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जर्मनी ने हिजबुल्लाह पर प्रतिबंध लगाया, हिजबुल्‍लाह का संक्षिप्त काल क्रम

जर्मनी ने हाल ही में लेबनान (Lebanon) के आतंकी संगठन हिजबुल्लाह पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. ये प्रतिबंध देश में इस आतंकी संगठन द्वारा हमले कराए जाने की आशंका के मद्देनजर लगाया गया है. ईरान ने जर्मनी के इस निर्णय को इजराइल और अमेरिका के दबाव में उठाया गया कदम बताया है.

जर्मनी हिजबुल्लाह को दुनिया भर में कई हमलों और अपहरणों के लिए जिम्मेदार मानता है. इस फैसले से पहले जर्मनी ने इस संगठन की सैन्य गतिविधियों पर ही रोक लगा रखी थी. इसकी वजह से ये राजनीतिक रूप से यहां पर सक्रिय था.

जर्मन की सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस संगठन के करीब 1000 सदस्य देश में मौजूद हैं. ये जर्मनी का इस्तेमाल एक सुरक्षित जगह के रूप में करते आए हैं जहां ये योजना बनाते हैं, नए सदस्य खोजते हैं और आपराधिक गतिविधियों के जरिए धन जमा करते हैं.

यूरोपीय संघ पर भी प्रतिबंधित करने का दबाव

जर्मनी से पहले अमेरिका, इस्राएल, सऊदी अरब समेत कुछ अन्‍य देशों ने इस आतंकी संगठन पर प्रतिवंध लगा चुके हैं. जर्मनी के इस कदम से यूरोपीय संघ पर भी इसको प्रतिबंधित करने का दबाव बढ़ जाएगा. अमेरिका और इजराइल ने जर्मनी के इस कदम की सराहना की है. इजराइल ने जहां जर्मनी के इस कदम को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जंग में एक महत्वपूर्ण बताया है वहीं अमेरिका ने इससे यूरोपीय संघ को सीख लेने की नसीहत दे डाली है.

हिजबुल्‍लाह: संक्षिप्त काल क्रम

  1. हिजबुल्लाह की शुरुआत को समझने के लिए लेबनान (Lebanese Republic) के इतिहास पर एक नजर जरूरी है. लेबनान में 1943 में एक समझौते के तहत ये तय किया गया था कि देश में केवल एक सुन्नी मुसलमान ही प्रधानमंत्री बन सकता था. इसके अलावा ईसाई राष्ट्रपति और संसद का स्पीकर शिया मुसलमान हो सकता है.
  2. धीरे-धीरे लेबनान में फिलिस्‍तीन से आए सुन्नी मुसलामानों की संख्या बढ़ती चली गई और शिया मुसलामानों को अपने हाशिये पर जाने का डर सताने लगा. इसाई यहां पर पहले से ही अल्‍पसंख्‍यक थे. इस डर की वजह से 1975 में लेबनान में गृह युद्ध की शुरुआत हुई, जो 15 वर्ष तक चला.
  3. 1978 में इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से पर कब्जा कर लिया था. इससे पहले फिलिस्‍तीनी इस इलाके का इस्‍तेमाल इजरायल पर हमले के लिए किया करते थे.
  4. 1982 में लेबनान में हिजबुल्लाह नाम का एक शिया संगठन बना जिसका मतलब था ‘अल्लाह की पार्टी’. इजराइल के खिलाफ हमलों के लिए ईरान ने इसको फंडिंग में मदद की.
  5. हिजबुल्‍लाह ने 1985 में अपना घोषणापत्र जारी किया जिसमें लेबनान से सभी पश्चिमी ताकतों को निकाल बाहर करने का एलान किया गया. इसमें अमेरिका और सोवियत संघ को दुश्मन घोषित किया गया. इसके अलावा इसमें इजराइल को तबाह करने की भी बात कही गई थी.
  6. वर्ष 2000 में इजराइली सैनिकों की लेबनान से वापसी के बाद भी इनके बीच तनाव खत्म नहीं हुआ. 2011 में इस गुट ने सीरिया में राष्‍ट्रपति बशर अल असद के समर्थन में हजारों लड़ाके भेजे.
  7. धीरे-धीरे हिजबुल्लाह लेबनान में और मजबूत होता गया और आज ये देश की एक अहम राजनीतिक पार्टी है. दुनिया के कई देश इसे आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं.

लेबनान के प्रधानमंत्री साद हरीरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया

लेबनान के प्रधानमंत्री साद हरीरी ने 29 अक्टूबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति मिशेल आउन को दिया. इस्तीफे से देश में हो रहे सामूहिक प्रदर्शनों की एक मांग पूरी हो गई है.

प्रधानमंत्री साद हरीरी ने इस्तीफा वहां हो रहे सामूहिक प्रदर्शनों के कारण दिया है. लेबनान में भ्रष्टाचार, सार्वजनिक सेवाओं की खस्ताहाल स्थिति और सालों से हो रहे आर्थिक कुप्रबंधन के कारण पिछले 13 दिनों से सामूहिक प्रदर्शन हो रहे थे. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री साद हरीरी को हटाने की मांग कर रहे थे. हरीरी ने जनवरी 2019 में पदभार ग्रहण किया था.