विस्थापित श्रमिकों के लिए आत्मनिर्भर उत्तरप्रदेश रोज़गार योजना का शुभारम्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्थापित श्रमिकों के लिए 26 जून को ‘आत्मनिर्भर उत्तरप्रदेश रोज़गार योजना’ का शुभारम्भ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से किया. यह योजना उत्तर प्रदेश के 31 जिलों में शुरू की गई है.

यह योजना, उन विस्थापित श्रमिकों के लिए रोजगार सृजन के बारे में है जो हाल में अन्य राज्यों से लौटे हैं. इस अभियान के तहत राज्य में विभिन्न योजनाओं के जरिए लगभग 1.25 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराया जाएगा.

इस अभियान के माध्‍यम से गरीब ग्रामीण जनता को उनके घर के पास ही रोजगार उपलब्‍ध कराए जाएंगे. यह अभियान 12 विभिन्‍न मंत्रालयों और विभागों के समन्वित प्रयासों से शुरू किया गया है जिसमें ग्रामीण‍ विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन और राजमार्ग, खान, पेयजल और स्‍वच्‍छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि मंत्रालय शामिल हैं.

हिमाचल में ग्रामीण क्षेत्रों के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पंचवटी योजना शुरू

हिमाचल प्रदेश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘पंचवटी योजना’ का शुभारंभ किया है. इस योजना में ग्रामीण विकास विभाग केे माध्यम से मनरेगा योजना के अंतर्गत आवश्यक सुविधाओं से युक्त सभी विकास खंडों में पार्क और बागीचे विकसित किए जाएंगे. योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के वरिष्ठ नागरिकों को मनोरंजन के साथ पार्क और बागीचों की सुविधा उपलब्ध करवाना है.

पार्कों पर उपलब्ध रहेंगी विभिन्न सुविधाएं

हिमाचल सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और 14वें वित्त आयोग अभिसरण में न्यूनतम एक बीघा की समतल भूमि पर इन पार्कों और बागीचों को विकसित किया जाएगा. इन पार्कों में आयुर्वेदिक और औषधीय पौधे लगाने के अलावा बुजुर्गों के लिए मनोरजंन के लिए मनोरंजक उपकरण, पैदल पथ और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी.

इस वर्ष राज्य में होगा 100 पार्कों का निर्माण

चालू वित्त वर्ष में राज्य के विभिन्न स्थानों पर लगभग 100 पार्क विकसित किए जाएंगे. इन पार्कों के पहले चरण का शुभांरभ 9 जून को मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी ने वीडियो काॅन्फ्रंेसिंग के माध्यम से किया था.

उत्तरप्रदेश में बाल श्रमिकों के लिए बाल श्रमिक विद्या योजना की शुरुआत

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर 12 जून को बाल श्रमिक विद्या योजना (BSBY) की शुरुआत की. इस योजना के तहत श्रम विभाग बाल श्रमिकों की जिम्मेदारी लेगा और उनकी शिक्षा का खर्च उठाएगा.

बाल श्रमिक विद्या योजना में कामकाजी बच्चों को स्कूल भेजने के लिए सरकार उन्हें 1000 रुपये/माह और बच्चियों को 1200 रुपये/माह देगी. वहीं, कक्षा आठ, नौ और 10 पास करने पर छह-छह हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि अलग से मिलेगी.

हर जिले से सौ-सौ कामकाजी बच्चों को इस योजना से जोड़ा गया है. इसमें उन बच्चों को लाभ मिलेगा जिन बच्चों के माता या पिता या फिर दोनों की मृत्यु हो चुकी है. ऐसे बच्चे भी जोड़े गए हैं, जिनके माता या पिता या दोनों स्थायी रूप से दिव्यांग या गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं.

गिर वन में एशियाई शेर की आबादी में लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि

गुजरात के गिर वन इलाके में एशियाई शेर (Asiatic Lion) की आबादी में लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2015 में हुई आखिरी गिनती के समय गिर के जगंलों में शेर की तादाद 523 थी, वहीं अब बढ़कर 674 हो गई है.

शेरों की आबादी की गिनती गुजरात राज्य के वन विभाग द्वारा हर पांच साल पर की जाती है. 2020 में वन विभाग द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार वर्तमान में राज्य के कुल 674 एशियाई शेरों में 260 मादा, 161 नर, 93 उप-वयस्क और 137 शावक हैं.

जारी आंकड़े के अनुसार राज्य में एशियाई शेरों के प्रवास क्षेत्रफल में भी 36 प्रतिशत वृद्धि हुई है, वर्तमान में राज्य में एशियाई शेरों का प्रवास क्षेत्रफल वर्ष 2015 के 22,000 वर्ग किमी से बढ़कर 30,000 वर्ग किमी तक पहुँच गया है.

एशियाई शेर (Asiatic lion): एक दृष्टि

एशियाई शेर का वैज्ञानिक नाम पैंथेरा लियो पर्सिका (Panthera Leo Persica) है. ये मुख्यतः गुजरात में गिर के जंगलों और जूनागढ़, अमरेली तथा भावनगर ज़िलों के संरक्षित क्षेत्रों में पाए जाते हैं.

एशियाई शेर को ‘भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972’ के तहत अनुसूची-I में रखा गया है. International Union for Conservation of Nature (IUCN) ने एशियाई शेरों को संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है.

शेरों की जनगणना (Lion Census)

प्रथम शेर जनगणना 1936 में जूनागढ़ के तत्कालीन नवाब द्वारा कराई गई थी. वन विभाग 1965 से हर पाँच वर्ष पर शेरों की जनगणना करता है. इस वर्ष यानी 2020 में शेरों की जनगणना 5 और 6 जून को पूर्णिमा को की गई. जिसे ब्लॉक काउंट मेथड कहा जाता है. टाइम, GPS लोकेशन, शेर के ग्रुप और उनकी तादाद, रेडियो कॉलर नंबर्स, ई-गुजरात फॉरेस्ट डेटा के आधार पर पूरी गिनती की जाती है.

ओडिशा सरकार ने ‘बंदे उत्कल जननी’ को राज्य गान का दर्जा दिया

ओडिशा सरकार ने ‘बंदे उत्कल जननी’ को राज्य गान का दर्जा दिया है. ओडिशा मंत्रिमंडल ने राज्य गान का दर्जा देने से संबंधित प्रस्ताव को 7 जून को मंजूरी दी. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल ने बंदे उत्कल जननी को राज्य गान का दर्जा प्रदान किया.

राज्य गान का दर्जा दिए जाने के बाद यह अब सभी सरकारी कार्यक्रमों व राज्य विधानसभा में बिना वाद्य यंत्र के बजाया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही सभी सरकारी विद्यालय, कॉलेज व समारोह में इसे वाद्य यंत्रों के साथ बजाने की अनुमति है.

गाना बजने पर लोगों को इसके प्रति सम्मान भाव दिखाना आवश्यक है, हालांकि बुजुर्गों, बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसमें छूट दी गई है.

बंदे उत्कल जननी: एक दृष्टि

‘बंदे उत्कल जननी’ एक देशभक्ति कविता है, जो सन् 1912 में कांता कवि लक्ष्मीकांता महापात्र द्वारा लिखी गई है. यह एक अलग प्रांत के गठन की लड़ाई के दौरान उत्कल सम्मिलनी का शुरुआती गान रहा है. इसे राज्य गान का दर्जा प्रदान करने की यहां के लोगों की काफी लंबे समय से मांग रही है.

गैरसैंण को उत्तराखंड का ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने को राज्यपाल की मंजूरी

उत्तराखंड में चमोली जिले के गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को राज्य के ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में मंजूरी दी गयी है. यह मंजूरी राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने 8 जून को दी. राज्यपाल की मंजूरी के बाद गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के लिए शासनादेश जारी कर दिया गया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मार्च 2020 में गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया था.

देहरादून राज्य की अस्थायी राजधानी

उत्तराखंड के अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद आज तक स्थायी राजधानी नहीं मिल सकी है. देहरादून राज्य की राजधानी है, लेकिन वह अभी भी अस्थायी राजधानी के रूप में ही है. देश के 27वें राज्य के रूप में उत्तराखंड का गठन 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग करके किया गया था.

उत्तराखंड देश का चौथा राज्य जिसकी दो राजधानियां

अब उत्तराखंड देश का ऐसा चौथा राज्य बन गया है जिसकी दो-दो राजधानियां हैं. आंध्र प्रदेश में 3 राजधानियों का प्रस्ताव है तो हिमाचल प्रदेश और महाराष्ट्र में दो-दो राजधानियां हैं. जम्मू-कश्मीर में भी दो राजधानी हैं लेकिन 2019 में इसे राज्य की सूची से हटाकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.

उत्तराखंड हाई कोर्ट नैनीताल में

उत्तराखंड में प्रशासकीय तौर पर दो मंडल हैं, कुमाऊं और गढ़वाल. राज्य बनने के बाद गढ़वाल और राज्य की सीमा पर स्थित देहरादून को राजधानी बनाया गया तो कुमाऊं के नैनीताल में हाई कोर्ट बना रहा.

उत्तराखंड में दो राजभवन

उत्तराखंड देश के चुनिंदा राज्यों में शुमार है, जहां राज्यपाल के लिए दो राजभवन हैं- देहरादून और नैनीताल. ग्रीष्मकाल में राज्यपाल नैनीताल प्रवास पर आते हैं.

गैरसैंण: एक दृष्टि

गैरसैंण उत्तराखंड के चमोली जिले में आता है और इसे नगर पंचायत का दर्जा हासिल है. यह उत्तराखंड की पामीर के नाम से जानी जाने वाली दुधाटोली पहाड़ी पर स्थित है. इसी पहाड़ी पर रामगंगा का उद्भव हुआ है. भौगोलिक तौर पर यह इलाका उत्तराखंड के बीच में पड़ता है.

सातवीं शताब्दी में भारत यात्रा पर आए चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इस क्षेत्र में ब्रह्मपुर नामक राज्य होने का जिक्र किया था.

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू हुआ

केंद्र शासित प्रदेश (UT) जम्मू-कश्मीर में 19 मई से नया डोमिसाइल ऐक्ट लागू हो गया. सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन आदेश 2020 में सेक्शन 3A जोड़ा गया है. इसके तहत राज्य/UT के निवासी होने की परिभाषा तय की गई है.

क्या है नया डोमिसाइल ऐक्ट?

  • जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नए डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रोसीजर) रूल्स 2020 को लागू कर दिया है. इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय नागरिक प्रमाण पत्र (PRC) की जगह डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है.
  • नए डोमिसाइल नियमों के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में कम से कम 15 साल रहा है और 10वीं या 12वीं की परीक्षा यहां के किसी संस्थान से पास कर चुका है, तो वह जम्मू-कश्मीर का निवासी कहलाने का हकदार होगा.
  • नए डोमिसाइल ऐक्ट के तहत पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, सफाई कर्मचारी और दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं के बच्चे भी अब डोमिसाइल के हकदार होंगे.

महाराष्ट्र विधान परिषद के लिए मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित 9 उम्‍मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए

महाराष्‍ट्र में 14 मई को राज्‍य विधान परिषद सदस्य के रूप में मुख्‍यमंत्री उद्धव ठाकरे सहित 9 उम्‍मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। विधान परिषद के 9 सदस्य के चुनाव के लिए कांग्रेस के 1, भाजपा के 4, राकांपा के 2 और शिवसेना के 2 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था।

निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र विधान परिषद की 9 सीटों के लिए चुनाव 21 मई को करने की घोषणा की थी. इस चुनाव के लिए 9 योग्य उम्मीदवारों ने ही नामांकन किया था. ऐसे में बिना चुनाव हुए ही सभी निर्वाचित हो गए।

इससे पहले, कोरोना संक्रमण के फैलाव को देखते हुए चुनाव स्थगित कर दिए गए थे. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने 30 अप्रैल को निर्वाचन आयोग को पत्र लिख कर महाराष्ट्र विधान परिषद की रिक्त 9 सीटों के लिए चुनाव कराने का अनुरोध किया था.

मुख्यमंत्री बने रहने के लिए राज्य विधानमंडल का सदस्य होना अनिवार्य

किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री के लिए शपथ लेने के छह महीने के भीतर राज्य विधानमंडल के किसी एक सदन (विधानसभा या विधानपरिषद) का सदस्य होना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ऊद्धव ठाकरे को 28 नवम्बर 2019 को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी. वे राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे.

भारतीय संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री ठाकरे को पद पर बने रहने के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने के भीतर यानी 28 मई तक उन्हें किसी एक सदन का सदस्य होना अनिवार्य था.

विधान परिषद (State Legislative Council): एक दृष्टि

  • भारत के छः राज्यों में विधान परिषद, विधानमंडल का अंग है. यानी इन राज्यों में विधानसभा निचला सदन और विधानपरिषद उच्च सदन के रूप में गठित है.
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 171 किसी राज्य में विधानसभा के अलावा एक विधान परिषद के गठन का विकल्प प्रदान करता है. संविधान का अनुच्छेद 169 राज्य में विधान परिषद को समाप्त करने की शक्ति प्रदान की गयी है.
  • विधान परिषद सदस्य (MLC) का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है, जहां प्रत्येक दो वर्ष की अवधि पर इसके एक-तिहाई सदस्य कार्यनिवृत्त हो जाते हैं.

छह राज्यों में विधान परिषद का अस्तित्व

वर्तमान में छह राज्यों आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद का भी गठन किया गया हैं. जम्मू-कश्मीर को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने से पहले यहाँ भी विधान परिषद अस्तित्व में था.

विधानपरिषद सदस्यों का चुनाव प्रक्रिया

  1. राज्यसभा की तरह विधान परिषद के सदस्य सीधे मतदाताओं द्वारा निर्वाचित नहीं होते. इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं. कुछ सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनित किए जाते हैं.
  2. विधान परिषद के लगभग एक तिहाई सदस्य विधानसभा के सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं. एक तिहाई निर्वाचिका द्वारा, जिसमें नगरपालिकाओं के सदस्य, जिला बोर्डों और राज्य में अन्य प्राधिकरणों के सदस्य शामिल हैं, द्वारा चुने जाते हैं.
  3. एक बटा बारह (1/12) सदस्यों का चुनाव निर्वाचिका द्वारा ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जाता है जिन्होंने कम-से-कम तीन वर्षों तक राज्य के उच्च शैक्षिक संस्थाओं में अध्यापन में लगे रहे हों.
  4. एक बटा बारह सदस्यों का चुनाव पंजीकृत स्नातकों द्वारा किया जाता है जो तीन वर्ष से अधिक समय पहले पढ़ाई समाप्त कर लिए हैं.
  5. शेष सदस्य राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहयोग आन्दोलन और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाते हैं.

उत्तर प्रदेश ने ICMR से कोरोना वायरस के ‘पूल परीक्षण’ शुरू करने के लिए मंजूरी ली

उत्तर प्रदेश ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) से कोरोना वायरस के ‘पूल परीक्षण’ (pool testing) शुरू करने के लिए मंजूरी ली है. इसका उद्देश्य कोविद-19 के लिए परीक्षण प्रक्रिया को तेज करना है.

क्या है पूल परीक्षण?

पूल परीक्षण में कोरोना वायरस के व्यक्तिगत परीक्षण के बदले कई नमूनों के संग्रह को मिश्रित कर एक साथ परीक्षण किया जाता है. यदि नमूनों के संग्रह का परिणाम नकारात्मक आता है, तो इसका अर्थ होता है कि उस समूह के सभी नमूने नकारात्मक हैं. हालाँकि यदि संग्रह के नमूने का परिणाम भी सकारात्मक आता है तो उस समूह के सभी नमूनों का परीक्षण व्यक्तिगत रूप से किया जाता है.

15 अप्रैल 2020 को 73वां हिमाचल दिवस मनाया गया

प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल को हिमाचल दिवस (Himachal Diwas) मनाया जाता है. 1948 में इसी दिन हिमाचल का गठन किया गया था. 15 अप्रैल 2020 को हिमाचल प्रदेश में 73वां हिमाचल दिवस मनाया गया.

इस दिन प्रदेश भर में जिलास्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाता रहा है और भव्य तरीके से हिमाचल दिवस मनाया जाता है. लेकिन कोरोना संकट के चलते इस बार सीमित रूप से ही हिमाचल दिवस मनाया गया. 73वां हिमाचल दिवस राज्यस्तरीय समारोह रिज मैदान शिमला में सादगी पूर्वक आयोजित किया गया था. इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की थी. राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने हिमाचल दिवस समारोह पर प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दीं.

हिमाचल प्रदेश: एक दृष्टि

  • हिमाचल सन् 1857 तक पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह के शासन के अधीन पंजाब राज्य का हिस्सा रहा था. अप्रैल, 1948 में 30 रियासतों को मिलाकर हिमाचल को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया था. सन 1966 में इस केन्द्रशासित प्रदेश में पंजाब के पहाड़ी भाग को मिलाकर इस राज्य का पुनर्गठन किया गया था.
  • ‘हिमाचल प्रदेश राज्य अधिनियम-1971’ के अन्तर्गत इसे भारत का 18वाँ राज्य का दर्जा दिया गया था. यह 25 जनवरी, 1971 को पूर्ण राज्य बना गया था. प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को हिमाचल प्रदेश का स्थापना दिवस (Foundation Day of Himachal Pradesh) मनाया जाता है.
  • हिमाचल प्रदेश उत्तर में जम्मू कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में पंजाब, दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखण्ड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा हुआ है. रावी, ब्यास और चिनाव हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदियां हैं.
  • यह प्रदेश पश्चिमी भारत में स्थित राज्य है. इस प्रदेश को देव भूमि भी कहा जाता है. यह उत्तर में जम्मू और कश्मीर, पश्चिम तथा दक्षिण-पश्चिम में दक्षिण में हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश, दक्षिण-पूर्व में उत्तराखंड तथा पूर्व में तिब्बत से घिरा है.
  • शिमला, हिमाचल प्रदेश की राजधानी है. डा. यशवंत सिंह परमार हिमाचल प्रदेश के पहले और जय राम ठाकुर वर्तमान मुख्यमंत्री हैं.

शिवराज सिंह चौहान ने मध्‍यप्रदेश के 19वें मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली

शिवराज सिंह चौहान ने 23 मार्च को चौथी बार मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली. राज्यपाल लालजी टंडन ने राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. इससे पहले शिवराज सिंह चौहान को भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक में नेता चुना गया था.

मध्‍यप्रदेश विधानसभा की स्थिति

230 सदस्यों वाली विधानसभा में 25 स्थान रिक्त हैं. वर्तमान में 205 सदस्य हैं, जिसमें BJP के 106, सपा 1, बसपा 2 और 4 निर्दलीय सदस्य हैं. इस प्रकार वर्तमान में मध्‍यप्रदेश विधानसभा में बहुमत के लिए 103 सदस्यों की जरूरत है.

मध्‍यप्रदेश विधानसभा: संक्षिप्त घटनाक्रम

2018 में संपन्न हुए मध्‍यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 114 और BJP के 109 सदस्य निर्वाचित हुए थे. 230 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 116 निर्वाचित सदस्यों की जरूरत थी. इस प्रकार कांग्रेस ने मुख्‍यमंत्री कमलनाथ की अगुवाई में बसपा, सपा और निर्दलीय निर्वाचित सदस्यों के समर्थन से सरकार बनाई थी.

उनकी सरकार को 15 महीने भी नहीं हुए थे कि कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया BJP में शामिल हो गये. सिंधिया के साथ-साथ कांग्रेस के 22 निर्वाचित सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गयी थी. जिस कारण मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 20 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जिसके बाद BJP ने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया था.

शिवराज सिंह चौहान: एक दृष्टि

  • शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली है. वे 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल मुख्‍यमंत्री रह चुके हैं. इस दौरान उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. 29 नवंबर, 2005 को उन्हें बाबूलाल गौर के स्थान पर राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया था.
  • उनके फिर मुख्‍यमंत्री बनने पर मध्यप्रदेश के इतिहास में पहला मौका होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लिया हो. शिवराज के अलावा अब तक अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार मुख्‍यमंत्री रहे हैं.
  • शिवराज सिंह पहली बार 1990 में बुधनी सीट से मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए और 1991 में पहली बार विदिशा सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पद से इस्तीफा दिया

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 20 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल लालजी टंडन को सौंपा. राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है. विधानसभा में बहुमत न होने के चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है. कमलनाथ ने 17 दिसंबर 2018 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मत विभाजन से पहले इस्तीफा दिया. उच्चतम न्यायालय ने राज्य विधानसभा में 20 मार्च को शाम पांच बजे तक बहुमत परीक्षण पूरा कर लिए जाने का निर्देश दिया था. न्यायालय ने यह आदेश मध्यप्रदेश विधानसभा में बहुमत परीक्षण के अनुरोध से जुड़ी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित 10 भाजपा नेताओं की याचिका पर दिया.

क्या है मामला?

मध्‍यप्रदेश में पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और सत्तारूढ़ कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. इससे सदन में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 114 से घटकर 92 रह गई थी. दूसरी ओर, सदन में भाजपा के 107 सदस्य हैं. राज्‍य में बसपा के दो सदस्य हैं जबकि समाजवादी पार्टी का एक और चार निर्दलीय विधायक भी है.

230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में दो सीटें पहले से खाली हैं. मौजूदा परिस्थितियों में बहुमत के लिए 104 विधायकों का समर्थन चाहिए. इस प्रकार कमलनाथ के इस्तीफे के बाद राज्य में भाजपा के नेतृत्‍व में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया है.