विश्‍व प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ वी शांता का निधन

विश्‍व प्रसिद्ध कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ वी शांता का 19 जनवरी को चेन्‍नई में निधन हो गया है. वे 94 वर्ष की थीं.

डॉक्‍टर शांता अदयार कैंसर सैन्‍टर की अध्‍यक्ष थी. उन्‍होंने 1955 में प्रशिक्षु के तौर पर अस्‍पताल में काम शुरू किया और फिर संस्‍थान की प्रमुख बनी. मरीजों को उत्‍तम और किफायती इलाज उपलब्‍ध कराने के लिए संस्‍थान के अध्‍यक्ष के तौर पर उन्‍होंने अन्‍तर्राष्‍ट्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया.

डॉक्‍टर शांता को कैंसर विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए मेगसाइसाइ, पदमश्री, पदमभूषण और पदम विभूषण से अलंकृत किया गया.

मशहूर शास्त्रीय संगीतकार उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का निधन

मशहूर शास्त्रीय गायक और संगीतकार उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान का 17 जनवरी को मुम्बई में निधन हो गया. वह 89 वर्ष के थे. उन्हें संगीत के क्षेत्र में ‘जूनियर तानसेन’ के नाम से भी बुलाया जाता था.

भारत सरकार ने उन्हें 1991 में पद्म श्री, 2006 में पद्म भूषण और 2018 में पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया था. 2003 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था.

उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान रामपुर-सहसवान घराने से ताल्लुक रखते थे. उन्होंने मृणाल सेन की चर्चित फिल्म ‘भुवन शोम’ से अपने गायकी के करियर की शुरुआत की थी. हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में गुलाम मुस्तफा खान ने ‘उमराव जान’, ‘आगमन’, ‘बस्ती’, ‘श्रीमान आशिक’ जैसी फिल्मों में भी अपनी गायकी पेश किया था.

जानी-मानी गायिका आशा भोसले, गीता दत्त, मन्ना डे, सोनू निगम, हरिहरण, शान जैसे तमाम गायकों के करियर में गुलाम‌ मुस्तफा खान का भी अहम योगदान रहा है. बॉलीवुड के तमाम गायक उन्हें अपना गुरु मानते रहे हैं.

प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर रोडम नरसिम्हा का निधन

प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक प्रोफेसर रोडम नरसिम्हा का 15 दिसम्बर को बैंगलुरू में निधन हो गया. वे 87 वर्ष के थे. प्रोफेसर नरसिम्हा ने नेशनल एरो-स्पेस लैबोरेट्रीज के निदेशक और बैंगलुरू में जवाहर लाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केन्द्र की इंजीनियरिंग इकाई के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था.

हल्के लड़ाकू विमान जैसे देश के एरो-स्पेस कार्यक्रम में योगदान के लिए उन्हें 2013 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. उन्होंने अंतरिक्ष आयोग, प्रधानमंत्री की विज्ञान सलाहकार परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड सहित केन्द्र सरकार के विभिन्न निकायों में भी उल्लेखनीय कार्य किया था.

फाइबर ऑप्टिक्स के जनक प्रो नरिंदर सिंह कपानी का निधन

फाइबर ऑप्टिक्स के जनक माने जाने वाले भारतीय अमेरिकी नरिंदर सिंह कपानी का हाल ही में निधन हो गया. वह 94 साल के थे. वह दुनिया के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों में एक थे. उन्होंने 1954 में फाइबर ऑप्टिक्स तकनीकी का विकास कर पूरी दुनिया में नया आयाम दिया था.

प्रो नरिंदर सिंह कपानी ने स्नातक की पढ़ाई आगरा विश्वविद्यालय से की. उसके बाद उन्होंने परास्नातक की पढ़ाई लंदन से की. वहीं से उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि ली. उन्होंने 1973 में कैप्ट्रॉन की स्थापना की. अमेरिका की फार्च्यून पत्रिका ने दुनिया के दस सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में प्रो नरिंदर को शामिल किया था.

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के जनक फकीर चंद कोहली का निधन

भारत में सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग के जनक दिग्गज प्रबंधक एवं नेतृत्वकर्ता फकीर चंद कोहली का 26 नवम्बर को निधन हो गया. वे 96 वर्ष के थे. कोहली देश की शीर्ष सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (TCS) के संस्थापक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रहे थे. उन्होंने देश में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति की नींव रखी.

कोहली का जन्म 1924 में पेशावर में हुआ था. उन्होंने कनाडा की क्वीन्स यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में बैचलर की डिग्री ली और फिर अमेरिका की प्रतिष्ठित मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की.

1969 में टाटा ग्रुप के चेरमैन जेआरडी टाटा ने कोहली से TCS को शुरू करने के लिए उनसे मदद मांगी थी. बता दें कि उस समय TCS दुनिया की तीसरी कंपनी थी, जिसमें कंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा था. उन्हें देश में तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था.

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का निधन

असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का 23 नवम्बर को निधन हो गया. वह 86 वर्ष के थे. वह कांग्रेस राजनीतिक दल के नेता थे. तरुण गोगोई ने अपने नाम सबसे लंबे समय तक (18 मई 2001 से 24 मई 2016) असम का मुख्यमंत्री रहने का रेकॉर्ड दर्ज किया है.

रागोगोई 1971 में पहली बार जोरहाट लोकसभा सीट से चुने गए थे. 2001 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तीताबार सीट से चुनाव लड़ा और रेकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी.

मलयालम कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का निधन

जाने-माने मलयालम कवि और ज्ञानपीठ पुरस्कार (Jnanpith Award) विजेता अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का निधन हो गया है. वो 94 साल के थे. अक्कितम अच्युतन नंबूदरी का जन्म 8 मार्च 1926 को केरल के पलक्कड़ जिले में हुआ था.

पुरस्कार और सम्मान

अक्कितम को साहित्य अकादमी पुरस्कार, मूर्ति देवी पुरस्कार, कबीर सम्मान, वल्लतोल सम्मान समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. उन्हें साल 2019 का प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया था. उन्हें 2017 में पद्म-श्री, 1973 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1972 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1988 में कबीर सम्मान से भी सम्मानित किया गया है.

मशहूर पुस्तकें

अक्कितम युगद्रष्ट कवि थे. उनकी कविता, नाटक, उपन्यास और अनुवाद में उनकी 40 से अधिक किताबें छप चुकी हैं. उनकी सबसे मशहूर काव्य पुस्तक ‘इरुपदाम नूतनदीदे इतिहसम’ है, जो पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं.

अक्कितम की कुछ मशहूर पुस्तकें- खंड काव्य, कथा काव्य, चरित्र काव्य और गीत हैं. उनकी कुछ विख्यात रचनाओं में वीरवाडम, बालदर्शनम्, निमिषा क्षेतराम, अमृता खटिका, अक्चितम कवितातक्का, महाकाव्य ऑफ ट्वेंटीथ सेंचुरी और एंटीक्लेमम शामिल हैं.

प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना शोभा नायडू का निधन

प्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना शोभा नायडू का 15 अक्टूबर को निधन हो गया. वह 64 वर्ष की थीं और भारत की प्रमुख कुचीपुडी नर्तकियों में से एक थीं.

नायडू की प्रमुख उपलब्धियों में विप्रनारायण, कल्याण श्रीनिवासम और अन्य बैले (नृत्य-नटिकाओं) की कोरियोग्राफी और उनमें नृत्य तथा अभिनय करना था. इनमें नायडू ने सत्यभामा, देवदेवकी, पद्मावती, मोहिनी, साईबाबा और देवी पार्चती की मुख्य भूमिकाएं निभायी हैं.

उन्हें 2001 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. इसके अलाबा 1991 में उन्हें कुचीपुडी नृत्य में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान कार्लटन चैपमैन का निधन

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान कार्लटन चैपमैन का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 49 वर्ष के थे. मिडफील्डर चैपमैन 1995 से 2001 तक भारत की तरफ से खेले थे, उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 1997 में सैफ कप जीता था.

क्लब स्तर पर कार्लटन चैपमैन ने ईस्ट बंगाल और जेसीटी मिल्स जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया. चैपमैन ने पंजाब स्थित क्लब की तरफ से 14 ट्रॉफियां जीती थी. इनमें 1996-97 में पहली राष्ट्रीय फुटबॉल लीग (एनएफएल) भी शामिल है. चैपमैन बाद में एफसी कोच्चि से जुड़े, लेकिन एक सत्र बाद ही 1998 में ईस्ट बंगाल से जुड़ गये थे. ईस्ट बंगाल ने उनकी अगुवाई में 2001 में एनएफएल जीता था, उन्होंने 2001 में पेशेवर फुटबॉल से संन्यास ले लिया था.

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का निधन

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का 8 अक्टूबर को निधन हो गया. वे 74 वर्ष के थे और केंद्र सरकार में उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे. उन्होंने ग़रीब, वंचित तथा शोषित के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान दिया था.

रामविलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी की संस्थापक सदस्य थे. वह आठ बार लोकसभा के लिए चुने गए. वे श्री जयप्रकाश नारायण के प्रबल अनुयायी थे. वे लोकदल के महासचिव भी बने. पासवान ने केंद्रीय मंत्री के रूप में सभी राष्ट्रीय गठबंधन के पांच प्रधानमंत्रियों के अधीन काम किया है.

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का 27 सितम्बर को निधन हो गया है. वे 82 वर्ष के थे. जसवंत सिंह ने वाजपेयी सरकार में विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रालयों की ज़िम्मेदारी संभाली थी. राजनीती में आने से पहले वे भारतीय सेना में मेजर रहे थे. जसवंत सिंह सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संस्थापक सदस्यों में थे.

भारतीय सेना ने परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम पृथ्वी-2 मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारतीय सेना की सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command) ने 25 सितम्बर को पृथ्वी-2 शॉर्ट रेंज बलिस्टिक मिसाइल (Prithvi short-range ballistic missile) का सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण ओडिसा तट पर चांदीपुर में समेकित परीक्षण रेंज से किया गया.

परीक्षण में छोड़ी गई इस मिसाइल ने 350 किलोमीटर दूर लक्ष्य साधा. परीक्षण सभी निर्धारित मानकों पर सफल रहा. इस परीक्षण में मिसाइल के अंधेरे में मारक क्षमता की जाँच गयी.

सामरिक बल कमान (SFC) भारत का परमाणु कमांड विंग है. यह मुख्य रूप से देश में रणनीतिक परमाणु हथियारों का प्रबंधन करता है.

पृथ्वी-2 मिसाइल: एक दृष्टि

  • स्वदेश में विकसित पृथ्वी-2 मिसाइल सतह-से-सतह पर मार करने वाली और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. इस मिसाइल का पहली बार 27 अगस्त 1996 को परीक्षण किया गया था.
  • करीब 4600 किलोग्राम वजन और 9 मीटर लंबी यह मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम वजन के हथियार ले जा सकती है. इसमें तरल ईंधन से चलने वाले दो इंजन लगे हैं.
  • इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप विकसित किया गया है.