भारत ने सुपरसोनिक ऐंटी-शिप मिसाइल SMART का सफल परीक्षण किया

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 5 अक्टूबर को सुपरसोनिक ऐंटी-शिप मिसाइल SMART का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा के वीलर कोस्‍ट से किया गया.

क्‍या है SMART?

SMART का पूरा नाम Supersonic Missile Assisted Release of Torpedo है. यह एक तरह की सुपरसोनिक ऐंटी-शिप मिसाइल है. इसके साथ एक कम वजन का टॉरपीडो लगा है जो पेलोड की तरह इस्‍तेमाल होता है. दोनों मिलकर इसे एक सुपरसोनिक ऐंटी-सबमरीन मिसाइल बना देते हैं. यानी इसमें मिसाइल के साथ पनडुब्‍बी नष्‍ट करने की क्षमता होती है.

इस वेपन सिस्‍टम की रेंज 650 किलोमीटर होगी. ऐंटी-सबमरीन वारफेयर में यह तकनीक भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ा सकती है.

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भारत और बांग्लादेश की नौसेना के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘बोंगोसागर’ का आयोजन

भारत और बांग्लादेश की नौसेना के बीच 3-5 अक्टूबर को द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘बोंगोसागर’ आयोजित किया गया. इसका आयोजन बंगाल की खाड़ी में किया गया था. यह ‘बोंगोसागर’ नौसैनिक अभ्यास ‘बोंगोसागर’ का दूसरा संस्करण था. इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मैत्री बढाना और संयुक्त परिचालन कौशल विकसित करना था.

इस अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं ने सतह युद्ध अभ्यास, नाविक कला विकास और हेलीकॉप्टर संचालन का अभ्यास किया. इसके अलावा दोनों देशों के नौसेनाए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) के साथ संयुक्त रूप से गश्त में हिस्सा लिया.

बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास: एक दृष्टि

बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास का आयोजन भारत और बांग्लादेश के बीच प्रत्येक वर्ष बंगाल की खाड़ी में किया जाता है. यह समुद्री अभ्यास 2019 में शुरू हुआ था.

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हिमाचल प्रदेश में दुनिया की सबसे लंबी सुरंग ‘अटल सुरंग’ का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 अक्टूबर को हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में दुनिया की सबसे लंबी हाईवे सुरंग का उद्घाटन किया. इस सुरंग के खुल जाने की वजह से मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो गई.

रोहतांग दर्रे के नीचे यह ऐतिहासिक सुरंग बनाने का निर्णय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में तीन जून 2000 में लिया गया था. इसकी आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गयी थी. सेरी नाला फाल्ट जोन में 587 मीटर क्षेत्र में सुरंग बनाने का काम सबसे चुनौतीपूर्ण था.

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने इस सुरंग का नाम रोहतांग सुरंग के बजाय अटल सुरंग रखने को मंजूरी दी. इसके निमार्ण पर 3200 करोड़ रूपये की लागत आई है.

इस सुरंग के दोनों द्वारों पर बैरियर लगे हैं. आपात स्थिति में बातचीत के लिए हर 150 मीटर पर टेलीफोन और हर 60 मीटर पर अग्निशमन यंत्र लगे हैं. घटनाओं का स्वत पता लगाने के लिए हर ढाई सौ मीटर पर सीसीटीवी कैमरा और हर एक किलोमीटर पर वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लगी है.

दुनिया में सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग

  • अटल सुरंग दुनिया में सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग है. इसकी लंबाई 9.02 किलोमीटर है. यह मनाली को लाहौल स्पीति घाटी से जोड़ती है.
  • इस सुरंग के शुरू हो जाने के बाद यहाँ का आवागमन हमेशा जारी रहेगा. पहले घाटी छह महीने तक भारी बर्फबारी के कारण शेष हिस्से से कटी रहती थी.
  • सुरंग को हिमालय के पीर पंजाल की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच अत्याधुनिक विशिष्टताओं के साथ समुद्र तल से करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है.
  • अटल सुरंग का दक्षिणी पोर्टल मनाली से 25 किलोमीटर की दूरी पर 3060 मीटर की ऊंचाई पर बना है जबकि उत्तरी पोर्टल 3071 मीटर की ऊंचाई पर लाहौल घाटी में तेलिंग, सीसू गांव के नजदीक स्थित है.
  • घोड़े की नाल के आकार वाली दो लेन वाली सुरंग में आठ मीटर चौड़ी सड़क है और इसकी ऊंचाई 5.525 मीटर है.
  • अटल सुरंग की डिजाइन प्रतिदिन तीन हजार कार और 1500 ट्रक के लिए तैयार की गई है जिसमें वाहनों की अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटे होगी.
  • यह सुरंग सियाचिन ग्लेशियर और अक्साई चिन में स्थित सैन्य उप क्षेत्र को आपूर्ति करने के लिए मार्ग प्रदान करता है.
  • अटल सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) ने किया है. BRO रक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है.
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भारत ने शौर्य मिसाइल ने नए वर्जन का सफल परीक्षण किया

भारत ने 3 अक्टूबर को शौर्य मिसाइल ने नए वर्जन का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा के बालासोर से किया गया. यह मिसाइल संचालन में हल्का व आसान है. यह मौजूदा मिसाइल सिस्टम को मजबूत करेगा.

शौर्य मिसाइल: एक दृष्टि

  • जमीन से जमीन पर मार करने वाला यह बैलेस्टिक मिसाइल परमाणु क्षमता से लैस है. यह मिसाइल 800 किलोमीटर दूर तक टारगेट को तबाह कर सकता है.
  • मौजूदा मिसाइलों के मुकाबले यह हल्का है और इस्तेमाल भी आसान है. टारगेट की ओर बढ़ते हुए अंतिम चरण में यह हाइपरसोनिक स्पीड हासिल कर लेता है.
  • शौर्य मिसाइल का पहला परीक्षण 2008 में ओडिशा के चांदीपुर समेकित परीक्षण रेंज से किया गया था. इसके बाद सितंबर 2011 में इसका दूसरा परीक्षण किया गया था. पहले इसकी क्षमता 750 किलोमीटर दूर तक हथियार ले जाने की थी.

भारत ने हाल ही में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया था, जो 400 किमी दूर तक टारगेट को हिट कर सकता है जो पिछले मिसाइल की क्षमता से 100 किलोमीटर अधिक है.

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भारत ने स्वदेशी बूस्टर युक्त सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल किया

भारत ने 30 सितम्बर को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल किया. इस परीक्षण में स्वदेशी बूस्टर और एयरफ्रेम सेक्शन सहित कई स्वदेशी उप-प्रणालियों युक्त ब्रह्मोस के सतह से सतह तक मार करने वाली वर्जन का परीक्षण किया गया. यह परीक्षण ओडिशा में ITR, बालासोर से किया गया.

ब्रह्मोस मिसाईल: महत्वपूर्ण तथ्यों पर एक दृष्टि

  • ब्रह्मोस के महानिदेशक डॉक्‍टर सुधीर कुमार हैं.
  • ब्रह्मोस एक कम दूरी की सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है.
  • 9 मीटर लंबी इस मिसाइल का वजन लगभग 3 टन है. यह मिसाइल ठोस ईंधन से संचालित होती है.
  • यह दुनिया की सबसे तेज मिसाइल है. यह ध्‍वनि से 2.9 गुना तेज (करीब एक किलोमीटर प्रति सेकेंड) गति से 14 किलोमीटर की ऊँचाई तक जा सकता है.
  • इस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है जिसे अब 400 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है.
  • ब्रम्‍होस का विकास भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस के एनपीओ के संयुक्‍त उद्यम ने किया है.
  • ब्रह्मोस के संस्करणों को भूमि, वायु, समुद्र और जल के अंदर से दागा जा सकता है.
  • इसका पहला परीक्षण 12 जून 2001 को किया गया था.
  • इस मिसाइल का नाम दो नदियों को मिलाकर रखा गया है जिसमें भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्क्वा नदी शामिल है.
  • जमीन और नौवहन पोत से छोड़ी जा सकने बाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाईल पहले ही भारतीय सेना और नौसेना में शामिल की जा चुकी है. इस सफल परीक्षण के बाद ये मिसाइल सेना के तीनों अंगों का हिस्सा बन जायेगी.

सुखोई लड़ाकू विमान से गाइडेड बम छोड़ने का सफल परीक्षण

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 24 मई 2019 को सुखोई लड़ाकू विमान (SU-30 MKI) से 500 किलोग्राम श्रेणी के एक गाइडेड बम छोड़ने का सफल परीक्षण किया था.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितम्बर को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 75वें सत्र को ऑनलाइन संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी का संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह तीसरा संबोधन था. इससे पहले उन्होंने 2014 और 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया था. संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी में ही अपनी बात रखी.

प्रधानमंत्री का उद्बोधन मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र में सुधार, भारत में चल रहे लोककल्याणकारी योजनाएं, कोरोना वैक्सीन के लिए भारत का वैश्विक सहयोग और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर केंद्रित था.

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन के मुख्य बिंदु

  • प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को पुरजोर तरीके से उठाया. उन्होंने 1945 में गठित संयुक्त राष्ट्र के इक्कीसवीं सदी में प्रासंगिकता पर सवाल उठाया.
  • भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसिजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा? एक ऐसा देश जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, एक ऐसा देश जहां विश्व की 18 प्रतिशत से ज्यादा जनसंख्या रहती है, एक ऐसा देश जहां सैकड़ों भाषाएं हैं, सैकड़ों बोलियां हैं, अनेकों पंथ हैं, अनेकों विचारधाराएं हैं.
  • 2 अक्टूबर को विश्व अहिंसा दिवस और 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पहल भारत ने ही की थी. कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंटरनैशनल सोलर अलायंस ये भारत के ही प्रयास हैं.
  • भारत की नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी से लेकर ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी तक, सिक्यॉरिटी ऐंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन इसकी सोच या फिर इंडो-पसिफिक क्षेत्र के प्रति हमारे विचार सभी में इस दर्शन की झलक दिखाई देती है.
  • विश्व के सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के तौर पर भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और डिलिवरी क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के लिए काम आएगी.
  • बीते कुछ वर्षों में रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म इस मंत्र के साथ भारत ने करोड़ों भारतीयों के जीवन में बड़े बदलाव लाने का काम किया है. भारत ने सिर्फ 4-5 साल में 400 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा, 600 मिलियन लोगों को खुले में शौच से मुक्त किया और 500 मिलियन से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज से जोड़ करके दिखाया. आज भारत डिजिटल ट्रांजैक्शन में दुनिया के अग्रणी देशों में है. भारत 2025 तक अपने प्रत्येक नागरिक को टीबी से मुक्त करने के लिए बहुत बड़ा अभियान चला रहा है. भारत अपने गांवों के 150 मिलियन घरों में पाइप से पीने का पानी पहुंचाने का अभियान चला रहा है. भारत ने अपने 6 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड ऑप्टिकल फाइबर से कनेक्ट करने की बहुत बड़ी योजना की शुरुआत की है.
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भारतीय चिकित्सा परिषद का अस्तित्व समाप्त, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का संचालन शुरू

सरकार ने भारतीय चिकित्सा परिषद (Medical Council of India) का अस्तित्व समाप्त कर दिया है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 24 सितम्बर को जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई है. MCI के स्थान पर अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को अस्तित्व में लाया गया है जिसने 25 सितम्बर से संचालन शुरू कर दिया है.

भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) का गठन 1934 में किया गया था. MCI के पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों और मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने से जुड़े मामलों की अपारदर्शी जांच के बीच उच्चतम न्यायालय ने मई 2016 में सरकार को नया कानून आने तक MCI के सभी संवैधानिक कार्यों को देखने के लिए एक समिति की स्थापना करने का निर्देश दिया था.

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC): एक दृष्टि

राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने 8 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) कानून 2019 को मंजूरी प्रदान की थी. यह कानून चिकित्सा शिक्षा, पेशे और संस्थानों से जुड़े सभी पहलुओं के विकास और नियमन के लिए MCI की जगह NMC की स्थापना की बात कहता है. राष्ट्रपति ने 2018 में MCI को भंग कर दिया था.

NMC कानून ने स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थानों में भर्ती होने के लिए राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET) अनिवार्य कर दी. NMC कानून के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष, 10 पदेन सदस्य और 22 अंशकालिक सदस्य होंगे.

प्रोफेसर सुरेश चंद्र शर्मा NMC के पहले अध्यक्ष

प्रोफेसर सुरेश चंद्र शर्मा को NMC का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. वे NMC के पहले अध्यक्ष हैं. कैबिनेट की नियुक्ति कमेटी ने शर्मा की नियुक्ति तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक की अवधि के लिए करने को मंजूरी दी थी. इनके अलावा मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के बोर्ड आफ गवर्नर्स में महासचिव राकेश कुमार वत्स को समान अवधि के लिए आयोग का सचिव नियुक्त किया गया है.

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भारत ने लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और ‘अभ्‍यास’ मिसाइल वाहन का परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 23 सितम्बर को लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और ‘अभ्‍यास’ (ABHYAS) मिसाइल वेहिकल का सफल परीक्षण किया.

‘अभ्‍यास’ मिसाइल वेहिकल

DRDO ने अभ्‍यास का परीक्षण ओडिसा के बालासोर से किया. अभ्‍यास (ABHYAS) हाई स्‍पीड एक्‍सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) मिसाइल वाहन है. इससे पहले मई 2019 में भी इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. यह मिसाइल वाहन 5 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ सकता है. इसकी रफ्तार आवाज की रफ्तार से आधी है. इसमें 2G क्षमता है और 30 मिनट तक ऑपरेट करने की क्षमता है.

लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल

DRDO ने MBT अर्जुन टैंक से लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (AGTM) का सफल परीक्षण किया. AGTM का टेस्‍ट अहमदनगर के आर्मर्ड कॉर्प्‍स सेंटर ऐंड स्‍कूल (ACC&S) की केके रेंज में हुआ. यह मिसाइल DRDO की आर्मामेंट रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट इस्‍टैब्लिशमेंट (ARDE) के कैनन लॉन्‍ड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई गई है.

DRDO द्वारा विकसित लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (AGTM) को कई प्‍लैटफॉर्म से लॉन्‍च किया जा सकता है. इस परीक्षण में ‘अर्जुन’ टैंक का इस्‍तेमाल किया गया. इसकी मारक क्षमता 4 किमी तक है. यह मिसाइल मॉडर्न टैंक्‍स से लेकर भविष्‍य के टैंक्‍स को भी नेस्‍तनाबूद करने में सक्षम है. भारत के पास ‘नाग’ जैसी गाइडेड मिसाइल पहले से है. नाग को NAMICA मिसाइल कैरियर से छोड़ा जाता है.

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कृषि क्षेत्र से संबंधित दो मुख्य विधयेकों को संसद के दोनों सदनों में मंजूरी दी गयी

राज्यसभा ने 20 सितम्बर को कृषि क्षेत्र से संबंधित दो मुख्य विधयेकों को मंजूरी दी. इन दोनों विधयेकों को लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। ये विदेयक- ‘कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020’ और ‘किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ हैं. कृषि मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने दोनों विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया था. ये विधेयक 5 जून 2020 को जारी किए गए समान अध्‍यादेशों का स्‍थान लेंगे.

कृ‍षक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 किसानों को अपनी उपज के इलेक्‍ट्रॉनिक व्‍यापार की सुविधा भी प्रदान करेगा. इससे वे कृषि जिन्‍सों की प्रत्‍यक्ष ऑनलाइन खरीद-फरोख्‍त के लिए लेन-देन प्‍लेटफॉर्म स्‍थापित कर सकेंगे.

किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 के अनुसार पैदावार या फसल उगाने से पहले खेती संबंधी करार (अनुबंध) किए जा सकेंगे. ऐसे समझौते में कृषि उपज की खरीद के लिए निश्चित मूल्‍य का उल्‍लेख किया जा सकेगा.

कृषि विधयेक: मुख्य बिंदु

  • इन विधयेकों के प्रावधानों के अनुसार कृषि उपज और खेती के क्षेत्र में स्‍टॉक सीमा और लाइसेंस राज की समाप्ति होगी. किसानों को अनुबंध खेती से अधिक आय प्राप्त करने का सुनहरा अवसर भी मिलेगा.
  • इससे किसानों की उपज खरीदने वालों की संख्‍या (प्रतिस्‍पर्धा) बढेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा.
  • किसानों को हर तरह के बिचौलियों और रूकावटों से आजाद करेगा. किसान अब यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं कि वे अपने उत्पादों को कहां और किस कीमत पर बेचेंगे.
  • यदि किसान अपनी उपज की बिक्री करेंगे तो उन्‍हें मंडी कर नहीं देना होगा, जो 2-8.5 प्रतिशत तक होता है.
  • इन विधेयकों से कृषि उपज बाजार समिति (AMPC) अधिनियम का प्रभाव किसी भी तरह कम नहीं होगा.
  • कृषि जिन्‍सों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) की प्रणाली जारी रहेगी.
  • प्रस्‍तावित कानूनों से किसानों को अंतर-राज्‍य बाजारों तक पहुंच कायम करने की अतिरिक्‍त सुविधा मिलेगी.
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रक्षा क्षेत्र में स्वत: मंजूरी के जरिये 74 प्रतिशत तक FDI को मंजूरी दी गयी

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्वत: मंजूरी मार्ग से 74 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी दे दी है. विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 17 सितम्बर को इसकी घोषणा की.

मौजूदा FDI नीति के तहत रक्षा उद्योग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमिति है. इसमें 49 प्रतिशत स्वत: मंजूरी के मार्ग से जबकि इससे ऊपर के लिये सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है.

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संसद ने दो चिकित्‍सा विधेयकों को पारित किया

राज्‍यसभा ने 18 सितम्बर को दो चिकित्‍सा विधेयकों को पारित किया. ये विधेयक हैं- होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020. लोकसभा इन विधेयकों को पहले ही पारित कर चुकी है. इन विधेयकों का उद्देश्‍य होम्‍योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए उच्‍चस्‍तरीय चिकित्‍सकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना है.

चिकित्‍सा विधेयक: एक दृष्टि

  • ‘होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020’ में होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है. इस अधिनियम में केंद्रीय होम्योपैथी परिषद की व्यवस्था की गई है जो होम्योपैथिक शिक्षा और प्रेक्टिस का नियमन करेगी.
  • यह विधेयक अप्रैल में जारी होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा. इसके तहत केंद्रीय परिषद की अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने के लिए 1973 के कानून में संशोधन किया गया है.
  • ‘भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020’ को 1970 के भारतीय चिकित्‍सा केन्‍द्रीय परिषद कानून में संशोधन के लिए लाया गया है.
  • यह कानून इस संबंध में अप्रैल में जारी अध्‍यादेश का स्‍थान लेगा. विधेयक में एक वर्ष के अंदर केन्‍द्रीय परिषद के पुनर्गठन का प्रस्‍ताव है. यह केन्‍द्रीय परिषद अप्रैल से एक वर्ष के लिए निलंबित रहेगी. तब तक सरकार निदेशक मंडल का गठन करेगी जिसे केन्‍द्रीय परिषद के अधिकार होंगे. निदेशक मंडल में दस सदस्‍य होंगे.
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भारत जिबूती आचार संहिता में बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुआ

भारत हाल ही में जिबूती आचार संहिता (Djibouti Code of Conduct) में बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुआ है. इस आचार संहिता का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाना है. इस समूह के अन्य पर्यवेक्षक नॉर्वे, जापान, यूके और अमेरिका हैं.

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी इंडो-पैसिफिक नीति के तहत हिंद महासागर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में अपनी भूमिका को और मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए भारत ने जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ पारस्परिक सैन्य लॉजिस्टिक्स समर्थन समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं.

चीन ने अगस्त 2017 में जिबूती में अपना विदेशी सैन्य अड्डा बनाया था. इसके पश्चात् से ही वह हिंद महासागर क्षेत्र में तीव्र विस्तारवादी रणनीति अपना रहा है. चीन की इस नीति की पृष्ठभूमि में भारत के लिये यह समझौता काफी महत्त्वपूर्ण हैं.

जिबूती आचार संहिता: एक दृष्टि

  • जिबूती आचार संहिता (DCOC) को पश्चिमी हिंद महासागर, अदन की खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में समुद्री चोरी और सशस्त्र डकैती को रोकने के से संबंधित एक आचार संहिता के रूप में जाना जाता है. यह 29 जनवरी 2009 को अपनाया गया था.
  • वर्ष 2017 में सऊदी अरब के जेद्दा में आयोजित DCOC में शामिल देशों की एक उच्च-स्तरीय बैठक में एक संशोधित आचार संहिता को अपनाया गया था. इसे DCOC में जेद्दा संशोधन के रूप में जाना जाता है.
  • DCOC में 20 सदस्य देश शामिल हैं. ये देश अदन की खाड़ी, लाल सागर, अफ्रीका के पूर्वी तट और हिंद महासागर क्षेत्र से सटे हैं.
  • DCOC के सदस्य देश: इरिट्रिया, इथियोपिया, मिस्र, कोमोरोस, जॉर्डन, जिबूती, मालदीव, केन्या, मेडागास्कर, मोजाम्बिक, ओमान, मॉरीशस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, सेशेल्स, सोमालिया, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, संयुक्त राज्य अमेरिका और तंजानिया गणराज्य.
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