भारत ने लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और ‘अभ्‍यास’ मिसाइल वाहन का परीक्षण किया

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 23 सितम्बर को लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल और ‘अभ्‍यास’ (ABHYAS) मिसाइल वेहिकल का सफल परीक्षण किया.

‘अभ्‍यास’ मिसाइल वेहिकल

DRDO ने अभ्‍यास का परीक्षण ओडिसा के बालासोर से किया. अभ्‍यास (ABHYAS) हाई स्‍पीड एक्‍सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) मिसाइल वाहन है. इससे पहले मई 2019 में भी इसका सफल परीक्षण किया जा चुका है. यह मिसाइल वाहन 5 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ सकता है. इसकी रफ्तार आवाज की रफ्तार से आधी है. इसमें 2G क्षमता है और 30 मिनट तक ऑपरेट करने की क्षमता है.

लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल

DRDO ने MBT अर्जुन टैंक से लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (AGTM) का सफल परीक्षण किया. AGTM का टेस्‍ट अहमदनगर के आर्मर्ड कॉर्प्‍स सेंटर ऐंड स्‍कूल (ACC&S) की केके रेंज में हुआ. यह मिसाइल DRDO की आर्मामेंट रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट इस्‍टैब्लिशमेंट (ARDE) के कैनन लॉन्‍ड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई गई है.

DRDO द्वारा विकसित लेजर-गाइडेड ऐंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (AGTM) को कई प्‍लैटफॉर्म से लॉन्‍च किया जा सकता है. इस परीक्षण में ‘अर्जुन’ टैंक का इस्‍तेमाल किया गया. इसकी मारक क्षमता 4 किमी तक है. यह मिसाइल मॉडर्न टैंक्‍स से लेकर भविष्‍य के टैंक्‍स को भी नेस्‍तनाबूद करने में सक्षम है. भारत के पास ‘नाग’ जैसी गाइडेड मिसाइल पहले से है. नाग को NAMICA मिसाइल कैरियर से छोड़ा जाता है.

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कृषि क्षेत्र से संबंधित दो मुख्य विधयेकों को संसद के दोनों सदनों में मंजूरी दी गयी

राज्यसभा ने 20 सितम्बर को कृषि क्षेत्र से संबंधित दो मुख्य विधयेकों को मंजूरी दी. इन दोनों विधयेकों को लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। ये विदेयक- ‘कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020’ और ‘किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ हैं. कृषि मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने दोनों विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया था. ये विधेयक 5 जून 2020 को जारी किए गए समान अध्‍यादेशों का स्‍थान लेंगे.

कृ‍षक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 किसानों को अपनी उपज के इलेक्‍ट्रॉनिक व्‍यापार की सुविधा भी प्रदान करेगा. इससे वे कृषि जिन्‍सों की प्रत्‍यक्ष ऑनलाइन खरीद-फरोख्‍त के लिए लेन-देन प्‍लेटफॉर्म स्‍थापित कर सकेंगे.

किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 के अनुसार पैदावार या फसल उगाने से पहले खेती संबंधी करार (अनुबंध) किए जा सकेंगे. ऐसे समझौते में कृषि उपज की खरीद के लिए निश्चित मूल्‍य का उल्‍लेख किया जा सकेगा.

कृषि विधयेक: मुख्य बिंदु

  • इन विधयेकों के प्रावधानों के अनुसार कृषि उपज और खेती के क्षेत्र में स्‍टॉक सीमा और लाइसेंस राज की समाप्ति होगी. किसानों को अनुबंध खेती से अधिक आय प्राप्त करने का सुनहरा अवसर भी मिलेगा.
  • इससे किसानों की उपज खरीदने वालों की संख्‍या (प्रतिस्‍पर्धा) बढेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा.
  • किसानों को हर तरह के बिचौलियों और रूकावटों से आजाद करेगा. किसान अब यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं कि वे अपने उत्पादों को कहां और किस कीमत पर बेचेंगे.
  • यदि किसान अपनी उपज की बिक्री करेंगे तो उन्‍हें मंडी कर नहीं देना होगा, जो 2-8.5 प्रतिशत तक होता है.
  • इन विधेयकों से कृषि उपज बाजार समिति (AMPC) अधिनियम का प्रभाव किसी भी तरह कम नहीं होगा.
  • कृषि जिन्‍सों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) की प्रणाली जारी रहेगी.
  • प्रस्‍तावित कानूनों से किसानों को अंतर-राज्‍य बाजारों तक पहुंच कायम करने की अतिरिक्‍त सुविधा मिलेगी.
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रक्षा क्षेत्र में स्वत: मंजूरी के जरिये 74 प्रतिशत तक FDI को मंजूरी दी गयी

सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्वत: मंजूरी मार्ग से 74 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की मंजूरी दे दी है. विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 17 सितम्बर को इसकी घोषणा की.

मौजूदा FDI नीति के तहत रक्षा उद्योग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमिति है. इसमें 49 प्रतिशत स्वत: मंजूरी के मार्ग से जबकि इससे ऊपर के लिये सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है.

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संसद ने दो चिकित्‍सा विधेयकों को पारित किया

राज्‍यसभा ने 18 सितम्बर को दो चिकित्‍सा विधेयकों को पारित किया. ये विधेयक हैं- होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020. लोकसभा इन विधेयकों को पहले ही पारित कर चुकी है. इन विधेयकों का उद्देश्‍य होम्‍योपैथी और भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए उच्‍चस्‍तरीय चिकित्‍सकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना है.

चिकित्‍सा विधेयक: एक दृष्टि

  • ‘होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020’ में होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है. इस अधिनियम में केंद्रीय होम्योपैथी परिषद की व्यवस्था की गई है जो होम्योपैथिक शिक्षा और प्रेक्टिस का नियमन करेगी.
  • यह विधेयक अप्रैल में जारी होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा. इसके तहत केंद्रीय परिषद की अवधि दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने के लिए 1973 के कानून में संशोधन किया गया है.
  • ‘भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक-2020’ को 1970 के भारतीय चिकित्‍सा केन्‍द्रीय परिषद कानून में संशोधन के लिए लाया गया है.
  • यह कानून इस संबंध में अप्रैल में जारी अध्‍यादेश का स्‍थान लेगा. विधेयक में एक वर्ष के अंदर केन्‍द्रीय परिषद के पुनर्गठन का प्रस्‍ताव है. यह केन्‍द्रीय परिषद अप्रैल से एक वर्ष के लिए निलंबित रहेगी. तब तक सरकार निदेशक मंडल का गठन करेगी जिसे केन्‍द्रीय परिषद के अधिकार होंगे. निदेशक मंडल में दस सदस्‍य होंगे.
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भारत जिबूती आचार संहिता में बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुआ

भारत हाल ही में जिबूती आचार संहिता (Djibouti Code of Conduct) में बतौर पर्यवेक्षक शामिल हुआ है. इस आचार संहिता का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाना है. इस समूह के अन्य पर्यवेक्षक नॉर्वे, जापान, यूके और अमेरिका हैं.

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी इंडो-पैसिफिक नीति के तहत हिंद महासागर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में अपनी भूमिका को और मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए भारत ने जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ पारस्परिक सैन्य लॉजिस्टिक्स समर्थन समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं.

चीन ने अगस्त 2017 में जिबूती में अपना विदेशी सैन्य अड्डा बनाया था. इसके पश्चात् से ही वह हिंद महासागर क्षेत्र में तीव्र विस्तारवादी रणनीति अपना रहा है. चीन की इस नीति की पृष्ठभूमि में भारत के लिये यह समझौता काफी महत्त्वपूर्ण हैं.

जिबूती आचार संहिता: एक दृष्टि

  • जिबूती आचार संहिता (DCOC) को पश्चिमी हिंद महासागर, अदन की खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र में समुद्री चोरी और सशस्त्र डकैती को रोकने के से संबंधित एक आचार संहिता के रूप में जाना जाता है. यह 29 जनवरी 2009 को अपनाया गया था.
  • वर्ष 2017 में सऊदी अरब के जेद्दा में आयोजित DCOC में शामिल देशों की एक उच्च-स्तरीय बैठक में एक संशोधित आचार संहिता को अपनाया गया था. इसे DCOC में जेद्दा संशोधन के रूप में जाना जाता है.
  • DCOC में 20 सदस्य देश शामिल हैं. ये देश अदन की खाड़ी, लाल सागर, अफ्रीका के पूर्वी तट और हिंद महासागर क्षेत्र से सटे हैं.
  • DCOC के सदस्य देश: इरिट्रिया, इथियोपिया, मिस्र, कोमोरोस, जॉर्डन, जिबूती, मालदीव, केन्या, मेडागास्कर, मोजाम्बिक, ओमान, मॉरीशस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, सेशेल्स, सोमालिया, संयुक्त अरब अमीरात, यमन, संयुक्त राज्य अमेरिका और तंजानिया गणराज्य.
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टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने नए संसद भवन के निर्माण का कॉन्ट्रेक्ट हासिल किया

टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने नए संसद भवन के निर्माण का कॉन्ट्रेक्ट हासिल किया है. संसद भवन के निर्माण के लिए लगाई गई बोली के आधार पर यह कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है. टाटा ने निर्माण के लिए 861.90 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. इस बोली में दूसरे स्थान पर लार्सन एंड टुब्रो थे जिसने 865 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.

CPWD ने नए संसद भवन के निर्माण में 940 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान जताया था. प्रोजेक्‍ट के एक साल में पूरे होने की संभावना है. नई बिल्डिंग को त्रिकोणाकार में डिजाइन किया जाएगा.

देश को आजाद हुए 75 साल होने वाले हैं और देश का संसद भवन अब काफी पुराना हो चुका है. सरकार चाहती है कि जब देश 15 अगस्त 2022 को अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा हो तब सांसद नए संसद भवन में बैठें.

पुराना संसद भवन: एक दृष्टि

मौजूदा संसद की बिल्डिंग का निर्माण ब्रिटिशकाल में किया गया था और यह वृत्‍ताकार है. यह 1911 में बनना शुरू हुआ था और 1927 में इसका उद्घाटन हुआ था. तब अंग्रेजों के शासन के दौर में दिल्ली राजधानी बनी थी.

किंग जॉर्ज पंचम ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की थी. पंचम ने नई राजधानी के निर्माण के लिए एडविन लुटियंस को नामित किया था. वर्तमान संसद भवन और राष्ट्रपति भवन को एडविन लुटियंस ने ही डिजाइन किया था.

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भारतीय संस्कृति की उत्पत्ति और विकास पर अध्ययन के लिए समिति का गठन

भारतीय संस्कृति की उत्पत्ति और विकास पर एक अध्ययन करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. इसकी घोषणा केंद्रीय संस्कृति मंत्री और पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने की. इस समिति में 16 सदस्य शामिल हैं, जिनमें भारतीय पुरातत्व सोसायटी के अध्यक्ष केएन दीक्षित हैं.

यह समिति भारतीय संस्कृति के उद्भव और विकास का एक समग्र अध्ययन 12,000 साल पहले से वर्तमान तक करेगी. यह दुनिया भर की अन्य संस्कृतियों के साथ अध्ययन और उसके इंटरफेस का भी अध्ययन करेगा.

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प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना का शुभारंभ किया गया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 10 सितम्बर को डिजिटल माध्यम से ‘प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना’ का उद्घाटन किया. उन्‍होंने ई-गोपाला ऐप की भी शुरूआत की. इसका उद्देश्‍य मत्‍स्‍य पालन, मत्‍स्‍य बीज में व्‍यापक बेहतरी, संबंधित बाजार और सूचना पोर्टल की व्‍यवस्‍था करना है. इस ऐप को किसान सीधे तौर पर इस्‍तेमाल कर सकते हैं. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने बिहार में मत्‍स्‍य पालन और पशुपालन क्षेत्रों से संबंधित अनेक कार्यक्रमों की शुरूआत की.

प्रधानमंत्री मत्‍स्‍य संपदा योजना पर 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि निवेश की जायेगी. अब तक मत्‍स्‍य पालन क्षेत्र में निवेश की जाने वाली ये सबसे बड़ी राशि है. इसका उद्देश्‍य वर्ष 2024-25 तक अतिरिक्‍त 70 लाख टन मछली उत्‍पादन बढ़ाना है.

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पांच रफाल लडाकू विमानों को अम्बाला के वायुसेना अड्डे पर भारतीय सेना में शामिल किया गया

पांच रफाल लडाकू विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 सितम्बर को इन विमानों को अम्बाला के वायुसेना अड्डे पर एक विशेष समारोह में भारतीय सेना में शामिल किया. इस दौरान फ्रांस की मंत्री फ्लोरेंस पार्ले भी उपस्थित थीं.

वायुसेना में शामिल किये गये ये रफाल लडाकू विमान 17 स्क्वाड्रन का एक हिस्सा है जिसे ‘गोल्डन एरोज’ कहा जाता है. पांच रफाल विमानों की पहली खेप 27 जुलाई को फ्रांस से अम्बाला के अम्बाला वायुसेना अड्डे पर पहुंची थी.

भारत ने 36 राफेल लड़ाकू जेट की खरीद के लिए फ्रांस के साथ समझौता किया है. सभी राफेल विमानों की आपूर्ति 2022 तक पूरी की जानी है.

रफेल का लांग रेंज ऑपरेशन अपने वजन के बराबर अर्मामेंट और एडिशनल सेल्फ कैरी करने की कैपेसिटी, 60 लैंडिंग ग्राउंड से ऑपरेट करने की एवलिटी, हाई स्पीड जैसी खुबियां इसे दुनिया के बेस्ट एयरक्राफ्ट में से एक बनाती हैं.

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भारत ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल का सफल परीक्षण किया

भारत ने 7 सितम्बर को हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिशा के बालासोर में किया गया. इसका विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने स्वदेशी प्रौद्योगिकी से किया है. यह प्रौद्योगिकी अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक व्‍हीकल्‍स के निर्माण में मददगार साबित होगी.

भारत विश्व का चौथा देश बना

अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा ऐसा देश बन गया है जिसने खुद की हाइपरसोनिक टेक्‍नोलॉजी विकसित कर ली और इसका सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. फिलहाल अमेरिका, चीन और रूस ने हाइपरसोनिक मिसाइलें विकसित कर ली है. दुनिया के किसी देश के पास फिलहाल इसका डिफेंस सिस्‍टम नहीं है.

सफल टेस्‍ट के मायने

HSTDV के सफल परीक्षण से DRDO स्वदेशी तकनीक से स्‍क्रैमजेट इंजन के साथ हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर सकता है. इसकी रफ्तार दो किलोमीटर प्रति सेकेंड से ज्‍यादा होगी. इससे अंतरिक्ष में सैटलाइट्स भी कम लागत पर लॉन्‍च किया जा सकते हैं. इससे भारत को अगली ब्रह्मोस-II मिसाइल का हाइपरसोनिक जेनरेशन तैयार करने में मदद मिलेगी.

हाइपरसोनिक मिसाइल क्या है?

हाइपरसोनिक मिसाइल की गति आवाज से 5 गुना ज्‍यादा होती है. तेज गति के कारण यह मिसाइल दुनिया के किसी भी कोने में दुश्मन के ठिकाने को मिनटों में निशाना बनाया जा सकता है. आम मिसाइलें बैलस्टिक ट्रैजेक्‍टरी फॉलो करती हैं. इसका मतलब है कि उनके रास्‍ते को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है. इससे दुश्‍मन को तैयारी और काउंटर अटैक का मौका मिलता है जबकि हाइपरसोनिक वेपन सिस्‍टम कोई तयशुदा रास्‍ते पर नहीं चलता. इस कारण दुश्‍मन का एयर डिफेंस सिस्‍टम इस मिसाइल के टारगेट को आसानी से पता नहीं लगा सकता.

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ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिये राष्‍ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद की स्‍थापना

केन्‍द्र सरकार ने एक अधिसूचना के जरिये राष्‍ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद (National Council for Transgender- NCT) की स्‍थापना की है. इसका गठन ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम’ 2019 के तहत किया गया है. सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री इसके पदेन अध्‍यक्ष और सामाजिक न्‍याय तथा अधिकारिता राज्‍य मंत्री इसके पदेन उपाध्‍यक्ष होंगे.

राष्‍ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद के कार्य

  • राष्‍ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद सरकार को ट्रांसजेंडर व्‍यक्तियों के संदर्भ में नीतियां, कार्यक्रम, कानून और परियोजनाएं तैयार करने के बारे में सलाह देगी.
  • परिषद ट्रांसजेंडरों को समान अवसर और पूर्ण भागीदारी प्रदान करने से संबंधित नीतियों तथा कार्यक्रमों के प्रभाव का मूल्‍यांकन करेगी और उन पर निगरानी रखेगी.
  • राष्‍ट्रीय परिषद ट्रांसजेंडरों से संबंधित मामलों का संचालन करने वाले सभी सरकारी विभागों और अन्‍य सरकारी तथा गैर सरकारी संगठनों की गति‍विधियों की समीक्षा करेगी और उनके बीच समन्‍वय करेगी.
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संयुक्‍त पात्रता परीक्षा के लिए राष्‍ट्रीय भर्ती संस्था के गठन को मंजूरी

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने सरकारी नौकरियों के लिए संयुक्‍त पात्रता परीक्षा (Common Eligibility Test) के आयोजन के लिए राष्‍ट्रीय भर्ती संस्था (National Recruitment Agency) के गठन को मंजूरी दी है. यह संस्था समूह ‘ख’ और समूह ‘ग’ में गैर-तकनीकी पदों के लिए उम्‍मीदवारों की जांच और चयन के लिए सामान्‍य पात्रता परीक्षा संचालित करेगी. भारत सरकार ने NRA के लिए 1517.57 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं.

इस एजेंसी में रेल मंत्रालय, वित्‍त मंत्रालय, कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) और बैंकिंग कर्मी चयन संस्‍थान (IBPS) के प्रतिनिधि होंगे.

राष्‍ट्रीय भर्ती संस्था: मुख्य बिंदु

  • राष्‍ट्रीय भर्ती संस्था (NRA) समूह सरकार के सभी ‘ख’ और समूह ‘ग’ में गैर-तकनीकी पदों के लिए एक सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) आयोजित करेगी.
  • स्नातक, उच्च-माध्यमिक (12वीं पास) और मैट्रिक (10वीं पास) वाले उम्‍मीदवारों के लिए अलग-अलग CET का संचालन किया जाएगा.
  • CET के अंक परिणाम घोषित होने की तिथि से तीन वर्ष की अवधि के लिए मान्‍य होंगे. मान्‍य अंकों में सर्वश्रेष्‍ठ अंकों को उम्‍मीदवार के मौजूदा अंक माना जाएगा. उम्‍मीदवार अधिकतम आयु सीमा से पहले CET कितनी बार भी दे सकेगा.
  • सरकार की मौजूदा नीति के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्‍य पिछडा वर्ग और अन्‍य श्रेणी के उम्‍मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी.
  • उम्‍मीदवारों को सामान्‍य पात्रता परीक्षा के पोर्टल पर पंजीकरण कराने और अपनी पंसद का केन्‍द्र चुनने की सुविधा होगी.
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