पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का निधन

पूर्व क्रिकेट खिलाडी यशपाल शर्मा का 13 जुलाई को निधन हो गया. श्री शर्मा 1983 विश्‍व कप विजेता टीम के सदस्‍य थे.

यशपाल ने भारतीय क्रिकेट के विकास में काफी योगदान दिया. वह राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता भी रहे. यशपाल ने वर्ष 1978 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला वनडे और 1979 में इंग्लैंड के खिलाफ पहला टेस्ट मैच खेला था. यशपाल शर्मा को सात साल के अंतराल में कभी कोई गेंदबाज वनडे क्रिकेट में शून्य पर आउट नहीं कर सका.

यशपाल शर्मा ने भारत के लिए कुल 37 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 1606 रन बनाए. इसके अलावा उन्होंने भारत के लिए 42 वनडे मैच भी खेले, जिनमें कुल 883 रन बनाये थे.

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह का निधन

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री और वीरभद्र सिंह का 8 जुलाई को निधन हो गया. 87 वर्षीय वीरभद्र सिंह कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता थे और छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे थे.

श्री सिंह वर्तमान में सोलन जिले के आर्की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे. वे नौ बार विधायक और पांच बार सांसद रहे थे. केंद्र में कार्यकाल के दौरान वे 1976 से लेकर 1977 तक पर्यावरण व नागरिक विमानन विभाग के उप-मंत्री रहे. 1980 से 1983 के बीच वे उद्योग राज्य मंत्री रहे. मई, 2009 से जनवरी, 2011 तक वे इस्पात मंत्री रहे. वे पहली बार 1983 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने.

दिग्गज फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार का निधन

दिग्गज फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार का 7 जुलाई को 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनका वास्तविक नाम मोहम्मद युसूफ खान था. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पत्नी सायरा बानो के साथ बिताए.

दिलीप कुमार ने ‘मुगल-ए-आजम’, ‘नया दौर’, ‘बाबुल’, ‘दीदार’, ‘मधुमती’, ‘देवदास’, ‘गंगा जमुना’ जैसी कई हिट फिल्मों में अभिनय किया था. उनके द्वारा अभिनीत पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ (1944) था.

भारतीय सिनेमा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें 1991 में प्रतिष्ठित पद्म भूषण और 2015 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. 1994 में उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया था. वह 1954 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने वाले पहले अभिनेता थे. पाकिस्तान सरकार ने भी दिलीप कुमार को 1998 में निशान-ए-इम्तियाज से सम्मानित किया था.

प्रख्यात एथलीट मिल्खा सिंह का निधन, ‘फ्लाइंग सिख’ नाम से जाने जाते थे


फ्लाइंग सिख के नाम से प्रख्यात भारत के महान एथलीट मिल्खा सिंह का 18 जून को 91 साल की आयु में निधन हो गया. मिल्खा सिंह भारत को खेल इतिहास के सबसे सफल एथलीट माना जाता है.

मिल्खा सिंह का जन्म 1929 में गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) में हुआ था. वह विभाजन के बाद भारत आ गये थे भारतीय सेना में शामिल हो गए. भारत सरकार ने उन्हें 1958 में पद्मश्री से सम्मानित किया था.

‘फ्लाइंग सिख’ नाम से जाने जाते थे

1960 में पाकिस्तान में आयोजित इंटरनेशनल एथलीट कंपिटिशन में मिल्खा सिंह का प्रदर्शन देखने के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिख का नाम दिया था.

कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय

  • मिल्खा सिंह ने 1956 में मेलबर्न में आयोजित ओलिंपिक खेल में भाग लिया था लेकिन कोई पदक जीत नहीं पाए थे.
  • उन्होंने 1958 में कटक में आयोजित नेशनल गेम्स में 200 मीटर और 400 मीटर स्पर्धा में रिकॉर्ड बनाए.
  • 1958 में टोक्यो में आयोजित एशियाई खेलों में उन्होंने 200 मी और 400 मी की दौड़ में भी स्वर्ण पदक जीता.
  • मिल्खा सिंह ने 1958 में इंग्लैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था. वह स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने.
  • 1962 में जकार्ता एशियाई खेलों उन्होंने में 400 मीटर और 4×400 रिले में स्वर्ण पदक जीते.

मिल्खा सिंह के जीवन पर साल 2013 में बॉलीवुड हिंदी फिल्म- भाग मिल्खा भाग बनी थी. इसका निर्देशन राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने किया, जबकि लेखन प्रसून जोशी का था. मिल्खा सिंह की भूमिका में फरहान अख्तर ने निभाई थी.

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरूद्ध जुगनाथ का निधन

मॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरूद्ध जुगनाथ का 3 जून को निधन हो गया. वह 18 साल से अधिक समय तक मॉरीशस के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे थे. उन्हें 1980 के दशक के मॉरीशस आर्थिक चमत्कार का जनक माना जाता था.

अनिरूद्ध जुगनाथ ने आधुनिक मॉरिशस के निर्माण में योगदान दिया था. उनहोंने प्रवासी भारतीय के रूप में भारत और मॉरिशस के द्विपक्षीय़ संबंध मजबूत बनाने में मदद की.

भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से समानित किया था.

चिपको आन्दोलन के नेता सुंदर लाल बहुगुणा का निधन

चिपको आन्दोलन के नेता और पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा का 21 मई को निधन हो गया. वे 94 वर्ष के थे. उन्होंने हिमालयी क्षेत्र में वनों के संरक्षण के लिए कार्य किया था. पर्यावरण और पृथ्‍वी की रक्षा के लिए दिया गया उनका संदेश विश्‍व के अनेक देशों ने सराहा और सम्‍मानित किया गया था. श्री बहुगुणा ने 1980 के दशक में हिमालय में बड़े बांधों के निर्माण के खिलाफ नेतृत्व किया था. वह टिहरी बांध के निर्माण का घोर विरोध कर रहे थे.

चिपको आन्दोलन

सुंदर लाल बहुगुणा को मुख्य रूप से चिपको आन्दोलन में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है. चिपको आन्दोलन भारत में वनों के संरक्षण के लिए शुरू किया गया था. इसकी शुरुआत 1973 उत्तराखंड में हुई थी. उन्होंने चिपको का नारा भी गढ़ा: ‘पारिस्थितिकी स्थायी अर्थव्यवस्था है (ecology is the permanent economy)’. इस आन्दोलन के लिए सुन्दरलाल बहुगुणा को 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था.

जाने-माने सितार वादक पदमभूषण पंडित देबू चौधरी का निधन

जाने-माने सितार वादक पदमभूषण पंडित देवव्रत चौधरी उर्फ देबू चौधरी का 1 मई को निधन हो गया. वे 85 साल के थे. उन्होंने सेनिआ संगीत घराना के पंचू गोपाल दत्ता और संगीत आचार्य उस्ताद मुश्ताक अली खान से संगीत की शिक्षा ली थी.

भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में शानदार योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित किया था.

अपोलो-11 मिशन को सफलतापूर्वक चांद की सतह पर उतारने वाले माइकल कॉलिंग का निधन

अपोलो-11 (Apollo-11) मिशन को चांद पर सफलतापूर्वक उतारने वाले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री माइकल कॉलिंस (Michael Collins) का 90 वर्ष की आयु में 28 अप्रैल 2021 को निधन हो गया. माइकल कॉलिंस अपोलो 11 के पायलट थे.

चाँद की सतह पर उतरने वाले पहले यात्री नील आर्मस्ट्रॉन्ग (Neil Armstrong) अपोलो-11 मिशन के सदस्य थे. 20 जुलाई, 1969 को अपोलो-11 मिशन के चांद पर उतरने के बाद ही नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चांद की सतह पर पहला कदम रखा था और इसके बाद बज एल्ड्रिन (Buzz Aldrin) उतरे थे.

माइकल कॉलिंस का एकमात्र उद्देश्य यही था कि सफलतापूर्वक अपोलो-11 को चांद की सतह पर उतारें और इसके बाद नील और बज को लेकर वापस धरती पर आ सकें. अपोलो-11 से निकलकर चांद तक जिस मॉड्यूल में नील और बज गए थे, उसका नाम द ईगल था. एक तरफ जहां इनके दोनों साथी चांद पर चहलकदमी कर रहे थे तो वहीं माइकल कॉलिंस यान के साथ चांद का चक्कर लगा रहे थे.

माइकल कॉलिन्स

उनका जन्म 31 अक्टूबर 1930 को रोम में हुआ था. वह एक अमेरिकी सेना के एक मेजर के पुत्र थे. उन्होंने एयरफोर्स टेस्ट पायलट के रूप में अपना करियर शुरू किया था. उनका पहला मिशन जेमिनी एक्स (Gemini X) था. माइकल ने “Carrying the Fire” नाम से अपनी आत्मकथा लिखी है.

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक राजन मिश्र का निधन

सुप्रसिद्ध शास्त्रीय गायक राजन मिश्र का 25 अप्रैल को नई दिल्ली में निधन हो गया. राजन मिश्र ने अपने भाई साजन मिश्र के साथ खयाल शैली में गायन से देश-विदेश के संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया.

पंडित राजन मिश्र बनारस की कंठ संगीत परंपरा और शास्त्रीय संगीत के बनारस घराने में खयाल गायिकी के लिए प्रसिद्ध थे. उन्होंने चार सौ साल पुराने बनारस घराने की परंपरा को आगे बढ़ाया था. उन्होंने आरंभिक शिक्षा अपने दादा पंडित बड़े रामजी मिश्रा और पंडित हनुमान मिश्र से ग्रहण की थी.

राजन मिश्र को पद्म विभूषण, राष्ट्रीय तानसेन पुरस्कार, संस्कृत अवार्ड, गंधर्व सम्मान सहित कई संगीत पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था.

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पति प्रिंस फिलिप का निधन

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) के पति प्रिंस फिलिप का 9 अप्रैल को निधन हो गया. वे 99 वर्ष के थे.

फिलिप का जन्म वर्ष 1921 में कॉर्फू टापू पर हुआ था. उनके पिता एंड्रू डेनमार्क और ग्रीस के प्रिंस थे. वह हेलेनीस के किंग जॉर्ज के छोटे बेटे थे. प्रिंस फिलिप की मां क्वीन विक्टोरिया की परपोती और प्रिंसेज ऐलिस लॉर्ड लूइस माउंटबेटन की बेटी थी.

प्रिंस फिलिप को ड्यूक ऑफ एडिनबर्ग (Duke of Edinburgh) का सम्मान हासिल था. प्रिंस फिलिप से महारानी एलिजाबेथ की शादी वर्ष 1947 में हुई थी. दोनों की शादी को 73 साल का समय हो चुका है.

भारत के पहले पर्यावरण मंत्री दिग्विजय सिंह झाला का निधन

पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री दिग्विजय सिंह झाला का 4 अप्रैल को निधन हो गया. वह 88 वर्ष के थे. दिग्विजय सिंह झाला भारत के पहले पर्यावरण मंत्री (India’s First Environment Minister) रहे थे. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा पर्यावरण मंत्रालय की स्थापना किये जाने के बाद वे 1982 से 1984 तक भारत के पहले पर्यावरण मंत्री बने थे.

दिग्विजय सिंह झाला सौराष्ट्र में वांकानेर की पूर्ववर्ती रियासत के प्रमुख थे. उनको भारत में वन्यजीवन संरक्षण में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है.

विश्‍व प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ वी शांता का निधन

विश्‍व प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ वी शांता का 19 जनवरी को चेन्‍नई में निधन हो गया है. वे 94 वर्ष की थीं.

डॉक्‍टर शांता अदयार कैंसर सैन्‍टर की अध्‍यक्ष थी. उन्‍होंने 1955 में प्रशिक्षु के तौर पर अस्‍पताल में काम शुरू किया और फिर संस्‍थान की प्रमुख बनी. मरीजों को उत्‍तम और किफायती इलाज उपलब्‍ध कराने के लिए संस्‍थान के अध्‍यक्ष के तौर पर उन्‍होंने अन्‍तर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया.

डॉक्‍टर शांता को कैंसर विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए मेगसाइसाइ, पदमश्री, पदमभूषण और पदम विभूषण से अलंकृत किया गया.