सुप्रीम कोर्ट ने रफाल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में जांच की याचिका को नामंजूर किया

सुप्रीम कोर्ट ने 36 रफाल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में न्‍यायालय की निगरानी में जांच की मांग संबंधी पुनर्विचार याचिकाओं को आज खारिज कर दिया. न्‍यायालय ने कहा कि पुनर्विचार याचिकाएं सुनवाई लायक नहीं है. तीन न्‍यायाधीशों की पीठ ने रफाल सौदे में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग भी नामंजूर कर दी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ ने फैसला सुनाया.

इन याचिकाओं में 14 दिसम्‍बर 2018 के उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी जिसमें न्‍यायालय ने कहा था कि रफाल खरीद के निर्णय से संबंधित प्रक्रिया में संदेह का कोई सवाल ही नहीं है.

न्‍यायालय में दायर पुनर्विचार याचिकाओं में पूर्व केन्‍द्रीय मंत्रियों यशवंत सिन्‍हा और अरूण शौरी तथा अधिवक्‍ता प्रशांत भूषण की याचिकाएं भी शामिल थीं. याचिका में आरोप लगाया गया है कि रफाल सौदे से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍यों को दबाया गया है, इसलिए इसकी आपराधिक जांच की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश के कार्यालय को सूचना के अधिकार के अंतर्गत माना

सुप्रीम कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) के कार्यालय को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत माना है. कोर्ट ने 13 नवम्बर को दिए अपने निर्णय में इस मामले में 2010 में दिए गये दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

अदालत के फैसले में कहा गया है कि CJI ऑफिस एक पब्लिक अथॉरिटी है, इसके तहत ये RTI के तहत आएगा. हालांकि, इस दौरान दफ्तर की गोपनीयता बरकरार रहेगी. अदालत ने कहा कि सूचना देने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं होती.

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)

  • भारतीय संसद ने 15 जून, 2005 को सूचना का अधिकार अधिनियम (Right to Information Act) पारित किया था और 12 अक्टूबर 2005 को लागू कर दिया गया था.
  • RTI का तात्पर्य है, सूचना पाने का अधिकार. इसके तहत सरकारी विभागों को नागरिकों द्वारा मांगी गयी सूचना का जवाब निश्चित समय के भीतर देना पड़ता है.
  • RTI अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता का बढ़ावा देना व सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है.

उच्‍चतम न्‍यायालय ने कर्नाटक विधानसभा के 17 अयोग्य विधायकों को चुनाव लड़ने की छूट दी

उच्‍चतम न्‍यायालय ने कर्नाटक विधानसभा अध्‍यक्ष के 17 विधायकों की अयोग्‍यता के फैसले पर 13 नवम्बर को अपना फैसला सुनाया. अपने फैसले में न्‍यायालय ने विधानसभा अध्‍यक्ष द्वारा 17 विधायकों को अयोग्य ठहराने के फैसले को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा है, साथ ही अयोग्य विधायकों को चुनाव लड़ने की भी इजाजत दे दी है.

न्‍यायमूर्ति एनवी रमना, न्‍यायमूर्ति संजीव खन्‍ना और न्‍यायमूर्ति कृष्‍ण मुरारी की तीन सदस्‍यीय खंडपीठ ने कहा कि यदि इस चुनाव में अयोग्‍य घोषित किए गए विधायक चुनाव जीतते हैं तो वे मंत्री या लोक अधिकारी हो सकते हैं.

जुलाई 2019 में कर्नाटक विधानसभा अध्‍यक्ष रमेश कुमार ने कांग्रेस और जनता दल एस की शिकायत के आधार पर 17 विधायकों को अयोग्‍य करार दिया था. ये विधायक विधानसभा में विश्‍वास मत के दौरान सदन से अनुपस्थित रहे थे, जिससे तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री कुमारस्‍वामी सदन में विश्वासमत हासिल नहीं कर पाए और उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. उसके भाजपा विधायक दल के नेता येदियुरप्पा के नेतृत्व में कर्नाटक में सरकार बनी थी.

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन को मंजूरी, अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने को मंजूरी दे दी. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की 12 नवम्बर को अनुशंसा की थी. इस दौरान महाराष्ट्र की विधानसभा निलंबित रहेगी.

राज्य में किसी भी दल के संवैधानिक तरीके से सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होने के कारण राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी.

संवैधानिक तरीके से सरकार बनाने में बिफल
महाराष्ट्र के राज्यपाल ने बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने का मौका दिया था. उनकी तरफ से हर संभव कोशिश के बाद भी सरकार का गठन संविधान के मुताबिक नहीं किया जा सका.

महाराष्ट्र विधानसभा में किसी भी दल को बहुमत नहीं
288 सदस्यों की महाराष्ट्र विधानसभा के लिए हाल ही में चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुआ था. इस चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इस गठबंधन ने 161 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत प्राप्त किया था, किन्तु मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति नहीं बन पाने के कारण नये विधानसभा का गठन नहीं किया जा सका.

इस विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सर्वाधिक 105 सीटें जबकि गठबंधन के सहयोगी शिवसेना ने 56 सीटें जीते थे. विपक्षी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गठबंधन ने 98 सीटें जीतने में सफल हुई थी. बाकी 29 सीटें छोटे दलों और निर्दलियों ने जीते. यहाँ सरकार के गठन के लिए आवश्यक बहुमत के लिए 145 सीटों (निर्वाचित सदस्यों) की जरूरत है.

अनुच्छेद 356: एक दृष्टि

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356, केंद्र सरकार को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने का अधिकार देता है.
  • किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता या संविधान के स्पष्ट उल्लंघन की दशा में उस राज्य के राज्यपाल की सिफारिश पर अनुच्छेद 356 का उपयोग का राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.
  • राष्ट्रपति शासन उस स्थिति में भी लागू होता है, जब राज्य विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं हो.
  • राष्ट्रपति शासन एक समय में 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है, बाद में लोकसभा व राज्यसभा की सहमती से इस अवधि को अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है.
  • अनुच्छेद 356 भारतीय संविधान में 1950 में लागू किया गया था. अनुच्छेद 356 को पहली बार 31 जुलाई 1957 को लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गयी केरल की कम्युनिस्ट सरकार बर्खास्त करने के लिए किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाया

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर 9 नवम्बर को सर्वसम्मति से फैसला सुनाया. कोर्ट ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को रामलला का बताया. न्‍यायालय ने निर्मोही अखाड़े की उस याचिका को नामंजूर कर दिया जिसमें विवादित जमीन पर नियंत्रण की मांग की गई थी.

कोर्ट ने केंद्र सरकार को 3 महीने के भीतर बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का गठन कर विवादित स्थान को मंदिर निर्माण के लिए देने को कहा. साथ ही कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दिए जाने का आदेश दिया.

5 जजों की बेंच ने फैसला सुनाया
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया. इस बेंच में मुख्य न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर थे.

अयोध्या भूमि विवाद में मध्‍यथता का प्रयास विफल हो जाने के बाद संविधान पीठ ने इस मामले में 6 अगस्त से रोजाना सुनवाई शुरू की थी. 16 अक्तूबर को न्यायालय ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था.

उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ सुनवाही
2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं. उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय में कहा गया था कि विवादित भूमि को दावेदारों में बराबर बांट दिया जाना चाहिए. इस विवाद में तीन प्रमुख पक्ष हिन्दू महासभा, निर्मोही अखाडा़ और मुस्लिम वक्फ बोर्ड हैं.

ASI की रिपोर्ट पर फैसला
कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को आधार मानते हुए कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद किसी खाली स्थान पर नहीं बनाई गई थी. मस्जिद के नीचे विशाल संरचना थी जो इस्‍लामिक संरचना नहीं थी. ASI ने इसे 12वीं सदी का मंदिर बताया था.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद भारत का नया मानचित्र जारी किया गया

केंद्र सरकार ने नये केंद्रशासित प्रदेश – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनाने के बाद भारत का नया राजनीतिक मानचित्र 3 नवम्बर को जारी किया. भारत के इस मानचित्र में इन दोनों केंद्रशासित प्रदेशों को भी दिखाया गया है. जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद नए मानचित्र में 28 राज्य और 9 केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं.

  • नए मानचित्र में केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में करगिल और लेह जिले शामिल हैं और पहले के जम्मू-कश्मीर राज्य के शेष जिले नवगठित केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बने रहेंगे. इस मानचित्र में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान लद्दाख क्षेत्र में है.
  • नए मानचित्र में POK के मुजफ्फराबाद और मीरपुर को भी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा दिखाया गया है. भारत हमेशा से इन दोनों जिलों को अपना हिस्सा बताता रहा है.
  • लद्दाख का लेह जिला क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा जिला होगा. इसके अलावा कुपवाड़ा, बांदीपोरा, बारामूला, पूंछ, बडगाम, शोपियां, कुलगाम, किश्तवाड़, उधमपुर, डोडा, सांबा, जम्मू, कठुआ, रामबन, राजौरी, अनंतनाग, पुलवामा, श्रीनगर, रियासी और गांदरबल जिले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा होंगे.

झारखंड में विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा की गयी

झारखंड में विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा 1 नवम्बर को की गयी. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने इसकी औपचारिक घोषणा की.

चुनाव आयोग की घोषणा के अनुसार राज्य में 81 विधानसभा सीटों पर पांच चरणों में मतदान होंगे. पहले चरण का मतदान 30 नवम्‍बर को जबकि पांचवें और अंतिम चरण का मतदान 20 दिसम्बर को होगा. मतगणना 23 दिसम्‍बर को होगी.

चुनाव की घोषणा के साथ झारखंड में चुनाव आचार सहिंता लागू हो गई है. झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 जनवरी 2020 को पूरा हो रहा है और उससे पहले नई सरकार का गठन किया जाना है. राज्य में कुल 2 करोड़ 26 लाख 58 हज़ार 948 मतदाता है.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आया

31 अक्टूबर 2019 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती पर दो केन्द्रशासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आ गये. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बदला गया हो. अब देश में कुल राज्यों की कुल संख्या 28 और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो गयी है.

जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के उप-राज्‍यपालों का शपथ ग्रहण

जम्मू-कश्मीर: गिरीश चन्‍द्र मुरमु को केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का पहला उप-राज्‍यपाल नियुक्त किया गया है. जम्‍मू कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश गीता मित्‍तल ने 31 अक्टूबर को उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

लद्दाख: राधा कृष्ण माथुर को केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख का पहला उप-राज्‍यपाल (लेफ्टि‍नेट गवर्नर) नियुक्त किया गया है. जम्‍मू कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश गीता मित्‍तल ने 31 अक्टूबर को लेह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

जम्मू-कश्मीर राज्य का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन

इस वर्ष पांच अगस्त को केन्द्र ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया था.

पुनर्गठन कानून के मुख्य बिन्दु
  • केंद्रशासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर में पुद्दुचेरी की तर्ज पर एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्‍यमंत्री होगा. जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य की विधान परिषद समाप्‍त कर दी गयी है. सीटों के पुनर्निर्धारण के बाद जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा का पुनर्गठन होगा.
  • लद्दाख, अंडमान और निकोबार की तर्ज पर केंद्रशासित प्रदेश होगा और सीधे उप-राज्‍यपाल द्वारा संचालित होगा. लद्दाख में एक हिल काउंसिल होगी जो उप-राज्‍यपाल के अधीन होगी.
  • लद्दाख और जम्‍मू-कश्‍मीर दोनों के लिए एक ही जम्‍मू-कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय होगा.
  • 106 केंद्रीय कानून दोनों नए केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होंगे. इनमें आधार अधिनियम-2016, भारतीय दंड संहिता-1860 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 शामिल हैं.
  • अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग तथा अल्‍पसंख्‍यक आयोग दोनों संघ शासित प्रदेशों में बनाए जाएंगे.

यूरोपीय संघ के सांसदों के शिष्टमंडल ने जम्मू-काश्मीर का दौरा किया

विभिन्‍न यूरोपीय देशों के 23 संसद सदस्‍यों के शिष्‍टमंडल ने 29-30 अक्टूबर को जम्मू-काश्मीर का दौरा किया. इस शिष्‍टमंडल में यूरोपीय संसद के इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड से संबंधित सदस्‍य शामिल थे. कश्मीर जाने से पहले इन सांसदों ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी.

काश्मीर की स्थिति के बारे पाकिस्तान के बयानों से निपटने तथा सरकार की विकास और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट के लिए यह एक प्रमुख कूटनीतिक कदम थी. यह शिष्टमंडल संविधान के अनुच्छेद 370 के अंतर्गत जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा निरस्त किए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के सरकार के निर्णय के बाद राज्य का दौरा करने वाला पहला विदेशी शिष्टमंडल था.

यूरोपीय शिष्टमंडल ने दो दिन की यात्रा के दौरान पंचों और सरपंचों सहित विद्यार्थियों, महिलाओं, व्‍यापारियों और फल उत्‍पादकों से भेंट की. शिष्‍टमंडल ने डल झील में शिकारा भ्रमण भी किया. उनकी यात्रा का उद्देश्‍य कश्‍मीर क्षेत्र में समग्र स्थिति का मौके पर जाकर ज़ायजा लेना था.

यूरोपीय शिष्टमंडल ने इस यात्रा के क्रम में आतंकवाद को समाप्त करने के प्रयासों में भारत का समर्थन किया. सांसदों ने कहा कि स्‍थाई शांति और आतंकवाद के सफाये के प्रयासों में वे भारत के साथ हैं. उन्‍होंने अनुच्‍छेद 370 को हटाए जाने को भारत का आंतरिक मामला बताया.

दिव्यांगजन और 80 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक को डाक-मतपत्र से अपना वोट देने की अनुमति

निर्वाचन आयोग की सिफारिश पर विधि और न्याय मंत्रालय ने चुनाव संचालन नियम 1961 में संशोधन किया है. इस संशोधन के बाद दिव्यांगजन और 80 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक अब अपना वोट डाक-मतपत्र से दे सकेंगे. ऐसे मतदाताओं के लिए मतदान केंद्र तक जाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत वोट देने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा.

संशोधित नियम के अनुसार संबंधित व्यक्ति को नए फॉर्म 12D में आवेदन करना होगा. यह आवेदन-पत्र चुनाव अधिसूचना जारी होने के पांच दिन के अंदर चुनाव अधिकारी तक पहुंच जाने चाहिए. आवेदन मिलने के बाद मतदाता को डाक मतपत्र जारी किया जाएगा. वोट दर्ज कराए जाने के बाद डाक मतपत्र निर्दिष्ट केंद्र में जमा कराए जाएंगे.

भारत ने ‘अंरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संस्था’ में पाकिस्तान की शिकायत की

भारत ने 28 अक्टूबर को ‘अंरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संस्था’ (International Civil Aviation Organisation) में पाकिस्तान की शिकायत की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सऊदी अरब दौरे के लिए विमान को अपने एयरस्पेस से उड़ने की मंजूरी न देने के कारण यह शिकायत की गयी है.

यह दूसरा मौका है, जब पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान को अपने एयरस्पेस से उड़ने की अनुमति नहीं दी है. इससे पहले सितंबर में उनके अमेरिका दौरे के वक्त भी पाकिस्तान ने ऐसा ही किया था.

‘अंरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संस्था’ एक वैश्विक संस्था है. इसके नियमों के मुताबिक एक देश मंजूरी मांगता है और दूसरा देश इसकी अनुमति देता है.

सरकार ने 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट ‘तमन्ना’ शुरू की

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए एक उच्च-स्तरीय अभिक्षमता या कौशल परीक्षा का मॉड्यूल ‘तमन्ना’ (Try And Measure Aptitude And Natural Abilities) तैयार किया है.

‘तमन्ना’ का उद्देश्य 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों के एप्टीट्यूड का पता लगाना है, ताकि वह किस दिशा में अपना करियर बना सकते हैं.