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एन चन्‍द्रशेखरन और रूपा पुरूषोत्‍तमन द्वारा लिखित पुस्‍तक ब्रिजिटल नेशन का लोकार्पण

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 20 अक्टूबर को नई दिल्‍ली में ब्रिजिटल नेशन (Bridgital Nation) पुस्‍तक का लोकार्पण किया. इस पुस्‍तक के लेखक टाटा सन्‍स के अध्‍यक्ष एन चन्‍द्रशेखरन और रूपा पुरूषोत्‍तमन हैं.

यह पुस्तक भविष्य के लिए पारिस्थितिकी तंत्र में तकनीक के उपयोग पर दृष्टिकोण प्रदान करती है. अत्याधुनिक डिजिटल उपकरण आकांक्षाओं और उपलब्धियों के बीच एक सेतु (ब्रिज) का काम कर सकते हैं इसीलिए इसका नाम ‘ब्रिजिटल’ रखा गया है.

बुकर पुरस्कार 2019: कनाडा की मार्गरेट एटवुड और ब्रिटेन की बर्नरडाइन एवरिस्टो संयुक्त विजेता बनीं

मार्गरेट एटवुड और बर्नरडाइन एवरिस्टो को संयुक्त रूप से वर्ष 2019 का बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा. बुकर के नियमों के अनुसार इस पुरस्कार को बांटा नहीं जा सकता, लेकिन बुकर पुरस्कार के लिए विजेताओं का चयन करने वाले निर्णायक मंडल ने कहा कि वे एटवुड और एवरिस्तो में से एक विजेता नहीं चुन सकते. पुरस्कार स्वरुप 60000 पाउंड की  राशि दोनों लेखिकाओं में बराबर बांटी जाएगी.

इस पुरस्कार के लिए छांटी गई (शार्टलिस्ट) छह पुस्तकों में भारतीय उपन्यासकार सलमान रुश्दी का उपन्यास ‘क्विचोटे’ भी शामिल था.

मार्गरेट एटवुड: कनाडा की 79 साल की मार्गरेट एटवुड सबसे बुजुर्ग पुरस्कार विजेता हैं. उन्हें यह पुरस्कार उनकी पुस्तक ‘द टेस्टामेंट’ के लिए दिया गया है.

बर्नरडाइन एवरिस्टो: ब्रिटेन की एवरिस्टो इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को जीतने वाली पहली अश्वेत महिला हैं. उन्हें यह सम्मान ‘गर्ल, वुमैन, अदर’ के लिए दिया गया.

बुकर पुरस्‍कार: एक दृष्टि

  • बुकर पुरस्‍कार के पूरा नाम ‘मैन बुकर पुरस्कार फ़ॉर फ़िक्शन’ (Man Booker Prize for Fiction) है.
  • बुकर पुरस्कार की स्थापना सन् 1969 में इंगलैंड की बुकर मैकोनल कंपनी द्वारा की गई थी.
  • यह पुरस्‍कार राष्ट्रमंडल (कॉमनवैल्थ) या आयरलैंड के नागरिक द्वारा लिखे गए मौलिक अंग्रेजी उपन्यास के लिए हर वर्ष दिया जाता है.
  • बुकर पुरस्कार विजेता को 60 हज़ार पाउण्ड की राशि विजेता लेखक को दी जाती है.
  • 1992 में आखिरी बार संयुक्त विजेता घोषित किया गया था. इसके बाद नियम में बदलाव किया गया, जिसके तहत निर्णायक मंडल सिर्फ एक ही विजेता घोषित कर सकते थे.
  • पहला बुकर पुरस्कार इंगलैंड के उपन्यासकार पी एच नेवई (P. H. Newby) को ‘Something to Answer For’ के लिए दिया गया था.
  • पिछले साल (2018) में यह पुरस्कार एना बर्न्स को ‘मिल्कमैन के लिए दिया गया था.
  • भारतीय उपन्यासकार सलमान रुश्दी की पुस्तक पांच बार इस पुरस्कार के लिए छांटी गई है.

बुकर पुरस्‍कार पाने वाले भारतीय: एक दृष्टि
कुल 5 बार यह पुरस्कार भारतीय मूल के लेखकों को मिला है. ये लेखक हैं- वी एस नाइपॉल, अरुंधति राय, सलमान रश्दी, किरण देसाई और अरविन्द अडिग.

लेखकउपन्यासवर्ष
1. वी एस नाइपॉलइन ए फ़्री स्टेट1971
2. सलमान रश्दीमिडनाइट्स चिल्ड्रेन1981
3. अरुंधति रायद गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स1997
4. किरण देसाईद इनहैरिटैंस ऑफ लॉस2006
5. अरविन्द अडिगद व्हाइट टाइगर2008

नोबेल पुरस्कार विजेता लेखिका टोनी मॉरिसन का निधन

नोबेल पुरस्कार विजेता लेखिका टोनी मॉरिसन का 6 अगस्त को निधन हो गया. वह 88 वर्ष की थीं. मॉरिसन का पहला उपन्यास “द ब्लूएस्ट आई” था. वह वर्ष 1993 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाली पहली अश्वेत महिला बन गईं. “बिलव्ड” और “सांग आफ सोलोमन” उनके द्वार लिखी गयी मुख्य उपन्यास हैं. “बिलव्ड” के लिए उन्हें वर्ष 1988 में पुलित्जर पुरस्कार भी मिला.