 25 से 30 किलोमीटर के दायरे में एक साथ कई निशाना लगा सकती है. यह दुश्मन की उन मिसाइलों को भी निशाना बनाने में कारगर साबित होगी जो नजदीक आकर अचानक गायब हो जाती हैं.

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भारत ने जमीन से मार करने में सक्षम ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 17 दिसम्बर को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिसा तट पर चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया. इस परीक्षण में मिसाइल के जमीन (सतह) संस्करण का परीक्षण किया गया.

ब्रह्मोस मिसाईल: महत्वपूर्ण तथ्यों पर एक दृष्टि

  • ब्रह्मोस के महानिदेशक डॉक्‍टर सुधीर कुमार हैं.
  • ब्रह्मोस एक कम दूरी की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है.
  • 9 मीटर लंबी इस मिसाइल का वजन लगभग 3 टन है. यह मिसाइल ठोस ईंधन से संचालित होती है.
  • यह दुनिया की सबसे तेज मिसाइल है. यह ध्‍वनि से 2.9 गुना तेज (करीब एक किलोमीटर प्रति सेकेंड) गति से 14 किलोमीटर की ऊँचाई तक जा सकता है.
  • इस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है जिसे अब 400 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है.
  • ब्रम्‍होस का विकास भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ के संयुक्‍त उद्यम ने किया है.
  • ब्रह्मोस के संस्करणों को भूमि, वायु, समुद्र और जल के अंदर से दागा जा सकता है.
  • इसका पहला परीक्षण 12 जून 2001 को किया गया था.
  • इस मिसाइल का नाम दो नदियों को मिलाकर रखा गया है जिसमें भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्क्वा नदी शामिल है.
  • जमीन और नौवहन पोत से छोड़ी जा सकने बाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाईल पहले ही भारतीय सेना और नौसेना में शामिल की जा चुकी है. इस सफल परीक्षण के बाद ये मिसाइल सेना के तीनों अंगों का हिस्सा बन जायेगी.
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संसद ने 126वां संविधान संशोधन विधेयक 2019 पारित किया, अनुच्छेद 334 में संशोधन किया गया

संसद ने हाल ही में भारतीय संविधान का 126वां संविधान संशोधन विधेयक 2019 पारित किया. यह भारतीय संविधान का 104वां संशोधन (104th Amendment of Indian Constitution) है. इसके तहत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 334 में संशोधन किया गया है.

इस विधेयक को राज्यसभा ने 12 दिसम्बर को पारित किया था. लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी थी. इस विधेयक के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि को दस साल और बढ़ाया गया है.

इस विधेयक के पारित हो जाने के बाद अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए लोकसभा और राज्‍य विधानसभाओं में 25 जनवरी 2030 तक सीटों का आरक्षण बढ़ाने का प्रावधान है. पहले इस आरक्षण का समय सीमा 25 जनवरी 2020 तक के लिए था.

एंग्‍लो-इंडियन समुदाय का आरक्षण समाप्त

इस संविधान संशोधन विधेयक द्वारा संसद में एंग्‍लो-इंडियन समुदाय को दिए जाने वाले आरक्षण को समाप्त कर दिया है. एंग्लो-इंडियन समुदाय को दिए जाने वाला आरक्षण 25 जनवरी, 2020 को समाप्त हो रहा था. इस आरक्षण के तहत इस समुदाय के 2 सदस्य लोकसभा में प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे.

आरक्षण को अनुच्छेद 334 में शामिल किया गया है

आरक्षण को आर्टिकल 334 में शामिल किया गया है. अनुच्छेद 334 कहता है कि एंग्लो-इंडियन, एससी और एसटी को दिए जाना वाला आरक्षण 40 साल बाद खत्म हो जाएगा. इस खंड को 1949 में शामिल किया गया था. 40 वर्षों के बाद इसे 10 वर्षों के विस्तार के साथ संशोधित किया जा रहा है.

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भारतीय संसद ने नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू हुआ, जानिए क्या है CAA

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 दिसम्बर को नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill or CAB) 2019 को मंजूरी दी थी. संसद (लोकसभा, राज्‍यसभा और राष्ट्रपति) की मंजूरी के बाद यह विधेयक अधिनियम (Act) बन गया था. यह कानून यानि नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act or CAA) 10 जनवरी को राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ पूरे देश में लागू हो गया.

इस विधेयक को राज्‍यसभा ने 11 दिसम्बर को पारित किया था. राज्‍यसभा 125 सदस्‍यों ने इस विधेयक के समर्थन में जबकि 105 सदस्‍यों ने इसके विरोध में मत दिया था. लोकसभा में यह विधेयक 9 दिसम्बर को पा‍रित हुआ था. यहाँ 311 सदस्‍यों ने इस विधेयक के समर्थन में और 80 ने विरोध में मतदान किया था. गृहमंत्री अमित शाह द्वारा इस विधेयक को संसद में प्रस्तुत किया था.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्‍यक्षता में 4 दिसम्बर को केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल की बैठक में CAB को मंजूरी दी थी. उल्लेखनीय है कि इस विधेयक को पिछले लोकसभा ने भी मंजूरी दे दी थी लेकिन यह राज्‍यसभा में प्रस्‍तुत नहीं किया जा सका और लोकसभा का कार्यकाल ख़त्म होने से विधेयक भी स्वतः निष्प्रभावी हो गया था.

इस विधेयक का उद्देश्य कुछ खास श्रेणियों के अवैध आप्रवासियों को मौजूदा कानून के प्रावधानों से छूट देने के लिए अधिनियम में बदलाव करना है.

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के मुख्य प्रावधान

  1. इस अधिनियम में नागरिकता अधिनियम 1955, पासपोर्ट अधिनियम 1920 और विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 में संशोधन का प्रावधान है.
  2. इस अधिनियम में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से भारत आए अप्रवासियों को नागरिकता के योग्‍य बनाने का प्रावधान है बशर्ते कि वो उन देशों के बहुसंख्यक समुदाय से नहीं हों.
  3. इस अधिनियम में हिन्‍दू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई समुदाय के उन व्‍यक्तियों को नागरिकता देने का प्रावधान है जो पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश और अफगानिस्‍तान से धार्मिक उत्‍पीड़न जैसे कारणों से वर्ष 2014 के अंत तक भारत में आ गए थे.
  4. संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा के क्षेत्रों और इनर लाइन परमिट वाले क्षेत्रों अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम में यह नागरिकता संशोधन विधेयक लागू नहीं होगा.

इनर लाइन ऑफ परमिट क्या है?

बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्युलेशन, 1873 के तहत सीमाई इलाकों (पूर्वोत्तर के राज्यों के ज्यातार इलाकों में) के लिए इनर लाइन ऑफ परमिट (ILP) सिस्टम लागू किया गया था. इन इलाकों में बाहरी लोगों (भारतीयों को भी) को ILP के जरिए बसने की अनुमति दी जाती है.

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची

आदिवासियों के संरक्षण के लिए भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत अधिसूचित (नोटिफाइड) इलाकों को भी CAB के दायरे से बाहर रखा गया है. असम, मेघालय, त्रिपुरा के कुछ क्षेत्रों को छठी अनुसूची के तहत संरक्षित किया गया है.

संविधान का अनुच्‍छेद 14

नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को कई विपक्षी राजनीतिक दलों ने भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 14 का उल्‍लंघन माना है. विधेयक पेश करते हुए केन्‍द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक अनुच्‍छेद 14 का भी उल्‍लंघन नहीं करता. उन्होंने कहा कि 1971 में, श्रीमती इंदिरा गांधी के एक निर्णय में बांग्‍लादेश से आये लोगों को नागरिकता दी गयी थी जबकि पाकिस्‍तान से आए हुए लोगों को नागरिकता नहीं दी गयी.

भारतीय संविधान का अनुच्‍छेद 14 के तहत भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करने की बात कही गयी है.

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शस्‍त्र संशोधन विधेयक-2019 पारित, शस्‍त्र अधिनियम 1959 में संशोधन किया जायेगा

राज्‍यसभा ने 10 दिसम्बर को शस्‍त्र संशोधन विधेयक (Arms Amendment Bill) 2019 पारित कर दिया. लोकसभा इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे चुकी है. संसद (राज्‍यसभा, लोकसभा और राष्ट्रपति) की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लिया है.

इस विधेयक में शस्‍त्र अधिनियम 1959 में संशोधन का प्रस्‍ताव है. इस संशोधन विधेयक में एक व्‍यक्ति को कई हथियार प्राप्‍त करने के लाइसेंस में कटौती करना और संबंधित कानून के उल्‍लंघन पर दण्‍ड की सीमा बढ़ाने का प्रावधान है. इस विधेयक का उद्देश्‍य हथियारों की अवैध तस्‍करी को रोकना है.

विधेयक में लाइसेंस धारक को केवल दो हथियार रखने की अनुमति होगी. विधेयक का उद्देश्‍य हथियार प्राप्‍त करने के लाइसेंस की वैधता तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने की भी व्‍यवस्‍था है. गोलियों के इस्‍तेमाल पर नज़र रखने के लिए प्रत्‍येक गोली पर सीरियल नम्‍बर लिखा जायेगा.

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ISRO ने भारत की नवीनतम रडार इमेजिंग भू-पर्यवेक्षी उपग्रह RISAT-2BR1 का सफल प्रक्षेपण किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 11 दिसम्बर को भारत की नवीनतम रडार इमेजिंग भू-पर्यवेक्षी उपग्रह RISAT-2BR1 का सफल प्रक्षेपण किया. यह प्रक्षेपण आंध्रप्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C-48 प्रक्षेपण यान (राकेट) के माध्यम से किया गया.

44.4 मीटर लंबे PSLV-C-48 का यह 50वां मिशन था. इस प्रक्षेपण में RISAT-2BR1 को 576 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया गया. इस प्रक्षेपण में PSLV-C-48 ने इस्राइल, इटली, जापान और अमरीका के 9 छोटे उपग्रह को भी प्रक्षेपित किया. न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ वाणिज्यिक समझौते के तहत ये विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए गये.

RISAT-2BR1 उपग्रह: एक दृष्टि

  • RISAT-2BR1 का भार 628 किलोग्राम है. यह पृथ्‍वी के रडार चित्र लेने वाला भू-प्रेक्षपण उपग्रह है. यह उपग्रह दिन और रात में काम कर सकता हैं.
  • इस उपग्रह की आयु पांच साल है और ये सैन्य उपयोग के साथ-साथ कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन में भी काम आएगा.
  • यह उपग्रह निगरानी के लिए सिंथेटिक अपर्चर राडार (SAR) का उपयोग करते हैं. इसके द्वारा ख़राब मौसम में भी निगरानी की जा सकती है.
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