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चीन ने नया सीमा कानून पारित किया, पडोसी देशों की चिंता

चीन की संसद ने हाल ही में एक नया सीमा कानून पारित किया था. इस कानून का नाम “भूमि सीमा कानून” (Land Boundary Law) है. नया सीमा कानून 1 जनवरी, 2022 से लागू होगा.

इस कानून में अन्य बातों के अलावा यह कहा गया है कि भूमि सीमा मामलों पर चीन दूसरे देशों के साथ किए या संयुक्त रूप से स्वीकार किए समझौतों का पालन करेगा. कानून में सीमावर्ती क्षेत्रों में जिलों का पुनर्गठन करने का भी प्रावधान है.

यह चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लिए चीन की भूमि सीमाओं के पार किसी भी आक्रमण, अतिक्रमण, घुसपैठ, उकसावे का मुकाबला करने के लिए व्यवस्था करता है.

पडोसी देशों की चिंता

  • चीनी का यह कानून भारत सहित चीन के सभी पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों पर असर डालेगा. चीन 14 देशों के साथ लगभग 22,000 किलोमीटर की भूमि सीमा साझा करता है, जिसके साथ विवाद उत्पन्न होते रहते हैं.
  • भारत ने इस नए कानून पर चिंता व्यक्त की है. भारत का मानना है कि इस कानून का सीमा प्रबंधन पर वर्तमान द्विपक्षीय समझौतों और सीमा से जुड़े सम्पूर्ण प्रश्नों पर प्रभाव पड़ सकता है.
  • भारत चीन के साथ 3,488 किलोमीटर की सीमा साझा करता है, जो अरुणाचल प्रदेश से जम्मू और कश्मीर तक फैली हुई है. भारत के साथ सीमा पूरी तरह से सीमांकित नहीं है और दोनों पक्षों ने समानता पर आधारित विचार विमर्श के आधार पर निष्पक्ष, व्यावहारिक और एक दूसरे को स्वीकार्य समाधान निकालने पर सहमति व्यक्त की है.
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चीन ने अंतरिक्ष से धरती पर हमला करने में सक्षम हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया

हाल ही में प्रकाशित एक अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार चीन ने अंतरिक्ष से धरती पर हमला करने में सक्षम हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है. चीन ने यह परीक्षण अपने लॉन्‍ग मार्च रॉकेट की मदद से किया था.

इस परीक्षण में परमाणु क्षमता से लैस हाइपरसोनिक मिसाइल को धरती की निचली कक्षा में भेजा, इसके बाद मिसाइल ने पृथ्‍वी का चक्‍कर लगाया. फिर मिसाइल ने ध्‍वनि की पांच गुना से ज्‍यादा रफ्तार से अपने लक्ष्‍य को निशाना लगाया.

रिपोर्ट के मुताबिक चीन का यह ताजा सिस्‍टम अगर काम करने लगता है तो वह धरती पर कहीं भी अचानक से अंतरिक्ष से परमाणु बम गिराने में सक्षम हो जायेगा. यह अंतर‍िक्ष से धरती के उत्‍तरी और दक्षिणी हिस्‍से पर समान रूप से हमला कर सकती है.

हाइपरसोनिक मिसाइल

  • हाइपरसोनिक मिसाइलों को आधुनिक ‘ब्रह्मास्‍त्र’ कहा जाता है. इसकी रफ्तार ध्‍वनि से 5 गुना ज्‍यादा होती है. दुनिया में अभी ऐसा कोई एयर डिफेंस‍ सिस्‍टम नहीं है जो हाइपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक करके उसे रोक पाए. हालांकि रूस का दावा है कि उसका एस-500 एयर डिफेंस सिस्‍टम हाइपरसोनिक मिसाइलों को मार गिरा सकता है.
  • अभी तक हाइपरसोनिक मिसाइलों को बनाने की तकनीक अमेरिका, रूस, चीन और भारत के पास है. भारत ने सितम्बर 2020 में इस तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था.
  • भारत के डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने ओडिशा के बालासोर में हाइपरसोनिक टेक्‍नॉलजी डिमॉन्‍स्‍ट्रेटर वीइकल (HSTDV) टेस्‍ट को अंजाम दिया था. इस परीक्षण के बाद भारत के पास अब बिना विदेशी मदद के हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की क्षमता हो गई है.
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चीन ने ‘शेनझू-13’ अंतरिक्ष यान से तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन भेजा

चीन का अंतरिक्ष यान ‘शेनझू-13’ तीन अंतरिक्ष यात्रियों को अपने साथ लेकर गया है. इस दल में दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्री झाई झिगांग 55 वर्ष व वांग यापिंग 41 शामिल हैं. इसके अलावा एक महिला अंतरिक्ष यात्री ये गुआंगफू भी इस मिशन का हिस्सा हैं.

अंतरिक्ष स्टेशन ‘तियान’ के काम को पूरा करेगा

चीन ने 16 अक्तूबर को शेनझू-13 अन्तरिक्ष मिशन को लांच किया था. चीन अपना खुद का स्पेस स्टेशन ‘तियान’ अंतरिक्ष में स्थापित कर रहा है. इस मिशन का उद्देश्य इस चीनी स्पेस स्टेशन के काम को पूरा करना और अगले छह महीने तक ऑपरेट करना है. नए मिशन के तहत चीन ने शेनझू-13 अंतरिक्ष यान को लांग मार्च-2 से रवाना किया है.

सबसे लंबे समय का रिकॉर्ड

चीन के इस मिशन का उद्देश्य सबसे लंबा समय अंतरिक्ष में बिताने का रिकॉर्ड बनाने का भी है. इससे पहले चीन ने तीन महीने के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस स्टेशन भेजा था, जो हाल ही में पृथ्वी पर लौटे हैं. इस बार चीन ने छह महीने के लिए इस मिशन को लांच किया है.

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चीन में तीन बच्चे पैदा करने की नीति को मंजूरी दी गयी

चीन की राष्ट्रीय विधायिका नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) ने सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा लायी गयी तीन बच्चों की नीति (Three-Child Policy) का औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है. यह नीति चीन में तेजी से कम होती जन्म दर को रोकने के मकसद से लायी गयी है.

चीन में 1980 के दशक से एक-बच्चे की नीति लागू थी

चीन में 1980 के दशक में राष्ट्रपति डेंग शाओपिंग के शासन में एक-बच्चे की नीति (वन-चाइल्ड पॉलिसी) सख्ती से लागू की गई थी. इसके तहत माता-पिता सिर्फ एक बच्चा ही पैदा कर सकते थे. इन नियमों को तोड़ने वाले माता-पिता और उनके बच्चों से सरकारी सुविधाएं छीन ली जाती थीं. साथ ही उन्हें सरकारी नौकरियों और योजनाओं से भी दूर कर दिया जाता था. चीन ने यह योजना 2015 तक जारी रखी.

2015 में से दो बच्चों की नीति

आबादी में बूढ़ों की संख्या बढ़ने और जन्मदर कम होने के बाद 2015 में इस नीति को बदल कर दो बच्चों की नीति (टू-चाइल्ड पॉलिसी) कर दिया गया. एक सर्वे के अनुसार 2020 में चीन में महज 1.2 करोड़ बच्चे ही पैदा हुए, जो कि 2019 के 1.46 करोड़ बच्चों के आंकड़े से कम था. इसके अलावा चीन में प्रजनन दर भी 1.3 फीसदी पर ठहर गई, जिसने चीन को सबसे कम प्रजनन दर वाले देशों में शामिल कर दिया.

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चीन में मैग्लेव ट्रेन परिवहन प्रणाली की सार्वजनिक तौर पर शुरुआत

चीन ने नई मैग्लेव ट्रेन परिवहन प्रणाली की सार्वजनिक तौर पर शुरुआत की है. यह शुरुआत चीन के तटीय शहर किंगदाओ से हुई है. चीन में द्रुत गति की मैग्लेव ट्रेन परियोजना की शुरुआत अक्टूबर, 2016 में हुई थी. 600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की इस ट्रेन का प्रोटोटाइप 2019 में बनाया गया था. इसका सफल परीक्षण जून, 2020 में हुआ था.

मैग्लेव ट्रेन: मुख्य बिंदु

  • इस ट्रेन की चाल 600 किलोमीटर प्रति है जिसमें 10 डिब्बे लगाए जा सकते हैं. प्रत्येक की क्षमता 100 यात्रियों की होगी.
  • इस ट्रेन के जरिए बीजिंग से शंघाई पहुंचने में केवल 2.5 घंटे लगेंगे. दोनों शहरों के बीच 1,000 किमी की दूरी है. अभी प्लेन से इसमें 3 घंटे और हाई-स्पीड रेल से 5.5 घंटे लगते हैं.
  • देश की सबसे तेज स्पीड की ट्रेन मैग्लेव 2003 में चलनी शुरू हो गई थी. इसकी अधिकतम स्पीड 431 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह शंघाई पुडोन्ग एयरपोर्ट को शंघाई के पूर्वी सिरे पर लॉन्गयाग रोड से जोड़ती है.

क्या है यह टेक्नोलॉजी

मैग्लेव यानी मैगनेटिक लेविटेशन. इन तेज रफ्तार रेलगाड़ियों में पहिए चाहिए, एक्सल, बियरिंग आदि नहीं होते हैं. परंपरागत ट्रेनों की तरह मैग्लेव रेल के पहिये रेल ट्रैक के संपर्क में नहीं आते हैं.

यह उच्च तापमान सुपरकंडक्टिंग (HTS) पावर पर चलती है जिससे लगता है कि यह चुंबकीय ट्रैक्स पर तैर रही हो. जापान और जर्मनी जैसे देश भी मैग्लेव नेटवर्क बनाने में जुटे हैं.

यह पटरियों के बजाय हवा में चलती है. इस वजह से इसमें ऊर्जा की बहुत कम खपत होती है और परिचालन लागत भी बहुत कम होती है.

भारत में मैग्लेव ट्रेन

भारत में मैग्लेव ट्रेन का के लिए सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी बीएचईएल ने स्विटजरलैंड की कंपनी SwissRapide AG के साथ समझौता किया है. SwissRapide AG को Maglev Rail परियोजनाओं में विशेषज्ञता हासिल है. बीएचईएल पिछले पांच दशकों से रेलवे के विकास में साझेदार है.

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WHO ने चीन को मलेरिया मुक्‍त घोषित किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चीन को मलेरिया से मुक्त देश घोषित कर दिया है. चीन में पिछले 70 सालों से इस जानलेवा बीमारी को पूरी तरह से खत्म करने के प्रयास किए जा रहे थे. इसकी अधिकारिक घोषणा WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने 30 जून को की.

पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में चीन पहला देश है जिसे तीन दशकों से ज्यादा समय में मलेरिया मुक्त प्रमाणन से सम्मानित किया गया है. इस स्थिति को हासिल करने वाले क्षेत्र के अन्य देशों में ऑस्ट्रेलिया (1981), सिंगापुर (1982) और ब्रुनेई दारुस्सलाम (1987) शामिल हैं.

1967 में, चीनी सरकार ने 523 प्रॉजेक्ट शुरू किया जो एक राष्ट्रव्यापी शोध कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य मलेरिया के लिए नया इलाज खोजना था. इस प्रयास में, 60 संस्थानों के 500 से ज्यादा वैज्ञानिकों को शामिल करते हुए, 1970 के दशक में आर्टीमिसिनिन की खोज की गई, जो आर्टीमिसिनिन-आधारित संयोजन चिकित्सा (एसीटी) का मुख्य यौगिक है, जो आज उपलब्ध सबसे प्रभावी मलेरिया की दवाएं हैं.

1990 के अंत तक, चीन में मलेरिया के मामलों की संख्या 117,000 तक गिर गई थी और मौतों में 95 प्रतिशत की कमी आई थी. 2003 के बाद से 10 वर्षों के भीतर, मामलों की संख्या सालाना लगभग 5,000 तक गिर गई थी. विश्व स्तर पर, 40 देशों और क्षेत्रों को WHO से मलेरिया मुक्त प्रमाणन प्रदान किया गया है, जिसमें हाल ही में, अल सल्वाडोर (2021), अल्जीरिया (2019), अर्जेंटीना (2019), पराग्वे (2018) और उज्बेकिस्तान (2018) शामिल हैं.

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चीन और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग परियोजना का शुभारंभ किया गया

चीन और रूस ने परमाणु ऊर्जा सहयोग परियोजना का शुभारंभ किया है. चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 19 मई को वर्चुअल माध्यम से इस परियोजना का शुभारंभ किया.

इस परियोजना में तियानवान (Tianwan) परमाणु ऊर्जा संयंत्र और शुदापु (Xudapu) परमाणु ऊर्जा संयंत्र का निर्माण किया जायेगा. इसके तहत तियानवान परमाणु ऊर्जा संयंत्र के यूनिट 7 और यूनिट 8, तथा शुदापु परमाणु ऊर्जा संयंत्र के यूनिट 3 और यूनिट 4 का निर्माण होना है.

चीन और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौता

चीन और रूस के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग से संबंधित यह एक अहम परियोजना है. इस परियोजना के लिए जून 2018 में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ था.

इन चार परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण पूरा होने और परिचालन में आने के बाद वार्षिक बिजली उत्पादन 37 अरब 6 करोड़ किलोवॉट तक पहुंच जाएगा. यह प्रति वर्ष 3 करोड़ 6 लाख 80 हज़ार टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के बराबर है.

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चीन ने मंगल ग्रह पर अपना पहला रोवर ‘जुरोंग’ उतारने में सफलता पाई

चीन ने हाल ही में मंगल ग्रह पर अपना पहला रोवर उतारने में सफलता पाई है. इस रोवर का नाम जुरोंग है. चीन ने 23 जुलाई, 2020 को अन्तरिक्ष यान ‘तियानवेन-1’ को प्रक्षेपित किया था, जिसमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर जुरोंग शामिल था. यह प्रक्षेपण लॉन्ग मार्च 5 (Long March 5) रॉकेट के माध्यम से किया गया था.

चीन मंगल पर अपना रोवर उतारने वाला विश्व का तीसरा देश है. इससे पहले अमेरिका और रूस ने यह उपलब्धि प्राप्त की थी. रूस अपने रोवर को मंगल पर उतारने में सफल रहा था, लेकिन लैंड होने के कुछ समय बाद ही इस रोवर का संपर्क टूट गया था.

जुरोंग रोवर: एक दृष्टि

जुरोंग छह पहियों वाला रोवर है. यह मंगल के यूटोपिया प्लेनेशिया समतल तक पहुंचा है जोकि मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध का हिस्सा है. चीन ने इस रोवर में एक प्रोटेक्टिव कैप्सूल, एक पैराशूट और रॉकेट प्लेफॉर्म का इस्तेमाल किया है.

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चीन से अंतरिक्ष में भेजा गया रॉकेट ‘लॉन्ग मार्च 5B’ अनियंत्रित होकर हिंद महासागर में गिरा

चीन से अंतरिक्ष में भेजा गया रॉकेट ‘लॉन्ग मार्च 5B’ अनियंत्रित होकर 9 मई को हिंद महासागर (मालदीव के पास समुद्र) में गिर गया. राकेट का अधिकांश मलबा वायुमंडल में जल गया था.

संक्षिप्त घटना-क्रम

चीन ने ‘लॉन्ग मार्च 5B Y2’ (Long March 5B Y2) रॉकेट को 29 अप्रैल को अंतरिक्ष भेजा था जो अनियंत्रित होकर खो गया था. तब से अंतरिक्ष विज्ञानी इस रॉकेट के पृथ्वी से टकराने को लेकर चिंतित थे.

चीन इस राकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में तियांगोंग (Tiangong) नाम का चीनी स्पेस स्टेशन बनाना चाहता था. इस अंतरिक्ष स्टेशन को 2022 तक पूरा किया जाना था.

Long March-5
Long March-5 का विकास चाइना एकेडमी ऑफ स्पेस टेक्नोलॉजी ने किया है. यह लगभग 9 मीटर लंबा और 4.5 मीटर चौड़ा है. इसका वजन 20 टन से अधिक है.

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ऑस्ट्रेलिया ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को रद्द किया, जानिए क्या है BRI

ऑस्ट्रेलिया ने चीन की महत्वकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (Belt and Road Initiative) के दो समझौते को रद्द कर दिया है. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन की कैबिनेट ने यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया है. चीन के साथ यह समझौता 2018 और 2019 में किया गया था. इस नए फैसले से ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है.

ऑस्ट्रेलिया ने जिन दो समझौतों को रद्द किया है, उनमें चीनी कंपनियां ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में दो बिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्टर को तैयार करने वाली थीं. चीन ने पहले ही ऑस्ट्रेलिया के साथ तनाव बढ़ने पर विक्टोरिया प्रशासन के साथ सफल व्यवहारिक सहयोग को बाधित करने को लेकर चेतावनी दी थी. जिसके बाद से ऑस्ट्रेलिया ने भी चीन को सबक सिखाने के लिए यह कदम उठाया है.

राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण समझौते को रद्द किया गया

ऑस्ट्रेलिया ने नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत चीन के इस प्रोजक्ट को रद्द करने का फैसला किया है. ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में एक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पारित किया था जो घरेलू नीतियों में गुप्त विदेशी दखल को प्रतिबंधित करता है.

नया कानून संघीय सरकार को निचले प्रशासनिक स्तर पर किये गए उन अन्तर्राष्ट्रीय समझौतों की अनदेखी की शक्तियां प्रदान करता है जो राष्ट्रहित का उल्लंघन करती हों. चीन ने इन कानूनों को चीन के प्रति पूर्वाग्रह पूर्ण और चीन-ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में जहर घोलने वाला बताया है.

क्या है बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजना?

  • चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2013 में ‘वन बेल्ट वन रोड’ परियोजना की परिकल्पना की थी. वर्ष 2016 से इस परियोजना को ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के नाम से जाना जाता है.
  • BRI परियोजना चीन द्वारा प्रस्तावित आधारभूत ढाँचा विकास एवं संपर्क परियोजना है जिसका लक्ष्य चीन को सड़क, रेल एवं जलमार्गों के माध्यम से यूरोप, अफ्रीका और एशिया से जोड़ना है.
  • यह परियोजना चीन के उत्पादन केंद्रों को वैश्विक बाज़ारों एवं प्राकृतिक संसाधन केंद्रों से जोड़ेगी. इस परियोजना के द्वारा चीन को विश्व की 70% जनसंख्या तथा 75% ज्ञात ऊर्जा भंडारों तक पहुँच मिल सकती है.
  • BRI के तहत पहला रूट चीन से शुरू होकर रूस और ईरान होते हुए इराक तक ले जाने की है. इस योजना के तहत दूसरा रूट पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से श्रीलंका और इंडोनेशिया होकर इराक तक ले जाया जाना है.
  • चीन से लेकर तुर्की तक सड़क संपर्क कायम करने के साथ ही कई देशों के बंदरगाहों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य भी इस योजना में रखा गया है.

BRI परियोजना का मुख्य उद्देश्य

दरअसल चीन के इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अपना भू-राजनीतिक प्रभुत्व कायम करना है, हालाँकि चीन इस बात से इनकार करता है. वास्तव में चीन का BRI परियोजना, निर्यात करने का माध्यम है जिसके ज़रिये वह अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का प्रयोग बंदरगाहों के विकास, औद्योगिक केंद्रों एवं विशेष आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिये कर वैश्विक शक्ति के रूप में उभरना चाहता है.

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चीन ने ब्रिटेन के 9 नागरिकों व चार संस्थानों पर प्रतिबंध लगाया

चीन ने हाल में ही में कई ब्रिटिश राजनेताओं और संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इससे पहले ब्रिटेन ने यूरोपीय संघ और अन्य देशों के साथ मिलकर कई चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया था. ब्रिटेन ने यह प्रतिवंध चीन के शिनजियांग (Xinjiang) में उइगर मुसलमानों के खिलाफ मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में लगाया है. ब्रिटिश विदेश मंत्री डॉमनिक रॉब ने चीन में मानवाधिकार हनन को लेकर प्रतिबंध की घोषणा की थी.

चीन ने जिन ब्रिटिश राजनेताओं और संस्थानों पर पाबंदी लगाई है उनमें ब्रिटेन के पूर्व कंजर्वेटिव पार्टी के नेता इयान डंकन स्मिथ और विदेशी मामलों की समिति के अध्यक्ष टॉम तुगेंदत, पाकिस्तानी मूल के नुसरत गनी और टिम लॉटन के अलावा हाउस ऑफ लार्ड्स के चेयरमैन बैरोनेस कैनेडी तथा लॉर्ड एल्टन आदि शामिल हैं.

चीन ने रिसर्च ग्रुप ऑफ एमपी और एसेक्स कोर्ट चैंबर्स समेत चार संगठनों को भी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया है. इन संगठनों ने शिनजियांग में चीनी कार्यों को नरसंहार के रूप में वर्णित किया था. इन प्रतिवंधों के बाद चीन में अब इन राजनयिकों और संगठनों की संपत्ति जब्त करने के साथ कई कार्रवाई की जाएगी.

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चीन ने प्रकाश आधारित दुनिया का पहला क्वांटम कंप्यूटर ‘जियूझांग’ बनाने का दावा किया

चीन के वैज्ञानिकों ने प्रकाश आधारित, दुनिया का पहला क्वांटम कंप्यूटर बनाने का दावा किया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह कंप्यूटर पारंपरिक सुपर कंप्यूटर के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से कार्य कर सकता है. इस सुपर कंप्यूटर का नाम गणित के प्राचीन चीनी ग्रंथ के नाम पर ‘जियूझांग’ दिया गया है.

जियूझांग क्वांटम कंप्यूटर भरोसेमंद तरीके से कंप्यूटेशनल एडवान्टेज का प्रदर्शन कर सकता है, जो कंप्यूटर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है. इस कंप्यूटर की मदद से शक्तिशाली मशीन को बनाने के तरीके में मौलिक बदलाव आएगा.

क्वांटम कंप्यूटर: एक दृष्टि

क्वांटम कंप्यूटर बहुत तेजी से काम करते हैं, जो पारंपरिक कंप्यूटर के लिए संभव नहीं है. इनकी मदद से भौतिक विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्धि हासिल होती है. यह सुपर कंप्यूटर जो गणना मात्र 200 सेकेंड (100 ट्रिलियन गुना तेज) में कर सकता है, उसे करने में पारंपरिक पद्धति से बने दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर ‘फुगाकू’ को 60 करोड़ साल लगेंगे.

पिछले साल गूगल ने 53 क्यूबिट क्वांटम कंप्यूटर बनाने की घोषणा की थी. जियूझांग 76 फोटॉन में हेरफेर कर जटिल गणना करता है, जबकि गूगल का क्वांटम कंप्यूटर सुपर कंडक्टिव वस्तुओं का इस्तेमाल करता है.

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