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वर्ष 2020 के शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कारों की घोषणा: मुख्य विजेताओं की सूची

वर्ष 2020 के शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कारों की घोषणा 26 सितम्बर को की गयी. पुरस्कारों की घोषणा काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के 79वें स्थापना दिवस समारोह में की गयी.

शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार 2019: मुख्य विजेताओं की सूची

जीवविज्ञान: डॉ. सुभदीप चटर्जी, और डॉ. वत्सला थिरुमलाई
रसायन विज्ञान: डॉ. ज्योतिर्मयी डैश और डॉ. सुबी जैकब जॉर्ज
पृथ्वी, वायुमंडल, महासागर व ग्रहीय विज्ञान: डॉ. अभिजीत मुखर्जी और डॉ. सुरेंदु दत्ता
इंजीनियरिंग विज्ञान: डॉ अमोल अरविंद्रो कुलकर्णी और डॉ किंशुक दासगुप्ता
गणित: डॉ. यूके आनंदवर्धन और डॉ. रजत सुभरा हाजरा
भौतिक विज्ञान: डॉ. राजेश गणपति और डॉ. सूरजजीत धरा
औषधि विज्ञान: डॉ. बुशरा अतीक और डॉ. रितेश अग्रवाल

शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार: एक दृष्टि

  • शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार (Shanti Swarup Bhatnagar Prize for Science and Technology) की स्थापना 1957 में वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) के संस्थापक निदेशक डॉ शांति स्वरुप भटनागर की स्मृति में की गयी थी.
  • यह पुरस्कार प्रतिवर्ष वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) द्वारा 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिक अथवा इंजिनियर को शोधकार्य को प्रदान दिया जाता है.
  • यह पुरस्कार जीव विज्ञानं, रसायन विज्ञान, मेडिकल साइंस, भौतिक विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग, वायुमंडल, महासागर तथा ग्रहीय विज्ञान के क्षेत्र में प्रदान किया जाता है.
  • इस पुरस्कार में पांच लाख रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है.

इसरो प्रमुख के. सिवन को 2020 के ‘वॉन कर्मन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जायेगा

इसरो के प्रमुख डॉ के सिवन को 2020 के वॉन कर्मन अवॉर्ड (Von Karman Award) के लिए चुना गया है. उन्हें मार्च 2021 में पेरिस में इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा.

वॉन कर्मन अवॉर्ड: एक दृष्टि

  • यह पुरस्कार इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (IAA) के द्वारा प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार अकादमी का सर्वोच्च गौरव है. इसकी शुरुआत 1982 में की गयी थी.
  • इसका नामकरण थियोडोर वॉन कर्मन के नाम पर किया गया है, जो एक एयरोस्पेस इंजीनियर थे और विशेष रूप से वायुगतिकी (aerodynamics) में अपनी प्रमुख प्रगति के लिए जाने जाते थे. IAA की स्थापना भी वॉन कर्मन द्वारा की गई थी. जो संगठन के पहले अध्यक्ष भी थे.
  • यह पुरस्कार राष्ट्रीयता या जेंडर की सीमा के बिना विज्ञान की किसी भी शाखा में आजीवन उपलब्धियों के लिए हर साल दिया जाता है. यह पुरस्कार अकादमी के संस्थापक और प्रथम अध्यक्ष की स्मृति को सम्मानित करता है.
  • यह पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय प्रो. उडुपी रामचंद्र राव थे. उन्हें 2005 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनके बाद 2007 में इसरो वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

भारत ने दुनिया के सबसे बड़े परमाणु फ्यूजन प्रोजेक्ट के ‘क्रायोस्टेट’ का अंतिम हिस्सा पूरा किया

भारत ने दुनिया के सबसे बड़े ‘परमाणु फ्यूजन प्रोजेक्ट’ के ‘क्रायोस्टेट’ का अंतिम हिस्सा पूरा कर लिया है. ‘क्रायोस्टेट’ के इस हिस्से को देश के एक निजी क्षेत्र की कंपनी ‘एलएंडटी’ ने सूरत के हजीरा में बनाया है. इसे 30 जून को फ्रांस भेजा गया. यह प्रोजेक्ट फ्रांस के कादार्शे में डेढ़ लाख करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है. यह धरती पर सूरज से ज्यादा ऊर्जा पैदा करने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है.

क्रायोस्टेट क्या है?

क्रायोस्टेट स्टील का हाई वैक्यूम प्रेशर चैम्बर होता है. जब कोई रिएक्टर बेहद गर्मी पैदा करता है, तो उसे ठंडा करने के लिए एक विशाल रेफ्रिजरेटर की जरूरत होती है जिसे क्रायोस्टेट कहते हैं.

परमाणु फ्यूजन प्रोजेक्ट: मुख्य तथ्य

  • परमाणु फ्यूजन प्रोजेक्ट के तहत 15 करोड़ डिग्री सेल्सियस तापमान पैदा होगा. यह सूर्य की कोर से 10 गुना ज्यादा होगा.
  • क्रायाेस्टेट का कुल वजन 3850 टन है. इसका 50वां और अंतिम हिस्सा करीब 650 टन वजनी, 29.4 मीटर चाैड़ा और 29 मीटर ऊंचा है.
  • इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) की यह मैग्नेटिक फ्यूजन डिवाइस की परियोजना परमाणु विखंडन के बजाए सूरज की तरह परमाणु संलयन पर आधारित है.

भारत, अमेरिका, जापान समेत 7 देश इस संयंत्र को बनाने में शामिल

  • इस प्रोजेक्ट में भारत के अलावा यूरोपीय देश, अमेरिका, जापान, चीन, फ्रांस और रूस शामिल हैं. इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) प्रोजेक्ट के सदस्य देश हाेने के नाते भारत ने क्रायोस्टेट बनाने की जिम्मेदारी चीन से ली थी.
  • भारत ने इस क्रायोस्टेट का निचला सिलेंडर जुलाई 2019 में और मार्च 2020 में इसके ऊपरी सिलेंडर को भेजा गया था. अब इसकी ऊपरी सतह भेजी गयी है.
  • इन सभी हिस्सों को जाेड़कर चैम्बर का आकार देने के लिए भारत ने कादार्शे के पास एक वर्कशॉप भी बनाई है. इस प्राेजेक्ट में भारत का योगदान 9% है, लेकिन क्रायोस्टेट देकर देश के पास इसके बौद्धिक संपदा के अधिकार सुरक्षित रहेंगे.

भारतीय अमेरिकी मृदा वैज्ञानिक रतनलाल को 2020 का विश्व खाद्य पुरस्कार दिया जायेगा

मशहूर भारतवंशी अमेरिकी मृदा विज्ञानी रतनलाल को ‘विश्व खाद्य पुरस्कार’ (World Food Prize) 2020 दिए जाने की घोषणा की गई है. उन्हें 2,50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 1.90 करोड़ रुपये) पुरस्कार राशि के रूप में दिए जाएंगे. रतनलाल ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी (OSU) में कार्बन प्रबंधन व सिक्वेस्ट्रेशन सेंटर के संस्थापक निदेशक हैं.

रतनलाल को यह पुरस्कार मृदा विज्ञान के क्षेत्र में किए गए कार्य के लिए दिया गया है. उन्होंने चार महाद्वीपों में अपना योगदान दिया है. उनकी तकनीकों से 50 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को लाभ हुआ. दो अरब से अधिक लोगों के लिए आहार व पोषण की व्यवस्था करने के प्रयासों में सुधार आया है.

विश्व खाद्य पुरस्कार क्या है?

विश्व खाद्य पुरस्कार प्रतिवर्ष दिया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार है. इसे कृषि के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार माना जाता है। यह पुरस्कार अमेरिकी संस्था ‘व‌र्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन’ द्वारा वर्ष 1987 से दिया जा रहा है. दुनिया में भोजन की गुणवत्ता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार करके वाले व्यक्तियों को इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है.

भारतीय वैज्ञानिक राजीव जोशी को ‘इन्वेंटर ऑफ ईयर’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया

भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक राजीव जोशी को प्रतिष्ठित ‘इन्वेंटर ऑफ ईयर’ (Inventor of the Year Award) पुरस्कार दिया गया है. उन्हें यह पुरस्कार इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को बढ़ावा देने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) क्षमताओं को बेहतर बनाने में योगदान के लिए दिया गया है.

राजीव जोशी IIT मुंबई के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एमएस की डिग्री और कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क से मैकेनिकल/ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल की है. वह न्यूयॉर्क में IBM थॉमसन वाटसन शोध केंद्र में काम करते हैं.
उन्होंने वैश्विक संचार और स्वास्थ्य विज्ञान से संबंधित कई आविष्कार किए हैं. अमेरिका में उनके नाम 250 से अधिक पेटेंट दर्ज हैं.

इन्वेंटर ऑफ ईयर: एक दृष्टि

इन्वेंटर ऑफ ईयर पुरस्कार प्रत्येक वर्ष समाज के प्रति आविष्कारक के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है. यह पुरस्कार न्यूयार्क बौद्धिक संपदा कानून संघ (New York Intellectual Property Law Association- NYIPLA) दारा प्रदान किया जाता है.

वर्ष 2020 का एबेल पुरस्कार हिलेल फुरस्टेनबर्ग और ग्रेगरी मारगुलिस को देने की घोषणा

वर्ष 2020 का एबेल पुरस्कार (Abel Prize) इज़राइल के हिलेल फुरस्टेनबर्ग और रुसी-अमेरिकी ग्रेगरी मारगुलिस को देने की घोषणा हाल ही में की गयी है. इन्हें यह सम्मान ‘pioneering use of methods from probability & dynamics in group theory, number theory and combinatorics’ के लिए दिया गया है.

इन दोनों गणितज्ञों ने गणित के विविध क्षेत्रों में कठिन समस्याओं को हल करने के लिए संभाव्य तरीकों और यादृच्छिकता (randomness) तकनीकों का उपयोग किया था.

हिलेल फुरस्टेनबर्ग और ग्रेगरी मारगुलिस

हिलेल फुरस्टेनबर्ग यरुशलम (इज़राइल) के हिब्रू विश्वविद्यालय में एक अमेरिकी-इजरायली गणितज्ञ हैं. उन्होंने गणित में वुल्फ पुरस्कार भी जीता है.

ग्रेगरी मारगुलिस एक रूसी-अमेरिकी गणितज्ञ हैं. वह फील्ड्स मैडल, वुल्फ प्राइज और एबेल प्राइज, इन तीनों पुरस्कार को जीतने वाले पांचवें व्यक्ति हैं.

एबेल पुरस्कार (Abel Prize): एक दृष्टि

  • एबेल पुरस्कार प्रत्येक वर्ष गणित के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियों के लिए नॉर्वे के राजा द्वारा प्रदान किया जाता है. यह गणित का नोबेल पुरस्कार से भी जाना जाता है.
  • यह पुरस्कार नार्वेजियन अकादमी ऑफ साइंस एंड लेटर्स (Norwegian Academy of Science and Letters) द्वारा ओस्लो में प्रदान किया जाता है.
  • इस पुरस्कार की स्थापना के लिए नील्स हेनरिक एबेल मेमोरियल फंड की स्थापना 1 जनवरी, 2002 को नॉर्वे में की गई थी.
  • इस पुरस्कार के तहत 60 लाख नार्वेजियन क्रोनर (6 Million Norwegian Kroner) अर्थात 7 लाख 76 हजार अमेरिकी डॉलर के समतुल्य पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है.

प्रथम एबेल पुरस्कार
पहला एबेल पुरस्कार वर्ष 2003 में फ्रांस के गणितज्ञ जीन-पियर सेर को दिया गया था.

एबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय
श्रीनिवास एसआर वर्धन एक मात्र भारतीय गणितज्ञ हैं जिन्हें वर्ष 2007 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन कोलकाता में आयोजित किया गया

नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी (ICONST) 2020 पर अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन 5-7 मार्च को कोलकाता के बिस्वा बंगला पारंपरिक केंद्र में किया गया. इस सम्मलेन का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के नैनो मिशन के तत्वावधान में किया गया था. आयोजन का उद्देश्य इस प्रमुख अनुसंधान क्षेत्र की हाल की प्रगतियो पर ध्यान केंद्रित करना था.

इस सम्मेलन में भौतिक, रासायनिक सामग्री के साथ-साथ जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक विकास के कई विषयगत विषयों पर विचार-विमर्श किया गया. नैनो-सामग्रियों पर मौजूदा शोध के अलावा, कई उभरते क्षेत्रों जैसे कि क्वांटम मैटिरियल, ऊर्जा सामग्री और कृषि के लिए नैनो प्रौद्योगिकी को DST नैनो मिशन के चिन्हित क्षेत्रों में शामिल किया गया है.

प्रो. साबू थॉमस राष्ट्रीय अनुसंधान पुरस्कार से सम्मानित

उद्घाटन समारोह के दौरान, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम के कुलपति प्रो. साबू थॉमस को नैनो विज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय अनुसंधान पुरस्कार से सम्मानित किया गया. IIT मुम्बई के डॉ. सौरभ लोढ़ा और TIFR, मुंबई के डॉ. विवेक पोलशेट्टीवार को नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी में युवा अनुसंधान पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने ‘विश्वकर्मा पुरस्कार’ 2019 प्रदान किए

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने 24 फरवरी को ‘विश्वकर्मा पुरस्कार’ 2019 प्रदान किए. पुरस्कार समारोह का आयोजन अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) में किया गया था. यह विश्वकर्मा पुरस्कार का तीसरा संस्करण था.

विभिन्न उप-श्रेणियों के तहत कुल 23 टीमों को छात्र विश्वकर्मा पुरस्कार (CVA) ये पुरस्कार प्रदान किए गए. केंद्रीय मंत्री निशंक ने उत्कृष्ट संस्थान विश्वकर्मा पुरस्कार (USVA) के तहत छह संस्थानों को सम्मानित किया.

विश्वकर्मा पुरस्कार: एक दृष्टि

AICTE (All India Council for Technical Education) वर्ष 2017 से विश्वकर्मा पुरस्कारों का आयोजन कर रहा है. AICTE ने इस पुरस्कार का गठन अपने मातहत संस्थानों के हितधारकों के जरिए समाज के समग्र विकास के लिए अभिनव और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए किया है. AICTE भारत में तकनीकी शिक्षा व तकनीकी शिक्षण संस्थानों का नियामक संसथान है.

इस पुरस्कार का उद्देश्य राष्ट्र के संपूर्ण विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए अपने क्षेत्र विशेष में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए युवाओं, मार्गदर्शकों और संस्थानों / संगठनों को प्रेरित करना है.

तीसरा विश्वकर्मा पुरस्कार 2019

वर्ष 2019 के विश्वकर्मा पुरस्कार के तीसरे संस्करण के लिए प्रविष्टियों के लिए प्रतियोगिता की घोषणा मानव संसाधन (HRD) मंत्री ने सितंबर, 2019 में की थी. यह प्रतियोगिता “गांव की आय कैसे बढ़ाएं” विषय पर आधारित थे. आवेदन दो श्रेणियों में मंगाए गए थे:

श्रेणी I: छात्र विश्वकर्मा पुरस्कार (CVA) उत्कृष्ट नवाचार टीम के लिए (छात्रों और परामर्शदाता के लिए)
श्रेणी II: उत्कर्ष संस्थान विश्वकर्मा पुरस्कार (USVA) आदर्श संस्थागत हस्तक्षेप के लिए.

डॉ. नीति कुमार को ‘SERB महिला उत्कृष्टता पुरस्कार 2020’ से सम्मानित किया जायेगा

CSIR-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टिट्यूट की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नीति कुमार को ‘SERB (Science and Engineering Research Board) महिला उत्कृष्टता पुरस्कार 2020’ से नवाजा गया है. उन्हें यह पुरस्कार 28 फरवरी को विज्ञान भवन में होने वाले राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के दौरान भारत के राष्ट्रपति प्रदान करेंगे. पुरस्कार के तहत साइंटिस्ट को विज्ञान और इंजिनियरिंग अनुसंधान बोर्ड 15 लाख रुपये की धनराशि देती है.

डॉ. नीति कुमार को यह पुरस्कार मलेरिया की रोकथाम के लिए वैकल्पिक दवाओं और नवीन लक्ष्यों की खोज के लिए मिला है. वह मानव मलेरिया परजीवी में प्रोटीन क्वॉलिटी कंट्रोल मशीनरी को समझने के लिए शोध कर रही हैं.

डॉ. नीति कुमार CSIR-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टिट्यूट (CDRI) के डिवीजन ऑफ मॉलिक्यूलर पैरासिटॉलजी ऐंड इम्युनॉलजी में कार्यरत हैं. उन्हें इनोवेटिव यंग बायोटेक्नोलॉजिस्ट अवार्ड (DBT-IYBA 2015), भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी द्वारा INSA मेडल फॉर यंग साइंटिस्ट (2010) आदि जैसे कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं.

SERB महिला उत्कृष्टता पुरस्कार: एक दृष्टि

यह पुरस्कार 40 वर्ष से कम आयु की महिला वैज्ञानिक को दिया जाता है, जिन्हें विभिन्न राष्ट्रीय अकादमियों से सम्मान प्राप्त हुआ है. महिला शोधकर्ताओं को भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड द्वारा 3 वर्षों के लिए 5 लाख प्रति वर्ष के अनुसंधान अनुदान की सहायता दी जाएगी.

डॉ एमएस स्वामीनाथन को ‘मुप्पावरप्पु वेंकैया नायडू नेशनल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस’ से सम्मानित किया गया

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ एम एस स्वामीनाथन को कृषि क्षेत्र में दिए गए उनके विशिष्ट योगदान के लिए 15 जनवरी को ‘मुप्पावरप्पु वेंकैया नायडू नेशनल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस’ से सम्मानित किया. इस पुरस्कार की घोषणा हाल ही में हैदराबाद में मुप्‍पावरपु फाउंडेशन की दसर्वी वर्षगांठ के समारोह के दौरान की गई थी. पुरस्‍कार के रूप में 5 लाख नकद और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया.

डॉ स्वामीनाथन देश के कृषि क्षेत्र में योगदान ने एक नई क्रांति का सूत्रपात किया जिसके कारण उन्‍हें हरित क्रांति का जनक कहा जाता हैं. स्वामीनाथन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा ‘आर्थिक पारिस्थितिकी के जनक’ के रूप में वर्णित किया गया है, क्योंकि उनके योगदान से कृषि क्षेत्र में हरित क्रांति हुई.

यूके की रॉयल एयरोनॉटिक्स सोसायटी ने DRDO के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी को सम्मानित किया

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के चेयरमैन जी सतीश रेड्डी को यूनाइटेड किंगडम की रॉयल एयरोनॉटिक्स सोसायटी द्वारा फेलोशिप (Fellowship By UK’s Royal Aeronautical Society) से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान एयरोस्पेस के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के समतुल्य माना जाता है.

जी सतीश रेड्डी बीते पहले भारतीय वैज्ञानिक हैं जिन्हें इस फेलोशिप से सम्मानित किया गया है. स्वदेशी हथियारों के निर्माण, उनका विकास तथा सही स्थान पर उनकी तैनाती में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया है.

जी सतीश रेड्डी को भारत में विविध मिसाइल प्रणाली के विकास, एयरोस्पेस व्हीकल, गाइडेड हथियार और एवियोनिक्स तकनीक का विकास करने के लिए जाने जाते हैं. वह DRDO के चेयरमैन (अध्यक्ष) के साथ-साथ रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार तथा रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा प्रक्षेपास्त्र एवं रणनीतिक प्रणालियों के महानिदेशक भी हैं. उन्हें रॉकेट मैन भी कहा जाता है.

भारत के रवि प्रकाश को हाल ही में ‘ब्रिक्स-यंग इनोवेटर प्राइज’ दिया गया

भारत के रवि प्रकाश को हाल ही में ‘ब्रिक्स-यंग इनोवेटर प्राइज’ (BRICS Young Innovator Prize) का प्रथम पुरस्कार दिया गया है. उन्हें यह पुरस्कार ‘मिल्क चिल्लिंग यूनिट’ (Milk Chilling Unit) के अविष्कार के लिए दिया गया है. इस पुरस्कार स्वरुप उन्हें 25,000 अमेरिकी डॉलर धनराशी दी गयी है.

रवि प्रकाश द्वारा तैयार की गयी ‘मिल्क चिल्लिंग यूनिट’ Nano Fluid Based Phase Change Material तकनीक पर आधारित है. यह मशीन दूध निकालने के तुरंत बाद ही कच्चे दूध के तापमान को 37 डिग्री सेलसियस से 7 डिग्री सेलसियस तक सिर्फ़ 30 मिनट के भीतर पहुंचा देती है.