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इज़राइल में प्रधानमंत्री नेतन्याहू की अगुवाई में पांचवीं बार नई सरकार ने शपथ ली

इज़राइल में 17 मई को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में नई सरकार ने शपथ ली. इज़राइली संसद ‘नेसेट’ में नई सरकार के विश्वास मत के दौरान सरकार के पक्ष में 73 मत, जबकि विपक्ष में 46 मत पड़े.

इज़राइल में एक के बाद एक हुए तीन चुनावों में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. इस कारण देश के इतिहास में सबसे लंबा राजनीति गतिरोध खत्म हो गया था जो इस शपथ के साथ ही खत्म हो गया. गतिरोध के दौरान 500 दिनों से भी ज्यादा वक्त तक कार्यवाहक सरकार बागडोर संभाले हुए थी.

लिकुड पार्टी और ब्लू एंड व्हाइट की गठबंधन सरकार

चुनावों में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने पर नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने बेनी गांट्ज के ‘ब्लू एंड व्हाइट पार्टी’ के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाई है. बेनी गांट्ज नेतन्याहू के लंबे समय तक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं. इस गठबंधन सरकार में गांट्ज ने रक्षा मंत्री और वैकल्पिक प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली है.

गठबंधन के समझौते के तहत सत्ता की साझीदारी पर बनी सहमति के मुताबिक नई सरकार में 18 महीने बाद नेतन्याहू पद छोड़ देंगे और 17 नवंबर 2021 को बेनी गांट्ज प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे. नेसेट ने लिकुड पार्टी के यारिव लेविन को नया अध्यक्ष चुना है.

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अमेरिका ने फलस्तीनी क्षेत्र में बस्तियां बनाने की इस्राइल की नीति का समर्थन किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृ्त्व में अमेरिका ने इजरायल के प्रति अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव किया है. ट्रम्प प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय की नीति को पलटते हुए इजराइल के वेस्ट बैंक और पूर्व येरुशलम पर कब्जे को मान्यता दी है.

इस बदलाव के तहत अमेरिका ने फलस्तीन में पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) पर बस्तियां बनाने के इस्राइल के अधिकार का समर्थन किया है. अमेरिका इसे अब अन्तर्राष्ट्रीय कानून के तहत असंगत रूप में नहीं देखता.

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने 18 नवम्बर को घोषणा की कि अमरीका अब यह नहीं मानता कि फलस्तीनी क्षेत्र में इस्राइल की बस्तियां अवैध है. इन बस्तियों को बार-बार अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहने का कोई फायदा नहीं हुआ. इसकी वजह से शांति की कोशिशें भी नहीं हुई हैं.

अमेरिकी समर्थन पर प्रतिक्रिया

इस्राइल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि अमरीका का बयान ऐतिहासिक भूल में सुधार है. लेकिन फलस्तीन प्रशासन ने अमरीकी नीति में बदलाव की निंदा की है और इसे अन्तर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है. इस बीच, यूरोपीय संघ ने फलस्तीनी क्षेत्र में बस्तियां बनाने की इस्राइल की नीति की आलोचना की है.

वेस्ट बैंक विवाद क्या है?

  • फिलीस्तीन और इजराइल के बीच वेस्ट बैंक, पूर्वी येरूशेलम के हिस्से को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है. दोनों देश इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर गोलियां और मिसाइलें दागते रहते हैं.
  • 1967 के तीसरे अरब-इजराइल युद्ध में इजराइल ने अपने तीन पड़ोसी देशों सीरिया, मिस्र और जॉर्डन को हराया था. इसके बाद उसने वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम के बड़े हिस्से पर कब्जा कर 140 बस्तियां बना दी थीं.
  • इन क्षेत्रों में अभी करीब 6 लाख यहूदी रहते हैं. इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध करार दिया जाता है, हालांकि इजराइल ने इन्हें अपना हिस्सा मानता है.
  • फिलिस्तीनी लंबे समय से इन बस्तियों को हटाने की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि वेस्ट बैंक में यहूदियों के रहने से उनका भविष्य में आजाद फिलिस्तीन का सपना पूरा नहीं हो पाएगा.
  • दरअसल फिलीस्तीन वेस्ट बैंक, पूर्वी येरूशेलम और गाजा पट्टी को साथ मिलाकर एक देश बनाना चाहता है. लेकिन इजराइल वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशेलम पर अपना दावा करता है.
  • इजराइल इस क्षेत्रों में यहूदियों की बस्ती का विस्तार कर उसे अपने अधिकार में लेना चाहता है. इजराइल की ओर से सिर्फ वेस्ट बैंक पर लाखों यहूदियों को बसाया जा चुका है. लेकिन इसी हिस्से में करीब 25 लाख फिलीस्तीनी लोग भी रहते हैं.
  • 1978 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने फैसला लिया था कि वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियां अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं. 2016 में संयुक्त राष्ट्र में इस पर एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें इजराइल के अवैध कब्जों को खत्म करने की मांग की गई थी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस प्रस्ताव पर वीटो करने से इनकार कर दिया था.

इजरायल के आम चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं

इजरायल के आम चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. यहाँ 120 सीटों वाले संसदीय चुनाव के लिए 17 सितम्बर को मतदान हुआ था. मतों की गिनती 18 सितम्बर को हुई. मतगणना में इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुद पार्टी को 31 जबकि उसकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को 32 सीटें मिली. यहाँ मध्य-वामपंथी गुट के पास 56 सीटें हो गयी हैं.

इजरायल के आम चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के बाद आज प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि दक्षिणपंथी दल सरकार का गठन नहीं कर सकते है और एक यूनिटी सरकार बनने की संभावना दिख रही है. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने प्रतिद्वंदी पार्टी ब्लू एंड वाइट के प्रमुख बेनी गांज से अपील करते हुए व्यापक यूनिटी सरकार बनाने का आह्वान किया.


इस्रइल ने गोलन हाइट्स का नामकरण रमात ट्रंप करने की घोषणा की