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जम्मू-कश्मीर में सरकारी काम-काज निपटाने के लिए प्रशासनिक परिषद गठित की गई

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सरकारी काम-काज निपटाने के लिए प्रशासनिक परिषद गठित की गई है. उप-राज्यपाल गिरीश चन्‍द्र मुर्मू इस परिषद के अध्यक्ष हैं. मुख्य सचिव इस प्रशासनिक परिषद के सचिव होंगे.

उप-राज्यपाल के सलाहकारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, आम प्रशासनिक विभाग के सचिव व अन्य प्रशासनिक सचिव विभिन्न मामलों में मंत्रियों के अधिकार प्रयोग कर सकेंगे. जो मामले कैबिनेट के सामने लाये जाएंगे, उनमें अध्यादेश जारी करने, राज्य विधानमंडल की बैठक बुलाने, स्थगित, विसर्जित अथवा भंग करने, राज्यपाल, उपराज्यपाल के विधानमंडल को संबोधित करने संबंधी मामले शामिल होंगे.

उपराज्यपाल जीसी मुर्मू ने अपने दो सलाहकारों केके शर्मा व फारूक खान को आम प्रशासनिक विभाग, गृह विभाग व वित्त विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी उपराज्यपाल ने अपने पास ही रखी है.

डल झील के आसपास के क्षेत्रों को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने के लिए समिति का गठन

जम्मू और कश्मीर सरकार ने श्रीनगर की प्रसिद्ध डल झील के आसपास के क्षेत्रों को पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) घोषित करने के लिए एक दस-सदस्यीय समिति का गठन किया है.

डल झील के सिकुड़ते आकार को लेकर चिंताओं के कारण यह निर्णय लिया गया है. ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (DCI) के 2017 के आकलन के अनुसार, प्रदूषण और अतिक्रमणों के कारण डल झील 22 वर्ग किलोमीटर के अपने मूल क्षेत्र से सिकुड़ कर लगभग 10 वर्ग किलोमीटर हो गई है.

चर्चा में: कश्मीर स्थित भारतीय सेना द्वारा की गई पहल ‘ऑपरेशन मां’

कश्मीर स्थित भारतीय सेना द्वारा की गई पहल ‘ऑपरेशन मां’ हाल के दिनों में चर्चा में रहा है. इस पहल के कारण वर्ष 2019 में 50 कश्मीरी युवक आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं.

‘ऑपरेशन मां’ भारतीय सेना के 15वीं कोर (चिनार कोर) द्वारा की गई पहल है. इस पहल में लापता युवकों को खोजने और उनके परिजन तक पहुंचाने के काम को अंजाम दिया गया. कोर ने घाटी और नियंत्रण रेखा पर आतंकवाद से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद भारत का नया मानचित्र जारी किया गया

केंद्र सरकार ने नये केंद्रशासित प्रदेश – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख बनाने के बाद भारत का नया राजनीतिक मानचित्र 3 नवम्बर को जारी किया. भारत के इस मानचित्र में इन दोनों केंद्रशासित प्रदेशों को भी दिखाया गया है. जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद नए मानचित्र में 28 राज्य और 9 केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं.

  • नए मानचित्र में केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में करगिल और लेह जिले शामिल हैं और पहले के जम्मू-कश्मीर राज्य के शेष जिले नवगठित केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में बने रहेंगे. इस मानचित्र में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान लद्दाख क्षेत्र में है.
  • नए मानचित्र में POK के मुजफ्फराबाद और मीरपुर को भी जम्मू-कश्मीर का हिस्सा दिखाया गया है. भारत हमेशा से इन दोनों जिलों को अपना हिस्सा बताता रहा है.
  • लद्दाख का लेह जिला क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा जिला होगा. इसके अलावा कुपवाड़ा, बांदीपोरा, बारामूला, पूंछ, बडगाम, शोपियां, कुलगाम, किश्तवाड़, उधमपुर, डोडा, सांबा, जम्मू, कठुआ, रामबन, राजौरी, अनंतनाग, पुलवामा, श्रीनगर, रियासी और गांदरबल जिले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा होंगे.

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में अस्तित्व में आया

31 अक्टूबर 2019 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 144वीं जयंती पर दो केन्द्रशासित प्रदेशों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आ गये. ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी राज्य को 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बदला गया हो. अब देश में कुल राज्यों की कुल संख्या 28 और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो गयी है.

जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख के उप-राज्‍यपालों का शपथ ग्रहण

जम्मू-कश्मीर: गिरीश चन्‍द्र मुरमु को केन्द्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का पहला उप-राज्‍यपाल नियुक्त किया गया है. जम्‍मू कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश गीता मित्‍तल ने 31 अक्टूबर को उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

लद्दाख: राधा कृष्ण माथुर को केन्द्रशासित प्रदेश लद्दाख का पहला उप-राज्‍यपाल (लेफ्टि‍नेट गवर्नर) नियुक्त किया गया है. जम्‍मू कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय की मुख्‍य न्‍यायाधीश गीता मित्‍तल ने 31 अक्टूबर को लेह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

जम्मू-कश्मीर राज्य का जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केन्द्रशासित प्रदेशों के रूप में पुनर्गठन

इस वर्ष पांच अगस्त को केन्द्र ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन किया था.

पुनर्गठन कानून के मुख्य बिन्दु
  • केंद्रशासित प्रदेश जम्‍मू-कश्‍मीर में पुद्दुचेरी की तर्ज पर एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्‍यमंत्री होगा. जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य की विधान परिषद समाप्‍त कर दी गयी है. सीटों के पुनर्निर्धारण के बाद जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा का पुनर्गठन होगा.
  • लद्दाख, अंडमान और निकोबार की तर्ज पर केंद्रशासित प्रदेश होगा और सीधे उप-राज्‍यपाल द्वारा संचालित होगा. लद्दाख में एक हिल काउंसिल होगी जो उप-राज्‍यपाल के अधीन होगी.
  • लद्दाख और जम्‍मू-कश्‍मीर दोनों के लिए एक ही जम्‍मू-कश्‍मीर उच्‍च न्‍यायालय होगा.
  • 106 केंद्रीय कानून दोनों नए केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होंगे. इनमें आधार अधिनियम-2016, भारतीय दंड संहिता-1860 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम- 2009 शामिल हैं.
  • अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग तथा अल्‍पसंख्‍यक आयोग दोनों संघ शासित प्रदेशों में बनाए जाएंगे.

यूरोपीय संघ के सांसदों के शिष्टमंडल ने जम्मू-काश्मीर का दौरा किया

विभिन्‍न यूरोपीय देशों के 23 संसद सदस्‍यों के शिष्‍टमंडल ने 29-30 अक्टूबर को जम्मू-काश्मीर का दौरा किया. इस शिष्‍टमंडल में यूरोपीय संसद के इटली, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड से संबंधित सदस्‍य शामिल थे. कश्मीर जाने से पहले इन सांसदों ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी.

काश्मीर की स्थिति के बारे पाकिस्तान के बयानों से निपटने तथा सरकार की विकास और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को स्पष्ट के लिए यह एक प्रमुख कूटनीतिक कदम थी. यह शिष्टमंडल संविधान के अनुच्छेद 370 के अंतर्गत जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा निरस्त किए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के सरकार के निर्णय के बाद राज्य का दौरा करने वाला पहला विदेशी शिष्टमंडल था.

यूरोपीय शिष्टमंडल ने दो दिन की यात्रा के दौरान पंचों और सरपंचों सहित विद्यार्थियों, महिलाओं, व्‍यापारियों और फल उत्‍पादकों से भेंट की. शिष्‍टमंडल ने डल झील में शिकारा भ्रमण भी किया. उनकी यात्रा का उद्देश्‍य कश्‍मीर क्षेत्र में समग्र स्थिति का मौके पर जाकर ज़ायजा लेना था.

यूरोपीय शिष्टमंडल ने इस यात्रा के क्रम में आतंकवाद को समाप्त करने के प्रयासों में भारत का समर्थन किया. सांसदों ने कहा कि स्‍थाई शांति और आतंकवाद के सफाये के प्रयासों में वे भारत के साथ हैं. उन्‍होंने अनुच्‍छेद 370 को हटाए जाने को भारत का आंतरिक मामला बताया.

जम्‍मू कश्‍मीर की शीतकालीन राजधानी जम्‍मू से सचिवालय का कार्य शुरू

जम्‍मू कश्‍मीर में 25 अक्‍तूबर से से राज्‍य सरकार के सचिवालय ने शीतकालीन राजधानी जम्‍मू से काम करना शुरू कर दिया. जम्‍मू-कश्‍मीर में अर्द्धवार्षिक दरबार मूव व्‍यवस्‍था के तहत राज्‍य सचिवालय और राज्‍यपाल का कार्यालय मई से अक्‍तूबर तक छह महीने के लिए श्रीनगर में और नवम्‍बर से अप्रैल के छह महीने जम्‍मू में काम करता है. (Srinagar is the summer capital, and Jammu is the winter capital)

जम्मू-कश्मीर के पहले प्रखंड विकास परिषदों के चुनाव के परिणाम घोषित किये गये

जम्मू-कश्मीर 24 अक्टूबर को पहले प्रखंड विकास परिषदों (Block Development Council) के चुनाव के लिए मतदान हुए. इन चुनावों में लगभग 98 प्रतिशत मतदाताओं ने भाग लिया. यहाँ 316 प्रखंड विकास परिषदों में 280 प्रखंड में मतदान कराया गया था जबकि 27 प्रखंड परिषद निर्विरोध चुने गए थे.

चुनावों में निर्दलीय उम्‍मीदवारों ने सबसे अधिक 217 प्रखंड में जीत हासिल की जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 81 और जम्‍मू-कश्‍मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने 8 और कांग्रेस ने 1 ब्‍लॉक में विजय प्राप्‍त की.

कश्‍मीर घाटी में 128 खंडों में से 109 निर्दलीय उम्‍मीदवार विजय रहे जबकि BJP ने 18 और कांग्रेस 1 ब्‍लॉक में विजेता रहा. जम्‍मू संभाग में 88 खंडों में निर्दलीय उम्‍मीदवार जीत गए जबकि BJP ने 52 ब्‍लॉकों पर कब्‍जा किया. जम्‍मू कश्‍मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी ने आठ ब्‍लॉक जीत लिए. लद्दाख डिविजन में 20 ब्‍लॉकों में निर्दलीय उम्‍मीदवार और 11 ब्‍लॉकों में BJP ने सफलता प्राप्‍त की.

देश के कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की गयी

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 25 अक्टूबर को देश के कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की. उन्होंने नवगठित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के पहले उपराज्यपाल की नियुक्ति की भी घोषणा की. आर्टिकल 370 हटाने के बाद राज्य का पुनर्गठन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया था.

  1. जम्मू-कश्मीर: गिरीश चंद्र मुर्मू को जम्मू-कश्मीर का पहला उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है. पुर्नगठन के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है और अब वहां राज्यपाल की जगह उप-राज्यपाल होंगे. भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (IAS) गिरीश चंद्र इस समय वित्त मंत्रालय में एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी हैं. मुर्मू नवंबर में सेवानिवृत होने जा रहे हैं.
  2. लद्दाख: IAS अधिकारी रहे राधा कृष्‍णा माथुर को जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग होकर बने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का पहला उप-राज्‍यपाल नियुक्‍त किया गया है. नवंबर, 2018 में वह देश के मुख्‍य सूचना आयुक्‍त (CIC) पद से सेवानिवृत हुए थे.
  3. गोवा: जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को गोवा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है.
  4. मिजोरम: पीएस श्रीधरन पिल्लई को मिजोरम का राज्यपाल बनाया है.
  5. लक्षद्वीप: दिनेश्वर शर्मा को लक्षद्वीप का प्रशासक नियुक्त किया गया है. वे जम्मू-कश्मीर वार्ता के लिए केंद्र सरकार के अधिकृत पूर्व-प्रतिनिधि थे.

जम्‍मू कश्‍मीर के 62 साल पुरानी विधान परिषद को समाप्त किया गया

जम्‍मू कश्‍मीर के विधान परिषद का 18 अक्टूबर को अंत हो गया है. जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य प्रशासन ने जम्‍मू कश्‍मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धारा 57 के तहत राज्य की 62 साल पुरानी विधान परिषद को समाप्त करने आदेश दिया था.

राज्‍य प्रशासन ने इस अधिनियम के तहत विधान परिषद के 116 सदस्‍य-कर्मचारियों को 22 अक्‍टूबर तक सामान्‍य प्रशासन विभाग में रिपोर्ट करने को कहा है. 31 अक्टूबर को जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य दो केन्‍द्र शासित प्रदेशों लद्दाख और जम्‍मू-कश्‍मीर में बंट जायेगा.

छत्तीस सदस्यों वाली जम्‍मू-कश्‍मीर विधान परिषद का गठन सन 1957 में संसद द्वारा एक कानून पारित किये जाने के उपरान्त किया गया था. विधान परिषद 87 सदस्यों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिये एक उच्च सदन की तरह कार्य करती थी.

जम्‍मू-कश्‍मीर को दो केन्‍द्रशासित प्रदेशों में विभा‍जन की निगरानी के लिए समिति का गठन

केन्‍द्र सरकार ने जम्‍मू-कश्‍मीर को दो केन्‍द्रशासित प्रदेशों में विभा‍जन की निगरानी के लिए तीन सदस्‍यीय समिति का गठन किया है. यह समिति दोनों प्रस्‍तावित केन्‍द्रशासित प्रदेशों में सम्‍पत्तियों और दायित्‍वों के वितरण की निगरानी करेंगी. जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख दोनों केन्‍द्रशासित प्रदेश 31 अक्‍टूबर 2019 को अस्तित्‍व में आ जाएंगे.

पूर्व रक्षा सचिव संजय मित्रा इस समिति के अध्यक्ष होंगे

पूर्व रक्षा सचिव संजय मित्रा इस समिति के अध्यक्ष होंगे जबकि सेवानिवृत आईएएस अधिकारी अरूण गोयल और भारतीय सिविल लेखा सेवा के सेवानिवृत अधिकारी गिरिराज प्रसाद गुप्ता उसके अन्य दो सदस्य होंगे.

समिति का गठन जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत

इस समिति का गठन जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 85 के तहत किया गया है. इस अधिनियम की धारा 84 के अनुसार जम्मू कश्मीर राज्य की पंरसंपत्तियां और देनदारियां जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्रशासित प्रदेशों के बीच बांटी जानी है.

पांच अगस्त को केंद्र ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था और उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया था. अधिसूचना के अनुसार वर्तमान जम्मू कश्मीर राज्य की परिसंपत्तियों और देनदारियों का बंटवारा केंद्र द्वारा गठित समिति की सिफारिश के आधार पर होगा.


श्रीनगर और जम्मू नगर निकायों के मेयरों को राज्य मंत्री स्तर का दर्जा दिया गया

श्रीनगर और जम्मू नगर निकायों के मेयरों को राज्य मंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है. इसके तहत श्रीनगर नगर निगम (SMC) और जम्मू नगर निगम (JMC) के मेयर को उनके क्षेत्रीय अधिकार के अंतर्गत राज्यमंत्री के स्तर का दर्जा दिया गया है.


नगर निगमों के लिए चुनाव 13 साल के अंतराल के बाद अक्टूबर 2018 में हुआ था. पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता जुनैद मट्टू और बीजेपी नेता चंद्र मोहन गुप्ता क्रमश: SMC और JMC के मेयर हैं.