प्रधानमंत्री ने भारतीय अंतरिक्ष संघ का शुभारंभ किया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 अक्तूबर को ‘भारतीय अंतरिक्ष संघ’ (Indian Space Association – ISpA) का शुभारंभ किया था. ISpA अंतरिक्ष और उपग्रह कंपनियों का प्रमुख उद्योग संगठन है जो भारतीय अंतरिक्ष उद्योग का सामूहिक प्रतिनिधि होगा.

मुख्य बिंदु

भारतीय अंतरिक्ष संघ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के अनुरूप देश को स्‍वालम्‍बी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनाने में सहयोग देगा.

ISpA के संस्थापक सदस्यों में नेल्को (टाटा समूह), भारती एयरटेल, लार्सन एंड टुब्रो, मैपमायइंडिया, वनवेब, वालचंदनगर इंडस्ट्रीज और अनंत टेक्नोलॉजी लिमिटेड शामिल हैं. मुख्य सदस्यों में BEL, गोदरेज, ह्यूजेस इंडिया, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स, एज़िस्टा-BST एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और मैक्सार इंडिया शामिल हैं.

ISpA के प्रथम अध्यक्ष जयंत पाटिल (एलएंडटी-एनएक्सटी रक्षा के वरिष्ठ कार्यकारी उपाध्यक्ष) होंगे.

ISpA क्या है?

ISpA देश में अंतरिक्ष और उपग्रह कंपनियों के लिए एक प्रमुख उद्योग निकाय के रूप में कार्य करेगा. यह भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की दिशा में काम करेगा, जिसमें भारत में क्षमता निर्माण और अंतरिक्ष आर्थिक हब और इन्क्यूबेटरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.

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आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण, 07 नई कॉर्पोरेट संस्थाओं में विभाजित

भारत के आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) को 01 अक्टूबर, 2021 से भंग कर दिया गया है. OFB भारत में हथियारों और सैन्य उपकरणों का प्रमुख उत्पादक था. 1 अक्टूबर के बाद, इसकी 41 फैक्ट्रियों को 7 नवगठित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) में स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

ये सात नई सरकारी स्वामित्व वाली कॉर्पोरेट संस्थायें वाहन, गोला-बारूद और विस्फोटक, हथियार और उपकरण, ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स गियर, सैनिक आराम के आइटम, पैराशूट और सहायक उत्पाद का उत्पादन करेंगी.

OFB के निगमीकरण का उद्देश्य आयुध आपूर्ति में स्वायत्तता, जवाबदेही और दक्षता में सुधार लाना है. OFB की 41 फैक्ट्रियों को जिन सात नई कॉरपोरेट इकाइयों में बांटा जाएगा. ये इकाई हैं:

  1. गोला बारूद और विस्फोटक समूह (मुनिशन इंडिया लिमिटेड)
  2. वाहन समूह (बख्तरबंद वाहन निगम लिमिटेड)
  3. हथियार और उपकरण समूह (उन्नत हथियार और उपकरण इंडिया लिमिटेड)
  4. ट्रूप कम्फर्ट आइटम्स ग्रुप (ट्रूप कम्फर्ट्स लिमिटेड)
  5. सहायक समूह (यंत्र इंडिया लिमिटेड)
  6. ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स समूह (इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड)
  7. पैराशूट समूह (ग्लाइडर्स इंडिया लिमिटेड)

आयुध निर्माणी बोर्ड क्या है?

भारत के आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board) भारतीय सशस्त्र बलों के लिए सैन्य उपकरणों और हथियारों का मुख्य उत्पादक और आपूर्तिकर्ता था. 240 साल पुराने इस द्वारा देश के 41 आयुध कारखानों को नियंत्रित किया जाता था. यह रक्षा मंत्रालय के अधीन एक अधीनस्थ कार्यालय के रूप में कार्य कर रहा था.

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आकाश मिसाइल के प्राइम संस्करण का सफल परीक्षण

भारत ने 27 सितम्बर को आकाश मिसाइल के प्राइम संस्करण का सफल परीक्षण किया था. यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर एकीकृत परीक्षण केंद्र से किया गया. परीक्षण के दौरान मिसाइल ने मानव रहित डमी आकाशीय लक्ष्य को इंटरसेप्ट किया और सटीक निशाना साध कर उसे ध्वस्त कर दिया.

‘आकाश प्राइम’ मौजूदा आकाश मिसाइल सिस्टम के मुकाबले स्वदेशी उन्नत सटीकता वाले उपकरण से लैस है. इसके अलावा अधिक ऊंचाई पर कम तापमान में भी इसका प्रदर्शन भरोसेमंद है. मौजूदा आकाश मिसाइल के ग्राउंड सिस्टम में बदलाव कर इसका फ्लाइट टेस्ट किया गया है.

आकाश मिसाइल: एक दृष्टि

आकाश मिसाइल एक मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा प्रणाली है. इसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. यह मिसाइल भारतीय सेना में पहले से शामिल है. इस मिसाइल का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा किया जाता है.

आकाश मिसाइल की मारक क्षमता 50-80 किमी तक है. यह मिसाइल दुश्मन के लड़ाकू जेट और बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर कर सकती है.

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प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरूआत की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 27 सितम्बर को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) की शुरूआत की. यह अस्‍पतालों में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. 15 अगस्त 2020 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नेइस मिशन की प्रायोगिक परियोजना की घोषणा की थी.

क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन?

इस मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को डिजिटल स्वास्थ्य आईडी उपलब्ध कराया जाएगा, जिसपर संबंधित व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकॉर्ड अपलोड होगा. डिजिटल माध्‍यम से उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जायेगा. इसमें लोगों के स्वास्थ्य के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी होगी. इस आईडी से कोई भी व्यक्ति, अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को मोबाइल ऐप के जरिये देख सकेगा.

इस स्वास्थ्य आईडी में प्रत्येक व्यक्ति की बीमारी, उपचार, रिपोर्ट और दवाइयों का भी ब्यौरा होगा. इसके अलावा इसमें चिकित्सकों, अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदाताओं के संबंध में भी जानकारी होगी. इसके माध्यम से किसी व्यक्ति के मेडिकल रिकार्ड को बिना किसी कागजी डॉक्यूमेंट के साझा किया जा सकेगा.

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अभी प्रायोगिक तौर पर छह केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है. ये हैं- अंडमान और निकोबार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुदुचेरी.

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नया पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए कस्तूरीरंगन समिति का गठन

केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों, शुरूआती बाल्यावस्था, अध्यापक और वयस्क शिक्षा के लिए नया स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने को लेकर 12 सदस्यीय एक समिति का गठन किया है. यह समिति भारत में स्कूलों के लिए पाठ्यक्रम, पाठ्य पुस्तक और शिक्षण प्रथाओं के लिए एक दिशानिर्देश के रूप में कार्य करेगा

के कस्तूरीरंगन समिति के अध्यक्ष

इसरो के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन को इन चार राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा (national curriculum frameworks – NCFs) को विकसित करने वाले समिति का अध्यक्ष बनाया गया है. वह राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) मसौदा समिति के भी अध्यक्ष भी थे.

अन्य सदस्य: राष्ट्रीय शिक्षा योजना एवं प्रशासन संस्थान के चांसलर महेश चंद्र पंत, नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद शर्मा, जामिया मिलिया इस्लामिया की कुलपति नजमा अख्तर, आंध्र प्रदेश के केन्द्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के कुलपति टीवी कट्टिमणि, आईआईएम जम्मू के अध्यक्ष मिलिंद कांबले और आईआईटी गांधीनगर के अतिथि प्रोफेसर मिशेल दनिनो, बठिंडा में पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय कुलाधिपति जगबीर सिंह, भारतीय मूल के अमेरिकी गणितज्ञ मंजुल भार्गव, प्रशिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता एमके श्रीधर, ‘लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन’ (एलएलएफ) के संस्थापक निदेशक धीर झिंगरान, और एकस्टेप फाउंडेशन के सह-संस्थापक एवं सीईओ शंकर मारुवाड़ा इस पैनल में शामिल हैं.

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C-295 परिवहन विमान की खरीदारी को मंजूरी, एयरबस-टाटा के सहयोग से निर्माण

रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए सी-295 परिवहन विमान खरीदने के लिए स्पेन के एयरबस डिफेंस एंड स्पेस (Airbus Defence and Space, Spain)  के साथ एक समझौते को मंजूरी दी है. यह सौदा करीब 20,000 करोड़ रुपये का है जिसके तहत 56 सी-295 परिवहन विमान खरीदा जाना है.

मुख्य बिंदु

  • सौदे के तहत, अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के 48 महीनों के भीतर स्पेन के एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा उड़ान भरने की स्थिति वाले 16 विमान उपलब्ध कराए जाएंगे.
  • अन्य 40 विमानों को भारत में ही 10 वर्षों के भीतर तैयार किया जाएगा. इसके लिए एयरबस डिफेंस ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम लिमिटेड (TASL) के साथ पार्टनरशिप की है. इस डील की खास बात ये है कि भारत में पहली बार किसी प्राइवेट कंपनी की तरफ से मिलिट्री एयरक्राफ्ट का निर्माण किया जाएगा.
  • C-295 MW विमान 5-10 टन क्षमता वाला परिवहन विमान है. यह अपनी तरह की पहली परियोजना है जिसमें एक निजी कंपनी द्वारा भारत में सैन्य विमान का निर्माण किया जाएगा.
  • अभी इंडियन एयरफोर्स ट्रांसपोर्ट के लिए Avro-748 विमान का इस्तेमाल करती है. एयरबस से खरीदे गए विमान इसको रिप्लेस करेगा.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक वायु गुणवत्ता मानदंडों में संशोधन किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नए वैश्विक वायु गुणवत्ता मानदंड (AQGs) जारी किया है. यह वर्ष 2005 के बाद से WHO का वायु गुणवत्ता मानदंडों में पहला संशोधन है.

इन दिशा-निर्देशों के तहत WHO ने प्रदूषकों के अनुशंसित स्तर को और कम कर दिया है, जिन्हें मानव स्वास्थ्य के लिये सुरक्षित माना जा सकता है. इन दिशा-निर्देशों का लक्ष्य सभी देशों के लिये अनुशंसित वायु गुणवत्ता स्तर प्राप्त करना है.

नए दिशा-निर्देश:

  • WHO के नए दिशा-निर्देश उन 6 प्रदूषकों के लिये वायु गुणवत्ता के स्तर की अनुशंसा करते हैं, जिनके कारण स्वास्थ्य पर सबसे अधिक जोखिम उत्पन्न होता है.
  • इन 6 प्रदूषकों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और 10), ओज़ोन (O₃), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शामिल हैं.
  • WHO ने पीएम 2.5 सहित कई प्रदूषकों के लिए स्वीकार्य सीमा कम कर दी है. अब, पीएम 2.5 सांद्रता 15μg/m³ से नीचे रहनी चाहिए. नई सीमा के अनुसार, औसत वार्षिक PM2.5 सांद्रता 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए.

मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का प्रभाव:

  • WHO के अनुसार, प्रत्येक वर्ष वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से 7 मिलियन लोगों की मृत्यु समय से पूर्व हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप लोगों के जीवन के लाखों स्वस्थ वर्षों का नुकसान होता है.
  • बच्चों में इसके अनेक प्रभाव दिखाई देते हैं, जैसे- फेफड़ों की वृद्धि और कार्य में कमी, श्वसन प्रणाली में संक्रमण, अस्थमा आदि.
  • वयस्कों में हृदय रोग और स्ट्रोक बाह्य वायु प्रदूषण के कारण समय से पूर्व मृत्यु के सबसे सामान्य कारण हैं तथा मधुमेह और तंत्रिका तंत्र का कमज़ोर होना या न्यूरोडीजेनेरेटिव (Neurodegenerative) स्थितियों जैसे अन्य प्रभावों के प्रमाण भी सामने आ रहे हैं.
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रक्षा मंत्रालय ने 118 अर्जुन Mk-1A मुख्य युद्धक टैंक को खरीदने की मंजूरी दी

भारतीय रक्षा मंत्रालय ने  अर्जुन Mk-1A मुख्य युद्धक टैंक के 118 यूनिट को खरीदने की मंजूरी दी. 7,523 करोड़ रुपये की लागत से इसका निर्माण चेन्नई स्थित हैवी व्हीकल फैक्ट्री (Heavy Vehicles Factory) में किया जाएगा.

अर्जुन टैंक पूरी तरह से भारत में निर्मित है. इस टैंक को DRDO की अन्य प्रयोगशालाओं के साथ कॉम्बैट व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (CVRDE) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है.

अर्जुन Mk-1A

  • यह टैंक अर्जुन Mk -1 का ही एक अपग्रेडेड वर्जन है. यह दिन और रात की परिस्थितियों में काम कर सकता है और स्थिर और गतिशील दोनों तरीकों से लक्ष्य पर निशाना साध सकता है.
  • इस टैंक में अत्याधुनिक ट्रांसमिशन सिस्टम लगाया गया है. जिससे टैंक के अंदर बैठा गनर सीधे कंट्रोल सेंटर से जुड़ सकता है. इसमें स्वदेशी 120 MM कैलिबर की गन भी लगी हुई है.
  • इस टैंक के बाहरी हिस्से में रिएक्टिव ऑर्मर लगे हुए हैं. जो दुश्मन के किसी भी मिसाइल या रॉकेट के प्रभाव को अपने ऊपर झेलकर कम कर सकते हैं.
  • इस टैंक में रसायनिक हमलों से बचने के लिए भी कई सेंसर लगाए गए हैं. जिससे अंदर बैठे क्रू मेंबर बाहरी हमले से सुरक्षित रह सकते हैं.
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वायुसेना ने फ्रांस से 24 पुराने मिराज 2000 लड़ाकू विमान की खरीद के लिए अनुबंध किया

भारतीय वायु सेना ने फ्रांस से 24 पुराने मिराज 2000 लड़ाकू विमान खरीदने के लिए के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं. यह सौदा 27 मिलियन यूरो का है. वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया की मंजूरी मिलने के बाद यह सौदा किया गया है.

मुख्य बिंदु

  • वायुसेना की 35 साल पुरानी मिराज फ्लीट ने 2019 में बालाकोट ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादियों के कैंप तबाह किये थे.
  • ‘राफेल’ लड़ाकू विमान बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने ही मल्टीरोल फाइटर मिराज 2000 का निर्माण किया है.
  • वायुसेना ने 1985 में चौथी पीढ़ी के लगभग 50 लड़ाकू विमान मिराज-2000 रखरखाव अनुबंध के साथ खरीदे थे. मौजूदा समय में वायुसेना के पास 50 मिराज-2000 हैं, जिन्हें अपग्रेड करने के लिए भी अनुबंध किया गया है.
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मद्रास उच्च न्यायालय ने राजमार्गों पर तय गति सीमा को रद्द किया

मद्रास उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर तय की गई गति सीमा को रद्द कर दिया है. न्यायालय ने 2018 की उस अधिसूचना को रद्द किया है जिसमें एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा, राष्ट्रीय राजमार्गों पर 100 किमी/घंटा, जबकि एम 1 श्रेणी के वाहनों के लिए गति सीमा 60 किमी/घंटा निर्धारित की गई थी. हाई कोर्ट का यह आदेश एक अपील पर दिया है.

न्यायालय ने कहा कि, अधिक गति मृत्यु का मुख्य कारण है और अधिकांश दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार है. इस तथ्य को जानने के बावजूद, सरकार ने वाणिज्यिक कारणों सहित विभिन्न कारणों से गति सीमा बढ़ा दी है. इससे अधिक मौतें हो रही हैं. इसका हवाला देते हुए  यह अधिसूचना रद्द की गई है.

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भारत का पहला परमाणु मिसाइल ट्रैकिंग जहाज INS ध्रुव को नौसेना में शामिल किया गया

भारत के पहले उपग्रह और बैलिस्टिक (परमाणु) मिसाइल ट्रैकिंग जहाज ‘ध्रुव’ को 10 सितम्बर को नौसेना में शामिल कर लिया गया. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उपस्थिति में विशाखापत्तनम में इस जहाज को शामिल किया गया. 10,000 टन वजनी इस जहाज में लंबी दूरी तक परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता है.

INS ध्रुव: एक दृष्टि

INS ध्रुव का विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) के सहयोग से हिंदुस्तान शिपयार्ड ने किया है. निर्माण की शुरुआत के दौरान इस जहाज का नाम वीसी-11184 दिया गया था. इसकी लंबाई 175 मीटर, बीम 22 मीटर, ड्राफ्ट छह मीटर है और यह 21 समुद्री मील की गति प्राप्त कर सकता है.

  • इस तरह के जहाज का संचालन करने वाला भारत छठा देश बन गया है. इससे पहले ऐसे जहाजों का संचालन केवल फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और चीन द्वारा किया जाता था.
  • यह दुश्मन पनडुब्बियों की विस्तृत जानकारी का पता लगाने के लिए समुद्र तल का नक्शा बनाने की क्षमता रखता है. यह अत्याधुनिक सक्रिय स्कैन एरे रडार या एईएसए से लैस है, जो भारत पर नजर रखने वाले जासूसी उपग्रहों की निगरानी के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में मिसाइल परीक्षणों की निगरानी के लिए विभिन्न स्पेक्ट्रम को स्कैन करने की क्षमता रखता है.
  • आईएनएस ध्रुव भारतीय नौसेना को तीनों आयामों- सतह के नीचे, सतह और हवा में बेहतर सैन्य संचालन की योजना बनाने में मदद करेगा
  • यह भारतीय शहरों और सैन्य प्रतिष्ठानों की ओर जाने वाली दुश्मनों की मिसाइलों के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करेगा. यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री जानकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन होगा.
  • यह मिसाइल को ट्रैक करने के साथ-साथ पृथ्वी की निचली कक्षा में सैटेलाइटों की निगरानी भी करेगा. लंबी दूरी तक परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने की क्षमता होने से भारत की एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता बढ़ेगी.
  • जमीनी जंग के बीच चीन और पाकिस्तान समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करते हुए भारत पर नौसैनिक शिप से बैलिस्टिक मिसाइल दाग सकते हैं. ऐसे में भारत का यह ट्रैकिंग और सर्विलांस शिप भारत की जमीनी सीमा को किसी मिसाइल या एयरक्राफ्ट के हमले से सुरक्षित करेगा.
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भारतीय वायुसेना में MR-SAM वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को शामिल किया गया

MR-SAM (Medium-Range Surface-to-Air Missile) वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली को 10 सितम्बर को भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया. रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (DRDO) ने राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय वायु सेना की 2204 स्‍कवॉडर्न को यह वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली सौंपी.

MR-SAM वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली: एक दृष्टि

MR-SAM सतह से हवा में मार करने वाली वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली है, जिसकी लंबाई 4.5 मीटर है. यह खराब मौसम में भी 70 किलोमीटर की रेंज में कई लक्ष्यों को एक साथ भेदने में पूरी तरह से सक्षम है. इसमें एक कमांड कंट्रोल सिस्टम, ट्रैकिंग रडार, मिसाइल और मोबाइल लॉन्चर सिस्टम को शामिल किया गया है.

यह रक्षा प्रणाली विरोधी लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, यूएवी, निर्देशित और बिना निर्देशित युद्ध सामग्री, सब-सोनिक और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई खतरों के खिलाफ हवाई सुरक्षा प्रदान करता है. यह अत्यंत द्रुत गति से भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों की रक्षा करने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है.

भारत और इजरायल द्वारा संयुक्त रूप से विकसित

MR-SAM को भारत और इजरायल की कंपनियों ने मिल कर बनाया है. इस प्रणाली के विकास के लिए इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के बीच एक समझौते पर 2009 में हस्ताक्षर किए गए थे. इसे IAI और DRDO द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है. इसका प्रयोग देश की तीनों सेनाएं कर सकेंगी.

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