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गजा में इस्राइल और फिलिस्तीन के बीच युद्धविराम लागू हुआ

गाजा पट्टी (Gaza strip) में इस्राइल और फिलिस्तीन (palestine) के बीच जारी लडाई 21 मई को समाप्त हो गयी। इस्राइल के सुरक्षा मंत्रिमंडल ने गाजा पट्टी में युद्ध विराम को मंजूरी दी। इसके साथ ही वहां दशकों में अब तक के सर्वाधिक भीषण संघर्ष की समाप्ति हुई है।

अमरीका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के इस्राइल के प्रधानमंत्री बेन्‍यामिन नेतनयाहू से लडाई समाप्त करने के अनुरोध और मिस्र, कतर और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता की पहल के बाद युद्धविराम के पक्ष में सहमति हुई है।

10 मई को शुरू हुई लडाई में दोनों पक्षों के कई नागरिकों की मौत हो गयी थी। यह तनाव इजराइली पुलिस और धुर दक्षिणपंथी यहूदी समूहों से फलस्तीनियों की हिंसक झड़प से शुरू हुआ था. झड़प दोनों ओर से गाजा पट्टी (Gaza strip) पर भारी बमबारी हुई थी.

फिलिस्‍तीन की सत्‍ता पर काबिज आतंकवादी संगठन हमास (Hamas) ने इजरायल के हवाई हमलों के जवाब में तेल अवीव (Tel Aviv) पर रॉकेट से हमला किया है.

ग़ज़ा पट्टी
ग़ज़ा पट्टी (Gaza strip) इस्रायल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक 6-10 किंमी चौड़ी और करीब 45 किमी लम्बा क्षेत्र है. इसके तीन ओर इसरायल का नियंत्रण है और दक्षिण में मिस्र है. गाजा पर फलस्तीनी चरमपंथी गुट ‘हमास’ का नियंत्रण है.

इजराइल-फिलिस्तीन तनाव

हाल के दिनों में इजराइल और फिलिस्तीन (palestine) के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है. यह तनाव इजराइली पुलिस और धुर दक्षिणपंथी यहूदी समूहों से फलस्तीनियों की हिंसक झड़प से शुरू हुआ था. झड़प दोनों ओर से गाजा पट्टी (Gaza strip) पर भारी बमबारी हुई है, जिसमें कई लोगों की जान चली गयी. इजरायल के हवाई हमले में हमास गाजा के सिटी कमांडर बसीम इस्सा की मौत हो गई है.

फिलिस्‍तीन की सत्‍ता पर काबिज आतंकवादी संगठन हमास (Hamas) ने इजरायल के हवाई हमलों के जवाब में तेल अवीव (Tel Aviv) पर रॉकेट से हमला किया है.

उल्लेखनीय है कि यरुशलम में हाल के दिनों में झड़पों में बढ़ोतरी हुई है, जो इस्राइल-फलस्तीन में लंबे समय से टकराव का मुख्य केंद्र रहा है. यहीं पर यहूदियों, ईसाइयों और मुस्लिमों के पवित्र स्थल भी हैं.

ग़ज़ा पट्टी

ग़ज़ा पट्टी (Gaza strip) इस्रायल के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक 6-10 किंमी चौड़ी और करीब 45 किमी लम्बा क्षेत्र है. इसके तीन ओर इसरायल का नियंत्रण है और दक्षिण में मिस्र है. गाजा पर फलस्तीनी चरमपंथी गुट ‘हमास’ का नियंत्रण है.

अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय का रुख

  • संयुक्त राष्ट्र के मध्य पूर्व शांति राजदूत टॉर वेनेसलैंड ने कहा है कि दोनों पक्ष इसे व्यापक युद्ध की ओर ले जा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस ने कहा है कि वे हिंसा को लेकर काफी चिंतित हैं.
  • अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा है कि इजरायल को अपनी रक्षा करने का अधिकार है. अमरीका के राष्‍ट्रपति जो. बाइडेन ने हमास और अन्‍य आतंकवादी समूहों के रॉकेट हमलों की निंदा की. उन्‍होंने कहा कि यह इस्राइल का वैध अधिकार है कि वह अपने क्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा करे.
  • जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के प्रवक्ता स्टीफन सीबेरट ने कहा कि गाजा से इजरायल पर हो रहे हमले की हम कड़ी निंदा करते हैं. इसे कहीं से भी उचित नहीं ठहराया जा सकता.
  • तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि फलस्तीनियों के प्रति इजरायल के रवैये के खिलाफ अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय को उसे कड़ा और कुछ अलग सबक सिखाना चाहिए.
  • वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इजरायल और फलस्तीन से तुरंत हमले रोकने की अपील की है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को शांति से बैठकर उभरते मुद्दों का हल करना चाहिए.

लॉड शहर में आपातकाल लगा

इस बीच इजरायली अरब की आबादी वाले इजरायल के अन्य शहरों में भी तनाव है. इजरायली शहर लॉड में इजरायली अरबों ने हिंसक प्रदर्शन किया है. इजरायली प्रधानमंत्री ने लॉड में इमरजेंसी की घोषणा की है. 1966 के बाद ये पहली बार हुआ है कि सरकार ने अरब समुदाय के ख़िलाफ़ आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया है.

अमेरिका ने फलस्तीनी क्षेत्र में बस्तियां बनाने की इस्राइल की नीति का समर्थन किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृ्त्व में अमेरिका ने इजरायल के प्रति अपनी नीतियों में बड़ा बदलाव किया है. ट्रम्प प्रशासन ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के समय की नीति को पलटते हुए इजराइल के वेस्ट बैंक और पूर्व येरुशलम पर कब्जे को मान्यता दी है.

इस बदलाव के तहत अमेरिका ने फलस्तीन में पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) पर बस्तियां बनाने के इस्राइल के अधिकार का समर्थन किया है. अमेरिका इसे अब अन्तर्राष्ट्रीय कानून के तहत असंगत रूप में नहीं देखता.

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने 18 नवम्बर को घोषणा की कि अमरीका अब यह नहीं मानता कि फलस्तीनी क्षेत्र में इस्राइल की बस्तियां अवैध है. इन बस्तियों को बार-बार अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहने का कोई फायदा नहीं हुआ. इसकी वजह से शांति की कोशिशें भी नहीं हुई हैं.

अमेरिकी समर्थन पर प्रतिक्रिया

इस्राइल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि अमरीका का बयान ऐतिहासिक भूल में सुधार है. लेकिन फलस्तीन प्रशासन ने अमरीकी नीति में बदलाव की निंदा की है और इसे अन्तर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है. इस बीच, यूरोपीय संघ ने फलस्तीनी क्षेत्र में बस्तियां बनाने की इस्राइल की नीति की आलोचना की है.

वेस्ट बैंक विवाद क्या है?

  • फिलीस्तीन और इजराइल के बीच वेस्ट बैंक, पूर्वी येरूशेलम के हिस्से को लेकर दशकों से विवाद चल रहा है. दोनों देश इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर गोलियां और मिसाइलें दागते रहते हैं.
  • 1967 के तीसरे अरब-इजराइल युद्ध में इजराइल ने अपने तीन पड़ोसी देशों सीरिया, मिस्र और जॉर्डन को हराया था. इसके बाद उसने वेस्ट बैंक और पूर्वी येरुशलम के बड़े हिस्से पर कब्जा कर 140 बस्तियां बना दी थीं.
  • इन क्षेत्रों में अभी करीब 6 लाख यहूदी रहते हैं. इन बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध करार दिया जाता है, हालांकि इजराइल ने इन्हें अपना हिस्सा मानता है.
  • फिलिस्तीनी लंबे समय से इन बस्तियों को हटाने की मांग कर रहा है. उनका कहना है कि वेस्ट बैंक में यहूदियों के रहने से उनका भविष्य में आजाद फिलिस्तीन का सपना पूरा नहीं हो पाएगा.
  • दरअसल फिलीस्तीन वेस्ट बैंक, पूर्वी येरूशेलम और गाजा पट्टी को साथ मिलाकर एक देश बनाना चाहता है. लेकिन इजराइल वेस्ट बैंक और पूर्वी येरूशेलम पर अपना दावा करता है.
  • इजराइल इस क्षेत्रों में यहूदियों की बस्ती का विस्तार कर उसे अपने अधिकार में लेना चाहता है. इजराइल की ओर से सिर्फ वेस्ट बैंक पर लाखों यहूदियों को बसाया जा चुका है. लेकिन इसी हिस्से में करीब 25 लाख फिलीस्तीनी लोग भी रहते हैं.
  • 1978 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने फैसला लिया था कि वेस्ट बैंक में इजराइली बस्तियां अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं. 2016 में संयुक्त राष्ट्र में इस पर एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें इजराइल के अवैध कब्जों को खत्म करने की मांग की गई थी. तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस प्रस्ताव पर वीटो करने से इनकार कर दिया था.