पोस्ट



ब्रिटेन 31 जनवरी 2020 को औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ की सदस्‍यता छोड़ दी

ब्रिटेन ने 31 जनवरी को औपचारिक रूप से यूरोपीय संघ की सदस्‍यता छोड़ दी. इसके साथ ही ब्रिटेन का उसके नजदीकी देशों के साथ चार दशक से अधिक पुराना आर्थिक, राजनीतिक तथा कानूनी एकीकरण समाप्‍त हो गया. ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ के संस्थान से ब्रिटेन का झंडा हटा दिया गया है.

करीब चार वर्ष तक राजनीतिक उठापटक के बीच ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग (ब्रेग्जिट) हुआ है. ब्रिटेन 47 वर्ष यूरोपीय संघ का सदस्‍य रहा. 2016 के जनमत संग्रह में मामूली बहुमत से ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने का समर्थन किया गया था. उसके बाद दो आम चुनाव हुए और दो प्रधानमंत्री बदले.

ब्रेग्जिट के बावजूद 31 दिसम्‍बर 2020 तक यथा स्थिति बनी रहेगी और ब्रिटेन तथा यूरोपीय देशों के बीच लोगों का मुफ्त आवाजाही सहित यूरोपीय संघ के अधिकतर नियम लागू रहेंगे.

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यूरोपीय संघ के साथ मैत्रीपूर्ण सहयोग के एक नए अध्‍याय की शुरूआत का वायदा किया है. यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच हुए समझौते की ही तरह ब्रिटेन भी यूरोपीय संघ के साथ स्‍थायी मुक्‍त व्‍यापार समझौता करना चाहता है.

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को वेल्स अदालतों के लिए रानी के वकील के रूप में नियुक्त किया गया

वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे को इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों के लिए रानी के वकील (Queen’s Counsel for courts of England and Wales) के रूप में नियुक्त किया गया है. साल्वे का नाम ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय द्वारा जारी सिल्क नियुक्तियों (एक खास तरह के सिल्क के गाउन पहनने वाले वकील जो रानी के विशेष वकील होते हैं, के मेरिट के आधार पर यह नियुक्तियां दी जाती हैं) की सूची में शामिल है.

साल्वे और अन्य नियुक्तियों को औपचारिक रूप से इस वर्ष 16 मार्च को रानी के वकील के रूप में नियुक्त किया जाएगा. रानी के वकील का खिताब उन लोगों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने वकालत के संचालन में विशेष कौशल और विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया है.

हरीश साल्वे ने 1999-2002 तक भारत के लिए सॉलिसिटर जनरल के रूप में काम किया था. वह भारत और विदेशों में कई महत्वपूर्ण मामलों में दिखाई दिए हैं. साल्वे को 2013 में ब्लैकस्टोन चेम्बर्स के लिए बुलाया गया था. पिछले वर्ष जनवरी में व्हाट एंड केस पार्टनर दीपेन सभरवाल क्वीन के काउंसल थे. उन्होंने कुलभूषण जाधव प्रत्यर्पण मामले में अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय के समक्ष भारत का प्रतिनिधित्व किया था.

ब्रेग्जिट प्रस्ताव ब्रिटेन की संसद के निचले सदन में पारित हुआ

ब्रिटेन की संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने (ब्रेग्जिट) के प्रस्ताव की प्रारंभिक अनुमति दे दी. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव के पक्ष में 358 मत पड़े जबकि विरोध में 234 सांसदों ने वोट दिया. इसके साथ ही 31 जनवरी, 2020 से ईयू से ब्रिटेन के अलगाव का रास्ता साफ हो गया.

उल्लेखनीय है कि पूर्ववर्ती कंजरवेटिव सरकार बहुमत के अभाव में इस प्रस्ताव को संसद में पारित कराने में चार बार विफल रही थी. तीन बार विफल रहने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री टेरीजा मे को पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

ब्रिटेन आम चुनाव में मौजूदा प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के नेतृत्व वाली कंजरवेटिव पार्टी ने जीत दर्ज की

ब्रिटेन आम चुनाव में मौजूदा प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंजरवेटिव पार्टी ने जीत दर्ज की है. 650 सदस्‍यों वाले निचले सदन (हाउस ऑफ कॉमन्स) में कंजर्वेटिव पार्टी ने 365 सीटें जीत कर स्पस्ट बहुमत प्राप्त किया है. विपक्षी लेबर पार्टी को 203 सीटें मिली है. स्‍कॉटिश नेशनलिस्‍ट पार्टी-एसएनपी को 48, लिबरल डेमोक्रेट्स को 11 और डेमोक्रेटिक यूनियनिस्‍ट पार्टी को आठ सीटें मिली हैं. इस जीत के साथ ही ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग करने (ब्रेग्जिट) पर अनिश्चितता खत्म हो गयी है.

ब्रिटेन में नई संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ के 650 सदस्यों के चुनाव के लिए 12 दिसम्बर को मतदान हुआ था. वर्ष 2016 में यूरोपीय संघ से अलग होने के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन में ब्रेक्जिट को लेकर गतिरोध बना हुआ था. 31 अक्टूबर की अंतिम समयसीमा तक ब्रेक्जिट लागू करने में नाकाम रहने के बाद प्रधानमंत्री जॉनसन ने 12 दिसंबर को चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी.

मौजूदा प्रधानमंत्री और कंजरवेटिव पार्टी के नेता बोरिज जॉनसन ने जनता से बहुमत देने की अपील की थी ताकि वह अगले महीने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने (ब्रेक्जिट) में तेजी ला सके. दूसरी तरफ जेरेमी कोरबेन के नेतृत्व वाली प्रमुख विपक्षी दल लेबर पार्टी ने ब्रेक्जिट पर नया जनमत संग्रह कराने का वायदा किया था. नतीजों के बाद जेरेमी कोरबेन ने लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया. लेबर पार्टी का 1935 से हुए अब तक के आम चुनाव में यह सबसे खराब प्रदर्शन है.

ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने की नई तारीख 31 जनवरी तय की गई

यूरोपीय संघ के सदस्यों ने ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग (ब्रेक्जिट) होने की तारीख को तीन महीने आगे बढ़ाने पर 28 अक्टूबर को सहमति दे दी. अब ब्रेक्जिट की तारीख 31 अक्टूबर से बढ़कर 31 जनवरी 2020 हो गई है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनॉल्ड टस्क ने ब्रेक्जिट की समय-सीमा बढ़ाने की पुष्टि की.