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डेनमार्क की प्रधानमंत्री की भारत यात्रा, दोनों देशों के बीच चार समझौतों पर हस्ताक्षर

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट फ्रेड्रिकसन 8 से 10 अक्तूबर तक भारत की यात्रा पर थीं. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. इस वार्ता में भारत और डेनमार्क ने आपसी सहयोग बढ़ाने के चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. ये समझौते कौशल विकास तथा उद्यमशीलता, परम्‍परागत ज्ञान डिजिटल पुस्‍तकालय, संभाव्‍य उपयोगों के साथ उष्‍णकटिबंधीय जलवायु के लिए प्राकृतिक उत्‍कृष्‍टता केंद्र की स्‍थापना और भूजल संसाधनों तथा जल निकायों के मानचित्रण के बारे में हैं.

डेनमार्क की प्रधानमंत्री की भारत यात्रा: मुख्य बिंदु

भारत में कृषि उत्पाद और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि संबंधित टेक्नोलॉजी में भी सहयोग करने का निर्णय लिया. इसके अंतर्गत फूड सेफ्टी, कोल्‍ड चेन, फूड प्रोसेसिंग, फर्टीलाइजर्स, फिशरीज, एक्‍वा कल्‍चर आदि अनेक क्षेत्रों की टेक्‍नोलॉजी पर काम किया जाएगा. दोनों देश स्‍मार्ट वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट वेस्‍ट टू बेस्‍ट और एफीशियंस सप्‍लाई चेन जैसे क्षेत्र में भी सहयोग करेंगे.

भारत और डेनमार्क के बीच प्रगाढ़ व्यापार और निवेश संबंध हैं. भारत में 200 से अधिक डेनमार्क की कम्पनियां और डेनमार्क में भारत की 60 से अधिक कम्पनियां काम कर रही हैं.

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हरित रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत और डेनमार्क में सहमति

भारत और डेनमार्क ने ‘हरित रणनीतिक साझेदारी’ के लिए अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का फैसला किया है. इसका मकसद नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के महत्वपूर्ण विस्तार के लिए रूपरेखा तैयार करना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन के बीच डिजिटल द्विपक्षीय शिखर बैठक में यह निर्णय लिया गया. इस दौरान उन्होंने काफी अरसे से लंबित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, कोविड -19 महामारी की चुनौती और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसके प्रभाव पर भी विचार-विमर्श किया.

दोनों नेताओं के इस बैठक में पुरुलिया में हथियार गिराए जाने के मामले में प्रमुख आरोपी किम डेवी का मुद्दा भी उठा और इस बात पर सहमति बनी कि इस मामले के शीघ्र हल के लिए दोनों पक्षों के अधिकारी संपर्क में रहेंगे. भारत इस मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए डेनमार्क से डेवी के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है.

दोनों नेताओं की वार्ता में ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, जल, अर्थव्यवस्था, सतत शहरी विकास, व्यापार, जहाजरानी, खाद्य, कृषि और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी. दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक महत्वाकांक्षी, निष्पक्ष तथा पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार और निवेश समझौते के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जतायी.

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-डेनमार्क जल प्रौद्योगिकी गठबंधन के जरिए जल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इच्छा व्यक्त की. इनमें जलापूर्ति, अपशिष्ट जल उपचार, सीवरेज प्रणाली, उपचारित अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, जल प्रबंधन आदि शामिल हैं.

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