जाने-माने फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर का निधन

जाने-माने फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर का 30 अप्रैल को मुंबई में निधन हो गया. वे 67 वर्ष के थे और ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) से पीड़ित थे.

ऋषि कपूर ने अपने पिता राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में बाल कलाकार के रूप में वे पहली बार फिल्म में अभिनय किया था. उसके बाद ‘मेरा नाम जोकर’ फिल्म के लिए बाल कलाकार के रूप में उन्होंने अपना राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता. वर्ष 1973 में फिल्म ‘बॉबी’ में उन्होने मुख्य नायक के रूप में पहली बार अभिनय किया था.

लैला मजनू, रफू चक्कर, कर्ज़, चांदनी, हीना और सागर जैसी फिल्मों में रोमांटिक नायक के रूप में उनके अभिनय को काफी सराहा गया.

वर्ष 2008 में उन्हें ‘फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वर्ष 2011 में ‘दो दुनी चार’ में अभिनय के लिए उन्होने ‘फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड’ दिया गया, वही वर्ष 2017 में ‘कपूर एंड संस’ में अपनी भूमिका के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार जीता.

जाने-माने फिल्म अभिनेता इरफ़ान खान का निधन

जाने-माने अभिनेता इरफ़ान खान का 29 अप्रैल को मुंबई में निधन हो गया. 54 वर्षीय इरफान, कैंसर से पीडि़त थे. 2018 में उनमें न्‍यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का पता चला था. इरफान खान पेट की समस्या से जूझ रहे थे, उन्हें कोलोन इंफेक्शन हुआ था. इरफान को उनके बेहतरीन अभिनय के लिए याद किया जाएगा.

  • इरफान ने National School of Drama से 1984 में अभिनय (एक्टिंग) की पढ़ाई की थी. उन्होंने ‘चाणक्य’, ‘भारत एक खोज’, ‘सारा जहां हमारा’, ‘बनेगी अपनी बात’, ‘चंद्रकांता’ और ‘श्रीकांत’ जैसे सीरियल में काम किया.
  • इरफ़ान खान का बॉलीवुड में सफर 1988 में मीरा नायर की फिल्‍म सलाम बॉम्‍बे से शुरू हुआ था. उन्होंने पहली बार 2005 की फिल्म ‘रोग’ में लीड रोल किया था. इसके बाद उन्‍होंने कई फिल्‍मों में काम किया, लेकिन मकबूल, लाइफ इन ए मेट्रो, पान सिंह तोमर और पीकू, हिंदी मीडियम, अंग्रेगी मीडियम जैसी फिल्‍मों से उन्‍हें खास पहचान मिली.
  • इरफ़ान खान ने स्‍लम डॉग मिलेनियर, अ माइटी हार्ट, जुरासिक वर्ल्‍ड और द अमेजिंग स्‍पाइडर मैन जैसी अनेक अन्तर्राष्ट्रीय फिल्‍मों में भी काम किया. उनकी फिल्‍म लाइफ ऑफ पाय ने बड़े पैमाने पर सफलता हासिल की.
  • फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. उन्हें कला और सिनेमा में दिए उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने 2011 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था.

ब्रिटेन के मशहूर कॉमेडियन टिम ब्रुक-टेलर का निधन

ब्रिटेन के मशहूर कॉमेडियन टिम ब्रुक-टेलर का 13 अप्रैल को निधन हो गया. वे 79 वर्ष के थे. उनकी मौत कोरोना वायरस (कोविड 19) के संक्रमण से हुआ.

ब्रुक ‘गुडीज’ (The Goodies) नामक मशहूर हास्य कलाकारों की तिकड़ी का हिस्सा थे. ‘गुडीज’ में ब्रुक के अलावा ग्रीम गार्डन और बिल ऑडी भी थे. ब्रुक ने 1960 में टीवी और रेडियो पर कॉमेडी शुरू की थी. वहीं 1975 में ब्रुक के गाने ‘फंकी गिबन’ काफी लोकप्रिय था. ब्रुक टीवी शो ‘एट लास्ट द 1948 शो’ का अहम हिस्सा रहे थे.

ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का निधन

ब्रह्माकुमारी संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी जानकी का 27 मार्च को निधन हो गया. वे 104 साल की थीं. वे 140 देशों में फैले अन्तर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक संस्थान का संचालन कर रही थीं.

दादी जानकी महज 21 साल की उम्र में ब्रह्माकुमारी संस्थान के संपर्क में आईं थीं. चौथी तक पढ़ी दादी जानकी ने ईश्वरीय सेवाओं के लिए पश्चिमी देशों को चुना. 1970 में पहली बार लंदन गईं और 35 वर्षों तक वहीं रहकर सौ से ज्यादा देशों में ईश्वरीय संदेश को पहुंचाया. हजारों-लाखों लोगों को जीवन जीने की कला सिखाई.

दादी जानकी ने नारी शक्ति को आगे बढ़ाते हुए 46 हजार बहनों को तैयार किया, जो लोगों में आध्यात्मिकता के जरिए ज्ञान, राजयोग और साधना से मूल्यनिष्ठता को स्थापित करने में जुटी हैं. ब्रह्माकुमारी संस्थान दुनिया की एकमात्र संस्था है जिसके सभी केंद्रों की प्रमुख महिलाएं होती हैं.

दादी जानकी स्वच्छता के संदर्भ में हमेशा से सक्रीय रही हैं. देश और विदेश में इसके लिए अभियान चलाती रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर बनाया था.

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के पूर्व महासचिव जेवियर पेरेज़ डी क्यूएलर का निधन

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के पूर्व महासचिव जेवियर पेरेज़ डी क्यूएलर का 4 मार्च को उनके पैतृक देश पेरू में निधन हो गया. वे 1981 से लेकर 1991 तक संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के महासचिव रहे. पेरेज़ डी क्यूएलर ईरान-इराक युद्ध और अल सल्वाडोर में चल रहे गृह-युद्ध के दौरान संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रमुख रहे थे.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अपने दो कार्यकालों के दौरान उन्होंने लैटिन अमेरिका, अफ्रीका, एशिया और मध्य पूर्व में शांति समझौते किए. उनकी एक प्रमुख उपलब्धि आठ वर्षों के संघर्ष के बाद 1988 में ईरान और इराक के बीच युद्ध विराम के लिए बातचीत रही.

ईरान-इराक युद्ध के अलावा 1991 में अपने दूसरे कार्यकाल के अंत में डी क्यूएलर ने पश्चिमी सहारा में युद्ध की स्थिति को खत्म करने व अल सल्वाडोर, कंबोडिया व निकारागुआ में गृह-युद्ध को खत्म करने में मदद की.

कंप्यूटर वैज्ञानिक लैरी टेस्लर का निधन; CUT, COPY, PASTE कमांड को विकसित किया था

कंप्यूटर वैज्ञानिक लैरी टेस्लर का 19 फरवरी को निधन हो गया. वह 74 वर्ष के थे. उन्होंने कंप्यूटर में CUT, COPY, PASTE सहित कई महत्वपूर्ण कमांड को विकसित किया था.

टेस्लर की CUT, COPY, PASTE कमांड की खोज ने लोगों के लिए पर्सनल कंप्यूटर को उपयोग करना आसान बना दिया. इसके अलावा उन्होंने फाइंड और रिप्लेस जैसे कई कमांड बनाए. इनसे टेक्स्ट लिखने से लेकर सॉफटवेयर डेवलप करने जैसे कई काम आसान हो गए.

लैरी टेस्लर ने कैलिफोर्निया के स्टैंफर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूजर इंटरफेस डिजाइन में एक्सपर्टाइज हासिल की. इस दौरान उन्होंने यूजर के लिए कंप्यूटर को और आसान बनाना सीखा.

टेस्लर ने 1960 के दशक की शुरुआत में सिलिकॉन वैली में काम करना शुरू किया था. यह दौर था जब कंप्यूटर नया-नया सामने आया था. उन्होंने दुनिया की कई बड़ी कंपनियों के लिए काम किया जिसमें Apple, Amazon और Yahoo शामिल हैं.

भारतीय पर्यावरणविद और टेरी के पूर्व-प्रमुख डॉ राजेन्द्र कुमार पचौरी का निधन

देश के प्रमुख पर्यावरणविद और ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट’ (TERI) के पूर्व-प्रमुख डॉ राजेन्द्र कुमार पचौरी का 13 फरवरी को 79 साल की अवस्था में निधन हो गया.

देश के प्रमुख पर्यावरणविद राजेन्द्र कुमार पचौरी कर जन्म 20 अगस्त, 1940 को नैनीताल में हुआ था. वह वर्ष 1981 में टेरी के निदेशक और 2001 में इस संस्थान के महानिदेशक बने थे. डॉ पचौरी 20 अप्रैल 2002 को IPCC के अध्यक्ष चुने गये थे.

पर्यावरण के क्षेत्र में उनके महत्वूपर्ण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2008 में पद्म विभूषण अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. उन्हें वर्ष 2007 में अल गोर के साथ, IPCC की ओर से नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया था.

डॉ पचौरी ने अमेरिका के करोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी रेलिग से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग और अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की डिग्री हासिल की थी. 1974 से 1975 तक वह इसी यूनिवर्सिटी में इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे.

प्रसिद्ध ओडिया फिल्मकार मनमोहन महापात्रा का निधन

ओडिशा के प्रसिद्ध फिल्मकार मनमोहन महापात्रा का 14 जनवरी को 69 साल की उम्र में निधन हो गया. 1970 से 80 के शुरुआती दशक में उन्होंने सिनेमा को एक नई पहचान दी थी. उन्हें ‘न्यू वेव ओडिया सिनेमा के जनक’ के रूप में जाना जाता है.

मनमोहन महापात्रा ओडिशा के एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने लगातार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है. उन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था. ओडिशा की रिज़नल फ़िल्म के लिए बेस्ट फीचर कैटेगरी में मनमोहन ने कुल आठ बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता.

महापात्रा ने पहली ओडिया फ़िल्म ‘सीता राती’ बनाई थी, जिसे इंटरनेशल फ़िल्म फेस्टिवल 1982 में दिखाया गया था. उन्हें निशिधा स्वप्ना, माझी पच्चा, नीरब झाड़ा, अग्नि बेना, क्लांता अपरान्हा, अन्धा दिगंता, किचि स्मृति किचि अनुभूति और भीना समया के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला. उन्होंने रिज़नल फ़िल्मों को अतंरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया. उनकी कई फ़िल्मों को विदेशों में भी दिखाया गया.

जाने-माने फिल्म अभिनेता डॉक्टर श्रीराम लागू का निधन

जाने-माने अभिनेता डॉक्टर श्रीराम लागू का 17 दिसम्बर को पुणे में निधन हो गया. वे 92 वर्ष के थे. श्रीराम लागू ने आजादी के बाद महाराष्‍ट्र में रंगमंच आंदोलन के विकास में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा की थी. वे पेशे से डॉक्टर थे, 42 साल की उम्र में उन्होंने अभिनय को अपना पेशा बना लिया था.

नटसम्राट और हिमालयाची साओली जैसे मराठी नाटकों और मराठी फिल्‍म पिंजरा में अभिनय से उन्‍हें लोकप्रियता मिली. उन्होंने हिन्दी फिल्मों एक दिन अचानक, घरोंदा और लावारिस में भी यादगार भूमिका निभाई.

प्रसिद्ध गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन

महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 14 नवम्बर को पटना में निधन हो गया. वे 77 वर्ष के थे. उन्हें भारत के आइंस्टीन के रूप में जाना जाता है.

दुनियाभर से चर्चित गणितज्ञों में शुमार वशिष्ठ नारायण सिंह ने 1969 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. इसके बाद वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. वशिष्ठ नारायण ने नासा में भी काम किया, लेकिन वह 1971 में भारत लौट आए.

भारत लौटने के बाद वशिष्ठ नारायण ने आईआईटी कानपुर, आईआईटी बंबई और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की. 1975 में वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित हो गए थे.

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का निधन

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त तिरूनेल्‍लई नारायणअय्यर शेषन का 11 नवम्बर को निधन हो गया. वे 86 वर्ष के थे. शेषन ने 1990 से 1996 के बीच 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं.

भारतीय चुनावी राजनीति की दिशा बदलने में शेषन का अहम योगदान माना जाता है. भारतीय चुनाव व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता लाने का श्रेय शेषन को ही जाता है. मतदाता फोटो पहचान पत्र शेषन द्वारा उठाये गए कई सुधारात्‍मक कदमों में से एक है.

टीएन शेषन तमिलनाडु काडर के 1955 बैच के IAS ऑफिसर थे. लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान को देखते हुए 1996 में उन्‍हें मैगसेसे पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था.

आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक वी गणेशन का निधन

आजाद हिंद फौज (INA) के पूर्व सैनिक वी गणेशन का 30 सितंबर को निधन हो गया है. वह 94 वर्ष के थे. वह नागपट्टनम (तमिलनाडु) जिले में वेदरण्यम के रहने वाले थे.

गणेशन नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली आजाद हिंद फौज में 18 साल की आयु में भर्ती हुए थे और उन्होंने सिंगापुर में छह महीने का प्रशिक्षण हासिल किया था.

म्यामां में ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई में भाग लेने के दौरान उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें यांगून जेल में 10 महीने कैद में रखा गया था. बाद में उन्हें वापस भारत भेज दिया गया.

गणेशन को 2012 में राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम में तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था. गणेशन ने सेमबोदोई गांव में नेताजी हॉस्पिटल खोला था, जो एक सार्वजनिक परमार्थ संस्था है.