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प्रधानमंत्री ने तीनों कृषि कानून निरस्त करने, MSP पर समिति बनाने की घोषणा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद द्वारा सितम्बर 2020 में पारित लाये तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की. इसके लिए संसद के आगामी सत्र में विधेयक लाया जाएगा. इन तीनों कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन कर रहे थे. प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से जुड़े मुद्दों पर एक समिति बनाने की भी घोषणा की.

प्रधानमंत्री ने 19 नवम्बर को गुरु नानक जयंती के अवसर पर इस आशय की घोषणा की. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी सरकार तीन नये कृषि कानून के फायदों को किसानों के एक वर्ग को हर संभव प्रयासों के बावजूद समझाने में असफल रही. उन्होंने कहा कि इन तीनों कृषि कानूनों का लक्ष्य किसानों विशेषकर छोटे किसानों का सशक्तीकरण था.

MSP को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए समिति का गठन

प्रधानमंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए एक समिति के गठन किये जाने की भी घोषणा की. इस समिति में केंद्र, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि अर्थशास्त्री होंगे.

क्या है तीन कृषि कानून

संसद ने किसानों के सशक्तीकरण के लिए सितम्बर 2020 में तीन कृषि विधेयक पारित कर अधिनियम का रूप दिया था. ये अधिनियम – कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2020; किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम, 2020 हैं.

इन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कृषि उपज और खेती के क्षेत्र में स्‍टॉक सीमा और लाइसेंस राज को समाप्त करना था. इसमें किसानों को अनुबंध खेती का विकल्प दिया गया था. किसानों को मौजूदा विकल्प के अतिरिक्त अन्य कई विकल्प दिए गये थे जिससे उनके उपज का बेहतर दाम मिल सके.

कानून वापसी की प्रक्रिया

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद भारत के संपूर्ण राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए और किसी राज्य का विधानमंडल उस राज्य या उसके किसी भाग के लिए कानून बना सकता है.

संसद को कानून बनाने के साथ-साथ कानून वापस लेने का भी अधिकार है. कानून खत्म करने की प्रक्रिया भी कानून बनाने के समान ही है. सरकार एक विधेयक में ही तीनों कानूनों की वापसी का जिक्र करके काम खत्म कर सकती है. इस विधेयक के पारित होने के बाद नया कानून अस्तित्व में आ जाएगा जिसके तहत तीनों कृषि कानून खत्म माने जाएंगे.

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विपणन वर्ष 2022-23 के लिए रबी फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में वृद्धि

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2022-23 के लिए रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी है. गेहूं का MSP 40 रुपये बढ़ाकर 2015 रुपये प्रति क्विंटल और जौं का 35 रुपये बढ़ाकर 1635 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

विपणन वर्ष 2022-23 के लिए रबी फसलों का MSP

फसलप्रति क्विंटल MSPवृद्धि
गेहूं201540
जौ163535
सरसों5050400
चना5230130
कुसुभ5441114
मसूर5500400

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है. MSP की घोषणा सरकार द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की संस्तुति पर वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में की जाती है.

सरकार फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

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विपणन वर्ष 2021-22 के लिए खरीफ फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में बढ़ोतरी की गयी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी का निर्णय किया है. यह निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 10 जून को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुई.

विपणन सीजन 2021-22 के लिए खरीफ फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी केन्द्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य, औसत उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुणा तय किया गया था ताकि किसानों को उनकी उपज का समुचित लाभ मिल सके.

मुख्य बिंदु

  • धान के MSP में 72 रुपये की वृद्धि की गयी है. यह अब 1,940 रुपये प्रति क्विंटल है.
  • अरहर दाल के MSP में 300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गयी है. अरहर दाल का MSP अब 6300 रुपये प्रति क्विंटल है. उड़द दाल का MSP भी बढ़ कर अब 6300 रुपये प्रति क्विटल, मूंग दाल का MSP बढ़ा कर 7275 रुपये प्रति क्विंट किया गया है.
  • तिलहन में तिल के MSP में सबसे ज्यादा 452 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. अब तिल का MSP 7,307 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. मूंगफली का MSP 275 रुपये बढ़ा है और 5550 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है.

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP (Minimum Support Price) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है.

सरकार हर साल फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

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भारत में विश्व का पहला नैनो यूरिया विकसित किया गया

भारत में विश्व का पहला नैनो यूरिया विकसित किया गया है. इसका विकास इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) ने किया है. यह यूरिया इफको के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अनुसंधान के बाद स्वदेशी और प्रोपाइटरी तकनीक के माध्यम से कलोल स्थित नैनो जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान केन्द्र में तैयार किया है. यह नवीन उत्पाद ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘आत्मनिर्भर कृषि’ की दिशा में एक सार्थक कदम है.

इफको नैनो यूरिया (Nano Urea): मुख्य बिंदु

  • यह यूरिया तरल (Liquid) के रूप में है. इसके 500 ml की एक बोतल में 40,000 PPM नाइट्रोजन होता है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के बराबर नाइट्रोजन पोषक तत्व प्रदान करेगा.
  • इफको नैनो यूरिया का उत्पादन जून 2021 तक आरंभ होगा. इसके एक बोतल (500 ml) की कीमत 240 रुपये निर्धारित की है जो सामान्य यूरिया के एक बैग के मूल्य से 10 प्रतिशत कम है.
  • नैनो यूरिया को सामान्य यूरिया के प्रयोग में कम से कम 50 प्रतिशत कमी लाने के प्रयोजन से तैयार किया गया है.
    नैनो यूरिया तरल का आकार छोटा होने के कारण इसे पॉकेट में भी रखा जा सकता है जिससे परिवहन और भंडारण लागत में भी काफी कमी आएगी.

इफको नैनो यूरिया की विशेषता

  • इफको नैनो यूरिया तरल को पौधों के पोषण के लिए प्रभावी व असरदार पाया गया है. इसके प्रयोग से फसलों की पैदावार बढ़ती है तथा पोषक तत्वों की गुणवत्ता में सुधार होता है.
  • नैनो यूरिया भूमिगत जल की गुणवत्ता सुधारने तथा जलवायु परिवर्तन व टिकाऊ उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव डालते हुए ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा.
  • किसानों द्वारा नैनो यूरिया तरल के प्रयोग से पौधों को संतुलित मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होंगे और मिट्टी में यूरिया के अधिक प्रयोग में कमी आएगी. यूरिया के अधिक प्रयोग से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मृदा स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, पौधों में बीमारी और कीट का खतरा अधिक बढ़ जाता है, फसल देर से पकती है और उत्पादन कम होता है. साथ ही फसल की गुणवत्ता में भी कमी आती है.

इफको (IFFCO): एक दृष्टि

इफको (Indian Farmers Fertiliser Cooperative) विश्व का सबसे बड़ा उर्वरक सहकारिता संस्था है. इफको का पंजीकरण 3 नवम्बर 1967 को का एक बहुएकक सहकारी समिति के रूप में किया गया था. बहुराज्य सहकारी सोसाइटीज अधिनियम, 1984 व 2002 के अधिनियमन के साथ यह एक बहुराज्य सहकारी समिति के रूप में पंजीकृत है. यह समिति प्रमुख रूप से उर्वरकों के उत्पादन और विपणन का कार्य करती है.

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सरकार ने नारियल गरी के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी

सरकार ने पेराई वाले नारियल का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 375 रुपये प्रति क्विंटल और नारियल गोला गरी के MSP में 300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 27 जनवरी को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने वर्ष 2021 सत्र के लिए नारियल गरी के MSP को अपनी मंजूरी दी.

उचित औसत गुणवत्ता (FAQ) के पेराई वाले नारियल (मिलिंग कोपरा) के MSP को 2020 सत्र के 9,960 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 10,335 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि नारियल गरी गोला के लिए MSP को पिछले साल के 10,300 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 10,600 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.

बढ़ोतरी के बाद पेराई लायक नारियल का MSP, उत्पादन लागत की तुलना में 52 प्रतिशत अधिक है, जबकि बाल कोपरा का समर्थन मूल्य 55 प्रतिशत अधिक है.

नारियल गरी के उत्पादन में विश्व में पहले स्थान पर
भारत नारियल गरी के उत्पादन और उत्पादकता में विश्व में पहले स्थान पर है. यह मुख्य रूप से 12 तटीय राज्यों में उगाया जाता है.

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है. MSP की घोषणा सरकार द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की संस्तुति पर करती है.

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संपूर्ण लक्षद्वीप को एक जैविक कृषि क्षेत्र घोषित किया गया

सरकार ने संपूर्ण लक्षद्वीप को एक जैविक (ऑर्गेनिक) कृषि क्षेत्र घोषित किया है. यह घोषणा केंद्र सरकार की भागीदारी गारंटी प्रणाली (PGS) के तहत की गयी है.

भागीदारी गारंटी प्रणाली (PGS) क्या है?

भागीदारी गारंटी प्रणाली (Participatory Guarantee Systems) जैविक उत्पादों को प्रमाणित करने की एक प्रक्रिया है. यह सुनिश्चित करती है कि उनका उत्पादन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार है. इसका कार्यान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता है. PGS प्रमाणीकरण केवल उन किसानों या समुदायों के लिये है, जो एक गाँव अथवा आस-पास के अन्य क्षेत्रों के भीतर समूह के रूप में संगठित होकर कार्य कर सकते हैं.

जैविक कृषि क्या है?

जैविक या ऑर्गेनिक कृषि में सभी प्रकार की कृषि गतिविधियाँ पूर्णतः सिंथेटिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग के बिना की जाती हैं. इसमें भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाए रखने के लिये फसल चक्र, हरी खाद, कंपोस्ट आदि का प्रयोग किया जाता है.

ऑर्गेनिक क्षेत्र बनने वाला देश का पहला केंद्रशासित प्रदेश

लक्षद्वीप 100 प्रतिशत जैविक कृषि क्षेत्र बनने वाला देश का पहला केंद्रशासित प्रदेश है. इससे पहले वर्ष 2016 में सिक्किम भारत का पहला 100 प्रतिशत जैविक राज्य बना था.

उल्लेखनीय है कि अक्तूबर 2017 में लक्षद्वीप प्रशासन ने सभी द्वीपों को रासायनिक मुक्त क्षेत्र बनाने के उद्देश्य से कृषि प्रयोजनों के लिये किसी भी प्रकार के सिंथेटिक रसायनों की बिक्री और उपयोग पर औपचारिक प्रतिबंध लगा दिया था.

लक्षद्वीप: एक दृष्टि

लक्षद्वीप, भारत का सबसे छोटा केंद्रशासित प्रदेश है. इसका क्षेत्रफल लगभग 32 वर्ग किलोमीटर है. यह एक द्वीप समूह है जिसमें कुल 36 द्वीप शामिल हैं. लक्षद्वीप की राजधानी कवारत्ती यहाँ का सबसे प्रमुख शहर है.

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विपणन वर्ष 2021-22 के लिए रबी फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में वृद्धि

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 2021-22 विपणन वर्ष के लिए रबी फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) बढ़ाने का‍ निर्णय लिया है. गेंहू का MSP 50 रुपए प्रति क्विंटल बढाकर 1975 रुपए कर दिया गया है. इसी तरह चने के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में 225 रुपए, जौ के समर्थन मूल्‍य में 75 रुपए और सरसों के समर्थन मूल्य में 225 रुपए की बढ़ोतरी की गई है.

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है. MSP की घोषणा सरकार द्वारा कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की संस्तुति पर वर्ष में दो बार रबी और खरीफ के मौसम में की जाती है.

सरकार फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

विपणन वर्ष 2021-22 के लिए रबी फसलों का MSP

फसलप्रति क्विंटल MSPवृद्धि
गेहूं197550
जौ160075
सरसों4650225
चना5100255
कुसुभ5327112
मसूर5100300
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कृषि क्षेत्र से संबंधित दो मुख्य विधयेकों को संसद के दोनों सदनों में मंजूरी दी गयी

राज्यसभा ने 20 सितम्बर को कृषि क्षेत्र से संबंधित दो मुख्य विधयेकों को मंजूरी दी. इन दोनों विधयेकों को लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। ये विदेयक- ‘कृषक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020’ और ‘किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020’ हैं. कृषि मंत्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर ने दोनों विधेयक को लोकसभा में प्रस्तुत किया था. ये विधेयक 5 जून 2020 को जारी किए गए समान अध्‍यादेशों का स्‍थान लेंगे.

कृ‍षक उपज व्‍यापार और वाणिज्‍य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020 किसानों को अपनी उपज के इलेक्‍ट्रॉनिक व्‍यापार की सुविधा भी प्रदान करेगा. इससे वे कृषि जिन्‍सों की प्रत्‍यक्ष ऑनलाइन खरीद-फरोख्‍त के लिए लेन-देन प्‍लेटफॉर्म स्‍थापित कर सकेंगे.

किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्‍वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 के अनुसार पैदावार या फसल उगाने से पहले खेती संबंधी करार (अनुबंध) किए जा सकेंगे. ऐसे समझौते में कृषि उपज की खरीद के लिए निश्चित मूल्‍य का उल्‍लेख किया जा सकेगा.

कृषि विधयेक: मुख्य बिंदु

  • इन विधयेकों के प्रावधानों के अनुसार कृषि उपज और खेती के क्षेत्र में स्‍टॉक सीमा और लाइसेंस राज की समाप्ति होगी. किसानों को अनुबंध खेती से अधिक आय प्राप्त करने का सुनहरा अवसर भी मिलेगा.
  • इससे किसानों की उपज खरीदने वालों की संख्‍या (प्रतिस्‍पर्धा) बढेगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर दाम मिलेगा.
  • किसानों को हर तरह के बिचौलियों और रूकावटों से आजाद करेगा. किसान अब यह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं कि वे अपने उत्पादों को कहां और किस कीमत पर बेचेंगे.
  • यदि किसान अपनी उपज की बिक्री करेंगे तो उन्‍हें मंडी कर नहीं देना होगा, जो 2-8.5 प्रतिशत तक होता है.
  • इन विधेयकों से कृषि उपज बाजार समिति (AMPC) अधिनियम का प्रभाव किसी भी तरह कम नहीं होगा.
  • कृषि जिन्‍सों के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (MSP) की प्रणाली जारी रहेगी.
  • प्रस्‍तावित कानूनों से किसानों को अंतर-राज्‍य बाजारों तक पहुंच कायम करने की अतिरिक्‍त सुविधा मिलेगी.
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि अवसंरचना कोष को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नई अखिल भारतीय केन्‍द्रीय योजना ‘कृषि अवसंरचना कोष’ (Agriculture Infrastructure Fund) को मंजूरी दी है. इस योजना के तहत फसल के बाद प्रबंधन के लिए व्यावहारिक परियोजनाओं में निवेश के लिए मध्यम और दीर्घकालिक ऋण की सुविधा दी जाएगी.

कृषि अवसंरचना कोष: मुख्य बिंदु

  • इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2020 से 2029 तक दस वर्षों के लिए होगी. इसके तहत, चालू वर्ष में 10 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ अगले चार वर्षों में ऋणों का भुगतान किया जाएगा. अगले तीन वित्तीय वर्षों में 30 हजार करोड़ रुपये वितरित किए जाएंगे.
  • योजना के तहत देश में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से किसान उत्पादक संगठनों (FPO), स्टार्टअप्स, प्राथमिक कृषि साख समितियों, कृषि-उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.
  • इस वित्तपोषण सुविधा के तहत सभी ऋणों में दो करोड़ की सीमा तक प्रति वर्ष 3 प्रतिशत का ब्याज अनुदान होगा. यह अनुदान अधिकतम सात वर्षों की अवधि के लिए उपलब्ध होगा. इसके अलावा पात्र उधारकर्ताओं को दो करोड़ रुपए तक के ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज योजना के तहत क्रेडिट गारंटी कवरेज उपलब्ध होगा.
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हिमालयी तितली ‘गोल्डन बर्डविंग’ को भारत की सबसे बड़ी तितली का दर्जा दिया गया

हिमालयी तितली ‘गोल्डन बर्डविंग’ को हाल ही में भारत की सबसे बड़ी तितली का दर्जा दिया गया है. ‘मादा गोल्डन बर्डविंग’ उत्तराखंड के दीदीहाट में जबकि ‘नर गोल्डन बर्डविंग’ मेघालय के शिलांग में ‘वानखर तितली संग्रहालय’ में पाया गया है.

गोल्डन बर्डविंग: एक दृष्टि

‘गोल्डन बर्डविंग’ (Golden Birdwing) का वैज्ञानिक नाम Troides aeacus है. इस प्रजाति के पंखों की लंबाई 194 मिलीमीटर तक होती है. तितली की यह प्रजाति गढ़वाल से उत्तर-पूर्व राज्य तथा ताइवान, चीन आदि में भी पाई जाती है.

इससे पहले ‘दक्षिणी बर्डविंग’ को भारत की सबसे बड़ी तितली होने का दर्जा

गोल्डन बर्डविंग को 88 वर्षों के बाद भारत की सबसे बड़ी तितली के रूप में खोजा गया हिया. इससे पहले भारत की सबसे बड़ी तितली होने का दर्जा 1932 में ‘दक्षिणी बर्डविंग’ को दिया गया था जो कॉमन बर्डविंग उप-प्रजाति है.
इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम Troides Minos है. दक्षिणी बर्डविंग के पंखों की लंबाई 140-190 मिलीमीटर तक होती है. यह गोवा से केरल तक पाई जाती है.

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किसानों के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये

सरकार ने किसानों के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन सहित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए. ये निर्णय 3 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गये. इन फैसलों से न केवल किसानों को बड़ा फायदा होगा बल्कि कृषि क्षेत्र की सूरत में भी आमूल-चूल तौर बदलाव होगा.

आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन

सरकार ने किसानों की आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 में संशोधन का फैसला किया है. यह कृषि क्षेत्र में बदलाव और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है.

मंत्रिमंडल ने कृषि उपज के बाधा मुक्त व्यापार को सुनिश्चित करने के लिए कृषि उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सहायता) अध्यादेश, 2020 को मंजूरी दी. इस अध्‍यादेश से ऐसा माहौल बनाने में मदद मिलेगी जिसमें किसान और व्‍यापारी अपनी पसंद की कृषि उपज खरीद और बेच सकेंगे.

साथ ही मूल्‍य आश्‍वासन और कृषि सेवाओं से संबंधित किसान सशक्‍तीकरण और संरक्षण अध्‍यादेश-2020 को स्वीकृति दी गयी है. यह अध्‍यादेश किसानों को कृषि उपज का प्रसंस्‍करण करने वालों, एग्रीगेटरों, थोक विक्रेताओं, बडे पैमाने पर खुदरा व्‍यापार करने वालों और निर्यातकों के साथ बिना किसी शोषण की आशंका के बराबरी के साथ व्‍यावसायिक संबंध बनाने में सक्षम बनाएगा.

आवश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन से लाभ

  • सरकार के इन फैसलों से आवश्यक वस्तु की सूची से अनाज, दलहन, तिलहन, प्‍याज और आलू जैसी तमाम वस्तुएं और कृषि उत्पादों को बाहर किया गया है.
  • इससे किसान ‘एग्रीकल्चर प्रोड्यूसर मार्केट कमेटी’ के बंधन से मुक्त हो जाएगा. किसान को न केवल अपनी फसल की अच्छी कीमत मिलेगी बल्कि वो उत्पादों का अपने मुताबिक भंडारण कर सकेंगे.
  • किसान अपनी मर्जी से कृषि उत्पादों को अब देश के किसी भी बाज़ार में बेच सकेगा. साथ ही उसे सीधे निर्यातकों को बेचने की भी अनुमति मिल गयी है.

इससे वन नेशन वन मार्केट की सरकार की नीति को भी बढावा मिलेगा. किसान प्रत्यक्ष रूप से विपणन से जुड़ सकेंगे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और उन्हें अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा.

कृषि क्षेत्र में निजी और प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश बढ़ेगा

इन फैसलों से कृषि क्षेत्र में निजी और प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश भी बढ़ेगा. इससे कोल्‍ड स्‍टोरेज में निवेश बढ़ाने और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला यानी सप्‍लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी.

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा

सरकार ने नियमों मे बदलाव करके उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की है. अब अकाल या युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषि‍ उपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है.

आवश्यक वस्‍तु अधिनियम, 1955: एक दृष्टि

आवश्यक वस्‍तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act of 1955) को उपभोक्‍ताओं को अनिवार्य वस्‍तुओं की सहजता से उपलब्‍धता सुनिश्चित कराने तथा व्‍यापारियों के शोषण से उनकी रक्षा के लिए बनाया गया था.

इस अधिनियम में अनिवार्य वस्‍तुओं के उत्‍पादन वितरण और मूल्‍य निर्धारण नियंत्रित करने की व्‍यवस्‍था की गई है. इस अधिनियम के तहत अधिकांश शक्तियां राज्‍य सरकारों को दी गई हैं.

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विपणन वर्ष 2020-21 के लिए खरीफ फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य में बढ़ोतरी की गयी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी का निर्णय किया है. यह निर्णय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में 1 जून को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुई.

मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार खरीफ की 14 फसलों के लिए MSP में 83 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गयी है. यह बढ़ोतरी किसानों के लागत से 50 प्रतिशत अधिक मुनाफे को ध्‍यान में रखते हुए किया गया है.

मंत्रिमंडल ने धान के MSP में 53 रुपये की बढ़ोतरी की है. अब धान का MSP 1868 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है. ज्‍वार का MSP 2620 प्रति क्विंटल और बाजरा का MSP 2150 प्रति क्विंटल घोषित किया गया है. कपास का MSP 260 रुपये बढ़ाकर 5515 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है.

MSP (Minimum Support Price) क्या है?

MSP (Minimum Support Price) यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह कीमत होती है, जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. इसे सरकारी भाव भी कहा जा सकता है.

सरकार हर साल फसलों की MSP तय करती है ताकि किसानों की उपज का वाजिब भाव मिल सके. इसके तहत सरकार फूड कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नैफेड जैसी सरकारी एजेसिंयों की मदद से किसानों की फसलों को खरीदती है.

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