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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी विश्‍व के लोकप्रिय नेताओं की रेटिंग में शीर्ष पर

अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म ‘मॉर्निंग कंसल्ट’ (Morning Consult) के एक सर्वे में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी को विश्व का सबसे लोकप्रिय नेता बताया गया है. इस सर्वे में 70 प्रतिशत अनुमोदन  के साथ वे रेटिंग सूची में सबसे ऊपर हैं. श्री मोदी को पूरे विश्व के वयस्क लोगों से अधिकतम अनुमोदन मिला है.

मैक्सिको के राष्‍ट्रपति आंद्रे मैनुअल लोपेज़ ऑब्रेदोर 66 प्रतिशत के साथ दूसरे स्‍थान पर हैं. इसके बाद 58 प्रतिशत अनुमोदन के साथ इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्राघी, 54 प्रतिशत के साथ जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल और 47 प्रतिशत के साथ ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्‍कॉट मॉरिसन का स्थान है.

अमरीका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन 44 प्रतिशत के साथ छठे स्थान पर हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो 43 प्रतिशत के साथ सातवें स्‍थान पर और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन 40 प्रतिशत के साथ शीर्ष दस में शामिल हैं.

मॉर्निंग कंसल्ट (Morning Consult)

मॉर्निंग कंसल्ट, अमेरिकी डेटा इंटेलिजेंस फर्म है. मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से प्रत्येक देश के वयस्कों के साथ साक्षात्कार के आधार पर रेटिंग निर्धारित की जाती है।

मॉर्निंग कंसल्ट ने ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में शीर्ष नेताओं के लिए अनुमोदन रेटिंग को ट्रैक किया है।

वर्ष 2019 में मॉर्निंग कंसल्‍ट पॉलिटिकल इंटेलीजेंस के पूरे विश्‍व से आंकड़े एकत्र करने की शुरुआत से ही प्रधानमंत्री मोदी को 60 प्रतिशत से अधिक अनुमोदन मिलता रहा है.

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वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांक 2021 जारी, भारत 71वें स्थान पर

वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांक (Global Food Security Index- GFSI) 2021 हाल ही में जारी किया गया था. 113 देशों के इस सूचकांक में भारत का 71वें स्थान पर है. इससे पूर्व हाल ही में जारी वैश्विक भुखमरी सूचकांक (GHI) 2021 में भारत को 101वाँ स्थान प्राप्त हुआ था.

प्रमुख बिंदु

  • इस सूचकांक को लंदन स्थित इकोनॉमिस्ट इम्पैक्ट द्वारा डिज़ाइन और निर्मित किया गया और इसे कॉर्टेवा एग्रीसाइंस (Corteva Agriscience) द्वारा प्रायोजित किया गया था. यह GFSI का दसवाँ संस्करण है.
  • यह सूचकांक सामर्थ्य, उपलब्धता, गुणवत्ता और सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधन के आधार पर खाद्य सुरक्षा के अंतर्निहित कारकों को मापता है.
  • आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, यूके, फिनलैंड, स्विट्ज़रलैंड, नीदरलैंड, कनाडा, जापान, फ्राँस और अमेरिका ने सूचकांक में 77.8 और 80 अंकों की सीमा में समग्र GFS स्कोर के साथ शीर्ष स्थान साझा किया.
  • भारत 57.2 अंकों के समग्र स्कोर के साथ 71वें स्थान पर है. पड़ोसी देशों में चीन (34वें), पाकिस्तान (75वें), श्रीलंका (77वें), नेपाल (79वें) और बांग्लादेश (84वें) स्थान पर है.
  • फूड अफोर्डेबिलिटी कैटेगरी में पाकिस्तान ने भारत से बेहतर स्कोर किया, जबकि श्रीलंका इस श्रेणी में पहले से ही बेहतर स्थिति में है. शेष 3 बिंदुओं पर भारत ने पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका से बेहतर स्कोर किया है.
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वर्ष 2021 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट जारी, भारत 101वें स्थान पर

वर्ष 2021 का ग्लोबल हंगर इंडेक्स (Global Hunger Index) रिपोर्ट 14 अक्टूबर को जारी किया गया था. यह इंडेक्स वेलहंगर लाइफ और कंसर्न वर्ल्डवाइड द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया है.

रिपोर्ट में भारत

इस रिपोर्ट में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर है. 2018 में भारत 103वें, 2019 में 102वें और 2020 में 94वें स्थान पर रहा था. भारत का GHI स्कोर 2000 में 38.8 था, जो 2012 से 2021 में 28.8 से 27.5 के बीच रहा.

रिपोर्ट के अनुसार, चाइल्ड वेस्टिंग (कम वजन के बच्चे) में भारत की हिस्सेदारी 1998-2002 के बीच 17.1 फीसदी से बढ़ कर 2016-2020 में 17.3 फीसदी हो गई.

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि इस सूची में पांच से कम GHI स्कोर के साथ चीन, ब्राजील और कुवैत समेत 18 देश शीर्ष स्थान पर हैं.
  • भारत के पड़ोसी देशों में नेपाल 76वें स्थान पर है. वहीं, बांग्लादेश 76वें स्थान पर, म्यांमार 71वें स्थान पर और पाकिस्तान 92वें स्थान पर हैं.
  • रिपोर्ट के अनुसार दुनिया 2030 तक शून्य भूखमरी को प्राप्त करने में सक्षम नहीं होगी. शून्य भूखमरी संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख सतत विकास लक्ष्यों में से एक है.

GHI क्या है और GHI स्कोर की गणना किस प्रकार की जाती है?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) रिपोर्ट में चार संकेतक जैसे कि अल्पपोषण, चाइल्ड वेस्टिंग, चाइल्ड स्टंटिंग और बाल मृत्यु दर के आधार पर देशों की रैंकिंग की जाती है. चाइल्ड वेस्टिंग से तात्पर्य पांच साल से कम उम्र के उन बच्चों से है जिनका वजन कम होता है. चाइल्ड स्टंटिंग में पांच साल से कम उम्र के वे बच्चे शामिल होते हैं, जिनकी ऊंचाई उनके वजन के अनुसार नहीं होता है.

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हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स: भारत 90वें स्थान पर, जापान और सिंगापुर शीर्ष स्थान पर

हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स (Henley Passport Index) 2021 रिपोर्ट हाल ही में जारी की गयी थी. 199 देशों की इस पासपोर्ट रैंकिंग रिपोर्ट में भारत 90वें स्थान पर है. भारत की रैंकिंग में पिछले रैंकिंग रिपोर्ट से 6 स्थान की गिरावट आई है. इस सूचकांक में शीर्ष तीन स्थानों पर एशियाई देश हैं. ये तीन देश जापान, सिंगापुर, जर्मनी व दक्षिण कोरिया हैं.

हेनले पासपोर्ट रैंकिंग क्या है?

  • हेनले पासपोर्ट रैंकिंग को इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के आधार पर हेनले एंड पार्टनर्स द्वारा जारी किया जाता है.
  • यह रैंकिंग देशों के पासपोर्ट की ताकत पर निर्भर करती है. इस रैंकिंग में स्कोर का मतलब है कि कितने देशों में उस पासपोर्ट के जरिए वीजा मुक्त या वीजा आन-अराइवल प्रवेश मिल सकता है.
  • जिस देश के पासपोर्ट के जरिए बगैर वीजा या वीजा ऑन अराइवल सबसे अधिक देशों में आने-जाने की छूट होती है, उसकी रैंकिंग सबसे अच्छी होती है.

भारत के पासपोर्ट पर 58 देशों में बिना वीजा यात्रा

रैंकिंग में भारत 90 वें स्थान पर है. भारतीय पासपोर्ट धारक भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मकाऊ, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, केन्या, मॉरिशस, सेशेल्स, जिम्बॉब्वे, यूगांडा, ईरान और कतर सहित 58 देशों में बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं.

हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स: एक दृष्टि

  • हेनले पासपोर्ट इंडेक्‍स में जापान और सिंगापुर संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान पर  हैं. दोनों देशों के पासपोर्टधारक 192 देशों की यात्रा बिना वीजा के यात्रा कर सकते है.
  • इस रैंकिंग में दूसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया और जर्मनी हैं. इन दोनों देशों के पासपोर्टधारक 190 देशों में वीजा के बिना यात्रा कर सकते हैं.
  • अमेरिका इस रैंकिंग में 7वें स्थान पर है. अमेरिका के पासपोर्टधारक को 185 देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकते है.
  • पड़ोसी देश चीन के पासपोर्ट का रैंकिंग में 72वां स्थान है. चीन के पासपोर्ट का 79 देशों में वीजा फ्री एक्सेस है और पाकिस्तान का पासपोर्ट जो 113वें स्थान पर है, उसका 31 देशों में वीजा फ्री एक्सेस है.
  • इस रैंकिंग में अफगानिस्तान, इराक और सीरिया सबसे खराब पासपोर्ट वाले देश बने हुए. अफगानिस्तान अंतिम 116वें स्थान पर है.
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भारत, वैश्‍विक नवाचार सूचकांक की रैंकिंग में 46वें स्‍थान पर

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (Global Innovation Index) 2021 हाल ही में जारी किया गया था. इस रैंकिंग में भारत ने पिछले वर्ष की रैंकिंग की अपेक्षा दो स्थान का सूधार करते हुए 46वां स्थान प्राप्त किया है. इस सूचकांक में पिछले कई वर्ष से भारत की स्थिति में सुधार हो रहा है. 2015 में वह 81वें स्‍थान पर था और इस वर्ष 46वें स्‍थान पर आ गया है.

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2021 में स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और दक्षिण कोरिया क्रमशः शीर्ष स्थान पर रहे

भारत के रैंकिंग में सुधार का कारण

स्‍टार्टअप व्‍यवस्‍था और निजी तथा सार्वजनिक अनुसंधान संगठनों के प्रभावशाली कार्यों के कारण वैश्‍विक नवाचार सूचकांक में भारत की स्थिति में लगातार सुधार हुआ है. परमाणु ऊर्जा, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष विभाग जैसे वैज्ञानिक विभागों ने भी देश में नवाचारों की प्रगति में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है.

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (World Intellectual Property Organization- WIPO) द्वारा प्रतिवर्ष जारी किया जाता है. यह संयुक्त राष्ट्र की 15 विशिष्ट एजेंसियों में से एक है. WIPO 1967 में स्थापित किया गया था. भारत WIPO का सदस्य है.

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विश्व बैंक ने की अपनी ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ रिपोर्ट के प्रकाशन को बंद किया

विश्व बैंक समूह ने अनियमितताओं के आरोपों के कारण अपनी ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of doing business) रिपोर्ट के प्रकाशन को बंद करने का फैसला किया है.

डूइंग बिजनेस 2018 और 2020 पर डेटा अनियमितताओं की सूचना मिलने के बाद विश्व बैंक समूह प्रबंधन के कार्यकारी निदेशक मंडल द्वारा यह निर्णय लिया गया. डेटा अनियमितताओं की जांच में चीन की रैंकिंग को बढ़ाने के लिए शीर्ष बैंक अधिकारियों द्वारा दबाव डाला गया था.

ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस 2020 की रैंकिंग में भारत 14 पायदान की छलांग लगाकर 63वें स्थान पर पहुंच गया है. इसने 2014 से 2019 के बीच पांच वर्षों में 79 पदों का सुधार किया है.

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भारत ने GCI सूचकांक में शीर्ष 10 देशों में जगह बनाई

अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने हाल ही में वैश्विक साइबर सुरक्षा सूचकांक (GCI) 2020 जारी किया था. इस सूचकांक में भारत ने 37 स्थानों की बढ़त के साथ शीर्ष 10 देशों में जगह बनाई है. प्रमुख साइबर सुरक्षा मानकों पर खड़ा उतरने के लिए भारत को यह उपलब्धि हासिल हुई है.

भारत ने GCI 2020 में दुनियाभर में दसवें स्थान पर पहुंचने के लिए संभावित अधिकतम 100 अंकों से कुल 97.5 अंक हासिल किए. भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सभी पांच स्तंभों पर लगातार काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक साइबर सुरक्षा सूचकांक में इसकी रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार हुआ है.

अमेरिका पहले स्थान पर

साइबर सुरक्षा के लिहाज से सूची में सबसे ऊपर अमेरिका है. उसके बाद ब्रिटेन व सऊदी अरब एक साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि तीसरे स्थान पर एस्टोनिया है.

GCI का आकलन

GCI (Global Cybersecurity Index) का आकलन कानूनी उपायों, तकनीकी उपायों, संगठनात्मक उपायों, क्षमता विकास और सहयोग सहित साइबर सुरक्षा के पांच मानकों पर प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है.

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IMD वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक 2021: स्विट्जरलैंड पहले और भारत 43वें स्थान पर

इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (IMD) ने हाल ही में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक (World Competitiveness Ranking) 2021 जारी किया था. इस बार के सूचकांक में कोविड-19 महामारी का दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़े प्रभाव का आकलन किया गया था.

मुख्य बिंदु

  • कुल 64 देशों की सूची में स्विट्जरलैंड पहले स्थान पर है. इस सूची स्वीडन दूसरे, डेनमार्क तीसरे जबकि नीदरलैंड चौथे और सिंगापुर पांचवें स्थान पर रहा.
  • भारत ने सूचकांक में 43वें स्थान को बरकरार रखा है. IMD ने कहा कि भारत पिछले तीन साल से अपनी वही स्थिति बनाये हुए है लेकिन इस साल उसने सरकारी दक्षता में उल्लेखनीय सुधार किया है.
  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाली एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में सिंगापुर (पाचवें), हांगकांग (सातवें), ताइवान (आठवें) और चीन (16वें) स्थान पर हैं.
  • ब्रिक्स देशों में भारत (43वें), चीन (16वें), रूस (45वें), ब्राजील (57वें) और दक्षिण अफ्रीका (62वें) स्थान पर है.

IMD विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता रैंकिंग

IMD विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता रैंकिंग में 64 अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया जाता है. इसमें यह आकलन किया जाता है कि कोई देश अपने लोगों की सुख समृद्धि को बढ़ाने में कहां तक आगे बढ़ा है. इसे IMD World Competitiveness Center द्वारा जारी किया जाता है.

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वैश्विक शांति सूचकांक 2021: आइसलैंड पहले और भारत 135वें स्थान पर

इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस (IEP) ने 17 जून को 15वां वैश्विक शांति सूचकांक (15th Global Peace Index), 2021 जारी किया था. इस सूचकांक में विश्व के 163 स्वतंत्र देशों को उनको शांति के स्तर के अनुसार रैंकिंग प्रदान की गई है.

यह सूचकांक तीन मुख्य संकेतकों के आधार पर तैयार किया गया है. ये संकेतक हैं- समाज में बचाव एवं सुरक्षा का स्तर, घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का विस्तार और सैन्यीकरण का स्तर.

वैश्विक शांति सूचकांक 2021: मुख्य बिंदु

  • विगत एक वर्ष के दौरान विश्व में शांति के स्तर में 0.07 प्रतिशत की दर से सुधार हुआ है. 87 देशों के शांति के स्तर में बढ़ोतरी जबकि 73 देशों के शांति के स्तर में गिरावट दर्ज की गई.
  • इस सूचकांक के अनुसार‚ यूरोप विश्व का सर्वाधिक शांतिपूर्ण क्षेत्र है. जबकि मध्य-पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका विश्व का सर्वाधिक अशांत क्षेत्र है.
  • वैश्विक शांति सूचकांक‚ 2021 के अनुसार‚ आइसलैंड (स्कोर-1.1) विश्व का सर्वाधिक शांतिमय देश है. इसके पश्चात न्यूजीलैंड दूसरे‚ डेनमार्क तीसरे‚ पुर्तगाल चौथे तथा स्लोवेनिया पांचवें स्थान पर रहे.
  • इस सूचकांक में अंतिम स्थान पर अफगानिस्तान (163वां) है. इसके पश्चात यमन को 162वां‚ सीरिया को 161वां‚ दक्षिण सूडान को 160वां तथा ईराक को 159वां स्थान प्राप्त हुआ.
  • इस सूचकांक में भारत को 135वें (स्कोर-2.553) स्थान पर है. भारत पिछले वर्ष के सूचकांक में 137वें स्थान पर था.
  • भारत के पड़ोसी देशों में भूटान को 22वां‚ नेपाल को 85वां‚ बांग्लादेश को 91वां‚ श्रीलंका 95वां तथा पाकिस्तान को 150वां स्थान प्राप्त हुआ है.
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विश्व दाता सूचकांक 2021: भारत दुनिया का 14वां सर्वाधिक परोपकारी देश

चैरिटीज एड फाउंडेशन (CAF) ने हाल ही में विश्व दाता सूचकांक (World Giving Index) 2021 जारी किया है. इस वर्ष के सर्वेक्षण में दान और परोपकारी गतिविधियों पर लॉकडाउन के प्रभावों का उल्लेख किया गया है.

विश्व दाता सूचकांक 2021: मुख्य बिंदु

  • विश्व दाता सूचकांक 2021 की रिपोर्ट में भारत को दुनिया का 14वां सर्वाधिक परोपकारी देश बताया गया है. इसके अनुसार भारत अब विश्व के शीर्ष 20 उदार देशों में शामिल हैं, जबकि पिछले दस वर्षों तक भारत 82वें स्थान पर था.
  • आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दुनिया के शीर्ष दस दान-दाता देशों में बने हुए हैं. इन दोनों देशों में कोविड महामारी की पहली लहर के दौरान सर्वेक्षण किया गया था.
  • CAF की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया के लगभग तीन अरब व्यस्क लोगों ने 2020 में किसी न किसी ऐसे व्यक्ति की सहाय़ता की जिसे वह जानते भी नहीं थे.
  • भारत में 2017-2019 के बीच दान और परोपकारी गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह रूझान 2020 में भी जारी रहा.
  • भारत में 61 प्रतिशत भारतीयों ने अपरिचितों की सहायता की, 34 प्रतिशत लोग मदद के लिए आगे आए और 36 प्रतिशत लोगों ने धनराशि दान की.
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QS वर्ल्ड रैंकिंग 2022: शीर्ष 200 में भारत से 3 संस्थान, अमेरिका का MIT शीर्ष पर

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (Quacquarelli Symonds World University Rankings) 2022 हाल ही में जारी की गई है. यह QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग का 18वां संस्‍करण था. इस रैंकिंग में विश्व के शीर्ष 200 में 3 भारतीय संस्थान को शामिल किया गया है.

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022: मुख्य बिंदु

भारत

  • 18वीं QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग के अनुसार, विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में तीन भारतीय संस्थान शामिल हैं. ये संसथान- IIT बेंगलुरु, IIT बॉम्बे और IIT दिल्ली भी शामिल हैं.
  • भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु को साइटेशन पर फैकल्टी (CPF) मीट्रिक यानी शोध पेपर प्रति संकाय सदस्य के लिए 100 में से 100 अंकों के स्कोर के साथ दुनिया के शीर्ष अनुसंधान विश्वविद्यालय अर्थात ‘टॉप रिसर्च यूनिवर्सिटी इन द वर्ल्ड’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. इसके साथ, IISc संपूर्ण 100 स्कोर करने वाला पहला भारतीय विश्वविद्यालय बन गया है.
  • IIT बॉम्बे को लगातार चौथे वर्ष भारत में शीर्ष क्रम के संस्थान के रूप में सूचीबद्ध किया गया है. हालांकि, इस साल QS रैंकिंग में यह पांच पायदान नीचे गिरकर 172 से 177 पर आ गया है. IIT दिल्ली, 193वीं रैंक से 185 पर पहुंचने के बाद, भारत का दूसरा सबसे अच्छा विश्वविद्यालय बन गया है. जबकि, ओवरऑल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में QS बेंगलुरु 185 से 186वीं रैंक पर पहुंच गया है.

विश्व

इस QS वर्ल्ड रैंकिंग में अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) को लगातार 10वें वर्ष को दुनिया के नंबर एक विश्वविद्यालय के रूप में चिह्नित किया. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने 2006 के बाद पहली बार दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय तीसरे स्थान पर हैं.

QS रैंकिंग का आधार

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग छह संकेतकों के आधार पर तैयार की जाती है. इनमें शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता प्रतिष्ठा, प्रति संकाय उद्धरण, संकाय / छात्र अनुपात, अंतरराष्ट्रीय संकाय अनुपात और अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपात आदि शामिल हैं.

QS रैंकिंग: एक दृष्टि

QS World University Rankings को ब्रिटिश कंपनी Quacquarelli Symonds द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रकाशित किया जाता है. QS द्वारा संस्थानों की रैंकिंग जिन मानकों पर की गई, वे हैं- एकेडेमिक, रेपुटेशन, फैकल्टी-स्टूडेंट्स रेशियो, एंप्लॉयर रेपुटेशन, इंटरनेशनल फैकल्टी रेशियो, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स रेशियो और साइटेशन/फैकल्टी.

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विश्व आर्थिक मंच ने ‘ऊर्जा ट्रांजीशन सूचकांक-2021 जारी किया

विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने हाल ही में ‘ऊर्जा ट्रांजीशन सूचकांक’ (Energy Transition Index- ETI)- 2021 जारी किया था. इस सूचकांक में दुनिया के 115 देशों की ऊर्जा प्रणाली के प्रदर्शन स्तर पर सर्वेक्षण किया गया है.

सर्वेक्षण में 115 देशों के ‘नेट-शून्य उत्सर्जन’ (Net-Zero Emissions) के मामले में अग्रणी देशों का विश्लेषण किया जाता है. मानव द्वारा उत्सर्जित ‘ग्रीनहाउस गैस’ (Greenhouse Gas- GHG) को वायुमंडल से पूरी तरह हटाने को ‘नेट-शून्य उत्सर्जन’ की स्थिति कहा जाता है.

ऊर्जा ट्रांजीशन सूचकांक (ETI)-2021: मुख्य बिंदु

  • स्वीडन लगातार चौथे वर्ष ETI रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर रहा है, इसके बाद नॉर्वे और डेनमार्क का स्थान है. सूचकांक में स्विट्जरलैंड चौथे और ऑस्ट्रिया पांचवें स्थान पर है.
  • शीर्ष स्थान पर वे देश रहे हैं जिन्होंने अपने ऊर्जा आयात तथा ऊर्जा सब्सिडी में कमी की है तथा राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में प्रतिबद्धता व्यक्त की है.

भारत और चीन

भारत इस सूचकांक में 87वें और चीन 68वें स्थान पर है. इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत सब्सिडी सुधारों के माध्यम से ऊर्जा बदलाव ला रहा है. दूसरी ओर, चीन निवेश और बुनियादी ढांचे के माध्यम से नवीकरण का विस्तार कर रहा है. वैश्विक ऊर्जा मांग का एक-तिहाई हिस्सा भारत और चीन में हैं.

विश्व आर्थिक मंच (WEF): एक दृष्टि

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) एक गैर-लाभकारी संस्था है. वर्ष 1971 में स्थापित विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय स्विट्जरलैंड में है.

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