चेनाब नदी पर 850 मेगावाट क्षमता वाली रेटले पनबिजली परियोजना को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्‍मू कश्‍मीर 850 मेगावाट क्षमता वाली रेटले पनबिजली परियोजना के लिए 5282 करोड रुपये मंजूर किए हैं. यह परियोजन किश्‍तवाड़ में चेनाब नदी पर बनाई जा रही है.

यह परियोजना राष्‍ट्रीय पनबिजली निगम (NHPC) और जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य बिजली विकास निगम (JKSPDC) का सयुंक्‍त उद्यम है. इसमें NHPC की 51 प्रतिशत और JKSPDC की 49 प्रतिशत हिस्‍सेदारी है.

रेटले परियोजना साठ महीने में पूरी हो जाएगी. इससे बनने वाली बिजली से ग्रिड में सुधार किया जा सकेगा जिससे बिजली आपूर्ति बेहतर होगी.

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जम्मू-कश्मीर में 28400 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास पैकेज की घोषणा

जम्मू-कश्मीर में 28400 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास पैकेज की घोषणा की गयी है. जम्मू-कश्मीर के उप-राज्‍यपाल मनोज सिन्हा ने 7 जनवरी को इसकी घोषणा की. जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक क्षेत्र के लिए औद्योगिक विकास पैकेज-2021 की मंजूरी केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी थी.

इस पैकेज का उद्देश्य मौजूदा औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देना, नई इकाइयां स्थापित करना, चार लाख पचास हजार रोजगार पैदा करना और कम से कम 20000 करोड़ रुपये का निवेश करना है. यह पैकेज 2037 तक लागू रहेगा.

यह पैकेज सभी प्रकार की औद्योगिक इकाइयों के लिए आकर्षक बनायीं गयी हैं. इसके अंतर्गत छोटी इकाइयों को संयंत्र और मशीनरी में 50 करोड़ रुपये तक निवेश करने पर 7.5 करोड़ रुपये तक पूंजी प्रोत्साहन मिलेगा.

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न्‍यायमूर्ति हिमा कोहली तेलंगाना उच्‍च न्‍यायालय की पहली महिला मुख्‍य न्‍यायाधीश बनीं

न्यायमूर्ति हिमा कोहली तेलंगाना उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश बन गई हैं. राज्‍यपाल डॉक्‍टर तमिलेसाई सुंदरराजन ने उन्‍हें हैदराबाद में राजभवन में आयोजित समारोह में उन्‍हें पद की शपथ दिलाई. तेलंगाना उच्‍च न्‍यायालय के वर्तमान मुख्‍य न्‍यायधीश आरएस चौहान को झारखण्‍ड उच्‍च न्‍यायालय का मुख्‍य न्‍यायाधीश नियुक्‍त किया गया है.

न्‍यायामूर्ति हिमा कोहली, दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में न्‍यायाधीश थी. वे तेलंगाना उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश बनने वाली पहली महिला न्‍यायमूर्ति हैं. 1 जनवरी 2019 को तेलंगाना उच्च न्यायालय अस्तित्व में आया था.

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मध्य प्रदेश में विश्व का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया जाएगा

मध्य प्रदेश में फ्लोटिंग (पानी पर तैरता) सोलर प्लांट लगाया जा रहा है. यह प्लांट नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध के पास होगा जिसके 2 वर्ष में पूरा होने का लक्ष्य है. इस प्लांट से 600 मेगावाट बिजली मिलेगी. यह विश्व का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट होगा. केरल के वायनाड में 105 मेगावाट क्षमता का तैरता सोलर प्लांट स्थापित है.

इंटरनेशनल फाइनेंस कार्पोरेशन, वर्ल्ड बैंक और पॉवर ग्रिड ने परियोजना विकास में सहयोग के लिए सैद्धांतिक सहमति दी है. इस प्रोजेक्ट में अनुमानित निवेश 3000 करोड़ रुपए है. परियोजना से दो साल में विद्युत उत्पादन की संभावना है. मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा परियोजना से 400 मेगावाट बिजली खरीदने के लिए सहमति दी जा चुकी है.

इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट में बांध के लगभग 2 हजार हेक्टेयर जल क्षेत्र में 25,00,000 सोलर पैनल प्लेटें लगाये जायेंगे जिससे बिजली का उत्पादन होगा. सोलर पैनल जलाशय में पानी की सतह पर तैरते रहेंगे. बांध का जलस्तर कम-ज्यादा होने पर यह स्वत: ही ऊपर-नीचे एडजस्ट होते रहेंगे. तेज लहरों और बाढ़ का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. सूर्य की किरणों से निरंतर बिजली का उत्पादन होगा.

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मध्यप्रदेश में धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को मंजूरी दी गयी

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल ने धर्म स्वातंत्र्य यानी धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक-2020 को मंजूरी दी है. नया अधिनियम मध्‍यप्रदेश में धार्मिक स्‍वतंत्रता अधिनियम 1968 की जगह लेगा.

प्रस्‍तावित कानून के अंतर्गत जो लोग धर्मांतरण के इच्‍छुक हैं, उन्‍हें दो महीने पहले जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन करना होगा. केवल धर्म परिवर्तन करने के उद्देश्‍य से विवाह करने को शून्‍य माना जाएगा.

इस विधेयक के प्रावधानों के अंतर्गत किसी महिला के धर्म को जबरन परिवर्तित करने की सजा 10 वर्ष और कम से कम जुर्माना 50 हजार रुपए किया गया है. इस प्रकार के धर्म परिवर्तन करने वालों के अभिभावकों सहित रिश्तेदार भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

नाबालिगों, समूहों या अनुसूचित जाति और अनुसूजित जनजाति से संबंधित लोगों के धर्म परिवर्तन कराने के मामलों में भी विशेष प्रावधान किए गए हैं.

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राजस्थान ‘सुगमता से व्यापार’ सुधारों को अपनाने वाला देश का छठा राज्‍य बना

राजस्थान, ‘सुगमता से व्यापार’ (Ease of Doing Business) सुधारों को सफलता के साथ अपनाने वाला देश का छठा राज्‍य बन गया है. इस उपलब्धि के साथ ही राजस्थान अब खुले बाजार से उधार के माध्यम से 2731 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के योग्य हो गया है.

राजस्थान के अलावा पांच अन्य राज्यों, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना ने पहले ही यह उपलब्धि हासिल कर ली है. इन छह राज्यों को 19459 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि उधार लेने की अनुमति दी गई है.

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने मई 2020 में राज्यों को दी जाने वाली अतिरिक्त उधार अनुमतियों को सुगमता से व्‍यापार कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन के साथ जोड़ने का फैसला किया था. इसके तहत राज्यों की उधार सीमा को उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के दो प्रतिशत तक बढ़ाया गया था.

राज्यों को इस अतिरिक्‍त धनराशि का आधा हिस्‍सा नागरिक केंद्रित सुधारों पर खर्च करना होगा. इन सुधारों में एक देश एक राशन कार्ड प्रणाली का कार्यान्वयन, सुगमता से व्‍यापार, शहरी स्थानीय निकाय सुधार और विद्युत क्षेत्र में सुधार शामिल हैं. अब तक 10 राज्यों ने एक देश एक राशन कार्ड प्रणाली को लागू किया है. छह राज्यों ने सुगमता से व्यापार संबंधी सुधार और दो राज्‍यों ने स्‍थानीय निकाय सुधार किए हैं.

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जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ‘सेहत’ की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 26 दिसम्बर को जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा उपलब्‍ध कराने की आयुष्‍मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ‘सेहत’ की शुरूआत की. ‘सेहत’ योजना के तहत जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को 5 लाख रुपए तक का नि:शुल्‍क स्‍वास्‍थ्‍य बीमा उपलब्‍ध कराया जाएगा.

उल्‍लेखनीय है कि जम्‍मू कश्‍मीर में पहले ही गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले लगभग 14 लाख परिवार आयुष्‍मान भारत योजना से 2018 से लाभन्वित हो रहे हैं. अब जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार के इस योजना से जम्‍मू कश्‍मीर के सभी परिवार को यह लाभ उपलब्‍ध होगा. इस योजना से पूरे जम्‍मू कश्‍मीर के एक करोड लोगों को लाभ होगा.

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स्वास्थ्य ढांचे में सुधार के लिए तमिलानाडु में ‘अम्मा मिनी क्लिनिक’ योजना की शुरुआत

तमिलानाडु के मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने ‘अम्मा मिनी क्लिनिक’ योजना की शुरुआत की. इसका मकसद जन स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है. इस योजना के तहत समूचे तमिलनाडु में दो हजार क्लिनिक खोले जाएंगे जिनमें लोग बुखार जैसी बीमारियों के लिए डॉक्टरों से परामर्श ले सकेंगे.

अम्मा मिनी क्लिनिक उन इलाकों में खोले जाएंगे जहां बड़ी संख्या में गरीब आबादी निवास करती है और वहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं हैं. इन क्लिनिकों में दवाई स्टोर होगा और मामूली ऑपरेशन करने के लिए उपकरण होंगे. प्रत्येक क्लिनिक में एक डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्य सहायक होगा.

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नीतीश कुमार ने 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की

नीतीश कुमार ने 16 नवम्बर को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल फागू चौहान ने कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. उन्होंने 7वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है.

शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार के साथ कुल 15 नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली. इसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) से 7, मुख्यमंत्री समेत वाली जनता दल U (JDU) से 6 और हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) व विकासशील इंसान पार्टी (VIP) से एक-एक नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ ली.

बहुमत के लिए 122 सदस्यों की जरूरत

243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा के लिए हाल ही में चुनाव कराये गये थे. राज्य विधानसभा या लोकसभा में बहुमत के लिए आधे से अधिक निर्वाचित सदस्यों की जरूरत होती है. इस प्रकार यहाँ सरकार बनाने के लिए 122 या इससे अधिक सदस्यों की जरूरत थी.

इस चुनाव में राष्ट्रीय लोकतान्त्रिक गठवंधन (NDA) को 125 सीटें मिलीं थीं. NDA के घटक दलों में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली JDU को 43 सीटें मिलीं जबकि BJP को 74 सीट हासिल हुई थी. दो अन्य घटक दलों VIP और HAM को 4-4 सीटें प्राप्त हुई. इस चुनाव में 75 सीटें जीत कर राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी रही.

तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को उप-मुख्यमंत्री का पद

BJP ने कटिहार से निर्वाचित विधायक तारकिशोर प्रसाद को विधानमंडल दल का नेता और बेतिया से निर्वाचित विधायक रेणु देवी को विधानमंडल दल का उप-नेता चुना है. इन्हें राज्य में उप-मुख्यमंत्री का पद दिया गया है.

उप-मुख्यमंत्री का पद: एक दृष्टि

  • भारतीय संविधान में उप-प्रधानमंत्री या उप-मुख्यमंत्री पद का कोई उल्लेखन नहीं है अर्थात यह पद संवैधानिक नहीं है. इस पद पर आसीन व्यक्ति को प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री की शक्तियां प्राप्त नहीं होतीं और न ही वह प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री अनुपस्थिति में प्रदेश की अगुवाई कर सकता है. उसे कोई अतिरिक्त वेतन, भत्ता देने का भी प्रावधन नहीं है.
  • पंडित नेहरू की सरकार में सरदार वल्लभ भाई पटेल देश के पहले उप-प्रधानमंत्री थे. इसके बाद मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम भी उप-प्रधानमंत्री रहे. हालांकि देवीलाल पहले ऐसे नेता रहे, जिन्होंने 1989 में उप-प्रधानमंत्री की बकायदा शपथ ली थी.
  • एसएम कृष्णा देश का पहला उप-मुख्यमंत्री थे. कर्नाटक में 1994 में वह उप-मुख्यमंत्री बने थे. इसके बाद कर्नाटक में ही 2004 में सिद्धारमैया उप-मुख्यमंत्री बने थे.
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दिल्‍ली में वायु गुणवत्‍ता प्रबंधन के लिए आयोग गठित करने संबंधी अध्‍यादेश जारी किया गया

राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्‍ता प्रबंधन के लिए आयोग गठित करने संबंधी अध्‍यादेश जारी किया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 29 अक्टूबर को इस अध्‍यादेश को मंजूरी दी.
यह आयोग वायु गुणवत्ता सूचकांक के बेहतर तालमेल, अनुसंधान, पहचान और वायु गुणवत्ता से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए काम करेगा.

आयोग में एक अध्यक्ष, पर्यावरण मंत्रालय का एक प्रतिनिधि, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सदस्य, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के तकनीकी विशेषज्ञ होंगे.

वायु गुणवत्ता प्रबंधन संबंधी इस आयोग में वायु प्रदूषण रोकने के उपायों के बारे में सुझाव देने के लिए तीन उप-समितियां होंगी.

आयोग के पास राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता के संरक्षण और इसमें सुधार के लिए सभी उपाय करने, निर्देश देने और शिकायतों पर कार्रवाई करने का अधिकार होगा. आयोग पर्यावरण में विभिन्न स्रोतों से प्रदूषक तत्वों के उत्सर्जन के मानक भी तैयार करेगा.

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केरल फलों-सब्जियों के MSP तय करने वाला पहला राज्‍य बना

केरल सरकार ने राज्य में सब्जियों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की घोषणा की है. राज्‍य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसकी घोषणा 28 अक्टूबर को की. इसी के साथ केरल सब्जियों के लिए MSP तय करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है.

सब्जियों का यह MSP उत्पादन लागत से 20 फीसदी अधिक होगा. यह योजना 1 नवंबर से लागू कर दी जाएगी. अगर बाजार मूल्य MSP से नीचे चला जाता है तो किसानों से उनकी उपज को MSP पर ही खरीदा जाएगा.

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जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में संशोधन किया गया

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में भूमि स्वामित्व अधिनियम संबंधी कानून में संशोधन किया है. इस संशोधन के बाद अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में अपने घर या कारोबार के लिए जमीन खरीद सकता है. हालांकि खेती की जमीन सिर्फ राज्य के लोगों के लिए ही रहेगी.

5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35-A के प्रावधान खत्म होने के बाद यह संशोधन किया गया है. अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर की एक अपनी अलग संवैधानिक व्यवस्था थी. उसके तहत जम्मू-कश्मीर के सिर्फ स्थायी नागरिकों (जिनके पास राज्य का स्थायी नागरिकता प्रमाण पत्र हो) को ही जमीन खरीदने की अनुमति थी. संशोधन के बाद नागरिकता प्रमाण पत्र की अनिवार्यता सिर्फ कृषि भूमि की खरीद के लिए होगी.

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