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2019 का व्‍यास सम्‍मान नासिरा शर्मा को उनके उपन्यास ‘कागज की नाव’ के लिए दिया जाएगा

हिन्दी की प्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा को वर्ष 2019 का प्रतिष्ठित ‘व्यास सम्मान’ दिया जायेगा. केके बिडला फाउंडेशन ने श्रीमती शर्मा को उनके उपन्यास ‘कागज की नाव’ के लिए यह पुरस्कार देने का फैसला 5 नवम्बर को किया. साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध लेखक डॉ. विश्वनाथ प्रसार तिवारी की अध्यक्षता में गठित चयन समिति ने पिछले 10 वर्षों में प्रकाशित पुस्तकों में सर्वश्रेष्ठ कृति कागज की नाव को माना है.

नासिरा शर्मा: संक्षिप्त परिचय
नासिरा शर्मा हिन्दी और फारसी की प्रमुख लेखिका हैं. सृजनात्मक लेखन के साथ ही स्वतन्त्र पत्रकारिता में भी उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किया है. वह ईरानी समाज और राजनीति के अतिरिक्त साहित्य कला व सांस्कृतिक विषयों की विशेषज्ञ हैं. वर्ष 2016 का साहित्य अकादमी पुरस्कार उनके उपन्यास ‘पारिजात’ के लिए दिया गया था. 2008 में अपने उपन्यास ‘कुइयाँजान’ के लिए उन्हें ब्रिटेन में कथा सम्मान से सम्मानित किया गया था.

नासिरा शर्मा की अन्य रचना (उपन्यास)
सात नदियाँ एक समन्दर, शाल्मली, ठीकरे की मँगनी, जि़न्दा मुहावरे, अक्षय वट, कुइयाँजान, ज़ीरो रोड, पारिजात, अजनबी जज़ीरा

कागज की नाव: एक दृष्टि
नासिरा शर्मा के उपन्यास ‘कागज की नाव’ में बिहार के एक जनपद के मुस्लिम परिवार के माध्यम से सदियों से पनपी-सवरी गंगा तहजीब की मार्मिक और हृदयस्पर्शी कहानी लिखी गयी है. जिसमें जहूर मियां पात्र के माध्यम से हमारे आसपास के जीवन और चुनौतियों को पेश किया गया है.

व्यास सम्मान: एक दृष्टि

  • व्यास सम्मान भारतीय साहित्य में किये गये योगदान हेतु दिया जाने वाला ज्ञानपीठ पुरस्कार के बाद दूसरा सबसे बड़ा साहित्य सम्मान है.
  • यह सम्मान प्रत्येक साल भारतीय भाषाओं के लेखक और कवि को दिया जाता है.
  • इस सम्मान के रूप में प्रशस्ति पत्र और पटि्टका के साथ-साथ चार लाख रुपये की राशि दी जाती है.
  • इस पुरस्कार को साल 1991 में केके बिड़ला फाउंडेशन ने शुरू किया था.
  • पहला व्यास सम्मान साल 1991 में रामविलास शर्मा की कृति ‘भारत के प्राचीन भाषा परिवार और हिन्दी’ के लिए दिया गया था.
  • साल 2017 का व्यास सम्मान हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका ममता कालिया को उनके उपन्यास ‘दुक्खम – सुक्खम’ के लिए दिया गया था.
  • साल 2018 का व्यास सम्मान हिंदी के प्रसिद्ध कवि लीलाधर जगूड़ी को उनके कविता संग्रह ‘जितने लोग उतने प्रेम’ के लिए दिया गया था.
  • धर्मवीर भारती, गिरजा कुमार माथुर, कुंवर नारायण, मनु भंडारी, केदारनाथ सिंह और चित्रा मुदगल जैसे लेखक यह पुरस्कार पा चुके हैं.