पोस्ट



ओडिशा सरकार ने ‘बंदे उत्कल जननी’ को राज्य गान का दर्जा दिया

ओडिशा सरकार ने ‘बंदे उत्कल जननी’ को राज्य गान का दर्जा दिया है. ओडिशा मंत्रिमंडल ने राज्य गान का दर्जा देने से संबंधित प्रस्ताव को 7 जून को मंजूरी दी. मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की अध्यक्षता वाले मंत्रिमंडल ने बंदे उत्कल जननी को राज्य गान का दर्जा प्रदान किया.

राज्य गान का दर्जा दिए जाने के बाद यह अब सभी सरकारी कार्यक्रमों व राज्य विधानसभा में बिना वाद्य यंत्र के बजाया जाएगा, लेकिन इसके साथ ही सभी सरकारी विद्यालय, कॉलेज व समारोह में इसे वाद्य यंत्रों के साथ बजाने की अनुमति है.

गाना बजने पर लोगों को इसके प्रति सम्मान भाव दिखाना आवश्यक है, हालांकि बुजुर्गों, बीमार व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसमें छूट दी गई है.

बंदे उत्कल जननी: एक दृष्टि

‘बंदे उत्कल जननी’ एक देशभक्ति कविता है, जो सन् 1912 में कांता कवि लक्ष्मीकांता महापात्र द्वारा लिखी गई है. यह एक अलग प्रांत के गठन की लड़ाई के दौरान उत्कल सम्मिलनी का शुरुआती गान रहा है. इसे राज्य गान का दर्जा प्रदान करने की यहां के लोगों की काफी लंबे समय से मांग रही है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को ‘हीरो टू एनिमल्स अवार्ड’ से सम्मानित किया गया

पशु अधिकार संस्था पेटा इंडिया ने 5 अप्रैल को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को ‘हीरो टू एनिमल्स अवार्ड’ से सम्मानित किया. उन्हें कोरोना वायरस महामारी को लेकर चल रहे लॉकडाउन के दौरान राज्य में सामुदायिक पशुओं को खिलाने के लिए धन आवंटित करने के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

लॉकडाउन के दौरान पशुओं को भोजन मिलने में मुश्किलें हो रही है. इसे देखते हुए राज्य सरकार ने पांच नगर निगमों और सभी 48 नगर पालिकाओं में आवारा पशुओं को खिलाने के लिए 54 लाख रुपये मंजूर किया है.

नवीन पटनायक के प्रयासों का सम्मान करते हुए, पेटा इंडिया ने पटनायक को यह पुरस्कार देने की घोषणा की. पुरस्कार स्वरूप उन्हें एक प्रमाण पत्र और प्रशस्ति पत्र दिया गया.

पेटा (PETA): एक दृष्टि

पेटा (PETA), People for the Ethical Treatment of Animals का संक्षिप्त रूप है. यह पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के लिए एक पशु-अधिकार संगठन है. इसकी स्थापना 22 मार्च, 1980 के की गयी थी. इसका मुख्यालय अमेरिका के वर्जिनिया में स्थित है. विश्व भर में इसके लगभग 20 लाख सदस्य हैं और यह अपने को विश्व का सबसे बड़ा पशु-अधिकार संगठन होने का दावा करता है.

1 अप्रैल: ओडिशा दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल को ओडिशा दिवस (Odisha Day) मनाया जाता है. 1936 में इसी दिन ओडिशा को स्वतंत्र राज्य बनाया गया था. इस प्रकार इस वर्ष ओडिशा का 84वां ओडिशा दिवस मनाया गया. ओडिशा का गठन भाषाई आधार पर संयुक्त बंगाल प्रांत से अलग कर बनाया गया था. 1912 में बंगाल से बिहार और उड़ीसा को अलग किया गया था. 1 अप्रैल, 1936 में बिहार व उड़ीसा प्रांत का विभाजन अलग-अलग प्रांत में किया गया.

ओडिशा: एक दृष्टि

  • स्वतंत्रता के बाद ओडिशा तथा इसके आसपास की रियासतों ने भारत सरकार को अपनी सत्ता सौंप दी थी. 1949 में ओडिशा की सभी रियासतों का ओडिशा राज्य में सम्पूर्ण विलय हो गया था.
  • कलिंग, उत्कल और उद्र ओडिशा के प्राचीन नाम हैं. यह प्रदेश मुख्यत: भगवान जगन्नाथ की भूमि के लिए प्रसिद्ध है.
  • भारतीय राज्य ओडिशा देश के पूर्वी तट पर है. ओडिशा उत्तर में झारखण्ड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल दक्षिण में आंध्रप्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ़ है तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी है.
  • ओडिशा के उत्तर में छोटा नागपुर का पठार है. महानदी, ब्राह्मणी, कालिंदी और वैतरणी ओडिशा के दक्षिण में बहने वाली मुख्य नदियां हैं.

प्रसिद्ध ओडिया फिल्मकार मनमोहन महापात्रा का निधन

ओडिशा के प्रसिद्ध फिल्मकार मनमोहन महापात्रा का 14 जनवरी को 69 साल की उम्र में निधन हो गया. 1970 से 80 के शुरुआती दशक में उन्होंने सिनेमा को एक नई पहचान दी थी. उन्हें ‘न्यू वेव ओडिया सिनेमा के जनक’ के रूप में जाना जाता है.

मनमोहन महापात्रा ओडिशा के एकमात्र ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने लगातार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है. उन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था. ओडिशा की रिज़नल फ़िल्म के लिए बेस्ट फीचर कैटेगरी में मनमोहन ने कुल आठ बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता.

महापात्रा ने पहली ओडिया फ़िल्म ‘सीता राती’ बनाई थी, जिसे इंटरनेशल फ़िल्म फेस्टिवल 1982 में दिखाया गया था. उन्हें निशिधा स्वप्ना, माझी पच्चा, नीरब झाड़ा, अग्नि बेना, क्लांता अपरान्हा, अन्धा दिगंता, किचि स्मृति किचि अनुभूति और भीना समया के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला. उन्होंने रिज़नल फ़िल्मों को अतंरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया. उनकी कई फ़िल्मों को विदेशों में भी दिखाया गया.

इटैलियन गोल्डन सैंड आर्ट पुरस्कार के लिए भारत से सुदर्शन पटनायक का चयन

भारतीय रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक का चयन ‘इटैलियन गोल्डन सैंड आर्ट अवार्ड 2019’ के लिये हुआ है. इटली में 13 नवंबर को ‘अंतरराष्ट्रीय स्कोराना सैंड नेटिविटी कार्यक्रम के दौरान उन्हें इस सम्मान से सम्मानित किया जायेगा. भारत सरकार ने सुदर्शन को 2014 में नागरिक सम्मान ‘पद्म-श्री’ से सम्मानित किया गया था.