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न्यू डेवलपमेंट बैंक ने भारत के लिए एक अरब डॉलर के ऋण को मंजूरी दी

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी से लड़ने के लिए भारत को एक अरब (बिलियन) डॉलर ऋण देने की मंजूरी दी है. इस राशि का उपयोग इस महामारी से होने वाले मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए किया जाएगा.

न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): एक दृष्टि

  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), BRICS समूह के देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) द्वारा स्थापित किया गया बैंक है. NDB का मुख्यालय शंघाई, चीन में है.
  • ब्राज़ील के फ़ोर्टालेज़ा में आयोजित छठे BRICS शिखर सम्मेलन, 2014 में 100 अरब डॉलर की शुरुआती अधिकृत पूंजी के साथ NDB की स्थापना का निर्णय किया गया था. इस धनराशि में सभी सदस्य देशों की बराबर-बराबर हिस्सेदारी है. भारत के केवी कामत NDB के पहले और वर्तमान अध्यक्ष हैं.

20 लाख करोड़ रुपये के ‘आत्मनिर्भर भारत पैकेज’ की घोषणा की गयी

वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने 13 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज (Atmanirbhar Bharat Package) का ब्यौरा दिया. यह राहत पैकेज देश के सकल घरेलू उत्पाद का 10 प्रतिशत है. इससे कुटीर उद्योग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, मध्य वर्ग तथा उद्य़ोग जगत सहित विभिन्न वर्गों को लाभ मिलने की उम्मीद है.

प्रधानमंत्री का राष्‍ट्र को संबोधन

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने राष्‍ट्र को संबोधित करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत पैकेज’ की घोषणा की थी. इसकी घोषणा कोरोना वॉयरस महामारी को देखते हुए किया गया है.

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कोविड-19 के बाद आत्‍म निर्भर भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की बात कही थी. उन्होंने देशवासियों से लोकल Products खरीदने और उनके प्रचार करने का भी अनुरोध किया था. उन्‍होंने ज़ोर दिया कि भारत की आत्‍मनिर्भरता इन पांच स्तंभों पर खड़ा होगा:

  1. अर्थव्यवस्था, जो वृद्धिशील परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबी छलांग सुनिश्चित करती है.
  2. बुनियादी ढांचा, जिसे भारत की पहचान बन जाना चाहिए.
  3. प्रणाली (सिस्‍टम), जो 21वीं सदी की प्रौद्योगिकी संचालित व्यवस्थाओं पर आधारित हो.
  4. उत्‍साहशील आबादी, जो आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है.
  5. मांग, जिसके तहत हमारी मांग एवं आपूर्ति श्रृंखला (सप्‍लाई-चेन) की ताकत का उपयोग पूरी क्षमता से किया जाना चाहिए.

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के मुख्य बिंदु

  • यह राहत पैकेज 20 लाख करोड़ रुपये का है जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 10 प्रतिशत है. GDP के अनुपात में यह दुनिया का पांचवां बड़ा आर्थिक पै‍केज है.
  • पैकेज में MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) और बिजनस के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के कोलैटरल फ्री 100% ऑटोमैटिक लोन की घोषणा. दबाव वाले MSME को 20,000 करोड़ रुपये का (बिना गारंटी के) कर्ज दिया जाएगा. इससे 2 लाख MSME लाभान्वित होंगे.
  • एंप्लॉयी प्रविडेंट फंड (EPF) में योगदान की राशि को कम करने की घोषणा की गयी. अब तक बेसिक पे का 12 प्रतिशत एंप्लॉयर और 12 प्रतिशत एंप्लॉयी पीएफ फंड में जमा करता रहा है. अगले तीन महीने के लिए इसे घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है. इससे 6750 करोड़ रुपये का लिक्विडिटी सपॉर्ट मिलेगा.
  • NBFC (नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनीज) को आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना के जरिये 45,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध करायी जाएगी.
  • सरकार ने नाबार्ड के जरिए किसानों के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की आपात कार्यशील पूंजी कोष बनाने की भी घोषणा की.
  • सरकार और निजी संस्‍थाओं को आवास क्षेत्र में किफायती किराया आवास विकसित करने के लिए 70 हजार करोड़ रुपए दिए जाएंगे. इससे रोजगार के साथ-साथ इस्‍पात, सीमेंट, परिवहन और निर्माण संबंधी अन्‍य सामग्री की मांग पैदा होगी.

CAIT ने खुदरा व्यापारियों के लिए ई-कामर्स मार्केट प्लेस ‘bharatemarket.in’ की शुरुआत की

कांफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने देश के सभी खुदरा व्यापारियों के लिए एक राष्ट्रीय ई-कामर्स मार्केट प्लेस की शुरुआत की है. यह ई-कामर्स मार्केट प्लेस ‘bharatemarket.in’ नाम के पोर्टल पर उपलब्ध होगा. इस मार्केटप्लेस में देश के सभी खुदरा व्यापारियों को लाने का लक्ष्य है.

इस पोर्टल से जुड़ने वाले व्यापारी इस मार्केटप्लेस के एक हिस्से के मालिक होंगे. पोर्टल का मिशन भारत की पारंपरिक स्व-संगठित व्यापारिक को डिजिटल तकनीक से जोड़ कर निर्माता से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक सामान पहुंचाने की जिम्मेदारी होगी.

इस पोर्टल पर बिकने वाले सामान पर कोई भी शुल्क नहीं लगेगा तथा व्यापारियों की ई-दुकाने बिना किसी शुल्क के बनाई जाएंगी. कोई भी उपभोक्ता अपने निकटतम रिटेलर से सामान खरीद सकेगा, जिसकी डिलीवरी तुरंत की जायेगी. अन्य पोर्टलों की अपेक्षा इस पोर्टल में सामान की गुणवत्ता, कीमत तथा डिलीवरी बहुत ही कम समय में होगी.

FDI पर भारत के नए प्रावधान, जानिए क्या है मामला?

सरकार ने प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति की 18 अप्रैल को समीक्षा की. इस समीक्षा में देश के वर्तमान FDI नीति में कई नए प्रावधान किये गये हैं. नीति के नए प्रावधानों का उद्देश्‍य कोविड-19 महामारी के बीच अनुकूल मौका देखते हुए भारतीय कंपनियों के विलय और अधिग्रहण की संभावनाओं को रोकना है.

FDI नीति के कई नए प्रावधान

  • नई नीति में यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाली FDI के कारण भारतीय कंपनियों के स्‍वामित्‍व के हस्तांतरण और किसी परिवर्तन के लिए भी सरकार का अनुमोदन आवश्‍यक होगा. यह नीति उन कंपनियों पर भी लागू होगी जिनके मालिक इन देशों के नागरिक हैं या ये कंपनियां इन देशों में स्थित हैं.
  • दरअसल, अभी तक रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, मीडिया, फार्मास्युटिकल्स और इंश्योरेंस सेक्टर को छोड़ कर अन्य क्षेत्रों में विदेशी निवेश (FDI) के लिए सरकार की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती थी. अब सरकार ने नियम बनाया है कि भारत से जमीनी सीमाएं साक्षा करने वाले देशों से भारत में निवेश बिना सरकार की मंजूरी के नहीं होगा, चाहे वह किसी भी सेक्टर में हो.
  • पाकिस्तान के निवेशकों पर इस तरह की शर्त पहले से लागू है. पाकिस्तान का कोई नागरिक अथवा पाकिस्तान में बनी कोई भी कंपनी केवल सरकारी मंजूरी के जरिये ही प्रतिबंधित क्षेत्रों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में निवेश कर सकते हैं. रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा और कुछ अन्य क्षेत्रों में विदेशी निवेश प्रतिबंधित है.

FDI के नए प्रावधानों से प्रभावित देश

भारत के साथ जमीनी सीमाएं साझा करने वाले देशों में चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान शामिल हैं. सरकार के इस निर्णय से इन देशों से आने वाले विदेशी निवेश पर प्रभाव पड़ सकता है.

चीन की प्रतिक्रिया

FDI नीति में भारत द्वारा जोड़े गये नए प्रावधानों को चीनी दूतावास ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के गैर-भेदभाव वाले सिद्धान्त का उल्लंघन और मुक्त व्यापार के खिलाफ बताया है. चीनी ने कहा कि नई नीति G-20 समूह में निवेश के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष, गैर-भेदभावपूर्ण और पारदर्शी वातावरण के लिए बनी आम सहमति के भी खिलाफ है.

क्या है मामला?

चीन के केंद्रीय बैंक ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ ने हाल ही में हाउसिंग लोन देने वाली भारतीय कंपनी HDFC लिमिटेड के 1.75 करोड़ शेयर खरीदे थे. ये शेयर तब ख़रीदे गये जब COVID-19 महामारी के कारण HDFC लिमिटेड के शेयरों में 32.29 फीसदी की गिरावट आई थी. इन निवेश के बाद अब HDFC लिमिटेड में चीनी केंद्रीय बैंक की हिस्सेदारी 1.01 प्रतिशत हो गई. चीन के इसी कदम के बाद भारत सतर्क हुआ है.

अर्थव्यवस्था में मजबूती के लिए RBI ने कई नियामक उपायों की घोषणा की

लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था पर बढ़े वित्तीय दबाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कई नियामक उपायों की घोषणा की है. यह घोषणा RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने 17 अप्रैल को की. इन उपायों से बाजार नकदी का प्रवाह बनाये रखने में मदद मिलेगी, बैंक ऋण सुविधा बढ़ेगी. वित्‍तीय दबाव कम होगा और बाजारों का औपचारिक संचालन हो सकेगा.

RBI के नियामक उपायों के मुख्य बिंदु

  • रिवर्स रैपो रेट को 4 प्रतिशत से घटाकर 3.75 प्रतिशत करने की घोषणा की. रैपोरेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
  • लघु और मध्‍यम उद्योगों के लिए पचास हजार करोड़ रुपये के पैकेज की भी घोषणा की.
  • बैंकों के फंसे कर्जों के लिए समाधान योजना की अवधि 90 दिन तक बढ़ा दी जायेगी.
  • गैर-बैंकिंग वित्‍तीय कंपनियों द्वारा रियल एस्‍टेट कंपनियों को दिये गये ऋणों पर अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिये जाने वाले लाभ के समान लाभ दिया जायेगा.
  • नाबार्ड, नेशनल हाउसिंग बैंक और सिडबी जैसे वित्तीय संस्थानों के पुन: वित्त पोषणा के लिए 50,000 करोड़ रुपये की सहायता देने की भी घोषणा की.

वर्तमान दरें: एक दृष्टि

नीति रिपो दर4.40%
प्रत्‍यावर्तनीय रिपो दर3.75%
सीमांत स्‍थायी सुविधा दर4.65%
बैंक दर4.65%
CRR3%
SLR18.25%

क्या होता है रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, सीआरआर और एसएलआर?

जानिए क्या है हेलिकॉप्टर मनी और क्वांटिटेटिव ईजिंग, क्यों है चर्चा में

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए जारी लॉकडाउन के कारण आर्थिक गतिविधि ठप हो गयी है. इस कारण देश को भारी नुकसान हो रहा है जिसके लिए हर सेक्टर से वित्तीय पैकेज की मांग की जा रही है. इस बीच पूरे विश्व में इन दिनों ‘हेलिकॉप्टर मनी’ (Helicopter Money) की चर्चा हो रही है. ऐसे में जानते हैं आखिर क्या होता है हेलिकॉप्टर मनी.

क्या है हेलिकॉप्टर मनी?

जब किसी देश की अर्थव्यवस्था खराब हो जाती है तो उस देश का केन्द्रीय बैंक (भारत में भारतीय रिजर्व बैंक-RBI) बड़े पैमाने पर नोटों की छपाई कर सरकार को देता है. सरकार को यह राशि सेंट्रल बैंक को लौटना नहीं करना पड़ता है. इस राशि की मदद से मनी सप्लाई बढ़ जाती है जिससे मांग और महंगाई में तेजी आ जाती है. अमेरिकन इकनॉमिस्ट मिल्टन फ्राइडमेन ने इस प्रक्रिया को हेलिकॉप्टर मनी का नाम दिया था.

क्वांटिटेटिव ईजिंग क्या है?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने हाल ही में क्वांटिटेटिव ईजिंग की बात कही है. उन्होंने केंद्र सरकार को केन्द्रीय अर्थव्यवस्था में फिस्कल डेफिसिट का टार्गेट GDP के 3 प्रतिशत के मुकाबले 5 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया है.

इसके अलावा चंद्रशेखर राव ने ‘क्वांटिटेटिव ईजिंग’ (Quantitative Easing) के माध्यम से GDP का 5 प्रतिशत जारी करने को कहा है. भारत की GDP करीब 3 लाख करोड़ डॉलर है. इसका 5 प्रतिशत 15 हजार करोड़ डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) होता है.

हेलिकॉप्टर मनी की तरह क्वांटिटेटिव ईजिंग में भी केन्द्रीय बैंक नोटों की छपाई करता है लेकिन वह इस राशि से सरकारी बॉन्ड खरीदकर सरकार को पैसे देता है. सरकार को बाद में यह राशि केन्द्रीय बैंक को लौटना होता है.

कोविड-19 से प्रभावित लोगों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा

सरकार ने कोविड-19 से प्रभावित प्रवासी मजदूरों और गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की है. वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारामन ने इस राहत पैकेज की घोषणा 26 मार्च को नई दिल्ली में की. घोषणा के तहत आठ कैटिगरीज में किसान, मनरेगा, गरीब विधवा-पेंशनर्स-दिव्यांग, जन-धन योजना-उज्ज्वला स्कीम, सेल्फ हेल्प ग्रुप (वुमन), ऑर्गनाइज्ड सेक्टर वर्कर्स (EPFO), कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को लाभ मिलेगा.

वित्‍तमंत्री द्वारा घोषित राहत पैकेज के मुख्य बिंदु

  1. कोरोना के मुकाबले में लगे विभिन्‍न वर्ग के लोगों को तीन महीने के लिए 50 लाख रुपये का बीमा भी कराया जाएगा. इनमें डॉक्टर, चिकित्सा-कर्मी, स्‍वास्‍थ्य-कर्मी, सफाई कर्मचारी और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं.
  2. प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को अगले तीन महीने तक 5 किलो चावल या गेंहू मुफ्त उपलब्‍ध कराया जाएगा. यह इस समय दिए जा रहे 5 किलो राशन के अतिरिक्त होगा. इसके अतिरिक्‍त, प्रत्‍येक परिवार को 1 किलो दाल भी मुफ्त दी जाएगी.
  3. मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी में भी वृद्धि की घोषणा की गयी. देश में मनरेगा योजना का लाभ 5 करोड़ परिवारों को मिलता है. मनरेगा दिहाड़ी अब 182 से बढ़ाकर 202 रुपये कर दी गई है.
  4. जन-धन योजना वली करीब 20 करोड़ महिलाओं के खाते में अगले 3 महीने तक डीबीटी के जरिए हर महीने 500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे.
  5. करीब 8.3 करोड़ BPL परिवारों को उज्जवला स्कीम के तहत 3 महीनों तक फ्री एलपीजी सिलेंडर दिए जाएंगे.
    वरिष्‍ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्‍यांगजनों को अगले तीन महीनों के दौरान एक-एक हजार रुपये की दो किस्‍तों में तदर्थ अनुदान दिया जाएगा.
  6. मौजूदा प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 8 करोड़ 70 लाख किसानों और अन्‍य लोगों को अप्रैल के पहले सप्‍ताह तक उनके खाते में 2 हजार रुपये जमा कर दिए जाएंगे.
  7. अगले तीन महीनों के लिए एम्प्लॉयी और एम्प्लॉयर दोनों के हिस्से का EPF योगदान (बेसिक सैलरी का 24 पर्सेंट) सरकार करेगी. ये उन सभी ऑफिसेस के लिए है जिनमें 100 से ज्यादा एम्प्लॉयी हैं. 15000 रुपये से कम सैलरी लेने वाले 80 लाख मजदूरों को और 4 लाख संगठित इकाइयों को फायदा मिलेगा. EPFO अब EPF खाते की रकम का 75% या 3 महीने की सैलरी, जो कम हो, निकालने की परमिशन देगा.

RBI ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए 30,000 करोड़ रुपये नकदी डालने की घोषणा की

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बाजार में 30,000 करोड़ रुपये की नकदी डालने की घोषणा की है. यह नकदी बांड की खरीद-बिक्री (खुले बाजार की गतिविधियां- OMO) के माध्यम से डाली जाएगी. यह खरीद 15,000-15,000 करोड़ रुपये की इसी महीने में होगी. इसकी नीलामी 24 मार्च और 30 मार्च को होगी.

RBI ने कोरोना वायरस महामारी के चलते वित्तीय बाजारों में पर्याप्त नकदी और कारोबार को सामान्य करने के लिए यह निर्णय लिया है.

उल्लेखनीय है कि RBI ने 20 मार्च को खुले बाजार गतिविधियों के जरिए 10,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी. केंद्रीय बैंक 19 दिसंबर 2022 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 6.84 फीसदी, 25 मई 2025 को परिपक्व होने वालों पर 7.72 फीसदी, नौ जुलाई 2026 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 8.33 फीसदी और 14 जनवरी 2029 को परिपक्व होने वाली प्रतिभूतियों पर 7.26 फीसदी ब्याज देगा.

जनगणना 2021: दो चरणों में सम्‍पन्‍न होगी, संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

भारत की जनगणना-2021 दो चरणों में सम्‍पन्‍न होगी. पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक चलेगा. इस चरण में आवास से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी. दूसरा चरण जनसंख्या की गणना का होगा जो 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक पूरे देश में एक साथ चलेगा. 2021 की जनगणना परंपरागत कागज और पेन के जरिए नहीं बल्कि एक मोबाइल फोन अनुप्रयोग (app) के माध्यम से की जाएगी.

पहले चरण में जनगणना कर्मी मोबाइल नम्बर, शौचालय, टेलीविजन, इन्टरनेट, वाहन और पेयजल के स्रोत सहित अन्य जानकारी मांगेंगे. जनगणनाकर्मी बिजली के मुख्य स्रोत, उपयोग किए गए पानी के निकलने की व्यवस्था, रसोई घर की उपलब्धता, LPG या PNG कनेक्शन तथा खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे मुख्य ईंधन से संबंधित जानकारी भी मांगेंगे.

जनगणना देश में नीतियां बनाने का प्रमुख आधार है. जनगणना से मिले आंकड़ों से देश की वास्तविक स्थिति सामने आती है. इन आंकड़ों से ही पता चलता है कि देश में कुल कितने लोग हैं, किस आयु वर्ग के कितने लोग हैं, किस भाषा को बोलने वाले लोग कितने हैं, किस धर्म के कितने लोग है, लोग कितने शिक्षित हैं, देश में कितने तरह के रोजगार हैं और कितने लोग किस रोजगार में लगे हैं, किन लोगों ने दस साल में अपने रहने का ठिकाना बदल लिया है आदि.

भारत की जनगणना: मुख्य तथ्य

  • भारत में हर दस साल में जनगणना होती है. साल 2011 में आख़िरी जनगणना हुई थी और 2021 में अगली जनगणना होनी है.
  • भारत में जनगणना 1872 से हो रही है और यह सिलसिला कभी नहीं टूटा है. भारत के आज़ाद होने के बाद जनगणना का काम साल 1948 के जनगणना अधिनियम के तहत होता है.
  • 1872 से लेकर 1931 तक की जनगणना में जाति भी गिनी जाती थी आज़ादी के बाद सरकार ने तय किया कि जनगणना में अब जाति नहीं गिनी जाएगी. 1951 से लेकर 2011 तक की जनगणना में जाति नहीं गिनी गई.
  • जनगणना का काम भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त का दफ़्तर करता है. यह दफ़्तर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम करता है.

भारतीय डाक बिभाग देश में पहली बार फ्री डिजिटल लॉकर सर्विस शुरू किया

भारतीय डाक बिभाग (इंडिया पोस्ट) देश में पहली बार फ्री डिजिटल लॉकर सर्विस शुरू करने जा रहा है. इसकी शुरुआत 12 मार्च को कोलकाता में दो पोस्ट ऑफिस सॉल्ट लेक सिटी और न्यू टाउन में किया गया. इस सर्विस के तहत कस्टमर्स पोस्ट ऑफिसेज से अपना पार्सल अपनी सुविधा के हिसाब से प्राप्त कर सकेंगे.

डिजिटल लॉकर सर्विस यूरोपीय देशों में काफी चर्चित है लेकिन भारत में पहली बार शुरू हो रही है. यह सर्विस वर्किंग क्लास के ऐसे लोगों के लिए की गई है, जिनके घर पर कोई पार्सल रिसीव करने वाला नहीं होता है. ऐसे लोग ऑफिस के बाद पोस्ट ऑफिस में अपने लॉकर से अपनी सुविधा के हिसाब से अपना पार्सल ले सकते हैं.

कैसे काम करेगा?

यह सुविधा अपनाने वाले कस्टमर्स को इंडिया पोस्ट की ओर से जहां भी पार्सल ड्रॉप किया जाएगा, उसके एड्रेस के लिए एक खास लॉकर नंबर दिया जाएगा. इस डिजिटल पार्सल लॉकर में पार्सल ड्रॉप कर दिया जाएगा और कस्टमर के पास OTP का एक मैसेज आ जाएगा. कस्टमर्स पार्सल ड्रॉप होने के अगले सात दिनों तक अपना पार्सल लॉकर से निकाल सकेंगे.

EPFO ने निधि कोष जमा राशि पर ब्‍याज दर 8.5 प्रतिशत किया

कर्मचारी निधि कोष संगठन (EPFO) ने निधि कोष जमा राशि पर ब्‍याज दर 8.65 प्रतिशत से घटाकर 8.5 प्रतिशत कर दिया है. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ब्याज दरों में 0.15 फीसदी कटौती की गई है. नई ब्याज दर पिछले 7 सालों में सबसे कम है. इससे पहले वित्त वर्ष 2012-13 में PF पर ब्याज दर 8.5 फीसद दी थी.

श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने आज EPFO की शीर्ष निर्णायक संस्‍था- सेन्‍ट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी की नई दिल्‍ली में हुई बैठक के बाद यह घोषणा की.

चीन को पीछे छोड़कर भारत अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना

अमेरिका अब चीन को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018-19 में भारत और अमेरिका के बीच 87.95 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था. इस दौरान भारत का चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार 87.07 अरब डॉलर रहा. इसी तरह 2019-20 में अप्रैल से दिसंबर के दौरान भारत का अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार 68 अरब डॉलर रहा, जबकि इस दौरान भारत और चीन का द्विपक्षीय व्यापार 64.96 अरब डॉलर रहा.

भारत-अमेरिका व्यापर: एक दृष्टि

  • अमेरिका उन चुनिंदा देशों में से है, जिसके साथ व्यापार संतुलन का झुकाव भारत के पक्ष में है. वर्ष 2018-19 में भारत का चीन के साथ जहां 53.56 अरब डॉलर का व्यापार घाटा (trade deficit) रहा था, वहीं अमेरिका के साथ भारत 16.85 अरब डॉलर के व्यापार लाभ (trade surplus) की स्थिति में था.
  • भारत और अमेरिका आने वाले समय में भी आर्थिक संबंधों को बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं. यदि दोनों देश ‘मुक्त व्यापार समझौता’ (FTA) कर लेते हैं तो द्विपक्षीय व्यापार बहुत आगे स्तर पर पहुंच सकता है.
  • अमेरिका के साथ FTA भारत के लिये बेहद फायदेमंद होगा क्योंकि अमेरिका भारतीय माल एवं सेवाओं का सबसे बड़ा बाजार है.
  • अमेरिका के साथ भारत का आयात और निर्यात दोनों बढ़ रहा है, जबकि चीन के साथ आयात-निर्यात दोनों में गिरावट आ रही है.
  • भारत अमेरिका में स्टील, स्टील उत्पाद और एल्युमिनियम उत्पादों का निर्यात करीब 22.7 अरब डॉलर का हुआ था.
    भारत को अमेरिका के साथ FTA करते वक्त सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि अमेरिका मक्का और सोयाबीन जैसे जिंसों का सबसे बड़ा उत्पादक व निर्यातक है.