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जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर 15 प्रतिशत वैश्विक कर लगाने के समर्थन का फैसला किया

विश्व के वि‍कसि‍त देशों के संगठन जी-7 ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर 15 प्रतिशत वैश्विक न्यूनतम कर लगाने के ऐतिहासिक समझौते के समर्थन का फैसला किया है. लंदन में जी-7 के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में यह भी सहमति हुई. ब्रिटेन के वित्त मंत्री ऋषि सुनाक ने कल इस समझौते की घोषणा की.

मुख्य बिंदु

  • समझौते के अनुसार जिन देशों में कंपनियों के उत्पादों की बिक्री होती है, उन देशों को कंपनी के मुनाफे पर कम से कम 20 प्रतिशत कर लेने का अधिकार होगा. बड़ी और ज्यादा मुनाफा कमाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर अलग से 10 प्रतिशत कर लगाया जा सकता है.
  • जी-7 के मंत्रियों में यह भी सहमति हुई है कि कंपनियों की गतिविधियों से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि निवेशक फैसला कर सकें कि उन्हें कंपनियों में निवेश करना है या नहीं.
  • जी-7 के मंत्रियों ने कहा कि वे अलग-अलग देशों के आधार पर कम से कम 15 प्रतिशत वैश्विक न्यूनतम कर लागू कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

विश्व बैंक ‘ग्‍लोबल इकनॉमिक प्रोस्‍पेक्‍ट’ रिपोर्ट, वैश्विक GDP 4 फीसद रहने का अनुमान

विश्व बैंक ने मौजूदा वर्ष (2021) के लिए वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था को लेकर अपनी एक अनुमानित रिपोर्ट ‘ग्‍लोबल इकनॉमिक प्रोस्‍पेक्‍ट’ (Global Economic Prospects) जारी की है. इस रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्‍यस्‍था की वृद्धि दर 4 फीसद रहने का अनुमान लगाया गया है. इस रिपोर्ट में स्‍पष्‍ट किया गया है कि पूरी दुनिया में छाई महामारी के प्रभावों की वजह से दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था के बाहर आने की प्रक्रिया कुछ धीमी रहेगी.

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट में कहा गया है यदि महामारी को जल्‍द खत्‍म नहीं किया गया तो इसका असर न सिर्फ इस साल बल्कि अगले साल तक बना रह सकता है और वैश्विक वृद्धि की रफ्तार सुस्‍त हो सकती है.
  • इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि वर्ष 2020 में दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था में 4.3 फीसद की कमी आई थी, लेकिन अब ये एक बार फिर से बढ़ोतरी की तरफ अग्रसर है.
  • कोविड-19 महामारी की वजह से गरीब लोग और अधिक गरीब हुए हैं. रोजगार पहले की अपेक्षा कम हुए हैं और बेरोजगारी में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
  • चालू वित्त वर्ष (2020-21) में भारतीय अर्थव्यवस्था में 9.6 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है.
  • रिपोर्ट के मुताबिक महामारी की वजह से अमेरिका की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) मौजूदा वर्ष में 3 फीसद से अधिक की दर से बढ़ने का अनुमान है. वर्ष 2020 में इसमें 3.6 फीसद की गिरावट दर्ज की गई थी.
  • जापान में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार करीब ढाई फीसद रहने की उम्‍मीद है. चीन की अर्थव्‍यवस्‍था में करीब आठ फीसद की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.

ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स क्या है?

ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स (Global Economic Prospects-GEP), विश्व बैंक समूह की एक रिपोर्ट है. यह वर्ष में दो बार जनवरी और जून में जारी की जाती है. इस रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक विकास एवं संभावनाओं से संबंधित तथ्य जारी किये जाते हैं.

37वां आसियान शिखर सम्मेलन, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर

37वां दक्षिण पूर्व एशियाई देशों (ASEAN) शिखर सम्मेलन 13-15 नवम्बर को वियतनाम के हनोई में आयोजित किया गया था. सम्मलेन की अध्यक्षता आसियान (ASEAN) के वर्तमान अध्यक्ष देश वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक ने की थी.

सम्मेलन के दौरान आसियान सदस्य देशों और उनके संवाद भागीदारों ने कोविड-19 महामारी के बाद आर्थिक बहाली और क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (RCEP) के हस्ताक्षर आदि मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर हस्ताक्षर

इस सम्मलेन के दौरान 10 आसियान (ASEAN) देशों और उनके 5 अन्य मुक्त व्यापार साझेदार देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूज़ीलैंड तथा दक्षिण कोरिया) के बीच ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी’ (RCEP) पर हस्ताक्षर किये गये. RCEP के सदस्य दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 30% हिस्सा हैं.

क्या है क्षेत्रीय व्‍यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)?

  • RCEP, Regional Comprehensive Economic Partnership का संक्षिप्त रूप है. यह आसियान के दस सदस्य देशों तथा पाँच अन्य देशों द्वारा अपनाया गया एक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है. इस समझौते पर 15 नवंबर 2020 को हस्ताक्षर किये गए.
  • RCEP में 10 आसियान देशों के अलावा भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के शामिल होने का प्रावधान था, जिसमें से अब भारत ने इसमें से बाहर रहने का फैसला किया है.
  • आसियान और उसके व्‍यापारिक साझेदार देशों के बीच आर्थिक संबंध को मजबूत करने के लिए नवम्‍बर 2012 में RCEP का गठन किया गया था.
  • RCEP समझौते के तहत सदस्य देशों के बीच आयात और निर्यात कर मुक्त या आंशिक कर लगाने का प्रावधान था.
    भारत का मानना है कि आयात शुल्क कम करने या खत्म करने से विदेश (मुख्य तौर पर चीन) से भारी मात्रा में सामान भारत आएगा और इससे देश के घरेलू उद्योगों को काफी नुकसान होगा.

भारत का RCEP समझौते से अलग होने के कारण और परिणाम

  • भारत ने RCEP समझौते की वार्ता में शामिल रहने के बाद आखिरी मौके पर इससे अलग रहने का निर्णय लिया है. RCEP से अलग रहने के पीछे भारत ने इस समझौते में अपने कई मुद्दों और चिंताओं पर आवश्यकता अनुरूप ध्यान नहीं दिये जाने को बड़ा कारण बताया है.
  • इस समझौते में शामिल होने के पश्चात् भारत को अपना बाजार खोलना पड़ता है, जिससे चीन से सस्ते उत्पादों का आयात बढ़ने की आशंका थी इससे घरेलू उद्योग व कारोबार पर असर पड़ने की संभावना बनी हुई थी.
  • इस समझौते में शामिल होने के पश्चात् भारत में स्थानीय और छोटे उत्पादकों को कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ सकता था. उदाहरण के तौर पर आयात शुल्क में कमी होने से भारत के कृषि, डेयरी उत्पाद और अन्य ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम’ (MSMEs) क्षेत्रों को क्षति हो सकती थी.
  • भारत के RCEP समझौते से अलग होने से RCEP सदस्यों के साथ भारत के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ गई है क्योंकि इस समूह में शामिल अधिकांश देश RCEP के अंदर अपने व्यापार को मज़बूत करने को अधिक प्राथमिकता देंगे.

जानिए क्या है आसियान…»

आय के आधार पर अर्थव्यवस्थाओं का वर्गीकरण 2020 जारी, नेपाल निम्न-मध्य आय ग्रुप में शामिल

विश्व बैंक ने हाल ही में आय के आधार पर विश्व के देशों के वर्गीकरण पर एक रिपोर्ट जारी की है. 2020 के इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के वर्गीकरण में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. भारत निम्न-मध्य आय वाला देश बना हुआ है.

नेपाल निम्न-मध्य आय ग्रुप में शामिल

इस रिपोर्ट में पहली बार नेपाल का वर्गीकरण निम्न-आय से निम्न-मध्य आय देश में किया है. रिपोर्ट के अनुसार 2018 के मुकाबले 2019 में नेपाल की प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है और उस स्तर को पार कर गई है जो किसी निम्न-मध्य आय वर्ग वाले देश की होती है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि नेपाल ने सकल राष्ट्रीय आय (Gross national income) में काफी बढ़ोतरी की है. 2018 में जहां नेपाल की प्रति व्यक्ति आय 960 डॉलर थी, वहीं 2019 में बढ़कर 1090 डॉलर हो गई.

श्रीलंका के वर्गीकरण में गिरावट

विश्व बैंक के 2020 के वर्गीकरण के अनुसार श्रीलंका उच्च-मध्यम-आय वर्ग वाले देश से अब एक निम्न-मध्य आय वर्ग देश वाला देश बन गया है. वर्ष 2019 में श्रीलंका का पर प्रति व्यक्ति आय 4020 अमरीकी डॉलर से कुछ कम था, जो उच्च-मध्यम-आय वर्ग वाले देश में बने रहने के लिए 6 अमरीकी डॉलर कम है.

विश्व बैंक द्वारा अर्थव्यवस्थाओं का वर्गीकरण: एक दृष्टि

विश्व बैंक सकल राष्ट्रीय आय (Gross national income- GNI) के आधार पर विश्व के सभी 218 देशों की अर्थव्यवस्थाओं का वर्गीकरण करता है. वर्गीकरण को हर साल 1 जुलाई को अपडेट किया जाता है. इस वर्ष यानी 2020 का वर्गीकरण 2019 के GNI पर आधारित है. किसी देश के नागरिकों का सकल घरेलू एवं विदेशी आय के योग को सकल राष्ट्रीय आय कहा जाता है.

विश्व बैंक के तय मानकों के अनुसार, यदि किसी देश की प्रति व्यक्ति आय (Per capita income) 1036 डॉलर से अधिक हो जाती है, तो उसे गरीब देश की श्रेणी से उपर माना जाता है. जिस भी देश के नागरिकों की आय 1036 डॉलर से कम होती है उसे सबसे निम्न आय देशों की श्रेणी में रखा जाता है.

विश्व बैंक सभी देशों को उनके नागरिकों के प्रति व्यक्ति आय के आधार चार वर्गों में बांटा है:

  1. निम्न आय वर्ग देश: $1,036 या उससे कम
  2. निम्न-मध्य आय वर्ग देश: $1,036 से $4045,
  3. उच्च-मध्य आय वर्ग देश: $4046 से $12,535 और
  4. उच्च आय वर्ग देश: $12,536 या अधिक.

भारत और इसके पड़ोसी और ब्रिक्स देश

मालदीव ($9,310) दक्षिण-एशिया में एक मात्र देश हैं जो उच्च-मध्यम-आय वर्ग में हैं. श्रीलंका ($4,020), बांग्लादेश ($ 1,750), भूटान ($ 3,080) और पाकिस्तान ($1,580) और भारत ($ 2,020) निम्न-मध्यम आय वर्ग में हैं. अफगानिस्तान ($550) निम्न आय वर्ग की अर्थव्यवस्थाओं में हैं.

ब्रिक्स देशों में निम्न-मध्य-आय वर्ग में भारत एकमात्र देश है. ब्रिक्स के अन्य देशों में- ब्राजील ($ 9,140), रूस ($ 10,230), चीन ($ 9,470) और दक्षिण अफ्रीका ($ 5,720) उच्च-मध्य-आय वर्ग में हैं.

एशिया की अर्थव्यवस्था पर IMF का ब्लॉग, 2020 में वृद्धि दर शून्य रहने का अनुमान

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने ‘कोविड-19 महामारी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र: 1960 के दशक के बाद की सबसे कम वृद्धि दर’ शीर्षक से एक ब्लॉग प्रकाशित किया है. इस ब्लॉग में कोरोना वायरस महामारी के कारण एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर पर चर्चा की गयी है.

ब्लॉग के मुख्य बिंदु:

  • इस महामारी का एशिया-प्रशांत क्षेत्र में गंभीर और अप्रत्याशित असर होगा. हालांकि गतिविधियों के संदर्भ में अन्य क्षेत्रों की तुलना में अभी भी एशिया बेहतर स्थिति में है.
  • 2020 में एशिया की वृद्धि दर 0 (शून्य) रहने की आशंका है. शून्य वृद्धि दर करीब 60 साल की सबसे खराब स्थिति होगी. एशिया की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 4.7 प्रतिशत और एशियाई वित्तीय संकट के दौरान 1.3 प्रतिशत थी.
  • इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में तीन प्रतिशत की गिरावट आने के अनुमान हैं. एशिया के दो बड़े व्यापारिक भागीदार अमेरिका और यूरोप में क्रमश: 6 प्रतिशत और 6.6 प्रतिशत की गिरावट के अनुमान हैं. IMF ने दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के लिए आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में क्रमश: 3.5 प्रतिशत और 9 प्रतिशत की कटौती की है.
  • एशिया में उत्पादकता में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. अब भी एशिया क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर कर सकता है.
  • इस साल भारत की विकास दर सबसे ज्यादा 1.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है. चीन की आर्थिक वृद्धि दर भी 2019 के 6.1 प्रतिशत से गिरकर 1.2 प्रतिशत पर आ जाने की आशंका है. 2021 में चीन 9.2 फीसदी और भारत 7.4 फीसदी की दर से विकास कर सकता है.

क्रोएशिया में जोरान मिलनोविक ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की

क्रोएशिया (Country in the Balkans croatia) में हाल ही में संपन्न हुए राष्ट्रपति चुनाव में जोरान मिलनोविक ने जीत हासिल की है. 53 वर्षीय मिलानोविक दिसंबर 2011 से जनवरी 2016 तक क्रोएशियाई प्रधानमंत्री के रूप में अपनी सेवा दे चुके हैं.

चुनाव में 99 प्रतिशत से अधिक लोगों ने भाग लिया था. इसमें जोरान को 52.7 फीसदी वोट मिले, जबकि राष्ट्रपति पद की दौड़ में मौजूदा राष्ट्रपति कोलिंदा ग्रैबर किटारोविच ने 47.3 प्रशित वोट हासिल किए.

उल्लेखनीय है कि 22 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में कुल 11 उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था. चूंकि किसी भी उम्मीदवार ने 50 फीसदी से अधिक मत प्राप्त नहीं किया था, इसलिए यहाँ शीर्ष दो उम्मीदवारों के साथ दूसरे दौर का मतदान कराया गया था.

जोरान मिलनोविक, जो सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी (SDP) और कई अन्य केंद्र-वाम दलों के उम्मीदवार के रूप में लड़ रहे थे, ने पहले दौर में लगभग 30 प्रतिशत वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि सत्तारूढ़ क्रोएशियन यूनियन (HDZ) के कोलिंदा लगभग 27 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही थीं.

CEBR की रिपोर्ट के अनुसार भारत की GDP 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी

ब्रिटेन ‘बेस्ड सेंटर फॉर इकनॉमिक्स ऐंड बिजनस रिसर्च’ (CEBR) ने हाल ही में ‘वर्ल्ड इकनॉमिक लीग टेबल 2020’ रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार भारत 2026 में जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि भारत 2034 में जापान से आगे निकल जाएगा और अमेरिका, चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा.

CEBR ने इस रिपोर्ट में कहा है कि भारत की GDP 2026 तक 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी. हालांकि, वर्तमान सरकार ने यह लक्ष्य 2024 निर्धारित किया है, यानी सरकार 2 साल की देरी से यह लक्ष्य हासिल कर पाएगी.

इस रिपोर्ट में कहा गया है, भारत ने 2019 में फ्रांस और यूके को पीछे छोड़कर पांचवें स्थान पर कब्जा कर लिया. यह 2026 तक जर्मनी को पीछे छोड़कर चौथे और जापान को 2034 में पछाड़कर तीसरे नंबर पर काबिज हो सकता है. CEBR के मुताबिक, अगले 15 सालों तक तीसरे स्थान के लिए जापान, जर्मनी और भारत के बीच प्रतियोगिता होगी.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत 112वें स्थान पर, आईसलैंड शीर्ष पर

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) ने 17 दिसम्बर को ‘ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स’ (Global Gender Gap Index) 2020 पर एक रिपोर्ट जारी किया. इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर के 153 देशों के बीच भारत को 112वां स्थान मिला है. पिछले वर्ष के रिपोर्ट में भारत 108वें स्थान पर था.

इस रिपोर्ट के अनुसार आईसलैंड सबसे बेहतर देश है, जहां कोई लिंग आधारित भेदभाव नहीं है. इसके बाद नार्वे, फिनलैंड, स्वीडेन व निकारगुआ हैं. वहीँ यमन सबसे अंतिम 153वें स्थान पर, ईराक 152वें स्थान पर और पाकिस्तान 151वें स्थान पर है. आइसलैंड 11वीं बार पहले स्थान पर बना हुआ है. इस रिपोर्ट में बांग्लादेश को 50वां स्थान मिला है और दक्षिण एशिया क्षेत्र में सबसे आगे है.

रिपोर्ट के इस वर्ष के संस्करण में 153 देश को शामिल किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया क्षेत्र अपने लिंग अंतर में दो-तिहाई के करीब है. अगर बीते 15 सालों की प्रगति की दर जारी रही तो लिंग अंतर को भरने में 71 साल लगेंगे.

ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स रिपोर्ट: एक दृष्टि

  • ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स रिपोर्ट वर्ष 2006 से जारी किया जा रहा है.
  • इस रिपोर्ट में चार प्रमुख आयामों- आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य और जीवन रक्षा, और राजनीतिक सशक्तीकरण को लेकर लिंग आधारित अंतर की सीमा को मापा जाता है.

दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेवल कंपनियों में एक थॉमस कुक को बंद करने का फैसला

दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेवल कंपनियों में एक थॉमस कुक बंद हो गई है. 178 साल पुरानी ब्रिटिश टूर ऑपरेटर लंबे समय से फंड की कमी से जूझ रही थी और स्वयं को दिवालिया घोषित कर दिया था. थॉमस कुक के चीफ एक्जिक्यूटिव पीटर फैंकहॉजर ने ग्राहकों, सप्लायर्स, कर्मचारी और पार्टनर्स से माफी मांगी है.

वर्ष 1841 में स्थापना

थॉमस कुक विश्व की सबसे पुरानी ट्रेवल कम्पनियों में से एक थी. इसकी स्थापना वर्ष 1841 में लीसेस्टरशायर, इंग्लैंड में थॉमस कुक द्वारा की गई थी.

पहली बार कंपलीट हॉलिडे पैकेज का ऐलान

1955 में थॉमस कुक कंपलीट हॉलिडे पैकेज का ऐलान करने वाली पहली कंपनी थी. उसने लंदन से पैरिस के लिए ट्रिप का ऐलान किया. पहली बार किसी कंपनी ने कंपनी हॉलिडे ‘पैकेज’ की पेशकश की, जिसमें यात्रा के साथ-साथ रहने और खाने का भी इंतजाम था.

कंपनी का राष्ट्रीयकरण

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1948 में ब्रिटेन में रेलवे का राष्ट्रीयकरण हुआ. इस दौरान थॉमस कुक भी बिकने के कगार पर थी तो सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया था.

फिर निजी हाथों में पहुंची

1972 में सरकार ने थॉमस कुक को फिर से निजी हाथों बेच दिया. कंपनी को मिडलैंड बैंक, होटलियर ट्रंस्ट हाउस फोर्ट और ऑटोमोबाइल असोसिएशन ने खरीद लिया.