24 अक्तूबर: विश्व पोलियो दिवस

प्रत्येक वर्ष 24 अक्तूबर को विश्व पोलियो दिवस (World Polio Day) मनाया जाता है. इस दिवस को मनाने का उद्देश्य पोलियो के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

जोनास साल्क का जन्मदिन

विश्व पोलियो दिवस जोनास साल्क के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो अमेरिकी वायरोलॉजिस्ट थे. उन्होंने दुनिया का पहला सुरक्षित और प्रभावी पोलियो वैक्सीन बनाने में मदद की थी. डॉक्टर जोनास साल्क ने साल 1955 में पोलियो से बचाव की दवा दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था.

पोलियो क्या है?

पोलियो या पोलियोमेलाइटिस, एक अपंग यानी विकलांग करने वाली घातक बीमारी है. पोलियो वायरस के कारण यह बीमारी होती है. व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने वाला यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला कर सकता है, जिससे पक्षाघात होने की आशंका होती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रयासों से टीकाकरण अभियान ने दुनिया को पोलियो से बचाया. भारत पिछले 7-8 वर्षों से पोलियो मुक्त हो चुका है.

14 अक्टूबर: विश्व मानक दिवस से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 14 अक्टूबर को विश्व मानक दिवस (World Standards Day) मनाया जाता है. यह दिवस वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मानकीकरण के महत्व के रूप में नियामकों, उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO), अंतर्राष्ट्रीय विद्युत तकनीकी आयोग (IEEC) और अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) मानकीकरण से संबंधित महत्त्पूर्ण मुद्दों के आधार पर विश्व मानक दिवस की एक थीम निर्धारित करते हैं. इस वर्ष यानि 2020 की थीम ‘Protecting the planet with standards’ है.

16 सितम्बर: ओज़ोन परत संरक्षण दिवस से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी

प्रत्येक वर्ष 16 सितम्बर को विश्व ओजोन परत संरक्षण दिवस (International Day for the Preservation of the Ozone Layer) मनाया जाता है. इस दिवस के मनाने का उद्देश्य पूरे विश्व में इसके प्रति लोगों में जागरूकता लाना है.

23 जनवरी, 1995 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में 16 सितंबर को अन्तर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया था.

वर्ष 2020 का थीम

इस वर्ष यानी 2020 के ओज़ोन परत संरक्षण दिवस का थीम ‘Ozone for life: 35 years of ozone layer protection’ है.

ओजोन क्या है?

ओजोन एक हल्के नीले रंग की गैस होती है. इस गैस की परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती है. ओजोन परत सामान्यत: धरातल से 10 किलोमीटर से 50 किलोमीटर की ऊंचाई के बीच पाई जाती है.

ओजोन परत की खोज साल 1913 में फ्रांस के वैज्ञानिक फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी. इस गैस में आक्सीजन के तीन परमाणु (O3) होते हैं. यह सूर्य से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों के लिए एक अच्छे फिल्टर का काम करती है.

पराबैगनी किरणों (अल्ट्रा वायलेट रेडिएशन) की बढ़ती मात्रा से चर्म कैंसर, मोतियाबिंद के अलावा शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. यही नहीं, इसका असर जैविक विविधता पर भी पड़ता है और कई फसलें नष्ट हो सकती हैं.

पांचवे भारत अंतर्राष्‍ट्रीय विज्ञान महोत्‍सव का कोलकाता में आयोजन

पांचवे भारत अंतर्राष्‍ट्रीय विज्ञान महोत्‍सव का आयोजन 5 से 8 नवम्बर तक कोलकाता में किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 5 नवम्बर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इस महोत्‍सव का उद्घाटन किया.

देश-विदेश के करीब 12 हजार विशेषज्ञ समारोह के दौरान आयोजित 28 विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं. इस विज्ञान समारोह में केन्द्रीय विज्ञान व तकनीक, और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और वैज्ञानिक और शिक्षा जगत से जुड़े लोग भी हिस्सा लेंगे.

महोत्सव का उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समावेशी विकास के लिए रणनीति तय करना है. इस वर्ष यानि 2019 का विषय- ‘राष्‍ट्रीय सशक्तिकरण के लिए अनुसंधान, नवाचार और विज्ञान’ है.

देश की विज्ञान और प्रोद्योगिकी विकास का जश्‍न वैज्ञानिकों, छात्रों और नवाचार करने वालों के साथ मनाने के लिए 2015 से इस महोत्‍सव का आयोजन किया जा रहा है.

विज्ञान और प्रोद्योगिकी के विकास में महिला वैज्ञानिकों और उद्यमियों के विशेष योगदान को भी महोत्‍सव में दर्शाया जायेगा. इस दौरान विज्ञान गांव का भी उद्घाटन किया जायेगा जिसमें देश भर के ढ़ाई हजार छात्र रहेंगे.

गुजरात सरकार ने राजकोट से ”वहाली डीकरी योजना” की शुरुआत की

गुजरात के मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी ने 3 अगस्त को राजकोट में ”वहाली डीकरी योजना” का उद्घाटन किया. इस योजना का उद्देश्‍य स्‍त्री-पुरूष समानता को बढ़ावा देना है.

वहाली दिकरी योजना में राज्य में जन्म लेने वाली सभी बेटियों को नगद प्रोत्साहन देने का प्रावधान है. इस योजना का मुख्य उदेश्य महिला और पुरुषो की संख्या में संतुलन बनाने के लिए लड़कियों के जन्म दर को प्रोत्साहित करना है. योजना के प्रावधानों के अनुसार चौथी कक्षा में प्रवेश लेने पर लड़की को सरकार की तरफ से 4 हजार रूपया दिया जायेगा. इसी तरह नौवीं क्लास में प्रवेश पर 6 हजार, 18वे साल में उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने पर 1 लाख रूपया और फिर शादी के वक्त और 1 लाख रूपया देने का प्रावधान है. इस योजना को कार्यान्वित करने के लिए इस साल के अंदाज पत्र में 133 करोड़ रुपये आबंटित किये जा चुके हैं.


प्रधानमंत्री की पश्चिम एशियाई देशों की ऐतिहासिक यात्रा