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प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरूआत की

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 27 सितम्बर को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) की शुरूआत की. यह अस्‍पतालों में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है. 15 अगस्त 2020 को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नेइस मिशन की प्रायोगिक परियोजना की घोषणा की थी.

क्या है आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन?

इस मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को डिजिटल स्वास्थ्य आईडी उपलब्ध कराया जाएगा, जिसपर संबंधित व्यक्ति का स्वास्थ्य रिकॉर्ड अपलोड होगा. डिजिटल माध्‍यम से उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जायेगा. इसमें लोगों के स्वास्थ्य के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी होगी. इस आईडी से कोई भी व्यक्ति, अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को मोबाइल ऐप के जरिये देख सकेगा.

इस स्वास्थ्य आईडी में प्रत्येक व्यक्ति की बीमारी, उपचार, रिपोर्ट और दवाइयों का भी ब्यौरा होगा. इसके अलावा इसमें चिकित्सकों, अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदाताओं के संबंध में भी जानकारी होगी. इसके माध्यम से किसी व्यक्ति के मेडिकल रिकार्ड को बिना किसी कागजी डॉक्यूमेंट के साझा किया जा सकेगा.

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अभी प्रायोगिक तौर पर छह केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू किया जा रहा है. ये हैं- अंडमान और निकोबार, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुदुचेरी.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक वायु गुणवत्ता मानदंडों में संशोधन किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने नए वैश्विक वायु गुणवत्ता मानदंड (AQGs) जारी किया है. यह वर्ष 2005 के बाद से WHO का वायु गुणवत्ता मानदंडों में पहला संशोधन है.

इन दिशा-निर्देशों के तहत WHO ने प्रदूषकों के अनुशंसित स्तर को और कम कर दिया है, जिन्हें मानव स्वास्थ्य के लिये सुरक्षित माना जा सकता है. इन दिशा-निर्देशों का लक्ष्य सभी देशों के लिये अनुशंसित वायु गुणवत्ता स्तर प्राप्त करना है.

नए दिशा-निर्देश:

  • WHO के नए दिशा-निर्देश उन 6 प्रदूषकों के लिये वायु गुणवत्ता के स्तर की अनुशंसा करते हैं, जिनके कारण स्वास्थ्य पर सबसे अधिक जोखिम उत्पन्न होता है.
  • इन 6 प्रदूषकों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और 10), ओज़ोन (O₃), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शामिल हैं.
  • WHO ने पीएम 2.5 सहित कई प्रदूषकों के लिए स्वीकार्य सीमा कम कर दी है. अब, पीएम 2.5 सांद्रता 15μg/m³ से नीचे रहनी चाहिए. नई सीमा के अनुसार, औसत वार्षिक PM2.5 सांद्रता 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए.

मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण का प्रभाव:

  • WHO के अनुसार, प्रत्येक वर्ष वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से 7 मिलियन लोगों की मृत्यु समय से पूर्व हो जाती है और इसके परिणामस्वरूप लोगों के जीवन के लाखों स्वस्थ वर्षों का नुकसान होता है.
  • बच्चों में इसके अनेक प्रभाव दिखाई देते हैं, जैसे- फेफड़ों की वृद्धि और कार्य में कमी, श्वसन प्रणाली में संक्रमण, अस्थमा आदि.
  • वयस्कों में हृदय रोग और स्ट्रोक बाह्य वायु प्रदूषण के कारण समय से पूर्व मृत्यु के सबसे सामान्य कारण हैं तथा मधुमेह और तंत्रिका तंत्र का कमज़ोर होना या न्यूरोडीजेनेरेटिव (Neurodegenerative) स्थितियों जैसे अन्य प्रभावों के प्रमाण भी सामने आ रहे हैं.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ‘स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड’ के अध्यक्ष बने

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री मनसुख मंडाविया ने 26 अगस्त को ‘स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड’ (Stop TB Partnership Board) के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया. उन्होंने स्टॉप टीबी बोर्ड के निवर्तमान अध्यक्ष  डॉ. हर्षवर्धन का स्थान लिया है.

श्री मनसुख मंडाविया 2022 तक, संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित टीबी लक्ष्यों तक पहुंचने की दिशा में स्टॉप टीबी पार्टनरशिप सचिवालय, भागीदारों और टीबी समुदाय के प्रयासों का नेतृत्व करेंगे.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2030 तक दुनिया भर में तपेदिक (टीबी) बीमारी के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2025 तक भारत को टीबी के उन्मूलन की प्रतिबद्धता जताई है.

स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड

स्टॉप टीबी पार्टनरशिप बोर्ड, वर्ष 2000 में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के लिए स्थापित की गई थी. इसमें कई अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संगठन  शामिल हैं. इसका सचिवालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है. यह 2015 से UNOPS द्वारा प्रशासित है. इससे पहले, इसकी मेजबानी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा की जाती थी.

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भारत में विश्‍व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है

भारत में विश्‍व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है. यह टीकाकरण कार्यक्रम Covid-19 संक्रमण को रोकने के लिए चलाया जा रहा है. इसकी शुरूआत प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी 16 जनवरी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए की. टीकाकरण कार्यक्रम का पहला टीका दिल्ली एम्स (AIIMS) के सफाईकर्मी मनीष कुमार को दिया गया.

कोविडशील्‍ड और कोवैक्‍सीन के इस्‍तेमाल की अनुमति

इस टीकाकरण के दौरान देश में ही निर्मित दो टीके कोविडशील्‍ड (Covishield) और कोवैक्‍सीन (Covaxin) में से किसी एक टिके का दो डोज दिया जायेगा. दोनों ही टीकों को देश के औषधि नियंत्रक (DGCA) और विशेषज्ञों द्वारा आपात स्थिति में इस्‍तेमाल करने के लिए स्‍वीकृत किया गया है.

कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनिका के साथ भारत में पुणे की प्रयोगशाला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया में विकसित किया गया है.

भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्‍ट्रीय विषाणु संस्‍थान पूणे के सहयोग से कोवैक्‍सीन तैयार किया है. यह पहली स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है जिसका अनुसन्धान और निर्माण भारत में किया गया है.

पहले चरण में स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों को टीका लगाया जाएगा

  1. टीकाकरण के प्रथम चरण में सरकारी या प्राइवेट स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों- डाक्‍टर्स, नर्स, अस्‍पताल में सफाई कर्मी, मेडिकल-पेरामैडिकल स्‍टॉफ और समेकित बाल‍ विकास सेवा से संबंधित कर्मियों को टीके दिए जा रहे हैं. इस चरण में तीन करोड़ लोगों को टीका लगाया जाएगा.
  2. टीकाकरण के अगले चरण में उन लोगों को टीका लगाया जाएगा जिन पर जरूरी सेवाओं और देश की रक्षा या कानून व्‍यवस्‍था की जिम्‍मेदारी है. इस चरण में 30 करोड़ लोगों को टीके लगाए जाएंगे.
  3. उसके बाद 50 वर्ष से अधिक की आयु वाले लोगों तथा इससे कम के आयु वाले वैसे लोगों को दी जाएगी जो किसी बीमारी से ग्रसित हैं. इनकी संख्‍या लगभग 27 करोड़ है.
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लॉन्गिटूडिनल एजिंग स्टडीज ऑफ इंडिया वेव-1 सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में Longitudinal Ageing Study of India (LASI) वेव-1 सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी की थी. यह भारत में उम्रदराज हो रही आबादी के स्वास्थ्य, आर्थिक तथा सामाजिक निर्धारकों और परिणामों की वैज्ञानिक जाँच का व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण है. इसे वर्ष 2016 में मान्यता प्रदान की गई थी.

यह भारत का पहला और विश्व का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है जो सामाजिक, स्वास्थ्य तथा आर्थिक खुशहाली के पैमानों पर वृद्ध आबादी के लिये नीतियाँ और कार्यक्रम बनाने के उद्देश्य से लॉन्गिटूडिनल डाटाबेस प्रदान करता है.

सर्वेक्षण में शामिल एजेंसियाँ

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वृद्धजनों हेतु राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Health Care of Elderly) में हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) तथा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग के सहयोग से मुंबई स्थित इंटरनेशलन इंस्टीट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज (IIPS) के माध्यम से यह सर्वेक्षण किया गया.

सर्वेक्षण की प्रक्रिया और दायरा

LASI, वेव-1 में परिवार तथा सामाजिक नेटवर्क, आय, परिसंपत्ति तथा उपयोग पर सूचना के साथ स्वास्थ्य पर विस्तृत डाटा एकत्रित किया गया था.
इस सर्वेक्षण में 45 वर्ष तथा उससे ऊपर के 72,250 व्यक्तियों और उनके जीवनसाथी के बेसलाइन सैंपल को लिया गया है. इसमें 60 वर्ष और उससे ऊपर की उम्र के 31,464 व्यक्ति तथा 75 वर्ष और उससे ऊपर की आयु के 6,749 व्यक्ति शामिल हैं. ये सैंपल सिक्किम को छोड़कर सभी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से लिये गए हैं.

सर्वेक्षण का निष्कर्ष

  • वर्ष 2011 की जनगणना में 60 वर्ष से अधिक आयु (60+) की आबादी भारत की आबादी का 8.6 प्रतिशत थी यानी 103 मिलियन वृद्ध लोग थे.
  • 3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से वर्ष 2050 में वृद्धजनों की आबादी बढ़कर 319 मिलियन हो जाएगी.
    75 प्रतिशत वृद्धजन किसी न किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होते हैं. 40 प्रतिशत वृद्धजन किसी न किसी दिव्यांगता से ग्रसित हैं और 20 प्रतिशत वृद्धजन मानसिक रोगों से ग्रसित हैं.
  • राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में बहु-रुग्णता की स्थिति (Multi-Morbidity Conditions) का प्रसार केरल (52%), चंडीगढ़ (41%), लक्षद्वीप (40%), गोवा (39%) और अंडमान तथा निकोबार द्वीप (38%) में अधिक है.

सर्वेक्षण का महत्त्व

LASI से प्राप्त साक्ष्यों का उपयोग वृद्धजनों के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम को मज़बूत एवं व्यापक बनाने में किया जाएगा और इससे वृद्धजनों की आबादी के लिये प्रतिरोधी तथा स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाने में मदद मिलेगी.

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भारत में COVID-19 वैक्सीन के रूप में कोविशील्ड और कोवैक्‍सीन को स्वीकृति

भारत के ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोविड के दो टीकों के आपात स्थिति में सीमित उपयोग की स्वीकृति दे दी है. CDSCO ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया के कोविशील्ड (Covishield) और भारत बायोटैक के कोवैक्‍सीन (Covaxin), को अनुमति दी है. औषधि महानियंत्रक (DGCA) वीजी सोमानी ने इसकी घोषणा 3 जनवरी को की.

दोनों टीकों का आपात उपयोग के बारे में केन्‍द्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर यह स्‍वीकृति प्रदान की गयी है. कोविशील्ड और कोवाक्सिन दोनों टीकों में से किसी एक टिके की दो खुराकें दी जाएगीं.

कोविशील्ड

कोविशील्ड को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनिका के साथ भारत में पुणे की प्रयोगशाला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया में विकसित किया गया है.

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया ने 23745 लोगों संबंधी सुरक्षा, रोग प्रतिरक्षा क्षमता के आकड़े प्रस्‍तुत किये और वैक्‍सीन के समग्र प्रभाव कार्य का 70.42 प्रतिशत पाई गई. इ‍सके अतिरिक्‍त संस्‍थान को देश में 1600 लोगों पर दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति दी गई.

कोवैक्‍सीन

भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्‍ट्रीय विषाणु संस्‍थान पूणे के सहयोग से कोवैक्‍सीन तैयार किया है. को-वैक्‍सीन का तीसरे चरण का परीक्षण भारत में 25800 स्‍वयंसेवियों पर किया गया था. यह पहली स्वदेशी रूप से विकसित वैक्सीन है जिसका अनुसन्धान और निर्माण भारत में किया गया है.

ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया

भारत में किसी दवा और वैक्सीन के मंजूरी ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा दिया जाता है. यह देश में दवा से संबंधित सभी नियामक कार्यों के लिए जिम्मेदार है. DCGI भारत में दवाओं के विनिर्माण, बिक्री, आयात और वितरण के लिए मानक स्थापित करती है.

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ऑक्सफोर्ड की COVID-19 वैक्सीन ‘Covishield’ को भारत में आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गयी

ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका द्वारा विकसित COVID-19 वैक्सीन ‘Covishield’ के भारत में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी गयी है. केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की कोविड-19 पर एक विशेषज्ञ समिति ने इसकी मंजूरी 31 दिसम्बर को दी.

Covishield वैक्सीन का उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) कर रहा है. इससे पहले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने पहले इस वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए आवेदन किया था. SII ने Covishield के उत्पादन के लिए एस्ट्रेजेनेका के साथ करार किया है. यह दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी है.

‘कोवैक्‍सीन’ को सीमित इस्‍तेमाल की अनुमति

विशेषज्ञ समिति ने स्वदेशी वैक्सीन ‘कोवैक्‍सीन’ को एहतियात के तौर पर नैदानिक परीक्षण मोड में, विशेष रूप से परिवर्तित स्‍ट्रेन द्वारा फैलाए जा रहे संक्रमण से संबंधि‍त आपात स्थिति में इसके सीमित इस्‍तेमाल की अनुमति देने की सिफारिश की है. भारतीय औषध महानियंत्रक वैक्‍सीन की मंजूरी के बारे में अंतिम फैसला करेंगे.
कोवैक्‍सीन भारत में निर्मित पहली वैक्‍सीन है, जिसे भारत बायोटेक ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और राष्‍ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्‍थान के सहयोग से तैयार किया है.

विशेषज्ञ समिति ने कैडिला हेल्‍थकेयर लिमिटेड अहमदाबाद को फेस-3 नैदानिक परीक्षण करने की भी सिफारिश की है.

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स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को अन्तर्राष्ट्रीय टीका और प्रतिरक्षा गठबंधन बोर्ड में नामित किया गया

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को टीका और प्रतिरक्षा के लिए गठित वैश्विक गठबंधन (GAVI) के बोर्ड में बतौर सदस्य नामित किया गया है.

डॉ. हर्षवर्धन इस बोर्ड में दक्षिण-पूर्व क्षेत्र क्षेत्रीय कार्यालय (SEARO)/ पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय (WPRO) निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनका कार्यकाल एक जनवरी, 2021 से 31 दिसंबर, 2023 तक रहेगा. वर्तमान में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व म्यांमार के श्री मिंत ह्टवे कर रहे हैं.

GAVI क्या है?

GAVI का पूर्ण रूप Global Alliance for Vaccines and Immunisation है. GAVI बोर्ड रणनीतिक दिशा एवं नीति-निर्माण के लिए जिम्मेदार है. इसके अलावा यह टीका गठबंधन के संचालनों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी भी करता है. वर्तमान में डॉ. नगोजी ओकोंजो इविएला GAVI बोर्ड के अध्यक्ष हैं.

जीवन को बचाने, गरीबी को कम करने और महामारी से विश्व को बचाने के लिए अपने मिशन के हिस्से के रूप में GAVI ने विश्व के सबसे गरीब देशों के 82.2 करोड़ बच्चों टीकाकरण किया है. यह भविष्य में 1.4 करोड़ से अधिक जिंदगियों को खत्म होने से बचाने की पहल है.

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स्वदेश विकसित पहली निमोनिया की वैक्सीन ‘निमोसिल’ का उद्घाटन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने स्वदेश विकसित भारत की पहली निमोनिया की वैक्सीन का 28 दिसम्बर को उद्घाटन किया. इस वैक्सीन का नाम ‘निमोसिल’ (Pneumosil) है. भारतीय औषध महानियंत्रक (DCGI) ने इस वैक्‍सीन को जुलाई 2020 में मंजूरी दी थी.

यह वैक्‍सीन शिशुओं में स्‍ट्रेप्‍टोकोक्‍कस निमोनिया (Streptococcus pneumonia) के कारण और निमोनिया के उपचार के लिए उपयोग की जाएगी. यह मांसपेशियों में इंजेक्‍शन के जरिए दी जाएगी. भारत में निमोनिया के फुल पीसीवी वैक्सीनेशन के लिए वैक्सीन के 3 डोज की जरूरत पड़ेगी. यह न्यूमोकॉकस बैक्टीरिया के 10 प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करता है, जो बच्चों में निमोनिया, मैनिंजाइटिस, कान और रक्त संक्रमण का कारण बनता है.

इस वैक्सीन को पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (SIIPL) ने बनाया है. SIIPL दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या में वैक्सीन खुराक का निर्माण करती है.

निमोनिया के उपचार के लिए स्‍वदेश विकसित पहली वैक्‍सीन

निमोनिया के उपचार के लिए स्‍वदेश में विकसित यह पहली वैक्‍सीन है. इससे पहले ऐसी वैक्‍सीन देश में लाइसेंस के जरिए आयात की जाती थी क्‍योंकि इसे बनाने वाली सभी कंपनियां भारत से बाहर की हैं. वर्तमान में निमोनिया के लिए फाइजर और ग्लैक्सोस्मिथलाइन द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है. इस वैक्सीन के दुनिया की सबसे किफायती निमोनिया की वैक्सीन होने का दावा किया जा रहा है.

एक लाख से अधिक बच्चों की ‘निमोकॉकल’ बीमारियों से मौत

निमोनिया एक श्वास संबंधी बीमारी है. यूनिसेफ के डेटा के मुताबिक, हर साल भारत में पांच साल से कम उम्र में ही एक लाख से अधिक बच्चों की निमोकॉकल बीमारियों से मौत हो जाती है.

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जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ‘सेहत’ की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 26 दिसम्बर को जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा उपलब्‍ध कराने की आयुष्‍मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्‍य योजना ‘सेहत’ की शुरूआत की. ‘सेहत’ योजना के तहत जम्‍मू-कश्‍मीर के सभी निवासियों को 5 लाख रुपए तक का नि:शुल्‍क स्‍वास्‍थ्‍य बीमा उपलब्‍ध कराया जाएगा.

उल्‍लेखनीय है कि जम्‍मू कश्‍मीर में पहले ही गरीबी रेखा के नीचे गुजर बसर करने वाले लगभग 14 लाख परिवार आयुष्‍मान भारत योजना से 2018 से लाभन्वित हो रहे हैं. अब जम्‍मू-कश्‍मीर सरकार के इस योजना से जम्‍मू कश्‍मीर के सभी परिवार को यह लाभ उपलब्‍ध होगा. इस योजना से पूरे जम्‍मू कश्‍मीर के एक करोड लोगों को लाभ होगा.

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स्‍वदेश में विकसित पहली न्‍यूमोकोक्‍कल पॉलीसैकैराइड कंज्‍युगेट वैक्‍सीन को मंजूरी

भारतीय औषध महानियंत्रक (DCGI) ने स्‍वदेश में विकसित पहली ‘न्‍यूमोकोक्‍कल पॉलीसैकैराइड कंज्‍युगेट’ (Pneumococcal Polysaccharide Conjugate) वैक्‍सीन को मंजूरी दे दी है. यह वैक्‍सीन शिशुओं में स्‍ट्रेप्‍टोकोक्‍कस निमोनिया (Streptococcus pneumonia) के कारण और निमोनिया के उपचार के लिए उपयोग की जाती है. यह वैक्‍सीन मांसपेशियों में इंजेक्‍शन के जरिए दी जाती है.

निमोनिया के उपचार के लिए स्‍वदेश विकसित पहली वैक्‍सीन

निमोनिया के उपचार के लिए स्‍वदेश में विकसित यह पहली वैक्‍सीन है. इससे पहले ऐसी वैक्‍सीन देश में लाइसेंस के जरिए आयात की जाती थी क्‍योंकि इसे बनाने वाली सभी कंपनियां भारत से बाहर की हैं. वर्तमान में निमोनिया के लिए फाइजर और ग्लैक्सोस्मिथलाइन द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का प्रयोग किया जाता है. स्वदेशी वैक्‍सीन पर इन वैक्‍सीन से कम लागत आएगी.

भारतीय दवा नियामक ने जुलाई में सीरम इंस्टीट्यूट को निमोकोकल पॉलीसैकेराइड कांजुगेट वैक्सीन के लिए मार्केट अप्रूवल दे दिया था.

यह वैक्‍सीन पुणे के भारतीय सीरम संस्‍थान (Serum Institute of India) ने विकसित की है. इस संस्‍थान को वैक्‍सीन के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षण की अनुमति दी गई थी जो अब सम्‍पन्‍न हो गए हैं. कंपनी ने गाम्बिया में भी इसके परीक्षण किए हैं. उसके बाद कंपनी ने वैक्‍सीन बनाने की अनुमति के लिए आवेदन किया था.

एक लाख से अधिक बच्चों की निमोकॉकल बीमारियों से मौत

निमोनिया एक श्वास संबंधी बीमारी है. यूनिसेफ के डेटा के मुताबिक, हर साल भारत में पांच साल से कम उम्र में ही एक लाख से अधिक बच्चों की निमोकॉकल बीमारियों से मौत हो जाती है.

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दवा नियामक प्रणाली में सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया

भारत की दवा नियामक प्रणाली में सुधार के लिए सरकार ने विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. इस समिति के गठन का उद्देश्य कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे का सामना करते हुए, दवाओं की स्वीकृति प्रक्रिया, अनुसंधान और टीका विकास को गति देना है.

यह समिति वर्तमान दवा नियामक प्रणाली का अध्ययन करेगी और सुधारों की अनुशंसा सौंपेगी ताकि प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढाला जा सके और इसे अधिक प्रभावी बनाया जा सके. समिति दुनिया भर की बेहतरीन कार्यप्रणाली के साथ ही घरेलू जरूरतों और केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को सुगम एवं प्रभावी बनाने के लिए अपनी सिफारिश सरकार को देगी.

राजेश भूषण इस समिति के अध्यक्ष होंगे

स्वास्थ्य मंत्री के स्पेशल ओन ड्यूटी (OSD) अधिकारी, राजेश भूषण इस समिति के अध्यक्ष होंगे. इस समिति में भारत के शीर्ष दवा एवं टीका उद्यमियों के साथ ही फार्मास्यूटिकल विभाग, बायोटेक्नोलॉजी विभाग, भारतीय फार्माकोपिया आयोग, भारतीय फार्मास्यूटिकल गठबंधन, ICMR के शीर्ष नेतृत्व के साथ ही AIIMS के जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ शामिल होंगे. भारत के संयुक्त औषधि नियंत्रक डॉ ईश्वरा रेड्डी विश्व की सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को अपनाने में समिति के काम में सहयोग करेंगे.

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